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रविवार, फ़रवरी 16, 2014

वार्षिक संगीतमाला 2013 पायदान संख्या 7 - सुन रहा है ना तू...कौन हैं अंकित तिवारी ? (Sun Raha hai na Tu. Ankit Tiwari)

वार्षिक संगीतमाला के प्रथम दस के सफ़र को आगे बढ़ाते हुए आज हमारे सामने हैं सातवीं पायदान का गीत जो इस साल चारों तरफ़ इतना बज चुका है कि अब ये गीत किसी परिचय का मुहताज़ नहीं रहा। हाँ ये जरूर है कि इस गीत की सफ़लता के पीछे जिस शख़्स का हाथ है उसके बारे में आप जरूर जानना चाहेंगे। जी हाँ मेरा इशारा है आशिक़ी 2 के गीत सुन रहा है तू के संगीत निर्देशक अंकित तिवारी की ओर।


कानपुर से ताल्लुक रखने वाले अंकित की पारिवारिक पृष्ठभूमि भक्ति संगीत से जुड़ी है। उनके माता पिता भक्ति संगीत के कार्यक्रमों जैसे 'जागरण' और 'माता की चौकी' को एक युगल जोड़ी (राजू सुमन एंड पार्टी ) के रूप में प्रस्तुत करते थे और छोटे से अंकित को भी अपने साथ  ले जाया करते थे। अंकित इसी माहौल में पले बढ़े। स्कूल के दिनों में उन्होंने अपने माता पिता को ये बता दिया था कि उन्हें आगे जाकर संगीत से जुड़ा ही कुछ करना है। पर मुंबई जाने के बाद पहली बड़ी सफलता मिलने में उन्हें छः सालों का लंबा इंतजार करना पड़ा। इसीलिए अंकित कहते हैं कि सफलता व प्रसिद्धि  तो कुछ दिनों की होती है पर उसके लिए व्यक्ति को हमेशा मेहनत करनी पड़ती है।




आशिक़ी 2 का ये गीत अंकित तिवारी की झोली में कैसे गिरा इस प्रश्न का जवाब अंकित कुछ यूँ देते हैं..
"लखनऊ में मेरे एक मित्र रहते है। उन्होंने ही महेश भट्ट से मेरे बारे में बताया। मुझे इस बात की खुशी है कि महेश भट्ट ने मुझे वापस फोन किया और कहा कि अपनी पाँच बेहतरीन संगीत रचना संगीत निर्देशक मोहित सूरी को सुना दो। मैंने वही किया। पियानों पर अपनी पाँचों धुनें तैयार कर ले गया। सबसे पहले मैंने 'सुन रहा है ना तू 'ही सुनाई। ये आशिक़ी के प्रदर्शित होने के एक साल पहले की बात है। उन्होंने मेरे पाँचों गीत सुने और कहा सभी अच्छे हें पर इसमें वो कौन सा फिल्म में इस्तेमाल करेंगे वे ये अभी नहीं बता सकते। पर किसी दूसरे को इन धुनों को देने के पहले तुम मुझे फोन जरूर कर लेना।"

जब ये धुन आशिक़ी 2 के लिए चुनी गई तो अंकित ने गाकर भी इसको सुनाया। महेश भट्ट और मोहित सूरी को उनकी आवाज़ भी जँच गई और इस तरह बतौर गायक भी उन्होंने इस गीत के लिए अपना योगदान दिया। पर अंकित के लिए गायिकी से ज्यादा महत्त्वपूर्ण संगीत निर्देशन है और आगे वो उसी पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

आशिक़ी 2 के इस गीत को लिखा है गीतकार संदीप नाथ ने। आपको याद होगा कि संदीप नाथ द्वारा फिल्म 'साहब बीवी और गैंगस्टर' के लिए लिखा गीत रात मुझे ये कह के चिढ़ाए तारों से भरी मैं और तू अकेली हाय  वार्षिक संगीतमाला 2011 के प्रथम दस गीतों में अपनी जगह बन चुका है। इसी फिल्म के दौरान अंकित तिवारी को उनके साथ बतौर पहली हिंदी फिल्म में काम करने का मौका मिला था। संदीप ने गीत की शब्द रचना युवाओं को ध्यान में रखकर सहज ही रखी है। मुझे इस गीत की सबसे अच्छी पंक्तियाँ दिल को ठिकाने दे, नए बहाने दे ...ख़्वाबों की बारिशों को, मौसम के पैमाने दे लगती हैं।


आशिक़ी 2 के इस गीत के दो वर्जन हैं। अंकित तिवारी ने अपने वर्सन को फिल्म की परिस्थिति के हिसाब से संगीत संयोजन ऐसा रखा है जैसे मंच पर कोई रॉक शो चल रहा है। इसलिए गीत के इंटरल्यूड्स में इलेक्ट्रानिक गिटार और ड्रम्स और जिटार (जो नीलाद्रि कुमार द्वारा ईजाद किया सितार का परिवर्तित रूप है) का प्रचुरता से उपयोग हुआ है। गीत के अंत में श्रोताओं के कोरस को भी इसीलिए डाला गया है। इसमें कोई शक़ नहीं कि अंकित अपनी संगीत रचना से सुनने वालों के मन को द्रवित करते हैं पर कहीं कहीं मुखर संगीत संयोजन के बीच उनकी आवाज़ दब सी जाती है।



अपने करम की कर अदाएँ, यारा ...यारा ...यारा ...
मुझको इरादे दे ..कसमें दे, वादे दे
मेरी दुआओं के इशारों को सहारे दे
दिल को ठिकाने दे, नए बहाने दे
ख़्वाबों की बारिशों को , मौसम के पैमाने दे

अपने करम की कर अदाएँ,  कर दे इधर भी तू निगाहें

सुन रहा है ना .. रो रहा हूँ मैं
सुन रहा है ना तू , क्यूँ रो रहा हूँ मैं

मंजिलें रुसवा हैं, खोया है रास्ता
आए ले जाए , इतनी सी इल्तिज़ा
ये मेरी ज़मानत है, तू मेरी अमानत है हाँ ...
अपने करम की कर अदाएँ, कर दे इधर भी तू निगाहें
सुन रहा है ना तू ....

वक़्त भी ठहरा है, कैसे क्यूँ ये हुआ
काश तू ऐसे आए, जैसे कोई दुआ
तू रूह की राहत है, तू मेरी इबादत है
अपने करम की कर अदाएँ,  कर दे इधर भी तू निगाहें
सुन रहा है ना तू ...




इस गीत की सबसे बड़ी खूबी इसकी मधुरता है जो श्रेया घोषाल के गाए वर्जन में ज्यादा उभर कर आती है। गीत के दूसरे वर्जन की तुलना में यहाँ संगीत संयोजन ज्यादा मुखर नहीं है। अगर आप गीत को ध्यान से सुनेंगे तो पाएँगे गीत के साथ और इंटरल्यूड्स में बजती बाँसुरी को घाटम और सरोद का सुरीला साथ मिला है। अंकित जानते हैं कि ये उनके सफ़र की शुरुआत भर है । इस गीत की सफलता के बाद उनकी आने वाली फिल्मों से अपेक्षाएँ बढ़ गयी हैं। आशा है भविष्य में वे हमारी अपेक्षाओं पर ख़रा उतरेंगे।

मंगलवार, फ़रवरी 21, 2012

वार्षिक संगीतमाला 2011 - पॉयदान संख्या 4 : रात मुझे ये कहकर चिढ़ाए, तारों से भरी मैं तू है अकेली हाए !

दोस्तों, वार्षिक संगीतमाला के इस मुकाम पर अब साल के सरताज गीत से महज़ तीन गीतों का फ़ासला रह गया है। गीतमाला की चौथी पॉयदान पर पेश है एक ऐसा नग्मा जिसके मुखड़े की काव्यात्मकता दिल को छू जाती है। क्या आप यकीन करेंगे कि एक बार सुन कर ही सम्मोहित करने वाले इस गीत के गीतकार ने अपनी पेशेवर ज़िंदगी की शुरुआत 'अपराध पत्रकारिता' से की थी ? जी हाँ, फिल्म 'साहब बीवी और गैंगस्टर' के इस रूमानी नग्मे को लिखा है संदीप नाथ ने।

उत्तरप्रदेश में इलाहाबाद में अपना बचपन और फिर मुरादाबाद और बिजनौर से आगे की पढ़ाई करने वाले संदीप नाथ को कविता करने का चस्का मात्र बारह साल की उम्र से ही लग गया था। मुंबई फिल्म जगत के लिए संदीप नाथ कोई नया नाम नहीं हैं। एक मध्यमवर्गीय बंगाली परिवार से ताल्लुक रखने वाले संदीप जब एक दशक पूर्व  मुंबई पहुँचे तो अपने मित्र की बदौलत उन्हें विज्ञापन के जिंगल को लिखने का मौका मिला। बतौर गीतकार वर्ष 2003 से फिल्म 'भूत' से शुरु हुआ उनका सफ़र 'पेज 3','सरकार','साँवरिया', 'फैशन' और अब 'साहब बीवी और गैंगस्टर' तक जा पहुँचा है। 

संदीप एक गीतकार होने के साथ साथ एक पटकथा लेखक भी हैं। उन्होंने कविताओं के आलावा ग़ज़लें भी लिखी हैं। 'मुझे कुछ भी नाम दो' और 'दर्पण अब भी अंधा है' के नाम से उनकी किताबें प्रकाशित भी हुई हैं। अपराध पत्रकारिता ने उन्हें अपने शुरुआती दिनों में एक आर्थिक अवलंब दिया जिसकी वज़ह से उन्होंने वही फिल्में लीं जिसमें उन्हें अपने काम से समझौता ना करना पड़े। अपने गीतो की रचना के बारे में उनका कहना है

"मुझे फिल्म में निर्देशक द्वारा दी गई परिस्थिति एक चुनौती की तरह लगती है। मैं अपने आप को चरित्रों और घटनाक्रमों के बीच रखता हूँ। उन हालातों को अपनी ज़िदगी के अनुभवों से जोड़ता हूँ और इस तरह से नग्मा हौले हौले साँस लेने लगता है। वैसे भी सृजन स्वतःस्फूर्त होता है। हम चाह कर कुछ बाहर नहीं निकाल सकते।"

फिल्म के इसी गीत को लीजिए।  गीत के मुखड़े में संदीप लिखते हैं

रात मुझे ये कहकर चिढ़ाए
तारों से भरी मैं तू है अकेली हाए

भई वाह! रात का उपालंभ देकर नायक को प्रणय के लिए प्रेरित करने की सोच और उपजे बोल आज के इस शोर शराबे वाले दौर में अद्भुत हैं

वैसे तो फिल्म 'साहब बीवी गैंगस्टर' में पाँच अलग अलग संगीतकारों को मौका मिला है पर इस गीत की धुन बनाई है नवोदित संगीतकार अभिषेक रॉय ने। मुख्यतः गिटार और तबले का प्रयोग करते हुए अभिषेक ने इस चुहल भरे रूमानी नग्मे को मजबूत आधार दिया है। इस गीत की गायिका श्रेया घोषाल के लिए ये साल कमाल का रहा है। मात्र सताइस साल की उम्र में ही श्रेया कई राष्ट्रीय और फिल्मफेयर पुरस्कारों को अपनी झोली में डाल चुकी हैं। इस गीत में भी उनकी आवाज़ की खनक दिल के तारों को झंकृत करने के लिए काफ़ी रही है।

तो आइए सुनते हैं इस गीत को...


रात मुझे ये कहकर चिढ़ाए
तारों से भरी मैं तू है अकेली हाए
कानों से मैं जली जली जाऊँ
आज रुको तो बली जाऊँ

क्या कहूँ, बोलो ना, क्या सुनूँ बोलो ना
रातों की हरकतों को तुम भी समझो ना
बातों की हरकतों को तुम भी समझो ना
शैतानियाँ ये रोज़ दिखाए
ऐसा कुछ करो कि रात लजाए

क्या कहूँ, बोलो ना, क्या सुनूँ बोलो ना
इस दिल की करवटों को तुम भी समझो ना
साँसों की हसरतों को तुम भी समझो ना
बेताबियाँ रात जगाए
ऐसा कुछ करो कि होश उड़ जाए

रात मुझे ये कहकर चिढ़ाए
तारों से भरी मैं तू है अकेली हाए
कह दो इसे ये ना इतराए
कल जो आए तो सर को झुकाए
रात मुझे..रात मुझे..



गीतों के बोलों के गिरते स्तर को संदीप स्वीकारते हैं पर भविष्य के लिए वो नाउम्मीद नहीं हैं। वे मानते हैं कि ऐसे दौर पहले भी आते रहे हैं और इन्हीं के बीच से एक नई धारा निकलेगी जो अच्छे बोलों को वापस लौटा लाएगी। संदीप जी की ये सकरात्मक सोच फलीभूत हो, हम जैसे संगीत प्रेमी तो यही कामना कर सकते हैं।
 

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