Monday, January 05, 2009

वार्षिक संगीतमाला 2008 :पायदान संख्या 23 - सुनिए एक गुजारिश.. और मिलिए जावेद अली से

पिछली वार्षिक संगीतमाला में जैसा कि आप को याद हो, तारे जमीं पर के चार गीत शामिल हुए थे जिनमें से एक 'सरताज गीत' भी था। आमिर खाँ की इस फिल्म के लिए गीत लिखे थे प्रसून जोशी ने, जो मेरे प्रिय गीतकार रहे हैं। पर 23 वीं सीढ़ी पर जो गीत है वो इस संगीतमाला में प्रसून जोशी का लिखा पहला और आखिरी गीत है। आखिरी इसलिए कि इस साल जोशी साहब ने ज्यादा फिल्मों के लिए गीत नहीं लिखे। वैसे भी वो गीत तभी लिख पाते हैं जब McCann-Erickson (विज्ञापन कंपनी) में वो अपने दायित्वों से फारिग हो पाएँ जो कि अक्सर वो नहीं होते


प्रसून जोशी ने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा था कि गजनी जैसी थ्रिलर (Thriller) के गीतों को लिखना उनके लिए एक चुनौती से कम नहीं था। खैर प्रसून जोशी के इस गीत का प्लस प्वाइंट इसका मुखड़ा और रहमान द्वारा बनाई इसकी आरंभिक धुन है जो एक बार ही में आपको अपने साथ बाँध लेती है। पर जोशी और रहमान जैसे दिग्गजों के बीच इस गीत से जो नया नाम जुड़ा है वो है गायक जावेद अली का


वैसे सही अर्थों में जावेद फिल्म जगत के लिए नए नहीं है। दिल्ली में जन्मे जावेद हुसैन के पिता कव्वाली गायक हैं। मल्लू एवम् माजिद खाँ से शास्त्रीय संगीत सीखने के बाद उन्होंने अपना कुछ समय गज़लों के बादशाह गुलाम अली की शागिर्दी में बिताया। बाद में अपने गुरु के सम्मान में उन्होंने अपना नाम जावेद अली रख लिया। जावेद ने वर्ष २००० में एक गुमनाम सी फिल्म बेटी न. १ के लिए गीत रिकार्ड किया पर ऍसी फिल्मों के गीत कौन देख पाता है सो उनकी आवाज़ अनसुनी ही रह गई। फिर नील और निक्की, क्यूँ हो गया ना, गोलमाल, चमेली आदि फिल्मों के कुछ गीत उनकी झोली में आए। पर उनका सितारा पिछले साल चमका जब वी मेट में गाए नग्मे नगाड़ा बजा से।

इस साल जावेद के किस्मत के सितारे तब और बुलंद हुए जब ए. आर. रहमान ने अपनी सभी फिल्मों में जावेद को गाने का मौका दिया। जावेद की आवाज़ की खासियत उसका अलग तरह का होना है। २९ वर्षीय जावेद ने फिल्म उद्योग में संघर्ष करते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाने की कोशिश की है जिसमें अब जाकर उन्हें सफलता मिल रही है। जावेद की गायिकी में विविधता की झलक आप तब देखेंगे जब दो अन्य गीतों जो कि ऊपर की पायदानों पर हैं, में उन्हें सुनने का मौका मिलेगा।

और हाँ अगर आप ये सोच रहे हों कि इस गीत की क्रेडिट्स में सोनू निगम का भी नाम है तो वो इसलिए कि आरंभिक धुन के ठीक पहले की गुनगुनाहट सोनू की आवाज़ में रिकार्ड की गई है। तो सुनिए जावेद की आवाज़ में इस विकल प्रेमी की गुजारिश


तू मेरी अधूरी प्यास प्यास
तू आ गई मन को रास रास
अब तो तू आ जा पास पास...
है गुजारिश...

है हाल तो दिल का तंग तंग
तू रंग जा मेरे रंग रंग
बस चलना मेरे संग संग
है गुजारिश...

कह दे तू हाँ तो ज़िन्दगी
चैनों से छूट के हँसेगी
मोती होंगे मोती राहों में
ये येह येह ...तू मेरी अधूरी ...

शीशे के ख्वाब ले के
रातों में चल रहा हूँ
टकरा ना जाऊँ कहीं

आशा की लौ हैं रोशन
फिर भी तूफां का डर है
लौ बुझ न जाए कहीं

बस एक हाँ की गुजारिश...
फिर होगी खुशियों की बारिश

तू मेरी अधूरी ...

चंदा है आसमां है
और बादल भी घने हैं
यह चंदा छुप जाए ना

तन्हाई डस रही है
और धड़कन बढ़ रही है
एक पल भी चैन आए न

कैसी अजब दास्तान है
बेचैनियाँ बस यहाँ हैं

तू मेरी अधूरी ...

और यू ट्यूब पर देख सकते हैं इस गीत का प्रमोशनल वीडिओ

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10 comments:

एस. बी. सिंह on January 11, 2009 said...

गीत तो कई बार सुना है पर जावेद अली के बारे में जान कर अच्छा लगा।

MANVINDER BHIMBER on January 11, 2009 said...

achchi jankaari di hai apne...geet bhi achcha laga

कंचन सिंह चौहान on January 12, 2009 said...

sadharan se bolo vala ye geet karnpriya lagta hai...! isi film ka ek geet kaise mujhe tum mil gai bhi lagbhag isi shreni ka hai aur apne sadharan bolo ke karan thik lagta hai.

डॉ .अनुराग on January 12, 2009 said...

प्रसून जोशी से मेरी उम्मीदे कुछ ज्यादा है....खास तौर से रंग दे बसंती ओर तारे जमीन के बाद.....पता नही क्यों गजनी में वो पूरी नही हुई......

Phoenix Rises on January 12, 2009 said...

It's a pleasant enough song, but not one of my favs...

Anonymous said...

bhoot achha collection h aapka abhi kuch time s hi dekha mena, bahoot achha laga dekhkar or padhkar.

अभिषेक ओझा on January 12, 2009 said...

इस गाने को तो थोड़ा और ऊपर होना चाहिए था... वैसे जब तक आगे वाले ना आ जाएँ ऐसा कहना उचित नहीं होगा.

Manish Kumar on January 13, 2009 said...

सिंह साहब और मनविंदर जी धन्यवाद अपनी राय से अवगत कराने का

अनुराग जहाँ तक मैं समझ सका हूँ प्रसून को गीत की सिचुएशन की वज़ह से अपने आप को बाँधना पड़ा। इसीलिए इस फिल्म में लिखे उनके गीत देखने में ज्यादा और सुनने में कम प्रभावित करते हैं।

कंचन बेनी दयाल की जगह अगर रहमान ने कैसे मुझे तुम मिल गए में किसी और को गवाया होता तो वो गीत शायद और प्रभावी बन पाता

अभिषेक मैंने भी ईसे पहले १६ पर रखा था। जैसा मैंने पिछली पोस्टों में कहा १४ से २२ तक के गीत कुल मिलाकर मुझे एक ही अंक श्रेणी में आते हैं। मूड के हिसाब से कोई गीत कभी कुछ ज्यादा अच्छा लग जाता है। वैसे भी ये तो व्यक्तिगत पसंद का सवाल है, ऊपर की टिप्पणियों में ही आपने देखा कि अलग अलग लोग इस गीत के बारे में अपना अलग नज़रिया रखते हैं।। अगर लोकप्रियता के हिसाब से देखते तो यह गीत निसंदेह और ऊपर जाता।

उर्वशी शुक्रिया अपनी राय बताने का। वैसेअब तक पिछले कमेंट में तुमने जिन गीतों की चर्चा की वो सब मेरी लिस्ट में भी हैं

अनाम भाई नाम के साथ कमेंट करें तो अच्छा लगता है। आशा है आपकी राय आगे भी मिलती रहेगी।

PrincessJasmine on January 28, 2009 said...

Hmm...movie released later but songs had been hit by then. Movie dekhne ke baad mujhe "Kaise Mujhe Tum Mil Gayi, Kismat Pe Aaye Naa Yakeen" gaana bahut hi achcha laga tha...a song filled with so many emotions.

Anonymous said...

मुझे गाना तो बहुत अच्छा लगा उससे भी ज्यादा इसलिए कि इसे जावेद अली ने गाया है।

 

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