Friday, January 10, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 20 : अग्नि हो कर मँगनी हो गई पानी से Beimani Se

वार्षिक संगीतमाला की अगली सीढ़ी पर एक बार फिर है गॉन केश का एक और सुरीला नग्मा। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार संगीतकार की भूमिका  निभाई है बिशाख ज्योति ने और इसे गाया है महालक्ष्मी अय्यर ने। अगर आपको बिशाख ज्योति का नाम कुछ कुछ सुना हुआ लग रहा हो तो बता दूँ कि वे सा रे गा मा सिंगिंग सुपरस्टार्स में रनर्स अप रहे थे। ये वही कार्यक्रम था जिसमें सुगंधा मिश्रा, स्निति मिश्रा और रंजीत रजवाड़ा जैसे नाम पहली बार उभरे थे। 

फिल्म जगत में गायिकी की प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि बहुत सारे गायक फिल्मों में बतौर संगीतकार अपनी जगह को तलाशने में जुटे हुए हैं। अब इसी साल की संगीतमाला में देखिए सोनल प्रधान, पायल देव, अखिल सचदेव और अब बिशाख ज्योति इन सारे गायकों ने संगीतकार का किरदार कितने करीने से निभाया है।


गॉन केश के पिछला नग्मे नुस्खा तराना और अब बेईमानी से समानता बस इतनी है कि दोनों को ही अभिषेक मजाल ने ही लिखा है। दिल्ली के इस गीतकार का नाटकों सें जुड़ाव रहा है और अब इस साल इस फिल्म के गीतों में भी उनकी प्रतिभा का दूसरा रूप छलका है। शायरी में मजाज़ की शोहरत से तो आप वाक़िफ़  ही होंगे। शायद अभिषेक ने अपना तख़ल्लुस मजाल रखने में उनसे प्रेरणा ली होगी।

जिस तरह नुस्खा तराना में फिल्म की कहानी का मर्म बयाँ करती उनकी पंक्ति ढूँढ रहा है पक्षी को दाना, मन में चला के ये नुस्खा तराना  हृदय को छू गयी थी वैसे ही यहाँ भी विपरीत स्वभाव के आकर्षण को उनका अग्नि हो कर मँगनी हो गई पानी से  के रूप में व्यक्त करना दिल को बाग बाग कर देता है। प्रेम गीत हर साल सैकड़ों में लिखे जाते हैं पर उसी भाव को तरह तरह से कहने की अदा एक श्रोता के मन को पुलकित करती रहती है।


बिशाख ज्योति, अभिषेक मजाल व श्वेता त्रिपाठी
महालक्ष्मी अय्यर की आवाज़ हिंदी फिल्मों में कम ही सुनाई देती है। वैसे उन्होंने अपने लंबे कैरियर में हिंदी फिल्मों में गाहे बगाहे अच्छे गाने दिए हैं। अपनी पसंद की बात करूँ तो बंटी और बबली का छुप छुप के, टशन का फलक तक चल साथ मेरे और झूम बराबर झूम का बोल ना हल्के हल्के जैसे युगल गीत याद आते हैं। बिशाख ज्योति उनके साथ स्टेज शो भी किया करते हैं इसलिए अपनी इस बेहतरीन धुन के लिए उन्होंने उन्हें चुना होगा। मुझे ऐसा लगता है कि इस गीत में जो मेलोडी है वो श्रेया की आवाज़ में और ज्यादा जँचती। 

गीत की सांगीतिक व्यवस्था का दारोमदार इस गीत में शुभदीप सिंह ने सँभाला है। गीत की शुरुआत में गिटार पर आधारित संगीत का टुकड़ा मधुर है। बाँसुरी का भी अच्छा इस्तेमाल किया है उन्होंने इस गीत में। तो आइए सुनते हैं ये पूरा गीत..



बेईमानी से मनमानी से
हासिल किया दिल आसानी से
बेगानी सी कहानी में

दाखिल हुआ दिल आसानी से
गिरती मेहर (मोहब्बत) ठहर के पेशानी (माथे) से
मुस्का रही नज़र ये नादानी से
कोई पूछ ले अगर ये दीवानी से
दीवानगी है क्या कुछ तो बता
बेईमानी से मनमानी से
अग्नि हो कर मँगनी हो गई पानी से
बेगानी सी कहानी से
लो चली हो चली सपनों की सुरीली सदा

बेईमानी से, तूने साहिल पे रोका
बना लहरों का झोंका, छू गया
मेरी रूह जहाँ तक गई तू गया
इन रूहों की रूमानी से
अग्नि हो कर मँगनी हो गई पानी से
बेगानी सी कहानी से
लो चली हो चली सपनों की सुरीली सदा.. 
बेईमानी से मनमानी से

हासिल किया दिल आसानी से

बेइमानी से कोई वादा ना करना
जरा रुक के गुजरना साथिया
तेरी हर खामोशी पे मैंने हाँ किया
ख़ुद से मिलूँ, हैरानी से
अग्नि हो कर मँगनी हो गई पानी से
बेगानी सी कहानी से
लो चली हो चली सपनों की सुरीली सदा.. 
बेईमानी से मनमानी से

हासिल किया दिल आसानी से

फिल्म में गीत के दूसरे अंतरे का इस्तेमाल नहीं हुआ है पर आज के ज़माने में कोई गीत रिक्शे पर फिल्माया जाए तो देखना तो बनाता है ना ! गीत में आपको नज़र आएँगे श्वेता त्रिपाठी के साथ जितेंद्र कुमार।



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4 comments:

Swati Gupta on January 11, 2020 said...

प्रेम गीत हर साल सैकड़ों लिखे जाते है, तो गीतकार को चाहिए कि वो कुछ नया लिखे कुछ ऐसा जो श्रोताओं के मन तक पहुंचे। यहां गीत के बोल अच्छे है

Manish Kumar on January 11, 2020 said...

मुझे तो "अग्नि हो कर मँगनी हो गई पानी से" की ताज़गी पसंद आई। :)

Arvind Mishra on January 12, 2020 said...

Behtreen song hai isme koi do ray nahi hai.
Par song ke surwaat mein 2005 mein release hui film "yahan" ka song NAAM ADA LIKHNA" ka feel deta hai.

Manish Kumar on January 12, 2020 said...

अरविंद आपने बिल्कुल सही कहा , एक पंक्ति की धुन उससे मिलती हुई फिर दूसरी ओर रुख ले लेती है। पहली बार सुनते ही ये मुझे भी लगा था। ये भी एक वजह रही इसके और ऊपर नहीं बजने की।

 

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