Sunday, January 13, 2008

वार्षिक संगीतमाला २००७ : पायदान १९ - लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ ..

वार्षिक संगीतमाला की १९ वीं पायदान आपके सामने हैं मित्रों। और इस पर गाना वो जो अस्सी के दशक में बनी फिल्म 'गोलमाल' फिल्म ले उस अंतरे की याद दिलाता है जिसे गुलज़ार साहब ने लिखा था । याद है ना 'आने वाला पल जाने वाला है' का ये जुमला

इक बार वक़्त से लमहा गिरा कहीं
वहाँ दास्तां मिली लमहा कहीं नहीं


जीवन के इस सफ़र में कितने ही सुनहरे लमहों से हम दो चार होते हैं पर समय रहते उन के साथ जीने की इच्छा को दबाते हुए दौड़ में आगे बढ़ जाते हैं। पर मुकाम पर पहुंच जाने के बाद लगता है अरे ! बहुतेरी बातें तो करनी रह ही गईँ... ।

और फिर याद आती है अतीत की गर्द से झांकते उन लमहो की ...पर क्या हम उन्हें फिर से तालाश पाते हैं? शायद नहीं।
ऍसे ही लमहों की कहानी लेकर आएँ हैं नवोदित गीतकार प्रशांत पांडे। देखिए तो वो क्या कह रहे हैं...


खुशनुमा आवारा सा, बेसबब, बेचारा सा लमहा था
जिंदगी के आसमां में टूटा सा वो तारा था, तनहा था
कह रहे है जर्रे देखो, रास्तों से गुजरा था यहाँ
ढूंढते हैं उसको लेकिन, गायब हैं पैरों के निशान
लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ...
लमहा कहाँ ये खो गया, इक पल में तनहा हो गया

आए जो मौसम नए, मंजर बदल जाएँगे
शाखों से पत्ते गिरे, गिरके किधर जाएँगे
कह रहे हैं जर्रे देखो, रास्तों से गुजरा था यहाँ
ढूंढते हैं उसको लेकिन, गायब हैं पैरों के निशान
लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ...
लमहा कहाँ ये खो गया, इक पल में तनहा हो गया

शबनम का कतरा है ये, शोले बुझा जाएगा
कर जाएगा आँखें नम, यादों में बस जाएगा
बारिशों की बूंदें बरसे, बादलों के दिल हल्के हुए
जाने पहचाने चेहरों के, अक्स भी क्यूँ धुंधले हुए
लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ...
तनहा ये जाएगा कहाँ... तनहा ये जाएगा कहाँ


और उनके खूबसूरत बोलों को सँवारा है के. मोहन ने अपनी आवाज़ से। तो आइए सुनें फिल्म दिल दोस्ती ईटीसी का ये गीत



इस संगीतमाला के पिछले गीत

Related Posts with Thumbnails

4 comments:

Alpana Verma on January 14, 2008 said...

congratulations mr.K.mohan ji ,aap ki awaj bahut achchee hai.aur geet bhi bahut achcha laga.sangeet bhi geeet ke bolon aur theme ke anusaar hi bana hai---keep it up!

mamta on January 14, 2008 said...

वो गाने जो हमने ज्यादा नही सुने है आपकी पोस्ट पर सुनने को मिल जाते है।

Manish on January 23, 2008 said...

शुक्रिया अल्पना जी और ममता जी गीत को पसंद करने का। बहुत सारे गीत अच्छे हुए भी लोग नहीं सुन पाते क्यूँकि उन्हें टीवी और कई बार रेडिओ पर भी वो फुटेज नहीं मिलती जिसके वो हकदार हैं।

Phoenix Rises on March 05, 2008 said...

I'm back!! :D
I'd never heard this song before. It's quite pleasing.

 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie