Wednesday, January 15, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 20 : ये आईना है या तू है, जो रोज़ मुझको सँवारे Ye Aaina Hai..

वार्षिक संगीतमाला की सत्रहवीं पायदान पर वो नग्मा जिसके गीतकार और संगीतकार की उपस्थिति पिछले साल के गीतों में बेहद कम रही। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ अमाल मलिक और इरशाद कामिल की। याद कीजिए 2015 और 2016 के साल अमाल मलिक एम एस धोनी, एयर लिफ्ट, नूर व रॉय जैसी फिल्मों के साथ चर्चा में बड़ी तेजी से आए थे। पिछले तीन सालों में उन्होंने मात्र दर्जन भर गीत किए हैं। एक तो उनकी दिक्कत ये रही कि उन्हें अपना ज्यादा काम मल्टी कम्पोजर फिल्मों में मिला और दूसरे उनसे जिस विविधता की उम्मीद थी उसमें वो पूरी तरह सफल नहीं हुए।

इस साल उनके गीत दे दे प्यार दे और बदला में सुनाई दिए पर जिस गीत ने सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरीं वो था कबीर सिंह का ये आईना है या तू है। एक बड़ी ही मुलायम सी रचना जिसे इरशाद ने अपने प्यारे लफ्जों से एक अलग मुकाम पर पहुँचा दिया।


अमाल को इस गाने के लिए निर्देशक संदीप वांगा द्वारा यही कहा गया कि आपको मुझे कुछ बताना नहीं है बस आप फिल्म की परिस्थिति देख लीजिए जहाँ इस गाने को आना है। अमाल ने अर्जुन रेड्डी ने पहले भी देखी थी। ये गीत फिल्म में तब आता है जब कबीर सिंह का ब्रेक अप हो चुका रहता है और वो पशोपेश में हैं कि अपने प्यार से छिटक जाने के ग़म में डूबा रहे या फिर ज़िंदगी में आगे बढ़े। संदीप ने इतना जरूर कहा था कि तुम्हें ये गाना लिखते समय कबीर सिंह को भूल जाना है। याद रखना है तो उस लड़की को जिसके जीवन में कबीर आया है। उसके लिए प्यार के क्या मायने हैं ये सोचना।

अमाल कहते हैं कि वैसे तो लड़कियाँ बड़ी जटिल होती हैं पर मैंने ये चुनौती इरशाद भाई पर छोड़ दी बस उन्हें ये कहते हुए कि आपको प्यार, इश्क़, मोहब्बत जैसे शब्दों से हटकर अपनी बात रखनी है। इरशाद तो ख़ैर धुरंधर हैं ही खिलाड़ी हैं इस ज़मीं के। . रच दिया उन्होंने ये  मुखड़ा 

ये आईना है या तू है, जो रोज़ मुझको सँवारे?
इतना लगी सोचने क्यूँ मैं आज-कल तेरे बारे

पिछले साल लैला मजनूँ के गीतों से रिझाने वाले इरशाद कामिल भी अमाल की तरह इस साल कबीर सिंह के आलावा अपनी दूसरी फिल्म भारत में कुछ ज्यादा कमाल नहीं दिखा सके पर इस गीत में उन्हें मौका मिला अपनी लेखनी की धार दिखाने का और नतीजे में निकली ऐसी खूबसूरत पंक्तियाँ

तू झील खामोशियों की
लफ़्ज़ों की मैं तो लहर हूँ
एहसास की तू है दुनिया
छोटा सा मैं एक शहर हूँ

गीत का अंत भी बड़े मोहक अंदाज़ में किया है उन्होंने ये कहते हुए

सीने पे मुझको सजा के, जो रात सारी गुज़ारे
तो मैं सवेरे से कह दूँ "मेरे शहर तू ना आ, रे"

संगीतमाला के पिछले गीत की तरह ही इस गीत को गाया है श्रेया घोषाल ने। पिछले गीत जैसी शास्त्रीय बंदिश हो या इस गीत की विशुद्ध रूमानियत श्रेया की आवाज़ उसके साथ पूरा न्याय करती है। इस गीत की रिकार्डिंग ने श्रेया ने बीस मिनटों में ही खत्म कर दी। इस साल उनके तीन गीत इस संगीतमाला में हैं। दो गीत तो अब आपने सुन लिए। उनका गाया तीसरा गीत जरूर आपमें से बहुतों के लिए अनसुना होगा। तो इंतज़ार कीजिए उस गीत का और फिलहाल सुनिए कबीर सिंह का ये बोल प्रधान गीत जो अपनी लय में कम से कम संगीत के बीच कानों में बहता सा चला आता है।

पर्दे पर इस गाने को फिल्माया गया है शाहिद कपूर और निकिता दत्ता पर !


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4 comments:

Pratima Sharan on January 16, 2020 said...

Meri list me no one song h ye 😁😁😁

Manish Kumar on January 16, 2020 said...

कोई खास वज़ह इसके पहले नंबर पर होने की ?

Santosh Singh on January 16, 2020 said...

यह गीत तो छूट ही गया था। शुक्रिया ध्यान आकर्षित कराने के लिये !

Manish Kumar on January 16, 2020 said...

Santosh इस गीत का उतना प्रमोट नहीं किया गया क्यूँकि ये फिल्म की सहायक नायिका पर फिल्माया गया था पर है ये प्यारा नग्मा ! :

 

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