Friday, December 27, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : इक मलाल है ऐसा Ek Malaal

वार्षिक संगीतमाला में चल रही है उन छः गीतों की बातें जो अंतिम 25 में स्थान बनाने में ज़रा सा के लिए रह गए। कल चिट्ठिये की चर्चा के बाद बारी है फिल्म मलाल के एक गीत की। संजय लीला भंसाली इस फिल्म के निर्माता होने के साथ साथ संगीत निर्देशक भी हैं।

संजय लीला भंसाली के संगीत के साथ  दिक्कत ये है कि कई बार उनके  गानों में संगीत का परिवेश एक सा होता है और उन्हें सुनते वक़्त Deja Vu का अहसास होता है पर दूसरा पक्ष ये भी है कि इसके बावज़ूद उनके गाने सुनने में अच्छे लगते हैं। ऐसे तो महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में रची बसी इस फिल्म के कई गीतों में मराठी तड़का है पर कत्थई कत्थई और इक मलाल विशुद्ध हिंदी गीत हैं। 

इसे गाया है शैल हाडा ने शैल संजय लीला भंसाली की फिल्मों से एक दशक से भी ज्यादा जुड़े हुए हैं। साँवरिया फिल्म का शीर्षक गीत हो या हाल फिलहाल में पद्मावत का खलबली शैल संजय की फिल्मों का अभिन्न हिस्सा रहें हैं। व्यक्तिगत तौर पर मुझे गुज़ारिश का उनका गीत तेरा जिक्र है सबसे पसंद है।





इक मलाल एक बेहद छोटा सा गीत है जिसे प्रशांत इंगोले की गहरे भाव ली हुई शब्द रचना और शैल हाडा की खूबसूरत गायिकी मन में बैठने को मजबूर कर देती है। ज़िंदगी में अचानक अपने प्रिय के चले जाने के बाद हमें अपनी गलतियाँ अपना दोष काटने दौड़ता है। साझी ख्वाहिशें का दुखंद अंत मन में कई सवाल खड़े कर देता है। शायद अगर मैंने ऐसा किया होता तो उसकी ये परिणिति नहीं हुई होती ऐसे ख्यालों या यूँ कहें मलाल बार बार मन को मथते हैं। प्रशांत इन्हीं भावों को गीत में कुछ यूँ प्रकट करते हैं।


इक मलाल है ऐसा

इक मलाल है

इक मलाल है ऐसा

इक मलाल है

बुन रहा है रंजिशों का

है ये जाल कैसा

इक मलाल है ऐसा
इक मलाल है

सोच की दीवारों पे
तारीख लिख के चला है
साँसों की मीनारों पे
ख़्वाहिश रख के चला है
रह गया है गर्दिशों में
ये सवाल कैसा
इक मलाल है ऐसा...




एक छोटी सी फिल्म का ये गाना आपमें से बहुतों के लिए अनसुना ही होगा। तो आइए सुनते हैं इस गीत कोमलाल का ये गीत नवोदित कलाकारों मीज़ान जाफरी और शरमिन पर फिल्माया गया है।


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14 comments:

Arvind Mishra on December 27, 2019 said...

अप्रतिम।
ग़ज़ल की अनुभूति हो रही थी। सही कहा आपने ये गीत अनसुना रहा गया था।

Manish Kumar on December 27, 2019 said...

हाँ, बेहद संवेदनशील गीत है ये।

Smita Jaichandran on December 27, 2019 said...

अरे वाह। यह गीत भी खूबसूरत। मगर अब बात ये है कि आप की सूची में मेरी पसंद के चार गीत आ जाएं तो बड़ी बात😢

Manish Kumar on December 27, 2019 said...

Smita jee आपका टाइम आएगा.. मतलब आपके चुने कुछ गीत भी है मेरी पसंद में। :)

Mantu Kumar on December 28, 2019 said...

संजय लीला भंसाली साब का म्यूजिक अलग है पर एक मेरी शिकायत रहती है कि उनके गाने जल्दी खत्म हो जाते हैं एक या कभी कभार दो अंतरे के बाद ही।

Manish Kumar on December 28, 2019 said...

बिल्कुल अब इसी गीत का एक और अंतरा होता तो सोने पर सुहागा हो जाता।

Kanchan Singh Chouhan on December 28, 2019 said...

ये गीत सुना था ख़ास नहीं लगा था।

Swati Gupta on December 31, 2019 said...

खूबसूरत नज़्म जैसा है ये...
वैसे गाना तो दूर की बात मैंने तो फिल्म का नाम भी पहली बार सुना

Manish Kumar on December 31, 2019 said...

Swati हां वैसा ही माहौल है ! आप साल में कितनी नई फिल्में देखती हैं। छोटे बजट की फिल्में तो कब आती हैं और चली जाती हैं पता भी नहीं लगता।

Swati Gupta on December 31, 2019 said...

जी, नई फिल्मों और नए गानों में हम जैसे लोगों की दिलचस्पी बहुत कम होती है। आपकी संगीतमाला के जरिए अच्छे गाने सुनने को मिल जातें है। इस बार की संगीतमाला का आगाज़ अच्छा है...उम्मीद है अंजाम भी बहुत अच्छा होगा

Manish Kumar on December 31, 2019 said...

Swati वो तो तब जब ग़ज़लों की तरह अपनी गीतों की पसंद भी मिलेगी

Swati Gupta on December 31, 2019 said...

आपकी पसंद पर पूरा भरोसा है मुझे

Prashant Ingole on December 31, 2019 said...

शुक्रिया Manish Kumar to bring it out.. India is a HERD MENTALITY most of the people are chasing songs which have no value and that's why most of the songs made in today's films are like that.. I appreciate you bringing this song up.. It's one of my favorite song too.. Thank you

Manish Kumar on December 31, 2019 said...

Prashant, You are quite talented song writer. I also loved your Man Beqaid hua. In spite of this herd mentality I am still hopeful for future as more and more independent music and alternative platform to TV and Cinema are coming up.

 

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