Monday, January 13, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 20 : घर मोरे परदेसिया Ghar More Pardesiya

वार्षिक संगीतमाला के दो हफ्तों का सफ़र मुझे पहुँचा लाया है अठारहवीं पायदान पर जहाँ है फिल्म कलंक का आप सब का चहेता ये नग्मा जिसका संगीत दिया है प्रीतम ने। संगीतकार प्रीतम पिछले कुछ सालों से लंबे ब्रेक ले रहे हैं। आख़िरी बार उनकी जानदार फिल्म जग्गा जासूस और जब हैरी मेट सेजल  में  उनका संगीत सुनाई पड़ा था जो ढाई साल पहले आई थी। इस साल  कलंक, छिछोरे और The Sky is Pink जैसी फिल्मों  में संगीतकार के रूप में उनका काम सुनने को मिला । 

कलंक भले आशा के अनुरूप नहीं चली पर उसका संगीत  काफी सराहा गया। इस संगीतमाला के प्रथम बीस गीतों में तीन गीत इस फिल्म से हैं और आज जो गीत यहाँ पर बज रहा है वो है घर मोरे परदेसिया। घर मोरे परदेसिया की ये शास्त्रीय बंदिश मुझे प्रीतम द्वारा रचे उनके गीत मेरे ढोलना सुन, मेरे प्यार की धुन... ..की याद दिला देती हैं। उस गीत में भी कमाल की सरगम थी जिसे एम. जी. श्रीकुमार के साथ श्रेया घोषाल ने बड़ी खूबसूरती से निभाया था। कलंक के इस गीत में भी श्रेया घोषाल हैं और उनके साथ हैं वैशाली म्हादे।


श्रेया घोषाल तो ख़ैर कमाल की गायिका हैं ही और इस तरह के शास्त्रीय  गीतों में तो उनका जो स्तर है वो और निखर के सामने आता है। वैशाली को मैंने पहले ज्यादा नहीं सुना और इस गीत के एक छोटे से हिस्से में ही उनकी आवाज़ सुनाई देती है। पुराने वक़्त पर आधारित फिल्मों में संगीत देना संगीतकारों के लिए चुनौती होता है। इन चुनौतियों पर की गयी मेहनत श्रोताओं के लिए विशेष अनुभूति बनकर आती है। प्रीतम के इस गीत में आप पिछली गीतमाला के स्टार नीलाद्रि कुमार का सितार भी सुन सकते हैं और सरोद पर रूपक नौगांवकर को भी । तबले पर अक्षय जाधव का कमाल पूरे गीत में दिखता है। 

ऐसी शास्त्रीय बंदिश वाले गीतों की एक खास संरचना होती है जिसमें गीतकार के लिए उस वक़्त का एक अहसास दिलाना ही मुख्य उद्देश्य होता है। अमिताभ यही ध्यान रखते हुए निर्मोही, सुध बुध, धनुर्धर, निहारना जैसे शब्दों का प्रयोग कर इस गीत की प्रकृति के साथ न्याय करने में सफल हुए हैं।

रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई
जय रघुवंशी अयोध्यापति, राम चन्द्र की जय
सियावर राम चन्द्र की जय, जय रघुवंशी अयोध्यापति
राम चन्द्र की जय, सियावर राम चन्द्र की जय
ता दी या ना धीम, दे रे ता ना दे रे नोम...ता दी या ना धीम,दे रे ता ना दे रे नोम...

रघुवर तेरी राह निहारे, रघुवर तेरी राह निहारे
सातों जन्म से सिया, घर मोरे परदेसिया
आओ पधारो पिया, घर मोरे परदेसिया
मैंने सुध-बुध चैन गवाके, मैंने सुध-बुध चैन गवाके
राम रतन पा लिया, घर मोरे परदेसिया..आओ पधारो पिया
धीम ता धीम ता ताना देरे ना, धीम ता धीम ता ताना देरे ना
धा नी सा मा, सा गा मा धा, नी धा मा गा पा
गा मा पा सा सा, गा मा पा नी नी
गा मा पा नी धा पा मा गा रे गा मा धा पा.... 


ना तो मईया की लोरी, ना ही फागुन की होरी
मोहे कुछ दूसरा ना भाए रे, जबसे नैना ये जाके
एक धनुर्धर से लागे, तबसे बिरहा मोहे सताए रे
दुविधा मेरी सब जग जाने, दुविधा मेरी सब जग जाने
जाने ना निरमोहिया
घर मोरे परदेसिया, आओ पधारो पिया
गई पनघट पर भरण भरण पनिया, दीवानी
गई पनघट पर भरण भरण पनिया
गई पनघट पर भरण भरण पनिया, दीवानी
गई पनघट पर भरण भरण पनिया
नैनो के नैनो के तेरे बान से, मूर्छित हुई रे हिरणनिया
झूम झना नन नन नन, झना नन नन नन

बनी रे बनी मैं तेरी जोगनिया, घर मोरे परदेसिया...आओ पधारो पिया


प्रीतम अब फिल्मों से हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कहने के मूड में हैं पर दिक्कत ये है कि फिल्म उद्योग उन्हें जल्दी छोड़ना नहीं चाहता। अगले साथ ब्रहमास्त्र सहित चार पाँच फिल्मों में आप उनका संगीत सुन पाएँगे।

घर मोरे परदेशिया एक ऐसा गीत है जिसे पर्दे पे देखना भी अपने आप में एक अनुभव है। कत्थक का प्रयोग हिंदी फिल्मी गीतों में होता रहा है। देवदास में माधुरी और ऐश्वर्या द्वारा अभिनीत  डोला रे डोला.. और अब यहाँ माधुरी के साथ आलिया  के नृत्य की भाव भंगिमाएँ वैभवशाली महल की सुंदरता में चार चाँद लगा जाती हैं। तो आइए देखते हैं इस गीत को..



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6 comments:

Anjali Naveen Singh on January 13, 2020 said...

Love this song

Arvind Mishra on January 15, 2020 said...

ये गीत top 10 में होगा ये विश्वास था, पर ये तो top 20 में निकला

Manish Kumar on January 15, 2020 said...

Nice to know Anjali !

Manish Kumar on January 15, 2020 said...

Arvind ऐसे गीत पहले भी बने हैं। बोल व संगीत में मुझे इतनी खासियत नहीं लगी जो इसे प्रथम दस में पहुँचा सके। हालांकि ये गीत बहुत सारे लोगों का पसंदीदा गीत रहा है इस साल का।

Manish on January 15, 2020 said...

प्रीतम की हर साल एक बेहतरीन अल्बम जरूर आती है। इतनी सफलता पर भी अलविदा क्यों कहना चाहते हैं!?

Manish Kumar on January 15, 2020 said...

Manish ढेर सारी फिल्मों के संगीत रचने की ढेर सारी जिम्मेदारियों पिछले सालों में लेने की वज़ह से वो थक से गए हैं। बीच में उनका स्वास्थ भी खराब हो गया था। वो धीरे धीरे अपनी गति से काम करना चाहते हैं जिसकी इजाज़त फिल्म उद्योग उन्हें दे नहीं पाता ! इसीलिए फिल्मों से सेवानिवृति की इच्छा उनके मन में घर कर रही है। स्वतंत्र रूप से संगीत रचने का सपना है अब उनका।

 

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