बुधवार, फ़रवरी 12, 2020

वार्षिक संगीतमाला : एक शाम मेरे नाम के संगीत सितारे 2019

वार्षिक संगीतमाला की ये समापन कड़ी है 2019 के संगीत सितारों के नाम। पिछले साल रिलीज़ हुई फिल्मों के  बेहतरीन गीतों से तो मैंने आपका परिचय पिछले दो महीनों में तो कराया ही पर गीत लिखने से लेकर संगीत रचने तक और गाने से लेकर बजाने तक हर विधा में किस किस ने उल्लेखनीय काम किया यही चिन्हित करने का प्रयास है मेरी ये पोस्ट। तो आइए मिलते हैं एक शाम मेरे नाम के इन संगीत सितारों से।



साल के बेहतरीन गीत
पुराने गीतों पर रिमिक्स बनाने का चलन कोई नया नहीं है पर पिछले साल तो हद ही हो गयी। कुछ ऐसे एलबम आए जिनमें उनके आलावा कुछ था नहीं। इतने प्रतिभाशाली संगीतकारों के रहते हुए भी लोग मेहनत से बच कर इस तरह के शार्ट कट इख्तियार करने लगें तो ये सचमुच चिंता का विषय है। अगर संगीतमाला के आधे गीत महज चार पाँच एलबम में सिमट जाएँ तो सोचिए कि जो हर साल सौ से अधिक फिल्में बनती हैं उनमें कैसा संगीत परोसा गया होगा?

आइटम नंबर की तरह रैप सांग को हर एलबम बनाने की प्रवृति भी इस साल नज़र आई।  गली ब्वॉय ने रैप गीतों से कुछ सार्थक संदेश देने में एक अच्छी पहल की। मल्टी कंपोसर एलबमों की संख्या में और वृद्धि हुई। वहीं इस प्रवृति ने एक संगीत उद्योग में म्यूजिक सुपरवाइसर का एक नए पद ही ईजाद कर दिया जिसका काम अलग अलग संगीतकारों से फिल्म की कहानी के हिसाब से गाने बनवाना है। कुछ बेहद कम बजट की गुमनाम फिल्मों में भी ऐसे गीत निकल कर आए जो बेहद मधुर थे। कई नए युवा संगीतकारों, गायक और गीतकारों ने मिलकर सुरीले रंग बिखेरे। जैसे मैंने पिछली पोस्ट में बताया था मेरे लिए इस साल का सरताज गीत तेरी मिट्टी रहा। वार्षिक संगीतमाला में शामिल सारे गीतों की सूची एक बार फिर ये रही।



साल का सर्वश्रेष्ठ गीत :  तेरी मिट्टी, केसरी (अर्को प्रावो मुखर्जी, मनोज मुंतशिर, बी प्राक)

03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15. मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

साल के बेहतरीन एलबम

अगर पूरे एलबम के लिहाज़ से देखा जाए तो कुछ छोटे बजट की फिल्मों ने भी अच्छा संगीत दिया जैसे कि गॉन केश, मोतीचूर चकनाचूर और घोस्ट। देशप्रेम के जज़्बे को उभारते केसरी और URI का भी संगीत काफी सराहा गया पर खिताबी जंग का मुकाबला इस बार त्रिकोणीय था। कलंक, मणिकर्णिका और कबीर सिंह के लगभग सभी गाने खासे लोकप्रिय हुए। जहाँ कबीर सिंह युवाओं की आवाज़ बना वही कलंक और मणिकर्णिका जैसी पीरियड फिल्मों ने पुरानी मेलोडी की यादें ताज़ा कर दीं। पर साल का सबसे बेहतरीन एलबम रहा कलंक जिसने
मणिकर्णिका से थोड़े अंतर से बाजी मारी ।

  • मणिकर्णिका : शंकर एहसान लॉय
  • कलंक  : प्रीतम
  • Uri: The Surgical Strike  : शाश्वत सचदेव
  • कबीर सिंह : कई संगीतकार
  • गॉन केश : कई संगीतकार

साल का सर्वश्रेष्ठ एलबम      :  कलंक, प्रीतम  

साल के कुछ खूबसूरत बोलों से सजे सँवरे गीत
इस साल कुछ नए और कुछ पुराने गीतकारों के बेहद अर्थपूर्ण गीत सुनने को मिले। नए लिखने वालों में अभिरुचि चंद  ने मंज़र है ये नया में मन में जोश भरने के साथ अपने प्रतीकों से गुलज़ार साहब की याद दिला दी वहीं अभिषेक मजाल अपने रूमानी गीत बेईमानी से में नए खूबसूरत बिंब भरते नज़र आए। प्रसून जोशी और जावेद अख्तर ने देशप्रेम के जज़्बे को कविता सरीखे शब्दों से नवाज़ा तो मनोज तेरी मिट्टी में सैनिक के दिल की आवाज़ बन कर उभरे। सीमा सैनी की बेइमान चंदा से नोक झोंक बड़ी प्यारी रही, वहीं रुआँ रुआँ में वरुण ग्रोवर ने अपने गहरे शब्दों से दिल जीता। अमिताभ ने कलंक के शीर्षक गीत इश्क़ का जोग विजोग फिर उभारा तो इरशाद कामिल ने आईना में रूमानियत से भरी बेहद दिलकश पंक्तियाँ रचीं। इतने सारे प्यारे गीतों में किसी एक को चुनना मेरे लिए बड़ा कठिन रहा और अंत में मैंने प्रसून जोशी की काव्यात्मकता और मनोज के दिल छूते भावों के आधार पर इन दोनों को ही संयुक्त रूप से साल के बेहतरीन लिखे गीतों में जगह दी है।

  • अमिताभ भट्टाचार्य :      कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया ….  
  • प्रसून जोशी           :      मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए...  
  • प्रसून जोशी           :      बोलो कब प्रतिकार करोगे 
  • वरुण ग्रोवर,          :      रुआँ रुआँ, रौशन हुआ... 
  • सीमा सैनी             :     ओ रे चंदा बेईमान ...
  • इरशाद कामिल     :      ये आईना है या तू है...
  • मनोज मुंतशिर       :      तेरी मिट्टी 
  • अभिषेक मजाल     :      बेईमानी से
  • अभिरुचि चंद         :      मंज़र है ये नया
  • जावेद अख्तर         :      मर्द मराठा

साल के सर्वश्रेष्ठ बोल : तेरी मिट्टी.. मनोज मुंतशिर /मैं रहूँ या ना रहूँ ...प्रसून जोशी

साल के गीतों की कुछ बेहद जानदार पंक्तियाँ 

जब आप पूरा गीत सुनते हैं तो कुछ पंक्तियाँ कई दिनों तक आपके होठों पर रहती हैं और उन्हें गुनगुनाते वक़्त आप एक अलग खुशी महसूस करते हैं। पिछले  साल के गीतों  की वो  बेहतरीन पंक्तियों जिनके शब्दों के साथ मेरे दिल की मँगनी हुई वे कुछ यूँ हैं 😃

  • तू झील खामोशियों की... लफ़्ज़ों की मैं तो लहर हूँ..एहसास की तू है दुनिया..छोटा सा मैं एक शहर हूँ
  • जिस्म से तेरे मिलने दे मुझे, बेचैन ज़िन्दगी इस प्यार में थी...उँगलियों से तुझपे लिखने दे ज़रा, शायरी मेरी इंतज़ार में थी
  • रुआँ रुआँ, रौशन हुआ...धुआँ धुआँ, जो तन हुआ...हाँ नूर को, ऐसे चखा..मीठा कुआँ, ये मन हुआ
  • काँधे पे सूरज, टिका के चला तू..हाथों में भर के चला बिजलियाँ..तूफां भी सोचे, ज़िद तेरी कैसी..ऐसा जुनून है किसी में कहाँ
  • मेरी नस नस तार कर दो और बना दो एक सितार..राग भारत मुझपे छेड़ो झनझनाओ बार बार
  • तरसे जिसको मोरे नैन चंदा, तू दिखे उसे सारी रैन चंदा..मैं जल जाऊँ तुझसे ओ चंदा, हाय लगाऊँ तुझपे ओ चंदा
  • दुनिया की नज़रों में ये रोग है..हो जिनको वो जाने, ये जोग है...इकतरफा शायद हो दिल का भरम...दोतरफा है, तो ये संजोग है
  • ओ माई मेरे क्या फिकर तुझे, क्यूँ आँख से दरिया बहता है, तू कहती थी तेरा चाँद हूँ मैं, और चाँद हमेशा रहता है
  • अग्नि वृद्ध होती जाती है, यौवन निर्झर छूट रहा है...प्रत्यंचा भर्रायी सी है, धनुष तुम्हारा टूट रहा है..कब तुम सच स्वीकार करोगे, बोलो, बोलो कब प्रतिकार करोगे?
  • सोच की दीवारों पे. तारीख लिख के चला है..साँसों की मीनारों पे, ख़्वाहिश रख के चला है..रह गया है गर्दिशों में..ये सवाल कैसा..इक मलाल है ऐसा
  • अग्नि हो कर मँगनी हो गई पानी से..

साल के बेहतरीन गायक
गायिकी की बात करूँ तो ये साल पुराने के साथ नए उभरते गायकों का भी रहा। शांतनु सुदामे द्वारा  मंज़र है ये नया का  जोशीला गायन ध्यान खींचने में सफल रहा। पापोन की नमकीन आवाज़ तेरा साथ है को एक अलग ही स्तर पर ले गयी। सोनू निगम मिर्जा वे और शर्त में अपनी उसी पुरानी लय में दिखे। वही अरिजीत सिंह ने हमेशा की तरह कलंक के शीर्षक गीत के उतार चढ़ाव को बखूबी निभाया। अरमान मलिक की आवाज़ की मुलायमियत तेरा जिक्र में मन को सहलाने वाली थी। पर ये साल पंजाबी गायिकों के लिए खास तौर से अच्छा रहा। सूफी गायिकी के लिए मशहूर करण ग्रेवाल ने चिट्ठिये का दर्द अपनी आवाज़ में उतार लिया तो वहीं अर्जुन हरजाई बड़ी मासूमियत से छोटी छोटी गल में मान जाने की वकालत करते रहे पर जिस आवाज़ ने गीत की पहली पंक्ति से रोंगटे खड़े कर दिए वो थी बी प्राक की आवाज़ जिन्होंने पंजाबी फिल्मों से पहली बार इस साल बालीवुड का रुख किया है। उनके गाये इस गीत के लिए अक्षर कुमार को भी कहना पड़ा कि ये उनके कैरियर के सबसे शानदार गाए गीतों में से एक है।



  • अरिजीत सिंह        :  कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया …
  • पापोन                   :  तेरा साथ है 
  • कँवर ग्रेवाल          :  चिट्ठिये 
  • शांतनु सुदामे         : मंज़र है ये नया 
  • बी प्राक                 : तेरी मिट्टी 
  • अर्जुन हरजाई        : छोटी छोटी गल 
  • सोनू निगम            :  मिर्जा वे
  • अरमान मलिक      :  तेरा ना करता जिक्र

साल के सर्वश्रेष्ठ गायक          :  बी प्राक, तेरी मिट्टी

साल की बेहतरीन गायिका
पिछले साल की अपेक्षा इस साल गायिकाओं को भी कई एकल गीत गाने का मौका मिला। कविता सेठ की आवाज़ बहुत सालों के बाद इस साल नुस्खा तराना में गूँजी। ज्योतिका टांगरी ने इस साल कई गीत गाए पर घोस्ट के लिए उनका गाया गीत काफी मधुर रहा। नई गायिकाओं में जिन आवाज़ों ने सबसे अधिक प्रभावित किया वो थीं आज जागे रहना में हिमानी कपूर और राजा जी में प्रतिभा सिंह बघेल। आशा है आने वाले सालों में इनके और गीत सुनने को मिलेंगे। बेहतरीन गायिका के लिए जीत का सेहरा लगातार दूसरे साल श्रेया घोषाल की झोली में गया । घर मोरे परदेशिया के शास्त्रीय आलाप हों या या ओ रे चंदा की मीठी चुहल वो दोनों ही गीतों में अपनी बेहतरीन गायिकी का सिक्का जमा गयीं।



  • हिमानी कपूर     : आज जागे रहना, ये रात सोने को है.
  • श्रेया घोषाल       : ओ रे चंदा बेईमान  
  • प्रतिभा बघेल     : ओ  राजा जी 
  • श्रेया घोषाल       : घर मोरे परदेसिया
  • कविता सेठ       : नुस्खा तराना
  • ज्योतिका टांगरी : ये जो हो रहा है

साल की सर्वश्रेष्ठ गायिका     :  श्रेया घोषाल (घर मोरे परदेसिया, ओ रे चंदा बेईमान)   

गीत में प्रयुक्त हुए संगीत के कुछ बेहतरीन टुकड़े

संगीत जिस रूप में हमारे सामने आता है उसमें संगीतकार संगीत संचालक और निर्माता की  बड़ी भूमिका रहती है पर संगीतकार की धुन हमारे कानों तक पहुँचाने का काम हुनरमंद वादक करते हैं जिनके बारे में हम शायद ही जान पाते हैं। वैसे आजकल गीतों में लाईव आर्केस्ट्रा का इस्तेमाल बेहद कम होता जा रहा है। ज्यादातर अंतरों के बीच प्री मिक्सड टुकड़े बजा दिए जाते हैं। फिर भी इस साल कलंक, केसरी, मणिकर्णिका, पानीपत जैसी फिल्मों के गीतों में लाइव रिकार्ड किए हुए भांति भांति के वाद्य गूँजे। विशाल भारद्वाज ने रुआँ रुआँ में गिटार को गीत के शब्दों के साथ बड़े करीने से समायोजित किया। संगीत संचालकों में आदित्य देव के काम ने बार बार ध्यान खींचा। कुछ गीतों में स्वीडन और थाइलैंड के विदेशी वादक समूहों का भी प्रयोग हुआ। कानों को मधुर लगने वाली  धुनों की चर्चा तो नीचे है पर सबसे ज्यादा दिल खुश हुआ विपिन पटवा के  तेरा साथ है के लिए किए गए संगीत संयोजन ने । घड़े, सितार और शहनाई के साथ तार वाद्यों की स्वरलहरी गीत के खत्म होने के बाद भी ज़हन में बजती रही।


  • रूआँ रूआँ : गिटार अंकुर मुखर्जी, विशाल भारद्वाज
  • तेरा साथ है गीत के अंत में तार वाद्यों पर आधारित धुन : विपिन पटवा
  • तेरी मिट्टी अंत में तार वाद्यों पर आधारित धुन प्रकाश वर्मा, आदित्य देव, अर्को प्रावो मुखर्जी
  • ऐरा गैरा प्रील्यूड/इंटरल्यूड : बुलबुल तरंग राशिद खाँ, मेंडोलिन, तापस राय. सितार सलमान खाँ, प्रीतम  
  • तेरा ना करता जिक्र प्रील्यूड : गिटार - केबा जरमिया,  असद खाँ
  • मिर्जा वे सिग्नेचर ट्यून : जीत गाँगुली
  • रुह का रिश्ता,इंटरल्यूड : आदित्य देव, सोनल प्रधान
  • जहाँ तू चला मिडनाइट मिक्स इंटरल्यूड : जसलीन रॉयल, अक्षय राहेजा

संगीत की सबसे कर्णप्रिय मधुर तान  : तेरा साथ है, विपिन पटवा 

संगीतमाला के समापन मैं अपने सारे पाठकों का धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने समय समय पर अपने दिल के उद्गारों से मुझे आगाह किया। आपकी टिप्पणियाँ इस बात की गवाह थीं कि आप सब का हिंदी फिल्म संगीत से कितना लगाव है। इस साल गीतमाला शुरु होने के पहले मैंने आप सबसे अपनी पसंद के गीतों का चुनाव करने को कहा था और साथ में ये बात भी कही थी कि जिन लोगों की पसंद सबसे ज्यादा इस गीतमाला के गीतों से मिलेगी उन्हें एक छोटा सा तोहफा दिया जाएगा मेरे यात्रा ब्लॉग मुसाफ़िर हूँ यारों की तरफ से। इस बार की प्रतियोगिता के सभी विजेताओं बठिंडा से अरविंद मिश्र, पटना से मनीष, लखनऊ से कंचन सिंह चौहान और कोयम्बटूर से स्मिता जयचंद्रन को मेरी तरफ से ढेर सारी बधाई।



एक बार फिर आप सभी का दिल से शुक्रिया इस सफ़र में साथ बने रहने के लिए। 

9 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा आकलन सही निकला!! मैंने पहले ही ज़िक्र कर दिया था, कलंक एवं कबीर सिंह साल के श्रेष्ठ अल्बम हो सकते हैं!

    जवाब देंहटाएं
  2. सटीक अनुमान कलंक और तेरी मिट्टी के बारे में! तभी तो विजेताओं में एक रहे।

    जवाब देंहटाएं
  3. आपको एक बार फिर धन्यवाद मनीष जी इस संगीत यात्रा को जारी रख हम लोगो को हमसफर बन आनंद उठाने का अवसर देने के लिए. आज का आलेख आपके संगीत की गंभीर समझ और रूचि का एक और परिचय देता है. मधुर तान पे इतना ध्यान कौन देता है या दिला सकता है भला? Thank you and keep it up. आपकी एक चाय मेरे घर पे due है. जल्दी बात करता हूँ.

    जवाब देंहटाएं
  4. धन्यवाद सुमित आप सब के साथ हिंदी फिल्मी गीतों का ये सालाना उत्सव मनाना हमेशा से आनंददायक रहा है और आगे भी रहेगा। :)

    जवाब देंहटाएं
  5. हमेशा की तरह एक शानदार सालाना संगीत का सफ़र रहा...कृपया हो सके तो इस दशक के फिल्मी संगीत के सफरनामा पर एक लेख जरूर लिखे...साथ मे रैंकिंग आये तो सोने पर सुहागा हैं....

    जवाब देंहटाएं
  6. धन्यवाद !
    एक दशक के संगीत के बारे में गीतों का चुनाव तो हर साल के शीर्ष गीत के चुनाव सा हो जाएगा। हाँ कभी इस विषय पर किताब लिखूँ तो आपके सुझाव को ध्यान में रखूँगा।

    जवाब देंहटाएं
  7. सर मैं आपका फैन होगया ,आपने कितना मेहनत किया होगा इन मोतियों को चुनने में। कुछ साल पहले मैं अपने ब्लॉग पे आया था जब मुझे सज्जाद अली का गाना सुनने को मिला था और ये मेरा फेवरेट गाना बन गया था, बहुत दिनों से सोच रहा था कि आपके वेबसाइट का लिंक कहाँ से मिलेगा लेकिन संजोग किया था ,। आपका ये ब्लॉग हम जैसे लोगो पे अहसान है ।

    जवाब देंहटाएं
  8. धन्यवाद विकास आप सब का प्यार ही इस मेहनत के लिए बल देता है। आते रहें और एक शाम मेरे नाम की महफिल का हिस्सा बनते रहें।

    जवाब देंहटाएं