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बुधवार, जुलाई 16, 2025

वार्षिक संगीतमाला 2024 :Top 25 ओ सजनी रे..

कुछ व्यक्तिगत कारणों से इस संगीतमाला पर एक लंबा ब्रेक लग गया था। आप सबको मैं 18 वीं पायदान के गीत वल्लो वल्लो पर छोड़ गया था। तो आज बारी है संगीतमाला की अगली सीढ़ी पर बैठे गीत की चर्चा करने की। ये गीत है ओ सजनी रे... जिसे पिछले साल लोगों द्वारा खूब पसंद किया गया। आपको याद होगा कि गत साल आई फिल्मों में लापता लेडीज़ ने खासी धूम मचाई थी। मुझे भी ये फिल्म औसत से बेहतर ही लगी थी। कलाकारों का अभिनय जानदार था और बतौर दीपक, स्पर्श श्रीवास्तव का काम तो मुझे खासा प्रभावित कर गया था। फिल्म की सफलता में इसके संगीत की भी अहम भागीदारी थी। 


इस फिल्म का संगीत निर्देशन किया था राम संपत ने। आमिर के साथ राम की सोहबत तलाश और सत्यमेव जयते के ज़माने की है। राम संपत इस गठजोड़ के बारे में अपने साक्षात्कारों में एक वाकया सुनाते हैं। जब उन्हें इस प्रोजेक्ट में लिया गया तो दुर्भाग्यवश मलेरिया के शिकार होकर वे अस्पताल में भर्ती हो गए। आमिर दुविधा में थे कि उन्हें रखें या नहीं। उन्होंने राम को फोन किया कि क्या आप इस प्रोजेक्ट को कर पाएँगे और तब राम ने उत्तर दिया कि I was born to do this project। फिर क्या था आमिर ने कहा कि अगर ऐसा है तो ये प्रोजेक्ट आप ही करेंगे। अस्पताल में रहते हुए ही राम संपत ने इस टीवी शो में प्रयुक्त गीत ओ री चिरैया की धुन तैयार की जो आज तक उसी चाव से सुनी जाती है।


राम संपत को हमेशा से ये मुगालता रहा है कि उन्हें अक्सर धीर गंभीर विषयों वाली फिल्मों को करने के मौके मिले। एक दो गीतों को छोड़ दें तो उनकी झोली में इतने दशकों के करियर में कोई रोमांटिक गीत शायद ही आया हो। इसीलिए जब ओ सजनी रे बनाने की बारी आई तो उन्होंने सोचा कि इसे बेहतर रूप कैसे दिया जाए। आख़िर दीपक का फूल से शादी के तुरंत बाद बिछड़ने के प्रसंग पर ही पूरी कहानी आधारित थी। दीपक के हृदय में फूल के यूँ गुम हो जाने की पीड़ा इस गाने में झलकानी थी। इस गीत के लिए सबसे बड़ा जोखिम लिया उन्होंने इंस्टाग्राम पर खड़ी बोली और ब्रज में लिखने वाले प्रशांत पांडे का गीतकार के रूप में चुनाव कर के जिनसे वो गीत के प्रीमियर के वक़्त पहली बार मिले। प्रशांत के इस गीत के लिए लिखे सहज बोल लोगों को बहुत जमे। मुझे इस गीत की वो पंक्ति सबसेअच्छी लगी जिसमें उन्होंने लिखा....कैसे घनेरे बदरा घिरे...तेरी कमी की बारिश लिए 🙂। वैसे पूरा गीत कुछ यूं है।

ओ सजनी रे
कैसे कटे दिन रात
कैसे हो तुझसे बात
तेरी याद सतावे रे
ओ सजनी रे...तेरी याद तेरी याद सतावे रे
कैसे घनेरे बदरा घिरे
तेरी कमी की बारिश के लिए
सैलाब जो मेरे सीने में है
कोई बताये ये कैसे थमे
तेरे बिना अब कैसे जियें
ओ सजनी रे...तेरी याद तेरी याद सतावे रे

गाँव की पृष्ठभूमि में बनी इस पटकथा के लिए विशुद्ध देशी या लोकसंगीत के बजाए राम संपत और निर्माता किरण राव ने देशी के साथ पश्चिमी वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल कर गीत को एक ताज़ी शक़्ल देने की कोशिश की गई जो आज के दौर के नायक नायिका के अनुरूप लगे। मूलतः गिटार पर आधारित इस धुन में कोरा, उदू और गोनी जैसे विदेशी वाद्य यंत्रों का भी इस्तेमाल हुआ है।

सबसे पहले ये गीत राम संपत ने अपनी आवाज़ में रिकार्ड किया था और आमिर ने उसे OK भी कर दिया था पर राम ये गीत अरिजीत से गवाना चाहते थे। जब दो तीन हफ्तों के बाद अरिजीत ने रिकार्डिग भेजी तो राम ये देख के चकित हो गए कि अरिजीत ने उसी गीत को दस अलग अलग तरह से गाया था। 

अगर आप सोच रहे हों कि ये कैसे संभव है तो उनके कुछ वर्सन के नाम सुन लीजिए ...ये किरण मैम की ब्रीफिंग के हिसाब से, ये आमिर सर के सुझाव पर , ये आपके जैसा, ये स्माइल के और ये बिना स्माइल के....😁। 

राम संपत कहते हैं गायिकी के प्रति अरिजीत की ये प्रतिबद्धता उन्हें वो मुकाम दिला पाई है जिसके वो सच्चे हक़दार हैं। खैर राम ने जो वर्सन चुना वो बेहद सराहा गया तो एक बार और आप भी सुन लीजिए ये पूरा गीत


रविवार, जनवरी 13, 2008

वार्षिक संगीतमाला २००७ : पायदान १९ - लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ ..

वार्षिक संगीतमाला की १९ वीं पायदान आपके सामने हैं मित्रों। और इस पर गाना वो जो अस्सी के दशक में बनी फिल्म 'गोलमाल' फिल्म ले उस अंतरे की याद दिलाता है जिसे गुलज़ार साहब ने लिखा था । याद है ना 'आने वाला पल जाने वाला है' का ये जुमला

इक बार वक़्त से लमहा गिरा कहीं
वहाँ दास्तां मिली लमहा कहीं नहीं


जीवन के इस सफ़र में कितने ही सुनहरे लमहों से हम दो चार होते हैं पर समय रहते उन के साथ जीने की इच्छा को दबाते हुए दौड़ में आगे बढ़ जाते हैं। पर मुकाम पर पहुंच जाने के बाद लगता है अरे ! बहुतेरी बातें तो करनी रह ही गईँ... ।

और फिर याद आती है अतीत की गर्द से झांकते उन लमहो की ...पर क्या हम उन्हें फिर से तालाश पाते हैं? शायद नहीं।
ऍसे ही लमहों की कहानी लेकर आएँ हैं नवोदित गीतकार प्रशांत पांडे। देखिए तो वो क्या कह रहे हैं...


खुशनुमा आवारा सा, बेसबब, बेचारा सा लमहा था
जिंदगी के आसमां में टूटा सा वो तारा था, तनहा था
कह रहे है जर्रे देखो, रास्तों से गुजरा था यहाँ
ढूंढते हैं उसको लेकिन, गायब हैं पैरों के निशान
लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ...
लमहा कहाँ ये खो गया, इक पल में तनहा हो गया

आए जो मौसम नए, मंजर बदल जाएँगे
शाखों से पत्ते गिरे, गिरके किधर जाएँगे
कह रहे हैं जर्रे देखो, रास्तों से गुजरा था यहाँ
ढूंढते हैं उसको लेकिन, गायब हैं पैरों के निशान
लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ...
लमहा कहाँ ये खो गया, इक पल में तनहा हो गया

शबनम का कतरा है ये, शोले बुझा जाएगा
कर जाएगा आँखें नम, यादों में बस जाएगा
बारिशों की बूंदें बरसे, बादलों के दिल हल्के हुए
जाने पहचाने चेहरों के, अक्स भी क्यूँ धुंधले हुए
लमहा ये जाएगा कहाँ ..लमहा ये जाएगा कहाँ...
तनहा ये जाएगा कहाँ... तनहा ये जाएगा कहाँ


और उनके खूबसूरत बोलों को सँवारा है के. मोहन ने अपनी आवाज़ से। तो आइए सुनें फिल्म दिल दोस्ती ईटीसी का ये गीत



इस संगीतमाला के पिछले गीत

 

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