Thursday, January 10, 2013

वार्षिक संगीतमाला 2012 पॉयदान # 20 : कुछ तो था तेरे मेरे दरमियाँ...

वार्षिक संगीतमाला की पॉयदान संख्या 20 पर पहली बार इस साल दाखिल हो रही है संगीतकार सलीम सुलेमान और इरशाद कामिल की जोड़ी, फिल्म जोड़ी ब्रेकर के इस गीत के साथ। इरशाद कामिल रूमानी गीतों में हमेशा से अपना हुनर दिखाते आए हैं और ये गीत भी उसकी एक मिसाल है। प्रेमानुभूति की गहनता कवि हृदयों को नए नए तरीके से अपनी बात कहने का अवसर देती रही है। यही वज़ह है कि दशकों से ऍसे गीतों को सुनते रहने के बावज़ूद भी हर साल हमें कुछ ऐसे गीत सुनने को मिल ही जाते हैं जिनकी काव्यात्मकता दिल को छू जाती है। 


प्रेम में रिश्ते बनते हैं, पलते हैं, प्रगाढ़ होते हैं और फिर टूट भी जाते हैं। पर रिश्तों को तोड़ना किसी के लिए आसान नहीं होता। बरसों लगते हैं उन साझी यादों को मिटाने के लिए। जो मंजिलें साथ साथ चल कर सामने दिखती थीं वो एकदम से आँखों से ओझल हो जाती हैं और हम भटकने लगते हैं मन के बियावान जंगलों में निरुद्देश्य..... दिशाविहीन.....

इरशाद क़ामिल इन्ही भावनाओं को अपने बोलों में खूबसूरती से उतारते हैं।.सलीम सुलेमान का संगीत तो मधुर है पर एक Déjà vu का सा आभास देता है। गीत के पार्श्व में गिटार और तबले की संगत अंत तक चलती है। प्रीतम और विशाल शेखर की हिंदी अंग्रेजी मिश्रित शैली को यहाँ सलीम सुलेमान भी कुशलता से अपनाते नज़र आते हैं। तो आइए सुनें शफक़त अमानत अली खाँ की आवाज़ में ये गीत..



लफ़्ज़ों से जो था परे
खालीपन को जो भरे
कुछ तो था तेरे मेरे दरमियाँ
रिश्ते को क्या मोड़ दूँ
नाता यह अब तोड दूँ
या फिर यूँ ही छोड़ दूँ ,
दरमियाँ
बेनाम रिश्ता वो ..बेनाम रिश्ता वो ,
बेचैन करता जो हो ना .. सके जो बयान , दरमियाँ दरमियाँ
दरमियाँ दरमियाँ दरमियाँ दरमियाँ कुछ तो था तेरे मेरे दरमियाँ

Oh its a special feeling
These moments between us
How will I live without you

आँखों में तेरे साये चाहूँ तो हो न पाए
यादों से तेरी फासला हाय
जा के भी तू ना जाए
ठहरी तू दिल में हाए
हसरत सी बन के क्यूँ भला
क्यूँ याद करता हूँ मिटता हूँ बनता हूँ
मुझको तू लाई यह कहाँ
बेनाम  रिश्ता  वो..दरमियाँ

Hard for us to say
It was so hard for us to say
Can't close a day by day
But Then the world's got me in way

चलते थे जिन पे हम तुम
रास्ते वो सारे हैं गुम
अब  ढूँढें कैसे  मंजिलें
रातें हैं जैसे मातम
आते हैं दिन भी गुमसुम
रूठी हैं सारी महफ़िलें
इतना सताओ ना, यूँ याद आओ ना
बन जाएँ आँसू ही जुबाँ
बेनाम  रिश्ता  वो..दरमियाँ

इस गीत के एक अंतरे को श्रेया घोषाल ने भी गाया है। श्रेया से ये गीत धीमे टेम्पो में गवाया गया है। गिटार की बीट्स की जगह पियानो की टनटनाहट के बीच से आती श्रेया की मधुर आवाज़ दिल पर सीधे चोट करती है।


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6 comments:

Rahul Singh on January 10, 2013 said...

बढि़या प्रस्‍तुति.

Ankit Joshi on January 11, 2013 said...

जोड़ी ब्रेकर्स के तमाम भुला देने वाले गानों में सिर्फ इसी गाने ने अपनी ओर खींचा था। वाकई इसमें जो काव्यत्मकता है वो ही कमाल करती है।

प्रवीण पाण्डेय on January 12, 2013 said...

कोमल शब्द, मधुर संगीत..

Amita Maurya on January 12, 2013 said...

love ths song ..

Vinay Kr Yadav on January 13, 2013 said...

Nice line...khalipan ko jo bhare...

Manish Kumar on January 13, 2013 said...

राहुल जी, प्रवीण, विनय, अमिता गीत पसंद करने के लिए शुक्रिया !

अंकित सही कहा ..

 

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