Thursday, January 17, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान #11 : तू ही अहम, तू ही वहम Tu Hi Aham

वार्षिक संगीतमाला की 21 वीं सीढ़ी पर एक कव्वाली थी तो 11वीं पायदान पर है एक भजन फिल्म सुई धागा का जिसे संगीतबद्ध किया है अनु मलिक ने, बोल हैं वरुण ग्रोवर के और आवाज़ रोंकिनी गुप्ता की।

किसी देखी हुई फिल्म का एलबम सुनते वक़्त अचानक से कोई गीत अच्छा लगता है और फिर हम सोचते हैं कि अरे ये फिल्म में कहाँ था? कई बार कुछ गीत फिल्मों में संपादन के दौरान ही हट जाते हैं या उनकी कुछ हिस्सा ही फिल्म में शूट होता है। सुई धागा के इस सुरीले भजन को तो मैं फिल्म में देख नहीं पाया पर हो सकता है मेरे ध्यान से रह गया हो या सिर्फ इसकी कुछ पंक्तियाँ इस्तेमाल हुई हों। इस गीत का प्रमोशन भी फिल्म के बाकी गीतों की तरह नहीं किया गया। इसलिए मुझे यकीन है कि आपमें से ज्यादातर लोगों के लिए ये मीठा सा भजन अनसुना होगा। 


इस गीत की चर्चा शुरु करते हैं गीतकार वरुण ग्रोवर से। तीन साल पहले अनु मलिक के साथ मिलकर उन्होंने मोह मोह के धागे लिखकर श्रोताओं को अपने मोह जाल में फाँस लिया था। उसी साल मसान में दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल से प्रेरित उनका गीत तू किसी रेल सी गुजरती है मुझे बेहद पसंद आया था। वरुण ग्रोवर का नाम मैं जब भी किसी फिल्म की क्रेडिट में देखता हूँ तो मन पहले से ही खुश हो जाता है कि चलो अब कुछ सार्थक गहरे बोलों से मुलाकात होने वाली है।

तू ही अहम के मुखड़े को ही को ही देख लीजिए। इस भजन के पीछे की सोच किसी ऐसे  इंसान की है जिसके मन में भगवान के होने के प्रति पहले कुछ शंका (वहम) थी पर उसका आभास होने से वो एक गौरव, एक शक्ति (अहम) में बदल गयी है। अब उस शक्ति से जुड़ाव हो गया है तो ये भरोसा हो चला है कि आगे का मार्ग भी वही दिखलाएगा। मुझे शब्दों के लिहाज से इस गीत का दूसरे अंतरा सबसे प्रिय है जिसमें वरुण माया मोह में पड़े इंसान की मनोवृतियों को वे खूबसूरत बिंबों से सामने रखते नज़र आते हैं।

अनु मालिक व  वरुण ग्रोवर 
कुछ साल के अज्ञातवास के बाद जबसे अनु मलिक ने दम लगा कर हइसा के संगीत से वापसी की है तबसे उनके गीतों में मेलोडी लौट आई है। पिछले साल की फिल्मों में सुई धागा के साथ साथ जे पी दत्ता की फिल्म पलटन में भी उनका काम सराहनीय था। अगर तू ही अहम की बात करूँ तो  प्रील्यूड व पहले इंटरल्यूड में  गिटार की तरंगों के बीच उभरता रोंकिनी का आलाप, बोलों के पीछे बार बार उभरती बाँसुरी मन को सुकून से भर देती है। दूसरे इंटरल्यूड में बाँसुरी की मोहक तान का तो कहना ही क्या! 

इन सब के आलावा अनु मलिक की तारीफ़ इसलिए भी करनी होगी कि उन्होंने इस शास्त्रीयता के रंग में डूबे इस गीत के लिए एक ऐसी गायिका को चुना जो इस तरह के गीत के साथ पूरी तरह न्याय कर सकती थीं। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ रोंकिनी गुप्ता की जिनके तुम्हारी सुलू के गीत रफ़ू ने पिछले साल इस गीतमाला का सरताज बनने का गौरव प्राप्त किया था।

रोंकिनी गुप्ता 
जो लोग बतौर गायिका रोंकिनी के सांगीतिक सफ़र से परिचित नहीं हैं वो उनके बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं। तुम्हारी सुलु का गीत गाते वक़्त सहायक निर्देशक मनन ने  (जो सुई धागा में भी सहायक निर्देशन का काम कर रहे थे) रोकिनी का नाम फिल्म के निर्देशक शरत कटारिया को सुझाया। अनु मलिक चाहते थे कि उनके संगीतबद्ध गीतों को कोई संगीत सीखी हुई तैयार गायिका मिले जिसकी आवाज़ का स्वाद कुछ अलग सा हो। रोंकिनी इन मापदंडों में बिल्कुल खरी उतरीं।  शास्त्रीय गायिकी पर उनकी पकड़ तो सर्वविदित है इसलिए उनके गीतों में संगीतकार कोई ना कोई आलाप डाल ही देते हैं। नतीजा ये  कि आप इस आलाप के साथ ही गीत से बँधने लगते हैं। इस गीत में जब वो परबत तोड़ धरम का ... या मुक्ति जो ये चाहे... गाती हैं तो उनकी आवाज़ का उतार चढ़ाव देखते ही बनता है। इस साल गायिकाओं के गाए बेहतरीन एकल गीतों में इस गीत का नाम भी मन में स्वाभाविक रूप से उठता है।

तो आइए सुनते हैं ये भजन उनकी आवाज़ में। 

तू ही अहम, तू ही वहम
तू ही अहम, तू ही वहम
तुझसे जुड़ा  वास्ता
हम हैं पाखी भटके हुए, तू साँझ का रास्ता
घाट तू ही पानी तू ही प्यास है
तू ही चुप्पी तू अरदास है, तू ही अहम, तू ही वहम

हमको तू ना माने, हम मानेंगे तुझको
घोर अंधेरे में भी पहचानेंगे तुझको
परबत तोड़ धरम का हम पायेंगे तुझको
तू रंग भी बेरंग भी
तू रंग भी बेरंग भी
शंका तू ही आस्था
हम हैं पाखी भटके हुए, तू साँझ का रास्ता
घाट तू ही.. तू अरदास है, तू ही अहम, तू ही वहम

तन ये भोग का आदी, मन ये कीट पतंगा
झूठ के दीवे नाचे, झूठा बने ये मलंगा
मुक्ति जो ये चाहे, तो मारे मोह अड़ंगा
तू ही सदा से दूर था
तू ही सदा से दूर था
तू ही सदा पास था
हम हैं पाखी भटके हुए, तू साँझ का रास्ता
घाट तू ही.. तू अरदास है
तू ही अहम.... तू ही वहम


वार्षिक संगीतमाला 2018  
1. मेरे होना आहिस्ता आहिस्ता 
2जब तक जहां में सुबह शाम है तब तक मेरे नाम तू
3.  ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
4.  आज से तेरी, सारी गलियाँ मेरी हो गयी
5.  मनवा रुआँसा, बेकल हवा सा 
6.  तेरा चाव लागा जैसे कोई घाव लागा
7.  नीलाद्रि कुमार की अद्भुत संगीत रचना हाफिज़ हाफिज़ 
8.  एक दिल है, एक जान है 
9 . मुड़ के ना देखो दिलबरो
10. पानियों सा... जब कुमार ने रचा हिंदी का नया व्याकरण !
11 . तू ही अहम, तू ही वहम
12. पहली बार है जी, पहली बार है जी
13. सरफिरी सी बात है तेरी
14. तेरे नाम की कोई धड़क है ना
15. तेरा यार हूँ मैं
16. मैं अपने ही मन का हौसला हूँ..है सोया जहां, पर मैं जगा हूँ 
17. बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन हाथ तोरा जब छूटा
18. खोल दे ना मुझे आजाद कर
19. ओ मेरी लैला लैला ख़्वाब तू है पहला
20. मैनू इश्क़ तेरा लै डूबा  
21. जिया में मोरे पिया समाए 
24. वो हवा हो गए देखते देखते
25.  इतनी सुहानी बना हो ना पुरानी तेरी दास्तां
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13 comments:

Sumit on January 18, 2019 said...

ये है गहरे सागर का नायाब मोती! वाह!

Manish Kumar on January 18, 2019 said...

Sumit ये भजन आपको पसंद आया जान कर खुशी हुई।

Ronkini Gupta on January 18, 2019 said...

Jis tarah aap apne shabdon ke zariye, prashansa karte Hain, Bada garv mehsoos hota hai... Bhagyashaali Hoon, ki iss daur mein, Jahan remixes ka palla bhaari hota ja Raha hai, ek aisa gaana gaane ka mauka Mila Jo shastriya Sangeet se juda hai aur jismein hamari mitti ki khushboo aati hai... Dhanyavaad Manish Kumar ji!

Manish Kumar on January 18, 2019 said...

रोंकिनी , भाग्य उन्हीं का साथ देता है जो मेहनत से नहीं घबराते हैं और जिन्हें अपनी काबिलियत पर भरोसा हो। आप में ये दोनों ही गुण है। मुझे खुशी है कि आपने अब तक जो भी काम किया है वो आम और खास सबके द्वारा सराहा गया है।

ऍसे ही गाते रहिए और हमें बार बार लिखने का मौका देते रहिए :)

Sumit on January 18, 2019 said...

You deserve every bit of appreciation and more!

Manish on January 19, 2019 said...

फ़िल्म में ये गीत नहीं था। कभी रेडियो पर भी नहीं बजा।

Manish Kumar on January 19, 2019 said...

आजकल कई गाने फिल्म के संपादन के समय कट जाते हैं या रहते भी हैं तो उनके सारे अंतरों का फिल्मांकन नहीं होता। मुझे भी ये गीत फिल्म देखते समय नहीं दिखा था। वैसे इस साल के बेहतरीन महिला एकल गीतों की दौड़ में ये नग्मा स्टार स्क्रीन एवार्ड में नामांकित हुआ था।

Smita Jaichandran on January 19, 2019 said...

Manish Kumar film mein na hone ke kaaran yeh geet reh Gaya...Ronkini ki awaaz behad pasand aaya

Manish Kumar on January 19, 2019 said...

हाँ स्मिता, वो एक बेहतरीन शास्त्रीय गायिका हैं।

Kanchan Singh Chouhan on January 22, 2019 said...

सुर, शब्द और धुन तीनों तरह से बेहतरीन गीत लगा। आज पहली बार सुना यह गीत। प्रील्यूड वाक़ई प्यारा है ।

Manish Kumar on January 22, 2019 said...

हाँ मुझे भी वो आलाप वाला हिस्सा बेहद पसंद है। :)

Sajeev Sarthie on January 22, 2019 said...

Solid list bhai.

Manish Kumar on January 22, 2019 said...

धन्यवाद सजीव :)

 

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