Tuesday, January 05, 2010

वार्षिक संगीतमाला 2009 - पायदान संख्या 25 : आज के युवा छात्रों की जिंदगी में झाँकते स्वानंद किरकिरे

थ्री इडियट्स के गाने मैंने करीब तीन हफ्ते पहले सुने थे और एक बारगी सुन कर मन उतना प्रसन्न भी नहीं हुआ था। कारण थे स्वानंद किरकिरे। हजारों ख्वाहिशें ऍसी में उनका पहला गीत बावरा मन देखने चला एक सपना हो या परिणिता का रात हमारी चाँद की सहेली है या फिर और उसके बाद खोया खोया चाँद में उनके गीतों की काव्यात्मकता हो या फिर लागा चुनरी में दाग में दो बहनों की अल्हड़ चंचलता को उभारता उनका प्यारा गीत हो, वो हमेशा मन में अपने गीतों से अलग सा अहसास जगाते थे।

सो मैंने फेसबुक पर जाकर उनसे अपनी निराशा प्रकट कर दी पर फिल्म में उनके गीतों का सफ़र देख इतना जरूर लग गया था कि काव्यात्मकता से हिंगलिश गानों का सफ़र उन्होंने फिल्म की स्क्रिप्ट के लिए ही तय किया होगा। और जब मैंने फिल्म देखी तो वहीं गीत जो बस ठीक-ठाक लग रहे थे फिल्मांकन के बाद बेहतरीन लगने लगे।

खुद स्वानंद साहब ने दैनिक हिंदुस्तान में दिए अपने साक्षात्कार में इस बारे में कहा

दरअसल गाने फिल्म की स्क्रिप्ट के हिसाब से लिखे जाते हैं। जैसे ‘खोया-खोया चाँद’ 1950 के आस-पास की फिल्म थी तो अल्फ़ाज़ भी वैसे ही ज़हीन थे।
परिणिता’ में बंगाल से जुड़ी कहानी थी तो गानों में भी काव्यात्मक्ता वैसी ही थी। ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ टपोरी और भाईगीरी पर थी, तो गाने भी वैसे ही टपोरीनुमा थे। एक एक्टर जैसे फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह मेकअप बदलता है तो वैसे ही एक गीतकार भी फिल्म की थीम की तरह ही अपना रूप बदलता है। ‘थ्री-इडियट्स’ जींस और टी-शर्ट पहनने वाले आज के स्टूडेंट्स की कहानी है तो लफ़्ज़ भी जींस-टी शर्ट वाले होने चाहिए।

तो वार्षिक संगीतमाला की 25 वीं पॉयदान पर इसी फिल्म का एक लोकप्रिय गीत जो आजकल अपने सर्वप्रिय जुमले 'आल इज्ज वेल' के लिए घर घर में चर्चित है। मुर्गे की बाँग से शुरु होता ये गीत सोनू निगम अपने अटपटे बोलों की वजह से आपका ध्यान पहले खींचता है, फिर गीत की मस्ती आपको झूमने पर विवश कर देती है। पर झूमने के साथ स्वानंद हँसी हंसी में आज के छात्र वर्ग की मानसिक स्थिति का भी बेहतरीन आकलन करते हैं। मुर्गी और अंडे के रूपक को विद्यार्थियों के लिए प्रयोग करने की बात पर उनका कहना है कि

मैंने इंटरनेट पर एक कार्टून देखा था, जिसमें मुर्गी का एक बच्चा हाफ-फ्राई देख रहा है और पूछ रहा है- ‘ब्रदर इज़ दैट यू’ (भाई क्या ये तुम हो)। तो यही इस गाने की फिलॉसफी भी रही कि मुर्गी क्या जाने अंडे का क्या होगा, लाइफ़ मिलेगी या तवे पे फ्राई होगा...’, ये बात एक स्टूडेंट के भविष्य के लिए भी फिट बैठती है कि ‘कोई ना जाने अपना फ्यूचर क्या होगा...होंठ घुमाओ, सीटी बजाओ..सीटी बजाके बोल भइया...ऑल इज़ वेल..’।

शान्तनु मोइत्रा के मस्त संगीत पर बने इस गीत को सोनू निगम ने स्वानंद किरकिरे और शान के साथ मिलकर पूरे मन से गाया है जिसे सुन कर आप महसूस कर सकते हैं..



जब लाइफ हो आउट आफ कंट्रोल
होठों को कर के गोल
होठों को कर के गोल
सीटी बजा के बोल

आल इज्ज वेल
मुर्गी क्या जाने अंडे का क्या होगा
लाइफ मिलेगी या तवे पे फ्राइ होगा
कोई ना जाने अपना फ्यूचर क्या होगा

होठ घुमा सीटी बजा.. भैया आल इज्ज वेल
अरे भइया आल इज्ज वेल
अरे चाचू आल इज्ज वेल

कनफ्यूजन ही कनफ्यूजन है
साल्यूशन कुछ पता नहीं
साल्यूशन जो मिला जो साला
क्वेश्चन क्या था पता नहीं
दिल जो तेरा बात बात पे घबराए
दिल पे रख के हाथ उसे तू फुसला ले
दिल ईडीयट है प्यार से उसको समझा ले
होठ घुमा सीटी बजा.. भैया आल इज्ज वेल
अरे भइया आल इज्ज वेल
अरे चाचू आल इज्ज वेल

स्कॉलरशिप की पी गया दारू
ग़म तो फिर भी मिटा नहीं
अगरबत्तियाँ राख हो गईं
गॉड तो आखिर मिला नहीं
बकरा क्या जाने उसकी माँ का क्या होगा
सींक घुसेगी या साला कीमा होगा

होठ घुमा सीटी बजा.. भैया आल इज्ज वेल


हँसी की फुहारों के साथ ये गीत इंजीनियरिंग कॉलेज के उन पुराने दिनों की याद दिला देता है जिसमें ये इडियोटिक लमहे भी अपने से लगने लगते हैं। यू ट्यूब पर इस गीत की झलक आप यहाँ देख सकते हैं


Related Posts with Thumbnails

12 comments:

Vishal on January 05, 2010 said...

Manish Ji
3 Idiots ke gano pe aapki tippani pasand aayi.
Vishal

Archana on January 05, 2010 said...

Film dekhate samay gaanaa achha lagata hai...Binaka,aur Cibaka ke baad is geetmala ka bhi swaagat hai ....

Priyank Jain on January 05, 2010 said...

Swanand Kirkire sahab ne to likh diye par ye bol professor's ke kano me padte kahan hain.AAJ HI KA KISSA HAI,HAMARE EK PROFESSOR FARMA RAHE THE KI KISI BADE COLLEGE ME ADMISSION BACHCHE APNI MEHNAT SE LETE HAIN AUR FIR SUCIDE KAR LETE HAIN TO YAHAN AATE HI KYUN HAIN,AAPNE GHAR PAR BHI WE YE SAB KAR SAKTE HAIN.
Khair ye to ek badi warta aur fir kuch na karne ka vishay , 'Daurane Tafteesh' padhi aur padh chukne ke baad dukh hua ki ye masla kyun itni jaldi hal ho gaya aur tafteesh khatm ho gayi!
Dhanyawaad

Puneet Bhardwaj on January 05, 2010 said...

शुक्रिया जी.. आपके ब्लॉग पर गीतों के बारे में काफी दिनों से पढ़ता आ रहा हूं। मुझे भी गीतों और गीतकारों से काफी लगाव है। उनके बारे में जानने के लिए अक्सर आपके ब्लॉग पर आता रहता हूं। स्वानंद किरकिरे का ये इंटरव्यू मैंने ही लिया था। अपने ब्लॉग पर स्वानंद किरकिरे के इंटरव्यू के बारे में संदर्भ देने के लिए शुक्रिया।

Manish Kumar on January 05, 2010 said...

पुनीत अच्छा लगा आपको यहाँ देखकर। आपने इंटरव्यू में स्वानंद जी से जो सवाल किये वो ऍसे प्रश्न थे जो हमारे जैसे संगीतप्रेमी अक्सर अपने चहेते गीतकार से पूछना चाहते हैं। इस के लिए आप भी बधाई के पात्र हैं। मेरी शुभकामना है कि पत्रकारिता में आपका सफ़र यूँ ही उज्ज्वल रहे।

राज भाटिय़ा on January 05, 2010 said...

बहुत सुंदर जानकारी दी. धन्यवाद

हिमांशु । Himanshu on January 06, 2010 said...

संगीतमाला की शुरुआत हो गयी !
सुन्दर विश्लेषण ! आभार ।

कंचन सिंह चौहान on January 06, 2010 said...

गाने की धुन अच्छी लगती है मुझे...! २५ वीं पायदान के लिये फिट...!

वैसे इसलिये भी अच्छा लगता है कि क्योंकि कुछ कुछ अपनी भी फिलॉसफी यही हैं जिंदगी के प्रति... इतनी अनिश्चितता में जो भविष्य को ले कर चिंता करना कभी कभी वर्तमान को भी गड़बड़ कर देता है।

और इसीलिये नदी के द्वीप की क्षणों में जीने का दर्शन भला लगा था।

सुशील कुमार छौक्कर on January 07, 2010 said...

गाने के बोल आपकी पोस्ट पर पढकर हमारा दिल भी होने लगा है इस गाने को सुनने का।

गौतम राजरिशी on January 08, 2010 said...

गीत का पूरा लिरिक्स यहां पढ़कर अब हमें भी ये गाना अच्छा लगने लगा है। वैसे किरकिरे साब के दीवाने तो हम "बावरा मन" से हो रखे हैं...

Manish Kumar on January 08, 2010 said...

अरे किस गीत की याद दिला दी गौतम आपने बावरा मन तो स्वानंद का पहला गीत था जिसने उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच पहचान दिला दी। 2005 की संगीतमाला में ये मेरे दूसरे नंबर का गीत बना था। चलिए इसकी लिंक को भी पोस्त का हिस्सा बनाता हूँ ताकि सनद रहे.

Anonymous said...

I wish not approve on it. I regard as polite post. Expressly the appellation attracted me to be familiar with the whole story.

 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie