Tuesday, December 23, 2008

तीन भूलें जिंदगी की (the 3 mistakes of my life) : चेतन भगत

जिंदगी में भूलें तो हम सभी करते है पर इन भूलों के बारे में कितनों से चर्चा की होगी आपने ? शायद अपने नजदीकियों से ! अब ये आइडिया तो कभी आपके मन में नहीं ही आया होगा कि अपनी गलतियों से तंग आकर आप आत्महत्या करने की सोचें और उसे कार्यान्वित करने से पहले एक बहुचर्चित उपन्यासकार के ई मेल कर दें। खैर मैं जानता हूँ इतना धाँसू आइडिया आपके मन में कभी नहीं आया, क्योंकि अगर ऍसा होता तो आप अपना वक़्त मेरी इस पोस्ट को पढ़ने में बर्बाद नहीं कर रहे होते। :)

अब देखिए अहमदाबाद के गोविंद पटेल ने यही किया और चेतन भगत की तीसरी किताब 'The 3 Mistakes of My Life' के नायक बन बैठे। गोविंद भाग्यशाली रहे कि वो बच गए और अपनी कहानी चेतन को सुना पाए। और परसों ही टीवी पर एक प्रोमो दिखा जिसमें हीरो कहता है कि मैं गोविंद हूँ तो तुरत समझ आ गया कि अब 'Hello' की तरह इस किताब पर भी फिल्म बनने जा रही है।

चेतन भगत की ये कहानी अहमदाबाद की है और गुजरात की तात्कालिक घटनाओं भूकंप, दंगों और भारत आस्ट्रेलिया क्रिकेट श्रृंखला आदि के बीच बनती पनपती है। पूरी कहानी उन तीन निम्न मध्यमवर्गीय दोस्तों के इर्द गिर्द घूमती है जिनकी रुचियाँ अलग अलग विषयों (धर्म, क्रिकेट और व्यापार) से जुड़ी हुई हैं। मैंने इससे पहले उनकी Five Point Someone और One Night at Call Centre पढ़ी थी और Five Point Someone को तो पढ़ने में बहुत मजा आया था। अगर किसी उपन्यासकार की पहली किताब बहुत पसंद की जाए तो वो एक मापदंड सी बन जाती है और अक्सर उसकी तुलना बाद की किताबों से होने लगती है।

और इस हिसाब से २५७ पृष्ठों की ये किताब मुझे उतनी पसंद नहीं आती। हालांकि चेतन की लेखन शैली हमेशा की तरह रोचक है। उनके चरित्रों से आम आदमी भी जल्द ही जुड़ा महसूस करता है। युवाओं के दिल में उठ रही बातों को बेबाकी से लिखने में चेतन माहिर हैं। उन्होंने गुजरातियों के व्यापार में Never Say Die वाली निष्ठा के साथ एक आम व्यापारी की सोच को भी टटोलने का काम किया है।

पर किताब से गुजरने के बाद आपको ये नहीं लगता कि आपने कुछ विशिष्ट पढ़ा। पूरी किताब एक व्यवसायिक हिंदी फिल्म की पटकथा ज्यादा नज़र आती है जिसमें राजनीति, धर्म, हिंसा, प्रेम, क्रिकेट का उचित अनुपातों में समावेश है और यही कारण है कि फिल्मवालों ने इस कहानी को जल्द ही झटक लिया।

अंततः यही कहना चाहूँगा कि अगर आपके पास कुछ और करने को ना हो तो ये किताब पढ़ सकते हैं जैसा मैंने अस्पताल में अपनी ड्यूटी निभाते वक्त किया और अगर किताब से ज्यादा फिल्मो का शौक रखते हों तो इस पर आधारित फिल्म देख लें ..
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10 comments:

Anonymous said...

manishji, mene abhi abhi iss book ko khatm hi kiya hai,mene bhi yahi soocha tha ki yah ''five point someone''ki tarah kuch alag hogi lekin such kahun toh muze ye kisi pocket book type sasta navel lagi, issme wo class kahin se kahin tak nazar nahi aaya.

कुश on December 23, 2008 said...

mujhe to ye bahut pasand aayi.. shayad ye bhi wajah ho ki mujhe hindi filme bahut pasand hai.. fir ye zaroori to nahi ki agar kitaab hindi film ki tarah ho to wo khrab ho jaye..

maine to ise 9 ghante mein hi complete kar diya tha..

डॉ .अनुराग on December 23, 2008 said...

शुक्र है आपने बहुत ज्यादा तारीफ़ नही लिखी...पहली दो किताबो की अपेक्षा मुझे ये ओवररेटेड किताब ज्यादा लगी ....

कंचन सिंह चौहान on December 24, 2008 said...

maine to khair nahi padhi hai ye book..lekin meri friend ne iski kaafi taarif kar rakhi thi...aur meri awaited books me ek ho chuki thi ye....! chunki meri frnd mathmatician hai.n is liye vo kafi kuchh ressumblance khud se kar rahi thi...! aur last scene unhone mujhe jis tarah se bataya, vo mobile par msg ka aur iske baad dost ki nigah..to mujhe khud laga ki aisi sthitiya.n agar kisi ke sath ho jaye.n to kya hoga...????

khair ab khud hi padh ke dekhu.ngi.:) :)

एस. बी. सिंह on December 24, 2008 said...

चलिए अभी तो मेरे पास करने को बहुत कुछ है, फ़िर देखेंगे।

sidheshwer on December 24, 2008 said...

पुस्तक चर्चा!
आह! पुस्तक अब भी संभावना है!!!!!

hempandey on December 24, 2008 said...

आज पहली बार इस ब्लॉग पर आया. अच्छा लगा कि यहाँ किताबों की चर्चा होती है.मैंने चेतन भगत की इस किताब के अलावा कसप,क्याप,गोरा,गुनाहों का देवता और मधुशाला भी पढी है. इन पुस्तकों पर आपकी राय भी अवश्य पढूंगा.

अभिषेक ओझा on January 05, 2009 said...

mujhe to ye kitaab achchi nahin lagi (one night... bhi achchi nahin lagi thi). mujhe laga ki ye waise hi likhi gayi hai jaise ham kisi course project ki presentation banaate the. 3-4 points ek bade se paper pe likh ke unako aapas mein idhar se udhar jodana hai bas ho gayi book ready ! 3-4 points to aap samajh hi gaye honge... cricket, sex, friendship, starting a business, religion, riots etc. ye wahi baatein hain jo hamaari peedhi ke dimag mein chalti hain.

Ravinder Singhania on October 17, 2015 said...

Mane kabhi book nahi padhi Maher gift ki ek 14saal ki ladki ko kiyo ki who usaki favorite book the

Ajay Kumar on October 30, 2017 said...

Mene abhi three mistakes of my life puri nahi padhi h lekin mujhe achha lga jitna bhi maine padha h..

 

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