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रविवार, नवंबर 16, 2025

वार्षिक संगीतमाला 2024 : Top 10 किसी रोज़ बरस जल थल कर दे

संगीत नहीं बल्कि राजनीतिक कारणों से मैथिली ठाकुर आजकल एक बेहद चर्चित नाम हो गया है। बिहार के चुनाव में उन्होंने इतनी कम उम्र में लड़ने का निश्चय किया और पिछले हफ्ते अपने चुनाव क्षेत्र से विजयी भी हुईं।  बहरहाल  पिछले तीन चार सालों  से उन्होंने बड़ी लगन से अपने आप को मिथिला सहित तमाम अन्य बोलियों में लिखे गए लोक गीतों की अग्रणी गायिका के रूप में स्थापित किया है । राजनीति में उनके पदार्पण से संगीतप्रेमियों को पहली चिंता ये हुई की क्या वे अपनी गायिकी को मांजने के लिए पूरा वक़्त दे पाएंगी? ख़ैर इस प्रश्न का जवाब तो आने  वाले समय देगा पर आज तो मैंने उनका ज़िक्र इसलिए किया क्यूंकि अजय देवगन और तब्बू द्वारा अभिनीत फिल्म औरों  में कहाँ दम था  के लिए गाया उनका गीत मेरी वार्षिक संगीतमाला  के दस बेहतरीन गीतों में शामिल है। 



बिहार के मधुबनी शहर से ताल्लुक रखने वाली मैथिली को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा उनके पिता रमेश ठाकुर से मिली। उनके दोनों भाई भी संगीत से जुड़े हैं और उनके साथ ही एक तिकड़ी के रूप में फेसबुक और यू ट्यूब पर अपनी कला का जौहर दिखलाते रहे हैं।  मैथिली की लोकप्रियता में सोशल मीडिया के इन मंचों का विशेष योगदान है।  
मैथिली ने अपने नाम को सार्थक करते हुए पहल मिथिला में गाए जाने वाले  लोकगीतों से की पर लोगों की फरमाइश पर वो अन्य बोलियों के लोकगीत भी गाने लगीं जो उन्हें सम्पूर्ण भारत और विदेशों में भी एक समर्पित श्रोता वर्ग दिलवा गया।  



वैसे तो मैथिली ने ये निर्णय लिया था की वे लोकगीतों को ही अपना पूरा समय देके भारत की इस सांस्कृतिक विरासत का प्रचार प्रसार करेंगी। फ़िल्मी गीतों को सामान्यतः वे अपनी आवाज़ नहीं देतीं।  शायद इसकी एक और वज़ह संभवतः शुरुआती दिनों में रियलिटी शो में मिला रिजेक्शन भी रहा हो। पर जब ऑस्कर विजेता एम एम कीरवानी के संगीत निर्देशन में उन्हें मनोज मुन्तशिर का लिखा ये गीत गाने को मिला तो वो इतने अच्छे लिखे और  संगीतबद्ध गीत को गाने से मना  नहीं कर पाईं। 

एम॰ एम॰ कीरावनी और मनोज मुंतशिर की जोड़ी जब जब साथ आयी है इन दोनों ने मिलकर कुछ अद्भुत रचा है। याद कीजिए वर्ष 2013 में आई फिल्म  स्पेशल 26 का वो गीत कौन मेरा,  मेरा क्या तू लागे क्यूँ  तो बांधे मन से मन के धागे जो उस साल की संगीतमाला में शिखर के  तीन गीतों में शामिल हुआ था या फिर दो साल बाद फिल्म बेबी में इस जोड़ी ने एक और बड़ा प्यारा गीत दिया जिसके बोल थे मैं तुझसे प्यार नहीं करती जिसमें मनोज ने लिखा 

वो अलमारी कपड़ो वाली लावारिस हो जाती है
ये पहनूँ या वो पहनूँ
ये उलझन भी खो जाती है
मुझे ये भी याद नही आता
रंग  कौन से मुझको प्यारे हैं
मेरे शौक, पसंद मेरी
बिन तेरे सब बंजारे हैं

इस गीत के लिए भी मनोज की शब्द रचना कमाल की है।  वियोग के संताप को कितनी खूबी से इन शब्दों में पकड़ा है गीतकार ने  तन में तेरी छुअन तलाशूं, मन में तेरी छाप पिया, भाप के जैसे पल उड़ जाएं, प्रीत को है ये श्राप पिया। कीरावनी साहब की धुन का उतर चढाव किसी भी गायिका के लिए कठिन साबित हो सकता था पर मैथिली ने इतनी कम उम्र में  भी उसे ठीक ठाक ही निभाया है। वैसे मेरी इच्छा है की सुनिधि चौहान की आवाज़ में भी कभी इस गीत को सुनने का अवसर मिले। 
मनोज, नीरज व एम एम कीरावनी


आदित्य देव ने हारमोनियम और सारंगी का मुखड़े के पहले और अंतरों के बीच शानदार इस्तेमाल किया है जो गीत में तैरती उदासी और बेचैनी की प्रतिध्वनि करता है।  साथ में तबले और तार वाद्यों की संगत तो है ही। सारंगी पर दिलशाद खान और हारमोनियम पर खुद आदित्य देव ने बखूबी कमान संभाली है  इनके बजाए हिस्सों को बार बार सुनने  का दिल करता है।  

तो आइये सुनते हैं ये संवेदनशील नग्मा मैथिली ठाकुर की आवाज़ में 
 
किसी रोज़, किसी रोज़, किसी रोज़, किसी रोज़
किसी रोज़ बरस जल थल कर दे, ना और सताओ साहिब जी
मैं युगों युगों की तृष्णा हूं, तू मेरी घटा हो साहिब जी
किसी रोज़, किसी रोज़ बरस जल थल कर दे
ना और सताओ साहिब जी...

पत्थर जग में कांच के लम्हे, कैसे सहेजूं समझ न आए
तेरे मेरे बीच में जो है, ज्ञानी जग ये जान न पाए
तन में तेरी छुअन तलाशूं, मन में तेरी छाप पिया
भाप के जैसे पल उड़ जाएं, प्रीत को है ये श्राप पिया
कैसे रोकूं जल अंजुरी में, 
भेद बताओ साहिब जी...

किसी रोज़, किसी रोज़ बरस जल थल कर दे
ना और सताओ...साहिब जी...

मंदिर पूजे, दरगाहों में जाके चढाई भेंट पिया जी
माथे से ये बिरह की रेखा कोई ना पाया भेद पिया जी
तू ही तो पहली प्रीत है मेरी तू ही तो अंतिम आस मेरी
कोई बहाना ढूँढ के आ जा टूट ना जाए साँस मेरी
दिल का कोई दोष नहीं है, दिल ना दुखाओ साहिब जी

किसी रोज़, किसी रोज़ बरस जल थल कर दे
ना और सताओ...साहिब जी..


बुधवार, जनवरी 09, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान # 17 बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन हाथ तोरा जब छूटा Bahut Dukha Man

वार्षिक संगीतमाला का अगला गीत जरा हट के है। कई बार हम सब संगीतप्रेमियों की शिकायत होती है कि आजकल का नया संगीत तेज शोर वाले डांस नंबर या एक जैसे लगने वाले रूमानी गीतों से भरा पड़ा है। साल भर के सौ से ज्यादा फिल्मों के संगीत को सुनते हुए ये शिकायत गलत नहीं लगती लेकिन ये भी जानना जरूरी है कि ऐसा आखिर क्यूँ है? अच्छे और अलग पहचान बनाने वालों गीतों के लिए ठोस पटकथाओं का होना आवश्यक है जो संगीतकारों और गीतकारों को कहानी और उसके परिवेश के हिसाब से नई नई चुनौतियाँ पेश कर सकें पर होता ये है कि ज्यादातर एलबमों में रोमांटिक, रैप, आइटम नंबर मसाले की तरह मिलाए जाते हैं। नतीजा है कि ऍसे एलबमों का ज़ायका कुछ दिनों तक होठों पर रहकर ऐसा उड़ता है कि फिर दोबारा नहीं लौटता। हालांकि कुछ निर्माता निर्देशक आज भी ऐसे हैं जो लीक से हटकर चलते हैं। संगीत उनकी फिल्मों के लिए फिलर नहीं बल्कि कहानी का हिस्सा होता है। अनुराग कश्यप ऐसे ही एक निर्माता हैं जिनकी फिल्म का संगीत कहानी को आगे बढ़ाता है। यही वजह है कि हिचकी की तरह ही मुक्केबाज इस साल के एलबमों में नयी हवा के झोंके की तरह उभरा है।

ये भी एक सुखद संयोग है कि हिचकी और दास देव के आजाद कर की तरह ही मुक्केबाज का संगीत एक नवोदित महिला संगीतकार ने रचा है। ये संगीतकार हैं रचिता अरोड़ा जो जसलीन व अनुपमा राग की तरह ही एक गायिका भी हैं। फर्क ये है कि जहाँ जसलीन खुद से संगीत सीख कर आगे बढ़ी हैं वहीं अनुपमा व रचिता ने बकायदा शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रखी है। दिल्ली में पली बढ़ी रचिता ने संगीत निर्देशन का काम वहाँ मंचित होने वाले नाटकों में संगीत देकर शुरु किया। मुंबई में पृथ्वी थियेटर में एक नाटक की रिहर्सल के दौरान उनकी मुलाकात मकरंद देशपांडे से हुई। उनका काम देखकर मकरंद ने उन्हें अनुराग कश्यप से मिलने को कहा। रचिता अनुराग से बतौर गायिका मिलने गयी थीं पर वहाँ से लौटीं फिल्म के लिए संगीतकार का काम ले के। अनुराग ने सबसे पहले सुनील जोगी की डेढ़ दशक पुरानी कविता मुश्किल है अपना मेल प्रिये रचिता से संगीतबद्ध करवाई। हास्य का पुट लिए इस गीत के आलावा मुक्केबाज में लोक संगीत का तड़का भी है और सत्ता के खिलाफ स्वर देता गीत भी। 

जब मैं इस संगीतमाला के लिए गीतों का चयन कर रहा था तो सबसे पहले मेरा ध्यान इस फिल्म के गीत छिपकली पर अटका। दोहरे चरित्र वाले लोगों पर ऐसी व्यंग्यात्मक धार वाले गीत हाल फिलहाल में कम ही बने हैं। वैसे इस फिल्म का सबसे मधुर गीत मुझे बहुत दुखा मन लगा जिसे  खुद रचिता ने आदित्य देव के साथ मिलकर गाया है। 

छिपकली और बहुत दुखा मन दोनों गीतों को ही लिखा है हुसैन हैदरी ने। चार्टेड एकाउटेंट और फिर मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले हैदरी को कविता का शौक़ कॉलेज के दिनों से ही था। अपनी पढ़ाई पूरी कर के वो कोलकाता की एक कंपनी का वित्त विभाग सँभाल रहे थे। उन्हें ऐसा लगा कि  कविता कहने और पढ़ने का शौक़ तो मुंबई जा कर ही पूरा हो सकता हैं क्यूँकि वहाँ खुले मंच पर तब तक कविताएँ पढ़ने का चलन शुरु हो गया था। साथ ही वो फिल्मी गीतों के लेखन में भी हाथ आज़माना चाहते थे। हैदरी को लगा कि गर मन में इच्छा है तो जोखिम अभी ही लेना पड़ेगा। 2015  में उन्होंने नौकरी छोड़ दी ये सोच कर कि अगर पाँच सालों में मुंबई में पैर जम गया तो ठीक नहीं तो वे वापस लौट आएँगे। इसी बीच उनकी कविता "हिंदुस्तानी मुसलमान" इंटरनेट पर काफी सराही गयी। गुड़गाँव और करीब करीब सिंगल के कुछ गीतों को लिखने के बाद उन्हें मुक्केबाज में मौका मिला और इस फिल्म में लिखे उनके तीनों गीतों को काफी सराहा गया है।

रचिता अरोड़ा व हुसैन हैदरी
साँझ का घोर अँधेरा मोहे
रात की याद दिलावे
रात जो सिर पर आवे लागे
लाख बरस कट जावे

आस का दरपन कजलाया रे
लागे मोहे झूठा
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

चिट्ठी जाए ना ऊ देस
जो देस गए मोरे सजना
हवा के पर में बाँध के भेजे
हम सन्देस का गहना

बिरहा ने पतझड़ बन के
पत्ता-पत्ता लूटा
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

धूप पड़ी जो बदन पे मोरे
अगन-सी ताप लगावे
छाँव में थम के पानी पिए तो
पानी में जहर मिलावे

तन की पीड़ तो मिट गई मोरी
मन का बैर न टूटा
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

मोरे हाथ में तोरे हाथ की
छुवन पड़ी थी बिखरी
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

बहुद दुखा मन एक विरह गीत है जो कि राग पूरिया धनश्री पर आधारित है। ये सांयकालीन राग अक्सर उदासी के रंगो को स्वरलहरी देने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। रचिता अरोड़ा ने इसीलिए शायद इस विरह गीत में इस राग का प्रयोग किया है। हुसैन हैदरी ने विरह की पीड़ा को जिन शब्दों में चित्रित किया है वो एक कविता सरीखा ही लगता है। आस का दरपन कजलाया रे..लागे मोहे झूठा, बिरहा ने पतझड़ बन के...पत्ता-पत्ता लूटा, मोरे हाथ में तोरे हाथ की...छुवन पड़ी थी बिखरी जैसे सटीक काव्यांश दिल की टीस को और गहरा कर देते हैं। हुसैन हैदरी के इन कमाल के शब्दों को रचिता की मीठी आवाज़ सहलाती हुई निकल जाती है। आदित्य देव ने भी अपनी पंक्तियाँ बखूबी निभाई हैं। रचिता की धुन ऐसी नहीं है कि एक ही बार में आपका ध्यान खींचे। ये गीत धीरे धीरे मन में घर बनाने वाला गीत है। इसलिए जब भी इसे सुनें फुर्सत से सुनें..

 


वार्षिक संगीतमाला 2018  
1. मेरे होना आहिस्ता आहिस्ता 
2जब तक जहां में सुबह शाम है तब तक मेरे नाम तू
3.  ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
4.  आज से तेरी, सारी गलियाँ मेरी हो गयी
5.  मनवा रुआँसा, बेकल हवा सा 
6.  तेरा चाव लागा जैसे कोई घाव लागा
7.  नीलाद्रि कुमार की अद्भुत संगीत रचना हाफिज़ हाफिज़ 
8.  एक दिल है, एक जान है 
9 . मुड़ के ना देखो दिलबरो
10. पानियों सा... जब कुमार ने रचा हिंदी का नया व्याकरण !
11 . तू ही अहम, तू ही वहम
12. पहली बार है जी, पहली बार है जी
13. सरफिरी सी बात है तेरी
14. तेरे नाम की कोई धड़क है ना
15. तेरा यार हूँ मैं
16. मैं अपने ही मन का हौसला हूँ..है सोया जहां, पर मैं जगा हूँ 
17. बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन हाथ तोरा जब छूटा
18. खोल दे ना मुझे आजाद कर
19. ओ मेरी लैला लैला ख़्वाब तू है पहला
20. मैनू इश्क़ तेरा लै डूबा  
21. जिया में मोरे पिया समाए 
24. वो हवा हो गए देखते देखते
25.  इतनी सुहानी बना हो ना पुरानी तेरी दास्तां

शुक्रवार, नवंबर 04, 2016

पहिले पहिल हम कइलीं, छठी मइया व्रत तोहार : शारदा सिन्हा का गाया मधुर छठ गीत Pahele Pahil Hum Kaili

चार दिन चलने वाले छठ पर्व का शुभांरभ हो चुका है और छठ के आगमन के पहले ही छठ मइया के पारम्परिक गीतों से बिहार, झारखंड, नेपाल के तराई और पूर्वी उत्तरप्रदेश के इलाके गुंजायमान हैं। बचपन में पटना में रहते हुए इस पर्व को अपने चारों ओर मनते हुए एक बाहरी दर्शक के तौर पर देखा है। सारे पर्व त्योहारों में मुझे यही एक पर्व ऐसा दिखता है जिसमें आस्था की पवित्रता किसी दिखावे से ज्यादा प्रगाढ़ता से दिखाई देती है।
कामकाजी बहू की भूमिका में Kristine Zedek
छठ के गीत बिहार के सबसे लोकप्रिय लोकगीतों में अपना स्थान रखते हैं। एक ही मूल धुन में गाए जाने वाले आस्था के इन सरल गीतों में एक करुणा है, एक मिठास है, जिससे हर कोई जुड़ता चला जाता है। यूँ तो छठ के गीतों को अनुराधा पोडवाल से लेकर कल्पना पोटवारी और देवी जैसे कलाकारों ने अपनी आवाज़ दी है पर छठ गीतों में जान फूँकने में लोक गायिका व पद्मश्री से सम्मानित शारदा सिन्हा का अभूतपूर्व योगदान है।
शारदा सिन्हा Sharda Sinha
उत्तर बिहार में जन्मी 63 वर्षीय शारदा सिन्हा ने संगीत की आरंभिक शिक्षा रघु झा, सीताराम हरि डांडेकर और पन्ना देवी से ली थी। शारदा जी की आवाज़ में जो ठसक है वो लोक गीतों के सोंधेपन को सहज ही श्रोताओं के करीब ले आती है। बिहार की आंचलिक भाषाओं भोजपुरी, मगही व मैथिली तीनों में उनके कई एलबम बाजार में आते रहे हैं। हिंदी फिल्मों में भी उनकी आवाज़ का इस्तेमाल किया गया है और कई बार ये गीत खासे लोकप्रिय भी रहे हैं। मैंने प्यार किया काकहे तोसे सजना, ये तोहरी सजनियापग पग लिये जाऊँ, तोहरी बलइयाँहम आपके हैं कौन का बाबुल जो तुमने सिखाया, जो तुमसे पाया और हाल फिलहाल में गैंग आफ वासीपुर 2  में तार बिजली से पतले हमारे पिया ने खूब धूम मचाई थी। पर छठ के मौके पर आज मैं आपसे उनके उस छठ गीत की बात करने जा रहा हूँ जो पिछले हफ्ते यू ट्यूब पर रिलीज़ किया गया है और खूब पसंद भी किया जा रहा है।

पर इससे पहले कि इस गीत की बात करूँ इस पर्व की जटिलताओं से आपका परिचय करा दूँ। सूर्य की अराधना में चार दिन चलने वाले इस पर्व की शुरुआत दीपावली के ठीक चार दिन बाद से होती है। पर्व का पहला दिन नहाए खाए कहलाता है यानि इस दिन व्रती नहा धो और पूजा कर चावल और लौकी मिश्रित चना दाल का भोजन करता है। पर्व के दौरान शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है। व्रती बाकी लोगों से अलग सोता है। अगली शाम रत रोटी व गुड़ की खीर के भोजन से टूटता है और इसे खरना कहा जाता है। इसे मिट्टी की चूल्हे और आम की लकड़ी में पकाया जाता है। इसके बाद का निर्जला व्रत 36 घंटे का होता है। दीपावली के छठे दिन यानि इस त्योहार के तीसरे दिन डूबते हुए सूरज को अर्घ्य दिया जाता है और फिर अगली सुबह उगते हुए सूर्य को। इस अर्घ्य के बाद ही व्रती अपना व्रत तोड़ पाता है।
छठ के दौरान पूजा की तैयारी 
त्योहार में नारियल, केले के घौद, ईख  का चढ़ावा चढ़ता है, इसलिए छठ के हर गीत में आप इसका जिक्र जरूर पाएँगे। ये व्रत इतना कठिन है कि इसे लगातार कर पाना कामकाजी महिला तो छोड़िए घर में रहने वाली महिला के लिए आसान नहीं है। पर पूरा परिवार घुल मिलकर ये पर्व मनाता है तो व्रतियों में वो शक्ति आ ही जाती है। एकल परिवारों में छठ मनाने की घटती परंपरा को ध्यान में रखते हुए शारदा जी ने एक खूबसूरत गीत रचा है जिसके बोल हैं हृदय मोहन झा के और संगीत है आदित्य देव  का। गीत के बोल कुछ यूँ हैं

पहिले पहिल हम कइलीं , छठी मइया व्रत तोहार
करिह क्षमा छठी मइया, भूल-चूक गलती हमार
गोदी के बलकवा के दीह, छठी मइया ममता-दुलार
पिया के सनेहिया बनइह, मइया
दीह सुख-सार.
नारियल-केरवा घउदवा, साजल नदिया किनार.
सुनिहा अरज छठी मइया, बढ़े कुल-परिवार.
घाट सजेवली मनोहर, मइया तोरा भगती अपार.
लिहिना अरगिया हे मइया, दीहीं आशीष हजार.
पहिले पहिल हम
कइलीं , छठी मइया व्रत तोहार
करिहा क्षमा छठी मइया, भूल-चूक गलती हमार


वैसे तो भोजपुरी हिंदी से काफी मिलती जुलती है पर जो लोग इस भाषा से परिचित नहीं है उन्हें इस गीत के मायने बता देता हूँ

छठी मैया मैं पहली बार आपकी उपासना में व्रत कर रही हूँ। अगर कोई भूल हो जाए तो मुझे माफ कर देना। ये जो मेरी गोद में नन्हा-मुन्हा खेल रहा है, माँ तुम उसे अपनी ममता देना। माँ तुम्हारे आशीर्वाद से पति का मेरे प्रति स्नेह और मेरे जीवन की खुशियाँ बनी रहें। तुम्हारी आराधना के लिए नारियल व केले के घौद को सूप में सुंदरता से सजाकर मैं नदी घाट किनारे आ चुकी हूँ। मेर विनती सुनना मैया और मेरे घर परिवार को फलने फूलने का आशीष देना। (यहाँ छठी मैया से तात्पर्य सूर्य की पत्नी उषा से है।)

वीडियो में एक जगह घर की बहू इस बात को कहती है कि घर में जो छठ मनाने की परंपरा है उसे मैं खत्म नहीं होने दूँगी। अच्छा होता कि पति पत्नी दोनों मिलकर यही बात कहते क्यूँकि छठ एक ऐसा पर्व है जिसे पुरुष भी करते हैं। आख़िर परंपरा तो पूरे परिवार के लिए हैं ना,  तो उसके निर्वहन की जिम्मेवारी भी पूरे परिवार की है।



इस वीडियो में नज़र आए हैं भोजपुरी फिल्मों के नायक क्रांति प्रकाश झा और दक्षिण भारतीय फिल्मों और टीवी पर नज़र आने वाली अभिनेत्री क्रिस्टीन जेडक। संगीतकार आदित्य देव का गीत में बाँसुरी का प्रयोग मन को सोहता है। तो बताइए कैसा लगा आपको ये छठ गीत ?
 

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स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

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