Wednesday, February 18, 2015

वार्षिक संगीतमाला 2014 पायदान # 6 : ज़हनसीब..ज़हनसीब, तुझे चाहूँ बेतहाशा ज़हनसीब .. Zehnaseeb

वार्षिक संगीतमाला की गाड़ी धीरे धीरे चलती हुई शुरु की छः पायदानों तक पहुँच गई है। इन छः गीतों से मुझे बेहद प्यार है और इन सभी को पहली बार सुनते ही मैंने अपनी इस सालाना सूची में डाल दिया था। तो छठी सीढ़ी पर गाना वो जिसकी धुन तैयार की युवाओं में खासी लोकप्रिय संगीतकार जोड़ी विशाल शेखर ने। वार्षिक संगीतमालाओं में हर साल विशाल शेखर की उपस्थिति अनिवार्य रहती है। वैसे व्यक्तिगत तौर पर मुझे विशाल शेखर की इस जोड़ी में शेखर रवजियानी की संगीतबद्ध धुनें हमेशा से ज्यादा आकर्षित करती रही हैं। मेलोडी पर इनकी गहरी पकड़ हर साल ऐसे कुछ गाने दे ही जाती है जिन्हें बार बार गुनगुनाने को दिल चाहता है। अगर पिछले कुछ सालों की बात करूँ तो उनके संगीतबद्ध गीतों में फलक़ तक चल साथ मेरे...., कुछ कम रौशन है रोशनी, कुछ कम गीली हैं बारिशें...., तू ना जाने आस पास है ख़ुदा...., बिन तेरे..कोई ख़लिश है हवाओं में बिन तेरे.... और जो भेजी थी दुआ... जैसे कर्णप्रिय गीत सहज दिमाग में आ जाते हैं।



संगीतमाला की इस पायदान पर आसीन है फिल्म हँसी तो फँसी का ये नग्मा जिसे गाया है शेखर रवजियानी ने चिन्मयी श्रीपदा के साथ। आपको याद होगा कि पिछले साल शेखर ने फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस के गीत ''तितली'' के लिए चिन्मयी को ही चुना था। पहले ये गीत शेखर ने सिर्फ अपनी आवाज़ में रिकार्ड किया था। पर ' हँसी तो फँसी' में इस गाने के द्वारा चूँकि सिद्धार्थ मल्होत्रा और परिणिति चोपड़ा के साथ गुजरे मीठे पलों का फिल्मांकन करना था तो उसे युगल गीत बनाना पड़ा। सच तो ये है कि चिन्मयी ने अपनी आवाज़ से इस गीत को रेशम सी मुलायमियत बख्श दी है।  इस गीत के बारे में चेन्नई से ताल्लुक रखने वाली चिन्मयी कहती हैं कि 
"शेखर सर ने मुझे इस गीत की रिकार्डिंग के पहले बस इतना बताया था कि ये एक रोमांटिक गीत है। गीत के बोलों से वैसे भी मैं समझ ही गई थी। हाँ मैंने गाने के पहले ये जरूर जान लिया था कि ज़हनसीब और बेतहाशा जैसे शब्दों का मतलब क्या है।"
Chinmayi Sripada & Shekhar Ravjiani
वैसे इस फिल्म के निर्माता करण जौहर का भी ये पसंदीदा नग्मा है और इस गीत के प्रति उनकी उत्सुकता का आलम ये था कि वो गीत की रिकार्डिंग में भी साथ मौज़ूद थे। सच में विशाल शेखर ने क्या मधुर धुन बनाई है इस गीत की। गीत का शुरुआती टुकड़ा हो या इंटरल्यूड्स, मन बस  गिटार की प्रमुखता से सजी धुन के साथ बहता चला जाता है। अमिताभ के बोल जब चिन्मयी की कोकिल कंठी आवाज़ में निकलते हैं तो हृदय में प्रेम की मिसरी सी घुलने लगती है। अमिताभ की लिखी इन पंक्तियाँ पर गौर करें तेरे संग बीते हर लम्हें पर हमको नाज़ है..तेरे संग जो न बीते उस लम्हें पर ऐतराज है.... या फिर तेरी अँखियों के शहर में यारा सब इंतज़ाम है..ख़ुशियों का एक टुकड़ा मिले या मिले ग़म की खुरचनें.... कितना नर्म सा अहसास मन में जगा  जाती हैं ये शब्द रचना !

वैसे हिंदी में 'ज़हनसीब' का मतलब होता है भाग्यशाली होना। यानि अमिताभ कहना चाहते हैं कि तुम्हारा  साथ पाकर मैं अपने आप को कितना भाग्यशाली महसूस करता हूँ। ये जो feeling lucky वाला अहसास है ना वो सिर्फ गूगल सर्च पर नहीं होता बल्कि हम सब की ज़ि्दगी में किसी खास शख़्स की वज़ह से आ ही जाता है। क्यूँ है ना ?

ज़हनसीब, ज़हनसीब, तुझे चाहूँ बेतहाशा ज़हनसीब
मेरे क़रीब, मेरे हबीब, तुझे चाहूँ बेतहाशा ज़हनसीब

तेरे संग बीते हर लम्हे पे हमको नाज़ है
तेरे संग जो ना बीते उसपे ऐतराज़ है

इस क़दर हम दोनों का मिलना एक राज़ है
हुआ अमीर दिल ग़रीब
तुझे
चाहूँबेतहाशा ज़हनसीब...

लेना-देना नहीं दुनिया से मेरा बस तुझसे काम है
तेरी अँखियों के शहर में यारा सब इंतज़ाम है
ख़ुशियों का एक टुकड़ा मिले या मिले ग़म की खुरचनें
यारा तेरे मेरे खर्चे में दोनों का ही एक दाम है


होना लिखा था यूँ ही जो हुआ
या होते-होते अभी अनजाने में हो गया
जो भी हुआ, हुआ अजीब
तुझे चाहूँ बेतहाशा ज़हनसीब




सच इस गीत को सुनते सुनते मेरा दिल तो गरीब हो चुका है और आपका ?

वार्षिक संगीतमाला 2014
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3 comments:

Sonroopaa Vishal on February 19, 2015 said...

I love this song ..u write superbly

Manish Kumar on February 19, 2015 said...

हाँ सोनरूपा जी ..आपने जिक्र किया था इस गीत का । सच बड़ी ही प्यारी धुन ,कुछ दिल को छूती पंक्तियाँ और फिर चिन्मयी की आवाज़। बस यूँ कहा जाए कि दिल को बाग बाग कर देने वाला गीत है ये

Sonroopaa Vishal on February 19, 2015 said...

Yeah...i can listen this song repeatedly :)

 

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