Wednesday, November 19, 2014

क्या वाकई प्रेम वक्त की बर्बादी है ? : Come waste your time with me !

बड़ीं विडंबना है ना कि ज़िंदगी में जिस चीज़ की सबसे ज्यादा किल्लत हो उसे ही हम व्यर्थ गँवाने को तैयार हो जाएँ। पर इतना तो आपको भी मानना पड़ेगा कि सबकी नज़रों में फालतू गँवाए ये क्षण किन्हीं दो ज़िंदगियों के लिए एक अनमोल धरोहर बन जाते हैं हैं। ये पल उन दानों का काम करते हैं जिन्हें हमारा दिल रूपी पंक्षी जब चाहे चुग आता है और कुछ देर के लिए ही सही  तृप्ति के अहसास से सराबोर हो उठता है।

आजकल टीवी के पर्दे पर आमिर खाँ और अनुष्का शर्मा भी हल्के फुल्के अंदाज़ में हम सबसे यही तो कह रहे हैं। पर मेरी ये पोस्ट पीके (PK) के इस चुलबुले गीत पर नहीं बल्कि इसी बात को बेहद खूबसूरती से व्यक्त करते उस गीत की है जो आज से अठारह साल पहले पहली बार अस्तित्व में आया था। इस गीत का जनक था अमेरिका का रॉक बैंड फिश (Phish)।

पहली बार 1996 में हुए एक कान्सर्ट में इस गीत को बैंड ने जनता के सामने पेश किया। पर मेरी मुलाकात इस  से चंद महीने पहले हुई जब एक मित्र के ज़रिए ये गीत मेरे पास पहुँचा और सच पहली बार सुनकर ही इस गीत में निहित भावनाओं का मैं कायल हो गया। इस गीत की शुरुआत में बजती गिटार की मधुर धुन और मुलायम सी गायिकी के  पीछे कलाकार थे Trey Anastasio । गीत में उनका सहयोग दिया था समूह के अन्य सदस्य माइक गोर्डन (Mike Gordon), पेज मैकानल  और जोन फिशरमेन (Jon Fisherman) ने। तो पहले सुनें इस गीत को...


और फिर देखें कि कि ऐसा क्या है इस गीत के शब्दों में..

Don't want to be an actor pretending on the stage
Don't want to be a writer with my thoughts out on the page
Don't want to be a painter 'cause everyone comes to look
Don't want to be anything where my life's an open book

A dream it's true
But I'd see it through
If I could be
Wasting my time with you

Phish Rock Band group members
Don't want to be a farmer working in the sun
Don't want to be an outlaw always on the run
Don't want to be a climber reaching for the top
Don't want to be anything where I don't know when to stop

A dream it's true
But I'd see it through
If I could be
Wasting my time with you

So if I'm inside your head
Don't believe what you might have read
You'll see what I might have said
To hear it

Come waste your time with me
Come waste your time with me

नहीं मैं नहीं चाहता कि मैं अभिनेता बनकर मंच पर अपनी भाव भंगिमा का प्रदर्शन करूँ। ना ही मैं ये चाहता हूँ कि एक ऐसा लेखक बनूँ जिसके विचार कागज़ के पन्नों पर बिखर कर सब तक पहुँचे। मैं तो वो चित्रकार भी नहीं बनना चाहता जिसकी कला को देखने के लिए सब लालायित हों। दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए मैं अपने जीवन को खुली किताब बना दूँ ये भी मुझे गवारा नहीं है। मुझे नहीं बनना किसान या एक विद्रोही, नहीं चढ़नी सफलता की सीढ़ियाँ, नहीं करना ऐसा कोई भी काम जहाँ ये ही ना पता हो कि रूकना कहाँ है ? मैंने तो बस एक ही सपना देखा है। पर उस सपने को पूरा करने के लिए मुझे तुम्हारे साथ अपना समय निरुद्देश्य बिताना होगा।

अरे तुमने तो वक़्त जाया करने वाली बात को सच ही मान लिया। अगर मैंने तुम्हारे दिलो दिमाग में अपना घर बना लिया है तो फिर वो सुनो जो तुम सुनना चाहती हो। हाँ मुझे तुम्हारे साथ समय नष्ट करना पसंद है क्यूँकि जिंदगी में किसी भी मुकाम तक पहुँचने के लिए तुम्हारा साथ मेरे लिए सबसे जरूरी है। ये संगत ही हमें उन सपनों तक भी पहुँचाएगी जो हमारे साझे होंगे।



वैसे आपका क्या मत है क्या प्रेम वाकई में समय की बर्बादी है ? क्या प्यार हमें उस राह से भटका देता है जो हम अपने हुनर के बल पर ज़िदगी में प्राप्त करने योग्य थे? तो दूसरी ओर क्या ये सही नहीं कि सब कुछ पा लेने के बाद भी व्यक्ति के जीवन में मोहब्बत ना हो तो सारा प्राप्य खोखला लगने लगता है? आपको इन प्रश्नों में उलझा कर मैं तो आमिर का राग ही अलापना पसंद करूँगा

फिर भी सोच लिया हूँ मन मा
एक बार तो इस जीवन मा
कर लें भेस्ट आफ टाइम
करना है भेस्ट आफ टाइम
I want to waste my time..I love this waste of time..
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7 comments:

Sumit Prakash said...

Wah Manish Ji.

Dilbag Virk on November 19, 2014 said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20-11-2014 को चर्चा मंच पर तमाचा है आदमियत के मुँह पर { चर्चा - 1803 } में दिया गया है
आभार

Manish Kumar on November 19, 2014 said...

सुमित गीत पसंद आया आपको?

Sumit Prakash said...

Bahut badhiya. You are widening your horizon. Nice to read your views on a English song. Still noticed your focus on lyrics.

Shiv Raj Sharma on November 20, 2014 said...

बहुत अच्छा गीत
इस जानकारी के लिए शुक्रिया

Anuj Singh on November 24, 2014 said...

कैसे किसी को बता दे क्या प्यार हैं कैसे समझा दे कि क्या प्यार बधंन नही हैं न ही कोई दीवार है प्यार की अनोखी है दास्ता –– जावेद अख्तर आैर रही बात वक्त की ‚ ये तो मन से होता ‚ सोते काम करते कभी भी कही भी

Manish Kumar on November 28, 2014 said...

शिव राज शर्मा : जान कर खुशी हुई
अनुज : आपके विचारों से सहमत हूँ।

 

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