मंगलवार, दिसंबर 27, 2016

वार्षिक संगीतमाला 2016 वो गीत जो संगीतमाला में दस्तक देते देते रह गए Part II

साल की आख़िरी पोस्ट में हाज़िर हूँ छः और नग्मों के साथ जो मूल्यांकन की दृष्टि से अंतिम पाँच पॉयदानों के आसपास थे। इनमें से तीन शायद आपने ना सुने हों पर वक़्त मिले तो सुनिएगा।

आज का पहला गीत मैंने लिया है फिल्म Parched से जो Pink के आस पास ही प्रदर्शित हुई थी। अपने अंदर की आवाज़ को ढूँढती निम्न मध्यम वर्ग की महिलाओं से जुड़ी एक संवेदनशील फिल्म थी Parched ! इसी फिल्म का एक गीत है माई रे माई जिसे लिखा स्वानंद किरकिरे ने और धुन बनाई हितेश सोनिक ने। स्वानंद कोई गीत लिखें और उसमें काव्यात्मकता ना हो ऐसा हो सकता है भला.. गीत का मुखड़ा देखिए 

माई रे माई , मैं बादल की बिटिया.. 
माई रे माई , मैं सावन की नदिया 
दो पल का जोबन, दो पल ठिठोली, 
बूँदों सजी है ,चुनर मेरी चोली 

इस गीत को गाया है नीति मोहन और हर्षदीप कौर ने..

  

प्रकाश झा अपनी फिल्मों के संगीत रचने में संगीतकारों को अच्छी खासी आज़ादी देते हैं। ख़ुद तो संगीत के पारखी हैं ही। जय गंगाजल में सलीम सुलेमान का रचा संगीत वाकई विविधता लिए हुए है। फिल्म का एक गीत राग भैरवी पर आधारित है जिसे शब्द दिए हैं मनोज मुन्तसिर ने। मनोज की शब्द रचना जीवन के सत्य को  हमारे सामने कुछ यूँ खोलती है

मद माया में लुटा रे कबीरा
काँच को समझा कंचन हीरा
झर गए सपने पाती पाती
आँख खुली तो सब धन माटी

शायद नोटबंदी के बाद भी कुछ लोगों को ये गीत याद आया होगा। इस गीत को अरिजीत ने भी गाया है और दूसरे वर्जन में अमृता फणनवीस ने उनका साथ दिया है जो ज्यादा बेहतर बन पड़ा है।
  

ऊपर के दो गीतों जैसा ही तीसरा अनसुना गीत है फिल्म धनक से जिसे नागेश कुकनूर ने बनाया है। राजस्थान की पृष्ठभूमि में एक भाई बहन की कहानी कहती इस फिल्म में एक प्यारा सा गीत रचा है मीर अली हुसैन ने। देखिए इस  गीत में हुसैन  क्या हिदायत दे रहे हैं इन बच्चों को

ख़्वाबों में अपने तू घुल कर खो जा रे
पलकों पे सपने मल कर सो जा रे
होगी फिर महक तेरे हाथो में
और देखेगा तू धनक रातो में


तापस रेलिया के संगीत निर्देशन में इस गीत को अपनी आवाज़ से सँवारा है मोनाली ठाकुर ने.


तो ये थी अनसुने गीतों की बात। आगे के तीनों गीत इस साल खूब बजे हैं और इन्हें आपने टीवी या रेडियो पर बारहा सुना होगा। फिल्म वज़ीर में शान्तनु मोइत्रा ने बड़ी ही मधुर पर अपनी पुरानी धुनों से मिलती जुलती धुन रची। परिणिता के गीत याद हैं ना आपको।ये गीत उसी फिल्म के संगीत की याद दिलाता है। ख़ैर सोनू निगम और श्रेया ने इस गीत में जान फूँक दी वो भी विधु विनोद चोपड़ा के बोलों पर जो एक अंतरे से ज्यादा नहीं जा पाए।



सुल्तान बतौर एलबम साल के शानदार एलबम में रहा। विशाल शेखर का संगीत और इरशाद क़ामिल के बोलों ने खूब रंग ज़माया। अब उनकी इन पंक्तियों में पहलवान क्या आम आदमी का ख़ून भी गर्म हो उठेगा

ख़ून में तेरे मिट्टी, मिट्टी में तेरा ख़ून
ऊपर अल्लाह नीचे धरती, बीच में तेरा जूनून...ऐ सुल्तान..

सुखविंदर सिंह की सधी आवाज़ तन मन में जोश भर देती है..



वैसे तो इस साल के झूमने झुमाने वाले गीतों में काला चश्मा, बेबी को बेस पसंद है और ब्रेकअप सांग खूब चले पर मेरा मन जीता बागी फिल्म की इस छम छम ने। तो इस छम छम के साथ आप भी छम छम कीजिए और मुझे दीजिए विदा। अगले साल वार्षिक संगीतमाला 2016 के साथ पुनः प्रस्तुत हूँगा


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