Saturday, July 05, 2008

असमी, झारखंडी और हिंदी लोकगीतों की अद्भुत छौंक : दैया री दैया चढ़ गयो पापी बिछुआ

लोकगीतों में मिट्टी की सोंधी खुशबू होती है और साथ में होता है एक ऍसा भोलापन जिसे नज़रअंदाज कर पाना मुश्किल है। पिछली दफ़े आपने सुना कल्पना का गाया हुआ एक मस्त भोजपुरी गीत।

मस्ती का रंग आज भी है पर आज के इस गीत में परिवेश है असम और उत्तर पूर्व का पर साथ ही इस गीत के तार झारखंडी गीतों की शैली से भी मिलते हैं। । अगर अलग-अलग क्षेत्रों में गाए जाने वाले लोकगीतों को एक ही गीत में पिरो कर सुनाया जाए तो वो छौंक अपना एक अलग आनंद देती है और आज के इस गीत में कुछ ऐसी ही बात है। जैसा कि मैंने आपको बताया था कि कल्पना मूलतः असम की हैं और अपनी जुबां में गाना भी बेहद पसंद करती हैं। तो तैयार हैं ना असम के बागानों से उठते इस बिहू गीत को सुनने के लिए आप। बिहू गीत वसंत के आगमन और असमी नव वर्ष के स्वागत के उपलक्ष्य में गाए जाते हैं। इस बिहू गीत में सुनें कल्पना की आवाज़ में चमेली की कहानी





आखम देखर बाकी सारे सूवाली
झूमोर तोमोर नासे कारो धे माली
हे लक्ष्मी ना हई मोरे नाम चामेली
वीरपुर ला बेटी मुर नाम चामेली

छोटो छोटो छोकड़ी
बड़ो बड़ो टोकरी
नरम सकाच पाता तोले टोक टोक
जवान बोदा राखी दे करे लक लक
छोटो छोटो पोउ खाना करे धक धक
कि भांति सोए हमर साहेली
मन राख मोर नाम चामेली

हे पाकदा आसिले कुनबा मुलका
एसि आमि बिहू गाबो जानूँ


और यहाँ से आगे गीत ने जो लय पकड़ी है वो बहुत कुछ झारखंड के उत्सवों पर गाए जाने वाले लोक गीतों की तरह है । यहाँ बताना मुनासिब होगा कि ऐसे गीतों को गाते वक़्त आदिवासी बालाएँ सफेद लाल पाड़ की साड़ी पहन, एक दूसरे की कमर में हाथ डाले बड़ी खूबसूरती से आगे पीछे की ओर थिरकती चलती हैं। गीत की लय ऍसी होती हे कि सुनने वाले का मन खुद ब खुद झूम जाता है जैसा कि कल्पना को सुन कर यहाँ झूम उठा

हे हाहे हो सोरिम गयो मैना तुमा रेनू पुखुरी
तुमा रेनू पुखुरी
पार मैनू खोरी गोइ साला
हे घामे घूमम गोये
मैना तुमा रेनू हरिर
तुमा रेनू हरिर
माखी हइनू सूमा दिम लाला


(शब्दों को चूंकि सुन कर लिखा है और इस भाषा की समझ ना के बराबर है इसलिए ऊपर के बोलों में गलती होने की पूरी गुंजाइश है।)

यहाँ कल्पना वापस आ जाती हैं इस लोकप्रिय लोकगीत पर..

हो बिछुआ हाए रे
पीपल छैयाँ बैठी पल भर
हो भर के गगरिया
हाए रे हाए रे हाए रे
दैया री दैया चढ़ गयो पापी बिछुआ
हाय हाय रे मर गई कोई उतारो बिछुआ
देखो रे पापी बिछुआ

मंतर झूठा और बैद भी झूठा
पिया घर आ रे , हाँ रे, हाँ रे, हाँ रे
देखो रे देखो रे कहाँ उतर गयो बिछुआ
सैयाँ को देख कर जाने किधर गयो बिछुआ
देखो रे पापी बिछुआ

दैया...................... बिछुआ




पिछली पोस्ट पर कल्पना द्वारा भोजपुरी कैसेट्स में गाए सस्ते गीतों की बात उठी थी जिस पर की गई कंचन की टिप्पणी वस्तुस्थिति का खुलासा करती है। दरअसल प्रतिभाशाली गायकों को जब तक आप अपना हुनर दिखाने के लिए सही मंच नहीं प्रदान करेंगे वो बाजार की अर्थव्यवस्था के अनुरूप शासित होते रहेंगे। अपनी टिप्पणी में कंचन कहती हैं..

"...समस्या कहे या असलियत ये है कि रेस्टोरेंट वो परोस रहे हैं जो हम खाना चाह रहे हैं.... अब समझ में नही आ रहा कि बाज़ारवाद के इस युग में गलती उपभोक्ता को दे या दुकानदार को ! भोजपुरी लोकगीतों को वही श्रोता सुन रहे हैं जो, बिलकुल नीचे तबके के हैं,..! पूरे दिन मेहनत कर के अनुराग जी के शब्दों मे जब वो अपनी सारी मेहनत का पसीना एक गिलास शराब बना कर पी जाता है, तब उसे जगजीत सिंह की गज़ल नही, ये कल्पना और गुड्दू रंगीला जैसे लोगो के गाने ही सुनने होते हैं जो उसकी झोपड़ी के २५० रु० के लोकल वाकमैन पर २५ रु के कैसेट से मनोरंजन करा देता है..! और जब कल्पना जैसे लोगो को सुनने वाला वही सुनना चाह रहा है तो वो, मजबूरी है उनकी कि वही सुनाए..!

अगली पोस्ट में कल्पना के गाए एक और लोकगीत की चर्चा होगी जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि लोकगीत मस्ती के रंगों को ही हम तक नहीं पहुँचाते पर कई बार आम जनों का दर्द भी भी श्रोताओं तक संप्रेषित करते हैं।
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7 comments:

yunus on July 05, 2008 said...

सुंदर गीत । मजा आ गया । एन डी टी वी पर ये सिलसिला शानदार चल रहा है । हम अकसर देखा करते हैं । अच्‍छा बहु‍त दिनों से पूछना है कि ये प्‍लेयर कहां से जुगाड़ा जाता है ।
बहुतै फास्‍ट है ।

DR.ANURAG on July 05, 2008 said...

आपकी वजह से मै ndtv पर ये प्रोग्राम देखने लगा हूँ......ओर आनंद ले रहा हूँ...

Anonymous said...

namashkar kanchanji,mai sanjay from jamshedpur.pichhle 5 salo se kalpanaji ko sun raha hu.mujhe aur meri ma ko unke gaye hue devi bhajans bahot achchha lagta hai.aapne is hasti ko guddu rangila se tulna kia.mai hairan hu.kya yahi aapki samajh hai,aapki anubhav hai.maaf kijiye,kal kalpanaji ne sitla ma ki pachra sunaya.kya bhagwati sasti lagi aapko?Majdur bhai ki bidroh aur huk gunji jab unhone he dola he dola sunaya,kya majduro ki mahnat bhi sasti lagi aapko.actually she is very versatile jo hamari up bihar ko gift mili.unme har rang shamil hai.ab aapke upar hai aap kya sunna chahte hai.meri subah unki nibiya ke dariya maiyya se shuru hoti hai.jai mata ki.

Manish Kumar on July 06, 2008 said...

संजय भाई मेरी समझ से आप जो कह रहे हैं और कंचन जी जो कहना चाह रही हैं वो दो पृथक बाते हैं। दरअसल कंचन जी की ये टिप्पणी पिछली पोस्ट में इस संदर्भ में आई थी कि कुछ पाठकों ने ये इंगित किया था कि बहुत सारे ऐसे गीत हैं जहाँ कल्पना जी ने बाजार की माँग के हिसाब घटिया बोलों पर अपना स्वर दिया है।

कंचन उस बात के जवाब में सिर्फ इस बात का उल्लेख कर रही थीं कि भोजपुरी में ज्यादातर जो बिक रहा है उसके लिए कलाकारों से कहीं ज्यादा संगीत कंपनियाँ और कुछ हद तक श्रोता वर्ग जिम्मेवार है।

गुड्डू रंगीला और कल्पना जी की तुलना करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी। कंचन जी खुद मालिनी और कल्पना की गायिकी की प्रशंसिका हैं।

आपने जैसा कहा और हम सब देख भी रहे हैं कि कल्पना बिहू, भोजपुरी भक्ति रस के गीतों को किस भावना और खूबसूरती से अपनी आवाज दे रहीं हैं। आपने जिस कहार वाले गीत की बात की उसे सुन कर तो मन उद्विग्न हो उठा था और इस श्रृंखला की अगली प्रस्तुति भी वही गीत होगा। आशा है कल्पना जी जुनूं कुछ कर दिखाने में आप जैसे सुधी श्रोताओं की वजह से सफलता के वो मुकाम छूएँगी जिसकी वो वाज़िब हकदार हैं।

बहुत अच्छा लगा कि आप यहाँ आए और कल्पना जी की गायिकी से जुड़े कुछ पहलुओं को आपने हम सब के साथ बाँटा। आशा है कि आपकी प्रतिक्रियाएँ हमें आगे भी मिलती रहेंगी।

Kalpanaa on July 06, 2008 said...

hi manishji nice blog u have made.now since bhojpuri music is in a very big stage(manch) we(singers) should have full support from people like u.i think that if kalpana has sung double meaning songs and public has liked it then she has also sung hundreds of hit bhajans,devi geet(pls go to ur nearest cessette dealer nd he will tell u the numbers.now my point is we should encourage this girl who being from Assam is dominating other languages/singers in junoon with her bhojpuri singing.be in the present.support her.vote her.discussions baad me karna.

अभिषेक ओझा on July 06, 2008 said...

ye tadka bhi achcha rahaa.

kanchan on July 07, 2008 said...

sarvapratham kshama mangati hun sanjay ji se, jinhe kuchh missunderstanding ho gai shayad mere bare me....!

jaisa ki Manish Ji ne bataya ki mai swayam bahut badi fan hun Kalpana aur Malini ji ki. GUddu Rangeela se tulna karne ka koi intention nahi tha mera, vo ek baat jisme ashlilata ki charcha hui us par mai kahana chaah rahi thi ki ham shrota varga hi iske jimmedar hai.n jinhe angreji gaane to samajh me aate hai lekin apne matribhasha ke geet samajhna unhe ganvaarpan lagta hai, aap hurt hue mai samajh sakti hun lekin pl iske pahale, meri mool tippani dekhe.n shayaad aap samajh sake ki mai aap ki hi baat kahana chaah rahi hu.n

regards

 

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