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गुरुवार, मार्च 19, 2026

वार्षिक संगीतमाला 2024 सरताज गीत : मैनू विदा करो ...अब विदा करो मेरे यारा

वार्षिक संगीतमाला 2024 को विदा करने का वक़्त आ गया है उस साल के सबसे शानदार गीत के साथ जिसे सुन या देख कर शायद ही किसी शख़्स की आँखें न भीगीं हों। कभी किसी ज़माने में पंजाब के मशहूर कवि शिव कुमार बटालवी ने इसी शीर्षक से एक कविता लिखी थी जिसे गीतकार इरशाद कामिल ने फिल्म अमर सिंह चमकीला में विदाई गीत का मुखड़ा बना लिया और बाकी के अंतरों में जाते हुए व्यक्ति के भावों को ऐसा पकड़ा कि वो हम सबका गीत बन गया।


ऐसा कहा जाता है कि अमर सिंह चमकीला की हत्या इसलिए की गई  क्योंकि उनके गीतों के विषय सामाजिक मान्यताओं और नैतिकता के पैमानों पर खरे नहीं उतरते थे। अतिवादियों ने इसलिए उन्हें और उनकी सह गायिका अमरजोत को इस दुनिया से चलता कर दिया। आख़िर चमकीला का अपराध क्या इतना बड़ा था कि उन्हें ऐसी सजा मिली?

मुझे ऐसा लगता है कि आख़िरी वक़्त आने पर हम सब दिल से बड़े हो जाते हैं। हमारा हृदय उदार हो जाता है। जब जीवन रहा ही नहीं तो उसमें होने वाली ज्यादतियों की शिकायत भी नहीं रह जाती। शारीरिक पीड़ा के इन क्षणों में भी अपने प्रियजनों के सुखद भविष्य की कामना होठों पर चली ही आती है। इरशाद कामिल व्यक्ति की इसी मनोस्थिति का गीत में मार्मिक चित्रण करते हैं। अरिजीत सिंह ने क्या डूब के इस गीत को गाया है जोनिता गांधी के साथ। ये भी कैसा संयोग है कि इस गीत के आने के डेढ़ साल बाद अरिजीत ने बतौर पार्श्व गायक फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया।

वैसे शुरुआत में रहमान का इरादा दिलजीत दोसांझ से इस गीत को गवाने का था जो फिल्म में अमर सिंह चमकीला की भूमिका निभा रहे थे। फिर ये ख़्याल उभरा कि कहानी में जब चमकीला मर चुका तो गाना किसी दूसरे की आवाज़ में गवाना चाहिए और फिर अरिजीत का नाम सामने आया। उनका हिस्सा रिकॉर्ड होने के बाद  लगा कि मृत्यु तो अमनजोत की भी हुई है तो उसके लिए एक महिला स्वर को भी गीत में होना चाहिए और इस तरह इस गीत का एक अंतरा जोनिता को मिला।

संसार को छोड़ने के पल के बारे में हर इंसान कभी न कभी विचार तो करता ही है। पर रहमान, इरशाद कामिल , इम्तियाज़ अली ने अरिजीत के साथ मिलकर इस विषय को गीत में ढाल कर अजर अमर बना दिया है। दशकों बाद भी इस गीत की भावनाएं अलग अलग परिपेक्ष्य में लोगों के दिल को जरूर झिझोड़ती रहेंगी, ऐसा मेरा विश्वास है।

चलते इस गीत के इस रूप में आने का वाक़या भी आपको बताता चलूँ। इस गीत के अपने अस्तित्व में आने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।

"रात के ढाई बज रहे थे। संगीतकार ए आर रहमान अपने मुंबई वाले स्टूडियो में इम्तियाज़ अली और इरशाद कामिल के साथ बैठे थे। अचानक रहमान ने कहा कि स्टूडियो की सारी लाइट बंद कर देते हैं। बत्तियां तो बुझा दी गईं पर उनके स्थान पर मोमबत्तियों और दीयों को जलाया गया। रहमान अपने पियानो पर अपने उंगलियाँ चलने लगे।  मुखड़ा तो पहले ही बन चुका था पर  बाकी अंतरों पर काम अगले दो घंटों में हुआ।"

मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी,अब विदा करो मेरे यारा,

मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी,
मैंने जाना है उस पार

तुम सभी साफ सही, हूँ मटमैला मैं,
तुम सभी पाक मगर पाप का दरिया मैं,
मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी,
अब विदा करो मेरे यार

झूठ भला क्यूँ बोलोगे तुम,
सब सच कहते हो,
मेरी नहीं है दुनिया जिसमें,
तुम सब रहते हो 


साथ तुम्हारे और रहूँ  मैं,
मेरा तो मन था,
सच है यहाँ पे जो भी बुरा था,
मेरे कारण था 

मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी,
अब विदा करो मेरे यार 

मेरे सर पे सारी तोहमत तुम धर देना,
मैं तो मैं हूँ रूह भी मेरी पागल कर देना,
तुम खुश रहना, सब कुछ सहना, मुझको आता है,
टूटे तारे का धरती से कैसा नाता है 

मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी,
अब विदा करो मेरे यारा,
मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी,
मैंने जाना है उस पार 

तुम सभी साफ सही (साफ सही) हूँ मटमैला मैं,
तुम सभी पाक मगर (पाक मगर) पाप का दरिया मैं,
मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी,
अब विदा करो मेरे यार...!!!


 


 

आशा है 2024 का सरताज गीत और पच्चीस गीतों की ये शृंखला आप सब को पसंद आई होगी। जिस तरह से मेरी कार्यालय की व्यस्तता बढ़ रही हैं उसका सीधा असर आपने इस संगीतमाला के लंबे खिंच जाने के तौर पर देखा होगा। मुझे पता नहीं की 2025 की संगीतमाला को आप तक इस रूप में पहुंचा पाऊंगा या नहीं पर पिछले 20-22 सालों से चल रही इस गीतमाला के जो श्रोता और पाठक रहे हैं उनका ढेर सारा आभार!

गुरुवार, जनवरी 08, 2026

वार्षिक संगीतमाला 2024 Top 5 : तू क्या जाने मेरे यार

2024 की मेरी संगीतमाला बेहद धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ी है। इसका एक कारण तो कार्यालय में बढ़ती जिम्मेदारियां हैं। जो लोग मुझे जानते हैं वो ये भी जानते होंगे कि मेरा खाली वक़्त संगीत के अलावा  सैर सपाटे, चिड़ियों और तितलियों की तस्वीरें लेने और उनके बारे में लिखने में लगता है। यही वज़ह है कि 2026 आ गया और मैं अभी तक 2024 की संगीतमाला की आख़िरी कुछ पायदानों में अटका हूं। पाठक गण से मैं अपनी इस मंथर गति के लिए क्षमा प्रार्थी हूं🙏।



खैर धीरे धीरे ही सही मेरी गीतमाला की ये पैसेंजर ट्रेन आ पहुंची है अपनी पांचवी पायदान पर जिस पर फिल्म अमर सिंह चमकीला का गाना वो जो पहली बार सुनते ही मेरा मनपसंद गीत बन गया था वो भी तब जबकि इसे गाया था एक अनजान गायिका ने जिन्हें इस गीत के पहले मैंने सुना ही नहीं था।

जी हां आपने सही पहचाना ये गायिका हैं यशिका सिक्का। यशिका का परिवार संगीत से जुड़ा परिवार नहीं है पर उनके पिता को संगीत सुनने का बड़ा शौक़ था। उन्हें अपनी बेटी की आवाज़ पर इतना भरोसा था कि न केवल उन्होंने यशिका को संगीत की तालीम दिलवाई पर साथ ही संगीत से जुड़े रियलिटी शो में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। वो अलग बात है कि यशिका की आवाज़ की बनावट परंपरागत न होने के कारण उन्हें ज्यादातर नाकामयाबी मिली। यशिका को भी ये बात मन में बैठने लगी कि शायद वो पार्श्व गायिकी के लायक नहीं हैं। पर पिता के विश्वास का कमाल था कि उन्हें जिंगल, कच्चे गीत और स्वतंत्र संगीत करने के प्रस्ताव मिलने लगे।

यशिका सिक्का

करीब एक दशक के संघर्ष के बाद अमर सिंह चमकीला में उन्हें नरम कलेजा गाने के लिए बुलाया गया। हुआ यूं कि रहमान को चमकीला के लिए पंजाबी गायकों की तलाश थी। फिल्म के संगीत को अंतिम रूप देने के पहले तमाम कलाकारों को बुलाकर उनसे ढेर सारे गाने गवाए गए। इन गायकों में यशिका भी एक थीं जिनकी आवाज़ रहमान को बिल्कुल अलग सी लगी। हालांकि नरम कलेजा में उनके हिस्से में बस गीत का छोटा टुकड़ा ही आया। 

इस बात के दस महीने बीतने के बाद अचानक ही उन्हें तू क्या जाने मेरे यार को गाने के लिए एक रात दस बजे बुलाया गया। दो बजे संगीत के जादूगर रहमान आए और उन्होंने 15 मिनट में धुन तैयार कर दी जिसे यशिका ने अगले दस मिनट में गा भी दिया और इस तरह गीत का मूल स्वरूप अस्तित्व में आया। गीत में परिवर्तन अगले कुछ महीने में होते रहे पर यशिका के मन में ये सवाल चलता रहा कि क्या उनकी आवाज़ अंततः फिल्म में रहेगी?

दरअसल इस गीत के लिए भी इम्तियाज़ अली और रहमान श्रेया घोषाल का नाम पहले सोच रहे थे पर जब इम्तियाज़ ने यशिका वाला वर्जन सुना तो वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा कि इसे ही रहने देते हैं।  वैसे भी यशिका की आवाज़ फिल्म के पंजाबी किरदार पर खूब जमी भी है।

यशिका बताती हैं कि इस गीत की सबसे कठिन जगह अंतिम वाले अंतरे में आती है जब सच्चियाँ मोहब्बतां के आगे की कुछ पंक्तियां उन्हें बिना बीच में सांस लिए ही गानी थीं और उन्होंने उसे क्या खूब  निभाया है। गीत के अंत में उनकी गुनगुनाहट को बार बार सुनने का दिल करता है। रिलीज़ होने के बाद बेहद लोकप्रिय हुआ पर दुख की बात ये थी कि यशिका के पिता जिन्होंने उनके संगीत की नींव रखी, ये देखने के लिए  जीवित नहीं रहे।

गीतकार इरशाद कामिल ने इस गीत में एक युवा स्त्री की आसक्तियों, उसकी आकांक्षाओं को भली भांति शब्दों में बांधा है। उनके शब्दों के चुनाव को देखिए तन का ताज भी मन का राज भी,अपना आज भी तुझपे है देना वार। प्रेम में डूबी हुई स्त्री के पूर्ण समर्पण का भाव कितनी स्पष्टता से उभरा है यहां। उसी भाव को आगे और गहरा कर के वे लिखते हैं

जीत लूं ज़माने से मैं जंग करके, तुझ पे दुपट्टे वाला रंग करके,
सूट से अपने मैं लूंगी मिला, रखना तुझे सीने पे अब मैंने

अपने प्रिय को इन पंक्तियों में अपने दिल के पास रखने का क्या नायाब तरीका ढूंढा है यहां नायिका ने!

मुखड़े के पहले ताल वाद्यों के साथ तुम्बी (विजय यमला) और मेंडोलिन (एस एम सुभानी) का रिदम मन को लुभाता है जिसे पराग छाबड़ा ने अरेंज किया है। पंजाबी लोक संगीत का स्वाद इन्हीं वाद्यों की वज़ह से गीत में उभर कर आया है। वहीं मुखड़े के बाद प्रतीक श्रीवास्तव का बजाया सरोद ध्यान खींचता है। 

तू क्या जाने मेरे यार, हाय
तू क्या जाने मेरे यार
छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ,
छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ
नैना चोर से, इक दिन जोर से,
करना है तुझको प्यार,
हाय......  नैना चोर से इक दिन जोर से,
करना है तुझको प्यार 
तू क्या जाने मेरे यार, हाय.... तू क्या जाने मेरे यार 


तन का ताज भी मन का राज भी,
अपना आज भी तुझपे है देना वार,
तू क्या जाने मेरे यार, हाय.... तू क्या जाने मेरी जान

सच्चियाँ मोहब्बतां बुलंद करके,रखना पिटारी में तू बंद करके
रुसना भी हंसना भी नाल तेरे, सबसे छुपा रखना अंग संग मैंने
हाय आय आय आए 
जीत लूं ज़माने से मैं जंग करके, तुझ पे दुपट्टे वाला रंग करके,
सूट से अपने मैं लूंगी मिला, रखना तुझे सीने पे अब मैंने
हाय आय आय आए। .. 

छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ,
छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ,
तू क्या जाने मेरे यार, तू क्या जाने मेरे यार 

हो संग ना छोड़ दे इश्क़ निचोड़ दे,
बजने दे तन के तार,
हाय संग ना छोड़ दे इश्क़ निचोड़ दे,
बजने दे तन के तार 
तू क्या जाने मेरे यार, हाय
तू क्या जाने मेरी जान 

तो आइए सुनते हैं यशिका की आवाज़ में पांचवीं पायदान का ये गीत

मंगलवार, अप्रैल 09, 2024

वार्षिक संगीतमाला 2023 : मुक्ति दो मुक्ति दो, माटी से माटी को..

कुछ गीत ऐसे होते हैं जिनके बारे में अलग से कुछ कहने को दिल नहीं करता क्यूँकि उन्हें सुनकर मन में एक गहरी शांति और शून्यता सी आ जाती है। 


पोन्नियिन सेल्वन 2 का ये गीत मुक्ति दो ऐसा ही एक गीत है । फर्ज कीजिए आपने अपने जीवन में जो भी करने को सोचा हो सब पूरा हो जाए। आपके रहने का ध्येय ही खत्म हो जाए तो फिर आप इस नश्वर शरीर से मुक्ति की कामना ही तो करेंगे। गुलज़ार लिखते हैं

मुक्ति दो मुक्ति दो, माटी से माटी को
मुक्ति दो मुक्ति दो, माटी से माटी को

मिट्टी से निकल कर मिट्टी में मिलने की ये जीवन यात्रा तो तभी शुरू हो जाती है जब हम इस संसार में आते हैं। अंतिम अरण्य में निर्मल वर्मा की लिखी वो पंक्तियां याद आ जाती हैं जिसमें एक किरदार कहता है..
आपको लगता है सब कुछ नॉर्मल है और यह सबसे बड़ी छलना है... क्योंकि सच बात यह है कि नॉर्मल कुछ भी नहीं होता... पैदा होने के बाद के क्षण से ही मनुष्य उस अवस्था से दूर होता जाता है, जिसे हम नॉर्मल कहते हैं..  नॉर्मल होना देह की आकांक्षा है, असलियत नहीं। देह  का अंतिम संदेश सिर्फ मृत्यु के सामने खुलता है जिसे वह बिल्ली की तरह जबड़े में दबाकर शून्य में अंतर्ध्यान हो जाती है।
वस्त्र से शरीर को, शरीर से आत्मा को
वस्त्र से शरीर को, शरीर से आत्मा को
मुक्ति दो मुक्ति दो माटी से माटी को
मुक्ति दो मुक्ति दो
 
रोशनी को रोशनी में, समा जाने दो
रोशनी को रोशनी में, समा जाने दो
सूर्य से ही आई थी, सूर्य ही में जाने दो
सूर्य से ही आई थी, सूर्य ही में जाने दो

नाममात्र के संगीत के बावज़ूद ए आर रहमान की बनाई ये धुन नवोदित गायिका पूजा तिवारी की सुरीली आवाज़ में दिल में गहरे पैठ कर जाती है। पूजा ने इससे पहले भी रहमान की फिल्मों में चंद नग्मे गाए हैं पर शास्त्रीय संगीत में निपुण लखनऊ की इस गायिका के शुरुआती कैरियर का ये निसंदेह एक अहम नग्मा होगा जिसको लोग सालों साल सुनेंगे। 

पूजा तिवारी

भातखंडे संगीत विद्यापीठ लखनऊ और प्राचीन संगीत महाविद्यालय चंडीगढ़ से संगीत में दो बार विशारद करने वाली पूजा के सांगीतिक जीवन में नया मोड़ तब आया जब उन्होंने चेन्नई की KM Conservatory से आडियो इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरु की। यहीं वो नामी संगीतकार ए आर रहमान के संपर्क में आईं। पूजा ने अपनी गायिकी से उन्हें इतना प्रभावित किया कि जिनके संगीत निर्देशन में एक गीत गाना भी कई गायकों का सपना होता है, उन्हीं रहमान ने उनसे अपनी फिल्मों के तीन गीत गवाए।

इस संगीतमाला की शुरुवात में मैंने पिप्पा के झुमाने वाले गीत मैं परवाना आपको सुनवाया था। उस गीत के महिला स्वरों में मुख्य आवाज़ पूजा तिवारी की ही थी। मतलब ये कि इतने अलग प्रकृति के गीतों को भी वो सहजता से निभा ले जाती हैं। भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए पिता और संगीतप्रेमी माँ की ये बिटिया अपने इस कौशल को यूँ ही और माँजे ऐसी आशा है।



जैसा कि मैं आपको पहले भी बता चुका हूँ प्राचीन तमिल साहित्य में पोन्नी,कावेरी नदी को कहा जाता था। इसी नदी के आसपास चोल साम्राज्य फला फूला।  पोन्नियिन सेल्वन फिल्म इसी नाम के ऐतिहासिक उपन्यास पर आधारित है।  चोल शासक अपने आप को सूर्य का प्रतिनिधि मानते थे इसीलिए गीत में सूर्य से आने और उसी में विलीन होने की बात कही गई है।


वार्षिक संगीतमाला 2023 में मेरी पसंद के पच्चीस गीत
  1. वो तेरे मेरे इश्क़ का
  2. तुम क्या मिले
  3. पल ये सुलझे सुलझे उलझें हैं क्यूँ
  4. कि देखो ना बादल..नहीं जी नहीं
  5. आ जा रे आ बरखा रे
  6. बोलो भी बोलो ना
  7. रुआँ रुआँ खिलने लगी है ज़मीं
  8. नौका डूबी रे
  9. मुक्ति दो मुक्ति दो माटी से माटी को
  10. कल रात आया मेरे घर एक चोर
  11. वे कमलेया
  12. उड़े उड़नखटोले नयनों के तेरे
  13. पहले भी मैं तुमसे मिला हूँ
  14. कुछ देर के लिए रह जाओ ना
  15. आधा तेरा इश्क़ आधा मेरा..सतरंगा
  16. बाबूजी भोले भाले
  17. तू है तो मुझे और क्या चाहिए
  18. कैसी कहानी ज़िंदगी?
  19. तेरे वास्ते फ़लक से मैं चाँद लाऊँगा
  20. ओ माही ओ माही
  21. ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते
  22. मैं परवाना तेरा नाम बताना
  23. चल उड़ चल सुगना गउवाँ के ओर
  24. दिल झूम झूम जाए
  25. कि रब्बा जाणदा

    रविवार, जनवरी 21, 2024

    वार्षिक संगीतमाला 2023 रुआँ रुआँ खिलने लगी है जमीं ...

    वार्षिक संगीतमाला के गीत इस साल किसी क्रम में नहीं आ रहे। पिछले साल के अपने सारे पसंदीदा गीतों को सुनवाने के बाद सारी पायदानों का खुलासा होगा सरताज गीत के साथ। पिप्पा का झूमता झुमाता गीत तो मैंने पिछली पोस्ट में सुनवाया ही था। आशा है गीत के साथ साथ ईशान खट्टर के थिरकने का अंदाज आपको भाया होगा।

    आज जिस गीत को मैं अपनी इस संगीतमाला में पेश कर रहा हूँ, वो बिल्कुल अलग प्रकृति का होते हुए दो बातों में पिछले गीत से मेल खाता है। पहली तो ये कि पिप्पा के गीत की तरह इस गीत को भी आप रेट्रो की श्रेणी में डाल सकते हैं और दूसरे ये कि इस गीत की संगीत रचना भी ए आर रहमान के हाथों हुई है। ये गीत है रुआँ रुआँ जो पिछले साल अप्रैल में रिलीज़ फिल्म पोन्नियिन सेल्वन 2 का अहम हिस्सा था। अगर आप इस फिल्म के शीर्षक के अर्थ को लेकर सशंकित हों तो ये बता दूँ इसका सीधा सा अर्थ है पोन्नी का बेटा। अब पोन्नी कौन है? प्राचीन तमिल साहित्य में पोन्नी,कावेरी नदी को कहा जाता था। इसी नदी के आसपास चोल साम्राज्य फला फूला।  पोन्नियिन सेल्वन फिल्म इसी नाम के ऐतिहासिक उपन्यास पर आधारित है।

     

    फिल्म के इस रोमांटिक गीत को लिखा गुलज़ार साहब ने। गुलज़ार, मणिरत्मन और रहमान जब भी एक साथ हुए हैं फिल्म संगीत ने नई ऊँचाइयों को छुआ है। साथिया, दिल से व गुरु के कितने ही गाने आज तक हमारी आपकी जुबां पर चढ़े हुए हैं। 

    रहमान रुआँ रुआँ के बारे में कहते हैं कि उन्होंने जिन आठ दस धुनों को तैयार कर के रखा था उसमें मणिरत्नम जी ने सबसे उलझी हुई धुन चुनीं। गीत की शुरुआत पहले रुआँ से न होकर आगे से थी। जब गुलज़ार से उस शब्द से गीत शुरु करने को कहा गया तो उन्होंने बाद की पंक्तियाँ बदल दीं।  गुलज़ार ने बड़ा प्यारा मुखड़ा रचा है इस गीत का। मंद मंद नीम बंद अधखुली वाली पंक्ति सुन कर दिल मुलायमियत से भर उठता है। बाकी गुलज़ार हैं तो इस रूमानी गीत में फूल, शबनम, जुगनू बादल और चाँद की चमक तो रहेगी ही।


    रुआँ रुआँ खिलने लगी है जमीं ओ
    तेरी ही तो खुशबू है न कहीं ओ
    मंद मंद, नीम बंद, नैनों से कहीं ओ
    आके बांके तूने कहीं झाँका तो नहीं

     
    सज़ा मिली है प्यार की, क़ैदी हूँ बहार की
    बंदी बनके ही रहूँ, मर्ज़ी है मेरे यार की
     
    रुआँ रुआँ खिलने लगी है..तूने कहीं झाँका तो नहीं
     
    फूलों पे शबनम, हौले से उतरे
    जुगनू जलाएं, रौशनी के कतरे
    जाऊँ जो चमन में, पंछी पुकारे
    आजा रे कोयल, आरती उतारे

    चाँद ढूंढते हैं आसमां खोल के,
    भूल गए बादल दिन है कि रात है
    आँखों में ख़्वाब ही ख़्वाब भरे हैं
    नींद नहीं आती…

    रुआँ रुआँ खिलने लगी है जमीं ओ...


    रहमान ने इस गीत के लिए  बतौर गायिका शिल्पा राव का चुनाव किया। शिल्पा की आवाज़ की बुनावट एकदम अलग सी तो है ही और वो बेहद हुनरमंद गायिका भी हैं। कुछ साल पहले कलंक और इस साल पठान में गाए उनके गीतों ने सफलता के नए कीर्तिमान बनाए हैं। उनके गाए पिछले गीतों की तुलना में ये काफी कठिन गीत था क्यूँकि इसकी धुन मुखड़े, पहले अंतरे से दूसरे अंतरे तक पहुँचते पहुँचते कई मोड़ तय करती है जिसे निभाना इतना आसान नहीं है। रहमान का गीत गाना किसी भी गायक या गायिका के लिए गौरव की बात होती है और शिल्पा ने इसे चुनौती कै रूप में स्वीकार किया।

    रहमान के गीतों में वॉयलिन और बाँसुरी का बखूबी इस्तेमाल होता है। यहाँ कुछ अंशों में इनके अलावा वीणा की हल्की सी खनक भी है। सज़ा मिली है वाले हिस्सा सुनकर साठ के दशक के गीतों की याद आ जाती है। तो आइए सुनते हैं ये गीत जिसे हिंदी के साथ साथ तमिल, तेलगु, मलयालम और कन्नड़ में भी रचा गया है।


    वार्षिक संगीतमाला 2023 में मेरी पसंद के पच्चीस गीत
    1. वो तेरे मेरे इश्क़ का
    2. तुम क्या मिले
    3. पल ये सुलझे सुलझे उलझें हैं क्यूँ
    4. कि देखो ना बादल..नहीं जी नहीं
    5. आ जा रे आ बरखा रे
    6. बोलो भी बोलो ना
    7. रुआँ रुआँ खिलने लगी है ज़मीं
    8. नौका डूबी रे
    9. मुक्ति दो मुक्ति दो माटी से माटी को
    10. कल रात आया मेरे घर एक चोर
    11. वे कमलेया
    12. उड़े उड़नखटोले नयनों के तेरे
    13. पहले भी मैं तुमसे मिला हूँ
    14. कुछ देर के लिए रह जाओ ना
    15. आधा तेरा इश्क़ आधा मेरा..सतरंगा
    16. बाबूजी भोले भाले
    17. तू है तो मुझे और क्या चाहिए
    18. कैसी कहानी ज़िंदगी?
    19. तेरे वास्ते फ़लक से मैं चाँद लाऊँगा
    20. ओ माही ओ माही
    21. ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते
    22. मैं परवाना तेरा नाम बताना
    23. चल उड़ चल सुगना गउवाँ के ओर
    24. दिल झूम झूम जाए
    25. कि रब्बा जाणदा

      गुरुवार, जनवरी 18, 2024

      वार्षिक संगीतमाला 2023 : मैं परवाना तेरा नाम बताना

      पिछले साल से एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमालाओं का सिलसिला रुका रुका सा है। इसका मुख्य कारण कोविड के बाद से बहुतेरी फिल्मों का OTT प्लेटफार्म पर रिलीज़ होना है। कई बार इन फिल्मों के गाने ढूँढने से भी नहीं मिलते। पहले मैं साल में प्रदर्शित हर फिल्म के गीतों को सुनकर अपनी संगीतमाला को अंतिम रूप देता था पर अब ये दावा करना मुश्किल है। पर पिछले कुछ दिनों से एक शाम मेरे नाम के कई पुराने पाठकों ने गुजारिश करी है कि ये सिलसिला फिर से शुरु किया जाए। अब उनके प्रेम को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल था इसलिए लगा कि एक कोशिश तो करनी ही चाहिए।

      तो चलिए आरंभ करते हैं इस साल की संगीतमाला को तड़कते फड़कते गीत से जिसे लिखा शैली ने,धुन बनाई ए आर रहमान ने और आवाज़ दी अरिजीत सिंह ने।


      भारत बांग्लादेश युद्ध पर बनी फिल्म पिप्पा के इस गीत की खासियत है अरिजीत सिंह ने किस तरह अपनी आवाज़ और गाने के तरीके में बदलाव किया। ये गीत उनकी बहुआयामी गायिकी का एक जीता जाता उदहारण है। इस गीत में अरिजीत का बखूबी साथ दिया है सहगायिका पूजा तिवारी और निशा शेट्टी ने। ट्रम्पेट,गिटार, एकार्डियन और ताल वाद्यों से रहमान की सजी सँवरी धुन आपको थिरकने पर मजबूर कर देगी। एक बार सुनिये तो सही..

      इस गीत द्वारा इशान खट्टर ने भी दिखा दिया है कि वे डांस करने में किसी से कम नहीं हैं। पूरा गीत तो ब्लॉग पर ही सुन पाएँगे पर यहाँ देखिए उसकी एक झलक

      मैं परवाना.. तेरा नाम बताना 
      तेरे प्यार में जलना जलाना 
      यूँ नज़रें उठाना यूँ नज़रें गिराना 
      तू शम्मा मैं हूँ मस्ताना 
      दिल पे वार वार वार ऐसा किया 
      Arrow आर पार यार कर दिया 
      चढ़ी हुई है गरारी अड़ी हुई है 
      मैं फौजी आज टिप्सी हो गया


      वार्षिक संगीतमाला 2023 में मेरी पसंद के पच्चीस गीत
      1. वो तेरे मेरे इश्क़ का
      2. तुम क्या मिले
      3. पल ये सुलझे सुलझे उलझें हैं क्यूँ
      4. कि देखो ना बादल..नहीं जी नहीं
      5. आ जा रे आ बरखा रे
      6. बोलो भी बोलो ना
      7. रुआँ रुआँ खिलने लगी है ज़मीं
      8. नौका डूबी रे
      9. मुक्ति दो मुक्ति दो माटी से माटी को
      10. कल रात आया मेरे घर एक चोर
      11. वे कमलेया
      12. उड़े उड़नखटोले नयनों के तेरे
      13. पहले भी मैं तुमसे मिला हूँ
      14. कुछ देर के लिए रह जाओ ना
      15. आधा तेरा इश्क़ आधा मेरा..सतरंगा
      16. बाबूजी भोले भाले
      17. तू है तो मुझे और क्या चाहिए
      18. कैसी कहानी ज़िंदगी?
      19. तेरे वास्ते फ़लक से मैं चाँद लाऊँगा
      20. ओ माही ओ माही
      21. ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते
      22. मैं परवाना तेरा नाम बताना
      23. चल उड़ चल सुगना गउवाँ के ओर
      24. दिल झूम झूम जाए
      25. कि रब्बा जाणदा

        गुरुवार, मार्च 24, 2022

        वार्षिक संगीतमाला Top Songs of 2021 : तेरे रंग रंगा मन महकेगा तन दहकेगा Tere Rang

        वार्षिक संगीतमाला के आखिरी मोड़ तक पहुँचने में बस दो गीतों का सफ़र तय करना रह गया है। अब आज के गीत के बारे में बस इतना ही कहना चाहूँगा कि जिन्हें भी भारतीय शास्त्रीय संगीत से थोड़ा भी प्रेम होगा उन्हें संगीतमाला में शामिल इस अनूठे गीत के मोहपाश में बँधने में ज़रा भी देर नहीं लगेगी। ये गीत है ए आर रहमान के संगीत निर्देशन में बनी फिल्म अतरंगी रे का। मुझे पूरा यकीन है कि ये गीत आपमें से बहुतों ने नहीं सुना होगा पर गुणवत्ता की दृष्टि से मुझे तो ये फिल्म अंतरंगी रे ही नहीं बल्कि पिछले साल के सर्वश्रेष्ठ गीतों में एक लगा।


        यूँ तो पूरी फिल्म में रहमान साहब का संगीत सराहने योग्य है पर इस गीत को जिस तरह से उन्होंने विकसित किया है तमाम उतार चढ़ावों के साथ, वो ढेर सी तारीफ़ के काबिल है। इतनी बढ़िया धुन को अगर अच्छे बोल नहीं मिलते तो सोने पे सुहागा होते होते रह जाता। लेकिर इरशाद कामिल ने प्रेम के रंगों में रँगे इस अर्ध शास्त्रीय गीत को बड़े प्यारे बोलों से सजाया है। गीत में बात है वैसे प्रेम की जैसा राधा से कृष्ण ने किया हो। गीत का आग़ाज़ द्रुत गति के बोलों से  इरशाद कामिल कुछ यूँ करते हैं

        तक तड़क भड़क, दिल धड़क धड़क गया, अटक अटक ना माना
        लट गयी रे उलझ गयी, कैसे कोई हट गया, मन से लिपट अनजाना
        वो नील अंग सा रूप रंग, लिए सघन समाधि प्रेम भंग
        चढ़े अंग अंग फिर मन मृदंग, और तन पतंग, मैं संग संग..और कान्हा

        गीत को गाया है कर्नाटक संगीत के सिद्धस्त गायक हरिचरण शेषाद्री ने नये ज़माने की स्वर कोकिला श्रेया घोषाल के साथ। चेन्नई के एक सांगीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले हरिचरण दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए नया नाम नहीं हैं पर हिंदी फिल्मों में संभवतः ये उनका पहला गीत है। 

        हरिचरण शेषाद्री श्रेया घोषाल के साथ

        रहमान साहब ने हिंदी फिल्मों में ना जाने कितने हुनरमंद कलाकारों को मौका देकर उनके कैरियर को उभारा है। साधना सरगम, नरेश अय्यर, बेनी दयाल, चित्रा, श्रीनिवास, विजय प्रकाश, अभय जोधपुरकार, चिन्मयी श्रीपदा, शाशा तिरुपति... ये फेरहिस्त दिनोंदिन लंबी होती ही जाती है। इसीलिए सारे नवोदित गायकों का एक सपना होता है कि वो रहमान के संगीत निर्देशन में कभी गा सकें। हरिचरण इसी जमात के एक और सदस्य बन गए हैं।

        हरिचरण भी रहमान के कन्सर्ट में बराबर शिरकत करते रहे हैं। जिस आसानी से इस बहते हुए गीत को उन्होंने श्रेया घोषाल के साथ निभाया है वो मन को सहज ही आनंद से भर देता है।

        मुरली की ये धुन सुन राधिके, मुरली की ये धुन सुन राधिके, मुरली की ये धुन सुन राधिके

        धुन साँस साँस में बुन के, धुन सांस सांस में बुन के
        कर दे प्रेम का, प्रीत का, , मोह का शगुन

        मुरली की ये धुन सुन राधिके...

        हो आना जो आके कभी, फिर जाना जाना नहीं
        जाना हो तूने अगर, तो आना आना नहीं
        तेरे रंग रंगा, तेरे रंग रंगा
        मन महकेगा तन दहकेगा

        तुमसे तुमको पाना, तन मन तुम..तन मन तुम
        तन से मन को जाना..उलझन गुम...उलझन गुम
        तुमसे तुमको पाना तन मन तुम
        जिया रे नैना, चुपके चुपके हारे
        मन गुमसुम, मन गुमसुम

        डोरी टूटे ना ना ना, बांधी नैनो ने जो संग तेरे
        देखे मैंने तो, सब रंग तेरे सब रंग तेरे
        फीके ना हो छूटे ना ये रंग

        तेरे रंग रंगा.. शगुन

        इस अर्ध शास्त्रीय गीत में क्या नहीं है तानें, आलाप, कोरस, मन को सहलाते शब्द, कमाल का गायन, ताल वाद्यों की थाप के बीच चलते गीत के अंत में बाँसुरी की स्वरलहरी और इन सब के ऊपर रहमान की इठलाती धुन जो तेरे रंग रंगा, तेरे रंग रंगा मन महकेगा तन दहकेगा.. तक आते आते दिल को प्रेम रस से सराबोर कर डालती है। 


        निर्देशक आनंद राय रहमान के इस जादुई संगीत से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस म्यूजिकल के अंत में A film by A R Rahman का कैप्शन दे डाला। आनंद तो यहाँ तक कहते हैं कि मेरा बस चले तो मैं रहमान के सारे गानों को सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए रख दूँ। वहीं श्रेया कहती हैं कि ऊपरवाला रहमान के हाथों संगीत का सृजन करता है। स्वयम् ए आर रहमान इस फिल्म की संगीत की सफलता का श्रेय इसकी पटकथा को देते हुए कहते हैं कि 

        जिस फिल्म की कथा देश के एक कोने से दूसरे कोने तक जा पहुँचती है तो बदलती जगहों और किरदारों के अनुसार संगीत को भी अलग अलग करवट लेनी पड़ती है। मैं शुक्रगुजार हूँ ऐसी कहानियों को जो संगीत में कुछ नया करने का अवसर हमें दे पाती हैं।

        वार्षिक संगीतमाला 2021 में अब तक

        बुधवार, फ़रवरी 02, 2022

        वार्षिक संगीतमाला Top Songs of 2021 जैसे रेत ज़रा सी Rait Zara Si

        राँझणा और तनु वेड्स मनु जैसी कामयाब फिल्में बनाने वाले आनंद राय जब एक बार फिर धनुष को अपनी नयी फिल्म अतरंगी रे में सारा और अक्षय कुमार के साथ ले कर आए तो आशा बँधी कि फिल्म कुछ वैसा ही जादू दोहरा पाएगी। धनुष के शानदार अभिनय के बावज़ूद अपनी लचर पटकथा की वज़ह से फिल्म तो कोई कमाल दिखला नहीं सकी जैसी आशा थी अलबत्ता संगीतकार ए आर रहमान एलबम में अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह सफल हुए। यही वज़ह है कि इस फिल्म के तीन गीत पिछले साल के शानदार गीतों की इस संगीतमाला में अपनी जगह बना पाए हैं।



        जहाँ तक रेत ज़रा सी का सवाल है तो यहाँ क्या मेलोडी रची है रहमान साहब ने। अगर आप दूर से भी इस गीत को सुनें तो सहज ही धुन की मधुरता आपको इसे गुनगुनाने पर मजबूर कर देगी। ज्यादातर धुनें पहले बनती हैं शब्द बाद में लिखे जाते हैं। जब भी कोई धुन बनती है तो संगीतकार या तो कच्चे बोलों से काम चलाता है या फिर अनर्गल बोलों का सहारा लेता है जिसे अंग्रेजी में Gibberish कहा जाता है। नेट पर मुझे इस गीत का ऐसा ही आडियो मिला जिसमें रहमान इस धुन को कुछ ऐसे ही बोलों से विकसित कर रहे हैं। तो सुनिए आप भी 

           

        पर आकाश में सिर्फ चाँद हो तो क्या रात अपनी सारी खूबसूरती बिखेर पाएगी? नहीं ना उसे तो ढेर सारे तारों की टिमटिमाहट भी चाहिए। शब्दों की यही जगमगाहट गीतकार इरशाद कामिल लाए हैं और उस चमक को अपनी गायिकी से हम तक पहुँचाया है अरिजीत सिंह और शाशा तिरुपति की युगल जोड़ी ने।

        इस गीत के मुखड़े को सुनकर  बचपन के वो दिन आ जाते हैं  जब रेत के टीले पर चढ़ते उतरते मस्ती करते हम बच्चे अपनी हथेलियों में मुट्ठी भर भर कर रेत का घर बनाने कर लिए ले जाया करते थे पर हर कदम के साथ रेत उँगलियों के कोनों से गिरती जाती और लक्ष्य तक पहुँचते हुए ज़रा सी ही रह जाती थी। 

        इस फिल्म में धनुष और सारा का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही है जो रेत की तरह दिल रूपी हथेली से कभी उड़ता तो कभी फिसलता चला जाता है। इन भावों को कितनी सरलता से कामिल कुछ यूँ व्यक्त करते हैं ...रोज़ मोहब्बत पढ़ता है, दिल ये तुमसे जुड़ता है...हवाओं में यूँ उड़ता है, हो जैसे रेत ज़रा सी....हाथ में तेरी खुशबू है, खुशबू से दिल बहला है...ये हाथों से यूँ फिसला है, हो जैसे रेत ज़रा सी


        होना तेरा होना, पाना तुमको पाना
        जीना है ये माना, पल भर में सदियां
        है सदियों में, जीना है ये माना
        हाथ में तेरी खुशबू है, खुशबू से दिल बहला है
        ये हाथों से यूँ फिसला है, हो जैसे रेत ज़रा सी
        रोज़ मोहब्बत पढ़ता है, दिल ये तुमसे जुड़ता है
        हवाओं में यूँ उड़ता है, हो जैसे रेत ज़रा सी

        ये हलचल, दिल की ये हलचल
        बोले आज आस पास तू मेरे
        बिखरा हूँ मैं तो, कुछ पल हवा में
        तेरे भरोसे को थामे
        चलना भी है बदलना भी है
        तुझमें ही तो ढलना भी है

        दिल थोड़ा जज़्बाती है, भर जाता है बातों से
        ये फिर छलके यूँ आँखों से, हो जैसे रेत जरा सी
        हाथ में तेरी खुशबू है, सच पुछो तो अब यूँ है
        तू चेहरे पे मेरे ठहरा, हो जैसे रेत ज़रा सी


        अरिजीत तो दर्द भरे प्रेम गीतों के बेताज बादशाह हैं ही शाशा तिरुपति ने भी दिल थोड़ा जज़्बाती है.. गाते हुए उनका बखूबी साथ दिया है। शाशा का अरिजीत के साथ गाया ये तीसरा युगल गीत हैं और वो मानती हैं कि अरिजीत के साथ उनकी आवाज़ गानों में फबती है। रहमान के बारे में उनका कहना है कि वो गीत बनाते समय ही मन में एक प्रारूप बना लेते हैं हैं कि ये गीत किससे गवाना है? रहमान ने इस गीत में ताल वाद्यों के साथ बाँसुरी और सरोद का इस्तेमाल किया है। करीम कमलाकर की बजाई बाँसुरी गीत सुनने के बाद में भी मन में बजती रहती है। रहमान का गीत है तो अंतरों के बीच कोरस का होना तो स्वाभाविक ही है।

        तो आइए सुनें इनकी आवाज़ में ये मीठा सा नग्मा।

         

        वार्षिक संगीतमाला 2021 में अब तक

        अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत किसी  क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी। 

        बुधवार, जनवरी 26, 2022

        वार्षिक संगीतमाला 2021 Top 15 छोटी सी चिरैया उड़के चली किस गाँव Chhoti Si Chiraiya

        वार्षिक संगीतमाला में आज का गीत फिल्म मिमी से। फिल्म का संगीत एक बार फिर ए आर रहमान ने दिया था। इस फिल्म में कई गीत हैं। खासकर डांस नंबर पसंद करने वाले गीत परम सुंदरी पर कई बार झूम चुके होंगे। पर 2021 के 15 उल्लेखनीय गीतों की मेरी सूची में इस फिल्म का वो गाना शामिल हो रहा है जिसमें आवाज़ है कैलाश खेर की और शब्द अमिताभ भट्टाचार्य के।


        पिछले साल सरोगेसी जैसे विषय पर बनी ये फिल्म काफी सराही गयी थी। जिस बच्चे को आप अपने गर्भ में नौ महीने तक पालते हैं उससे एक भावानात्मक लगाव हो जाना स्वाभाविक सा है खासकर तब जब जन्म के बाद भी उसका कुछ सालों तक लालन पालन आपने किया हो। सच्ची बात तो ये है कि शिशु के लिए तो माँ वही है जिसने उसे पाला पोसा हो। उसे क्या पता खून या गर्भ के रिश्ते के बारे में। संसार में आने के बाद जहाँ से ममता की छाँव मिली उसी को उसने माँ का सच्चा रूप मान लिया। 

        नायिका मिमी की आपबीती भी कुछ ऐसी ही है। मिमी ने पैसे लेकर गर्भ धारण किया पर बच्चे के जन्म के पहले ही उसे उसके वास्तविक माता पिता ने त्याग दिया और फिर सालों बाद जब उनकी मति फिरी तो मिमी और उसके परिवार के लिए उस बच्चे को छोड़ना असहनीय हो उठा। 

        परिवार की इसी पीड़ा को अमिताभ भट्टाचार्य ने इस गीत में अपने शब्द दिए हैं। गीतों के बोल और रहमान द्वारा दिया संगीत एक लोकगीत सा माहौल रचता है। कैलाश खेर की धारदार आवाज़ इस दुख को और गहरा कर देती है। कैलाश एक कमाल के गायक हैं। विगत कुछ वर्षों से निजी जीवन में अपने आचार व्यवहार की वज़ह से कई विवादों से घिरे रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रुहानी आवाज़ श्रोताओं को पिछले एक दो सालों में कम सुनने को मिली है। 

        अमिताभ वैसे गीतकारों में हैं जिन्हें साल दर साल अपने गीतों का स्तर बनाए रखा है और उनकी लेखनी फिल्म की कहानी के अनुरूप गीत के मूड को अपने बोलों से ढालने में सफल रही है। इसी गीत में देखिए कितने प्यारे बोल लिखे हैं उन्होंने ...

        छोटी सी चिरैया छोटी सी चिरैया 
        उड़के चली किस गाँव 
        रह गया दाना रह गया पानी 
        सूनी भई अमवा की छाँव 
        मुनिया मोरी सूनी भई अमवा की छाँव 
        छोटी सी चिरैया ... गाँव 

        अजब निराली मोह की माया, समझे समझ नहीं आए 
        अंगना से तोरी चहक तो जाए, तोहरी महक नहीं जाए 
        नैन समंदर सात भरे पर , भरे ना करेजवा के घाव 
        मुनिया मोरी भरे ना करेजवा के घाव 
        छोटी सी चिरैया छोटी सी चिरैया ..

        दे विदाई में तुझे क्या कीमती समान 
        दे जा निंदिया रैन की सुबहों की ले मुस्कान 
        भरके अपनी चोंच में ले जा हमरे प्राण आ 
        छोटी सी चिरैया ...की छाँव

         
         
        रहमान ने संगीत संयोजन में मुखड़े और पहले अंतरे के बीच विश्व मोहन भट्ट द्वारा बजाई मोहन वीणा पर सबसे पहले ध्यान जाता है। मुखड़े और दूसरे अंतरे में वीणा के साथ सारंगी का छोटा सा टुकड़ा भी आपको सुनने को मिलेगा। कैलाश खैर की बुलंद आवाज़ के साथ वैसे भी ज्यादा साज़ों की आवश्यकता नहीं होती। बस संगत में घटम, तबले व हारमोनियम का धीमा मधुर स्वर कानों को सहलाता चलता है। पर  ये सब  सुनने के लिए आपको गीत का ऑडियो सुनना  होगा। वीडियो वर्जन में गीत का पहला अंतरा नहीं है।

         

        वार्षिक संगीतमाला 2021 में अब तक

        अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत नीचे से ऊपर के क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी। 

        सोमवार, जनवरी 24, 2022

        वार्षिक संगीतमाला 2021 Top 15 हाय चकाचक चकाचक हूँ मैं Chaka Chak

        गीतकारों के लिए हर साल एक चुनौती रहती है कि कोई ऐसा शब्द गीत के मुखड़े के इर्द गिर्द बुनें जिसे सुनते ही लोगों की उत्सुकता उस गीत के प्रति बढ़ जाए। ए आर रहमान के संगीत निर्देशन में बनी फिल्म अतरंगी रे में ये काम किया चका चक वाले गीत ने जो आज पिछले साल के 15 शानदार गीतों की इस शृंखला में आज शामिल हो रहा है। इसे लिखा इरशाद कामिल ने। रिलीज़ होने के साथ कामिल का ये गीत सारा अली खाँ के लटकों झटकों और श्रेया घोषाल की गायिकी की बदौलत बड़ी आसानी से लोकप्रिय होता चला गया। 


        वैसे साफ सुंदर व्यवस्थित किये हुए किसी भी अहाते और कमरे के लिए ये कहना कि भई तुमने तो आज पूरा घर चकाचक कर रखा है पर किसी लड़की के साथ विशेषण के रूप में इस लफ़्ज़ के इस्तेमाल का श्रेय तो कामिल साहब को मिलेगा ही।

        शादी के समय में संगीत के कार्यक्रमों में गाना नाचना होता ही रहता है। पहले ज़माने में लोकगीत गाए जाते थे और उसकी भाषा भी बेबाक ही हुआ करती थी। मौका ऐसा रहता था कि ऐसे हँसी मजाक की छूट थी और आज भी है। फर्क इतना है कि आजकल लोक गीत की जगह फिल्मी गानों ने ले ली है। कोई अचरज नहीं कि इस गीत पर भी आप युवाओं को अगली शादी में नाचता गाता देखें।

        इरशाद कामिल के इस गीत के माध्यम से नायिका अपनी चाहत का खुला इज़हार कर रही है, बिना किसी संकोच के अपनी शारीरिक और भावनात्मक इच्छाओं, खूबियों और कमियों को बताते हुए ये साबित कर देना चाह रही है कि नायक के लिए वो कितना सही चुनाव रहती।

        अब इरशाद तो जो भी कहना चाह रहे हों मेरा ध्यान पहली बार पलँग टूटने से ज्यादा तपती दुपहरी, लड़की गिलहरी सी, पटना की चाट हो 16 स्वाद, माटी में मेरे प्यार की खाद जैसी मज़ेदार पंक्तियों पर पहले गया। बाकी रहमान साहब ने नादस्वरम और बाकी ताल वाद्यों से दक्षिण भारतीय शादी का ऐसा समां बाँधा है कि मन गीत के माहौल में रमता चला जाता है। श्रेया घोषाल की खनकती आवाज़ तो लुभाती ही है पर जिस मस्ती, उर्जा और उत्साह के साथ उन्होंने इस गीत को निभाया है वो काबिलेतारीफ़ है।


        वैसे कोई पटना वाला बताएगा कि सोलह स्वादों वाली चाट वहाँ कहाँ नसीब होती है? ☺

        वार्षिक संगीतमाला 2021 में अब तक

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