Thursday, March 13, 2014

वार्षिक संगीतमाला 2013 : पुनरावलोकन (Recap)

तो इससे पहले कि वार्षिक संगीतमाला के सरताज गीत की घोषणा करूँ एक बार पीछे पलट कर देख तो लीजिए कि मेरे लिए इस साल के पच्चीस शानदार गीत कौन से रहे ? अगर इस फेरहिस्त के हिसाब से साल के गीतकार का चयन करूँ तो वो तमगा इरशाद क़ामिल को ही जाएगा। इरशाद ने इस साल कौन मेरा, मेरा क्या तू लागे जैसे मधुर गीत लिखे तो दूसरी ओर जिसको ढूँढे बाहर बाहर वो बैठा है पीछे छुपके जैसे सूफ़ियत के रंग में रँगे गीत की भी रचना की। इतना ही नहीं इरशाद क़ामिल ने आमिर खुसरो की कह मुकरनी की याद ऐ सखी साजन से ताज़ा तो की ही, दो प्रेम करने वालों को पिछले साल शर्बतों के रंग और मीठे घाट के पानी जैसे नए नवेले रूपकों से नवाज़ा। 


 वार्षिक संगीतमाला 2013 संगीत के सितारे

इरशाद क़ामिल के आलावा अमिताभ भट्टाचार्य ने भी  सँवार लूँ, ज़िदा, कबीरा व तितली जैसे कर्णप्रिय गीत रचे। प्रसून जोशी ने भी भाग मिल्खा भाग के लिए कमाल के गीत लिखे। पर धुरंधरों में जावेद अख़्तर की अनुपस्थिति चकित करने वाली थी। मेरे पसंदीदा गीतकार गुलज़ार ने विशाल भारद्वाज की फिल्मों मटरू की बिजली.. और एक थी डायन के गीत लिखे। उनका लिखा गीत ख़ामख़ा मुझे बेहद पसंद है पर विशाल अपनी आवाज़ और धुन से उन बोलों के प्रति न्याय नहीं कर सके वैसे भी गुलज़ार की कविता कभी कभी गीत से ज्यादा यूँ ही पढ़ने में  सुकून देती है..विश्वास नहीं होता तो गीत के इस अंतरे को पढ़ कर देखिए

सारी सारी रात का जगना
खिड़की पे सर रखके उंघते रहना
उम्मीदों का जलना-बुझना
पागलपन है ऐसे तुमपे मरना
खाली खाली दो आँखों में
ये नमक, ये चमक, तो ख़ामख़ा नहीं...


संगीतकारों में इस साल की सफलताओं का सेहरा बँट सा गया। लुटेरा में अमित त्रिवेदी, रांझणा में ए आर रहमान और भाग मिल्खा भाग में शंकर एहसान लॉय ने कमाल का संगीत दिया। नये संगीतकारों में अंकित तिवारी ने सुन रहा है के माध्यम से काफी धूम मचाई। सचिन जिगर ने शुद्ध देशी रोमांस में अब तक का अपना सबसे बेहतर काम दिखाया। प्रीतम बर्फी जैसा एलबम तो इस साल नहीं दे पाए पर  ये जवानी है दीवानी, फटा पोस्टर निकला हीरो, Once upon a time in Mumbai दोबारा के उनके कुछ गीत बेहद सराहे गए।

गायकों में ये साल बिना किसी शक़ अरिजित सिंह के नाम रहा। तुम ही हो और लाल इश्क़ जैसे गीतों को जिस तरह डूब कर उन्होंने गाया है वो आम लोगों और समीक्षकों दोनों द्वारा सराहा गया है। वैसे कुछ नए पुराने कलाकारों ने पिछले साल अपनी खूबसूरत आवाज़ की बदौलत कुछ गीतों को यादगार बना दिया। चैत्रा अम्बादिपुदी द्वारा बेहद मधुरता से गाया कौन मेरा, मिल्खा के पैरों में जोश भरते आरिफ़ लोहार,मस्तों का झुंड में थिरकने पर मजबूर करते दिव्य कुमार, ये तूने क्या किया वाली कव्वाली में अपनी गहरी आवाज़ का जादू बिखेरते जावेद बशीर, अपनी आवाज़ की मस्ती से स्लो मोशन अंग्रेजा में झुमाने वाले सुखविंदर सिंह,भागन के रेखन की बँहगिया में एक प्यारी बन्नो का अपने परिवार से जुदाई का दर्द उभारती मालिनी अवस्थी  और झीनी झीनी में अपनी शास्त्रीय गायिकी से मन मोहते उस्ताद राशिद खाँ पिछले साल की कुछ ऐसी ही मिसालें हैं।

साल के सरताज गीत के बारे में तो आप अगली प्रविष्टि में जानेंगे (वैसे ये बता दूँ कि ऊपर के कोलॉज  में सरताज गीत से जुड़े सभी कलाकारों की तसवीर मौज़ूद है।) तब तक एक नज़र इस संगीतमाला के पिछले चौबीस गीतों पर एक नज़र...

वार्षिक संगीतमाला 2013

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7 comments:

manish kumar on March 13, 2014 said...

बहुत ही बढिया, बिनाका गीतमाला कि याद आ गयी. शायद "रान्झणा" प्रथम पायदान पर आयेगा.... मै भी मनीष, दुर्गापुर से

Manish Kumar on March 13, 2014 said...

मनीष दुर्गापुर जाना होता रहता है आप क्या करते हैं दुर्गापुर में?

प्रवीण पाण्डेय on March 13, 2014 said...

आपके साथ यह यात्रा आनन्द की यात्रा रही है।

manish kumar on March 14, 2014 said...

आप के ही सहयोगी संस्थान में हूँ, विशेष ई-मेल में.

Sumit on March 15, 2014 said...

A very enjoyable journey has come to an end. Thank you Manish. As i maintain, it is the most authentic top songs list.

But I must add that selection of 2013 songs are far more personal in nature if you compare it with 2012. Or is it just the difference in quality and popularity of songs of 2013 and 2012 which is making me think so?

Just think of no. one song of 2012 and now of 2013.

Thanks again.

Manish Kumar on March 16, 2014 said...

Thanks for your compliments Sumit! There are two issues you raised in your comment first about the quality of songs of this year as compared to last year & nature of selection.

Well frankly speaking this countdown has always been my personalized selection. I have been fortunate enough to work as a jury for Gitayan and there I have seen that out of a dozen jury members each has his own perspective over a particular song.

Last year countdown was dominated by some beautiful tracks of Barfi & yes overall quality of top 10 songs were definitely better than this year.

Manish Kumar on April 02, 2014 said...

शुक्रिया प्रवीण साथ बने रहने का !

 

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