जिन्दगी यादों का कारवाँ है.खट्टी मीठी भूली बिसरी यादें...क्यूँ ना उन्हें जिन्दा करें अपने प्रिय गीतों, गजलों और कविताओं के माध्यम से!
अगर साहित्य और संगीत की धारा में बहने को तैयार हैं आप तो कीजिए अपनी एक शाम मेरे नाम..
जुबीन नौटियाल वैसे तो करीब एक दशक से पार्श्व गायिकी में अपने गाए रूमानी गीतों की वज़ह से युवाओं के चहेते गायक रहे हैं पर जबसे उनका गीत बजाओ ढोल स्वागत में, मेरे घर राम आए हैं वायरल हुआ है तबसे क्या बच्चे और क्या बड़े सब उनके गाए गीत के साथ भक्तिमय हुए जा रहे हैं। देहरादून से ताल्लुक रखने वाले इस उभरते गायक ने कई सारे फिल्मी और गैर फिल्मी एल्बमों में गाने गाए हैं पर मुझे बजरंगी भाईजान के लिए उनका गाया हुआ नग्मा कुछ तो बता जिंदगी मेरा पता जिंदगी... सबसे प्रिय है।
गीतमाला को आगे बढ़ाते हुए आज पेश है उन्हीं का गाया फिल्म मिशन मजनू का एक बेहद सुरीला नग्मा जिसके मुखड़े की मेलोडी आपको कहीं से भी खींच कर ये गीत सुनने को मजबूर कर देगी।
इस गीत की धुन बनाई है तनिष्क बागची ने और हिंदी पंजाबी मिश्रित बोल लिखे हैं शब्बीर अहमद ने। आपको याद होगा कि पिछले साल तनिष्क बागची और जुबीन की इसी जोड़ी का गीत राता लंबियाँ हर महफिल की रौनक बना था।
जुबीन की आवाज़ का तो कहना ही क्या! सीधे दिल को जा कर लगती है। मुखड़ा तो जितनी बार गुनगुनाया जाए मन नहीं भरता पर अंतरों में ऊँचे सुरों में उनका ये माधुर्य थोड़ा फीका जरूर पड़ जाता है। तनिष्क की धुन तो मधुर है पर पर मुखड़े के पहले और इंटरल्यूड्स में राताँ लंबियाँ वाले संगीत संयोजन का दोहराव स्पष्ट दिखता है।
मिशन मजनू की नायिका नेत्रहीन हैं और बला की खूबसूरत भी। ज़ाहिर है हमारे मज़नूँ जी का दिल उन पर आ जाता है। जो आँखें देख ना सकें वो अपने भावों से बहुत कुछ सिखा जाती हैं सामने वाले इंसान को। शब्बीर इसी भाव को गीत में अपने सहज शब्दों से सँवारते हैं।
कि रब्बा जाणदा, कि रब्बा जाणदा,
तैनूँ कितनी मोहब्बताँ दिल करदा
हाँ तेरे वाजू जी नहीं लगदा
रोग ये लगा इशक का
हर दुआ में तैनूँ मँगदा
कि रब्बा जाणदा, कि रब्बा जाणदा,
ओ रे ओ रे तेरे नैना,
छीन ले गए दिल का चैना
इनमें झलके है ना ये जग सारेया
इश्क़ ये कैसे होता है
रंग ये कैसे खिलते हैं
देखूँ ये तेरी इन आँखों में
चाँदनी ये क्या होती है
दीप ये जलते कैसे हैं
देखूं ये तेरी इन आँखों में
हो ना जाने कब दिन चढ़ दा
कुछ वी पता नही चलदा
हर दुआ में तैनूँ मँगदा
कि रब्बा जाणदा, कि रब्बा जाणदा,
तैनूँ कितनी मोहब्बताँ दिल करदा..
देख दुनिया मेरी आँखियों से
मैं रखाँगा तैनूँ पलकों पर
इक उम्र का सौदा ना करिये
वादे कर दूँ सातों जन्मों के
कि रब्बा जाणदा, कि रब्बा जाणदा...
मिशन मजनू का ये गीत फिल्माया गया है सिद्धार्थ और रश्मिका पर
वार्षिक संगीतमाला 2023 में मेरी पसंद के पच्चीस गीत
इस बार थोड़ी देर से ही सही वार्षिक संगीतमाला 2021 का आगाज़ हो रहा है थोड़े बदले हुए रूप में जिसके बारे में पिछली पोस्ट में आपको बता ही चुका हूँ। तो आज बात करते हैं पिछले साल के ऐसे गीत की जिसने ये सिद्ध कर दिया कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती। भाषा की दीवार अच्छी धुनों के आड़े नहीं आती। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ राता लंबियाँ की जिसने कोविड के मायूसी के माहौल में करोड़ों संगीतप्रेमियों को खुशी के कुछ पल तो दिये ही औेर साथ ही थिरकने का मौका भी।
जुबीन नौटियाल ने इस गीत को बखूबी गाया है पर इस गीत की लोकप्रियता के सच्चे हक़दार तनिष्क बागची हैं जिनके ऊपर पिछले कुछ सालों से रिमिक्स किंग का ठप्पा लगता रहा है। तनिष्क ने अपनी इस छवि को बदलने की खास कोशिश नहीं की हालांकि अपनी अच्छी मूल धुनों से भी कभी कभी वो प्रभावित करते रहे हैं। पिछले साल का मेरे लिए तुम काफी हो और उससे पहले कान्हा माने ना मुझे जरूर पसंद आए थे। मज़े की बात है कि तनिष्क ने इस गीत के बोल भी लिखे हैं। कई बार ऐसा होता है कि अगर अच्छी सी धुन हो तो उस पर बेहद सहज से बोल भी लोगों के दिल में गहरी पैठ कर जाते हैं।
तनिष्क बागची
फिल्म शेरशाह का ये गीत रिकार्ड तो आज से करीब तीन साल पहले हुआ था जब कोविड की धमक गूँजी भी नहीं थी। जुबीन नौटियाल युवाओं के चहेते गायक रहे हैं। जुबीन कहते हैं कि जब ये गीत बना तभी उन्हें लगा कि ये कुछ ज्यादा ही कमाल करेगा और उनकी बात सच साबित हुई। इस गीत में जुबीन का साथ दिया है असीस कौर ने।
अब इस धुन का ही कमाल था जिससे प्रभावित होकर तंजानिया के टिक टॉकर किली पॉल ने अपनी बहन नईमा के साथ मिलकर ऐसा लिप सिंग किया कि वो वीडियो भारत में वायरल हो गया। आवारा का गीत मेरा जूता है जापानी जिस तरह रूस में लोकप्रिय हो गया था वहीं ये गीत भी तंजानिया में किली की वज़ह से भारतीय फिल्मों में लोगों की रुचि बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। वैसे क्या आपको पता है कि स्वाभाव से विनम्र और बेहद मामूली परिवेश से आने वाले किली का नाम वैसे तो यूसुफ़ है पर पिताजी वहाँ स्थित माउंट किलीमंजारो के नाम की वज़ह से उन्हें बचपन से किली बुलाया करते थे।
पर इस गीत के चर्चे तंजानिया तक ही नहीं है बल्कि यूक्रेन की तेरह वर्षीय वॉयलिन वादक कैरोलीना प्रोटसेनको अमेरिका की सड़कों पर इस गीत की धुन को सड़कों पर बजा कर मंत्रमुग्ध दर्शकों और यू ट्यूब फॉलोवर्स की वाहवाही लूट रही हैं। कैरोलीना के माता पिता ख़ुद भी वादक रह चके हैं और अब अमेरिका में ही रहते हैं। बॉलीवुड के गीत वैसे भी विश्व के हर उस कोने में गूँजते रहे हैं जहाँ दक्षिण एशियाई मूल के लोग रहते हैं पर तनिष्क ने अपनी इस मधुर धुन से उसके आगे की भी सीमाएँ लाँघ ली हैं ।
रही भारत की बात तो यहाँ इस गीत पर ढेर सारे डांस वीडियो बने हैं जिन्हें देखना चाहें तो आप नेट खँगाल सकते हैं। फिलहाल अगर ये गीत अब तक आपने ना सुना हो तो यहाँ सुन लीजिए।
अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत नीचे से ऊपर के क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी।
और हाँ अगर आप सब का साथ रहा तो अंत में गीतमाला की आख़िरी लिस्ट निकलने के पहले 2019 की तरह एक प्रतियोगिता भी कराई जाएगी जिसमें अव्वल आने वालों को एक छोटा सा पुरस्कार मिलेगा। ☺☺
तनिष्क बागची और वायु श्रीवास्तव की संगीतकार जोड़ी जिन्हें लोग तनिष्क वायु के नाम से जानते हैं के संगीत पर मेरा ध्यान फिल्म शुभ मंगल सावधान के गीत कान्हा से गया था। तनु वेड्स मनु रिटर्न के गीत बन्नो से ये जोड़ी पहली बार चर्चा में आई थी पर शुभ मंगल सावधान के बाद इनके गीतों में मुझे ऐसी कोई खास बात नज़र नहीं आई। तनिष्क ने इन गुजरे सालों में तो अपनी छवि संगीतकारों के रिमिक्स किंग की ही बना ली। वायु भी कमरिया जैसे गीतों के आगे अपनी लेखनी को विस्तार नहीं दे पाए।
पर शुभ मंगल ज्यादा सावधान के इस गीत में वायु ने वो कमाल कर दिखलाया जो उनके अपनी कला में हुनरमंद होने का प्रमाण दे गया। एक गीतकार की सफलता इस बात में है कि वो सहज से शब्दों में दिल को छूती बात कह जाए और वार्षिक संगीतमाला 2020 की छठी पायदान के गीत संगीत में तनिष्क वायु की जोड़ी यही करने में सफल रही है।
इस गीत को गाया है हर दिल अज़ीज़ आयुष्मान खुराना ने। आयुष्मान इस गीत के बारे में कहते हैं कि
"हम फिल्म में ऐसा गीत डालना चाहते थे जो प्यार और रूमानियत की वैश्विक भावना को उभार सके। ये एक ऐसा गीत है जिसमें प्रेम से जुड़ी सारी भावनाएँ समाहित हैं और जिसे सुनकर हम किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचेंगे जो हमारी ज़िदगी में खास है। हमारा मकसद ये भी बताना था कि जैसा आम प्रेमी युगल एक दूसरे के बारे में महसूस करते हैं वैसी ही भावना दो लड़कों के बीच भी हो सकती है।"
मैंने ये फिल्म नहीं देखी पर इस गीत को पहली बार सुनते ही मन में एक खुशनुमा अहसास मन में तारी हो गया था। वैसे तो वायु का लिखा पूरा गीत ही मुझे पसंद है पर जिस तरह उन्होंने युगल प्रेमियों को सितारों की तरह टूटने और टकराने की बात की या उनकी आपसी तकरार को साथ चलते दो चक्कों के घिसने रगड़ने से जोड़ा वो मुझे बेहद प्यारा लगा।
तेरी मेरी ऐसी जुड़ गई कहानी कि जुड़ जाता जैसे दो नदियों का पानी मुझे आगे तेरे साथ बहना है जाना तुम्हें तो है ये बात जानी कि ये ज़िन्दगी कैसे बनती सुहानी मुझे हर पल तेरे साथ रहना है
तुम कुछ अधूरे से हम भी कुछ आधे आधा आधा हम जो दोनों मिला दे तो बन जाएगी अपनी इक जिंदगानी ये दुनिया मिले ना मिले हमको खुशियाँ भगा देंगी हर ग़म को तुम साथ हो फिर क्या बाकी हो
मेरे लिए तुम काफी हो
मेरे लिए तुम काफी हो...मेरे लिए तुम काफी हो
इक आसमां के हैं हम दो सितारे कि टकराते हैं टूटते हैं बेचारे मुझे तुमसे पर ये कहना है चक्के जो दो साथ चलते हैं थोड़े तो घिसने रगड़ने में छिलते है थोड़े पर यूँ ही तो कटते हैं कच्चे किनारे ये दिल जो ढला तेरी आदत पे शामिल किया है इबादत में थोड़ी ख़ुदा से भी माफी हो मेरे लिए तुम काफी हो...
तनिष्क ने तार वाद्यों के हल्की मदद से गीत की कर्णप्रियता आखिर तक बनाए रखी। कुल मिलाकर ये एक ऐसा गीत है जिसे फिल्म की कहानी से परे भी हर शख्स अपनी ज़िंदगी से जोड़ पाएगा। तो आइए सुनते हैं आयुष्मान खुराना की आवाज़ में ये गीत जिसे फिल्माया गया है आयुष्मान और जितेन्द्र कुमार पर
वार्षिक संगीतमाला की तेइसवीं सीढ़ी इंतज़ार कर रही है तनिष्क बागची के द्वारा रचे दुर्गामती फिल्म के उस गीत का जो बी प्राक की जानदार आवाज़ में आप पर बरस बरस जाना चाहता है। अपने जोड़ीदार वायु श्रीवास्तव से गीत लिखाने वाले तनिष्क ने इस गीत में गीतकार की भूमिका भी ख़ुद ही निभाई है।।
तनिष्क बागची की गणना इस साल के सबसे व्यस्त संगीतकारों में करनी चाहिए। इस साल वो करीब दस फिल्मों में संगीत देते नज़र आए। मेरी संगीतमाला में शामिल उनका ये पाँचवा संगीतबद्ध गीत है। मुझे सबसे ज्यादा खुशी उनके गीत कान्हा (फिल्म : शुभ मंगल सावधान) ने ने दी थी जो कि वार्षिक संगीतमाला 2017 में दसवीं पॉयदान तक जा पहुँचा था। अब जब उन्होंने पिछले साल इतनी फिल्में की हैं तो देखिए वो अपना रिकार्ड इस संगीतमाला में सुधार पाते हैं या नहीं।
तनिष्क अपनी संगीतबद्ध रचनाओं से अक्सर अपनी प्रतिभा का परिचय देते रहे हैं पर कई बार उनका संगीत बेहद औसत भी रहता है। उन्होंने पिछले कुछ सालों में इतने सारे गानों के रिमिक्स बनाए हैं कि अब तो उनका नाम किसी फिल्म में देख कर ये लगता है कि लो अब एक और रिमिक्स आ गया। अपनी इस पहचान से वो जितना जल्दी आगे निकलें वो बेहतर होगा।
दुर्गामती फिल्म के इस गीत की शुरुआत होती है अल्तमश फरीदी के सुकून देने वाले आलाप से और फिर गूँजता है स्वर बी प्राक का
उनकी ये नज़र जो नज़र से मिली मैं पिघलता रहा उसमें ही कहीं मैं ख़ुदा से हाँ ख़ुदा से कहूँ तू मेरा, तू मेरा हाँ कि अँखियाँ बरस बरस जाएँ नैना तरस तरस जाएँ मोहे दरस दिखा जा रे पिया रे
मुखड़े की धुन अपनी ओर खींचती है और बी प्राक तनिष्क के सामान्य से बोलों में भी अपनी अदायगी से प्राण भर देते हैं। ऊँचे सुरों पर उनकी पकड़ तेरी मिट्टी की सफलता के बाद किसी से छिपी नहीं है। गीत के अंत में वादक तापस रॉय जब मेंडोलिन पर मुखड़े की धुन बजाते हैं तो मुँह से अनायास ही वाह वाह निकल पड़ती है।
तो आइए संगीतमाला की आज की कड़ी में सुनते हैं भूमि पेडनेकर और करण कपाड़िया पर फिल्माए इस मधुर गीत को
एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमाला में अगला गाना वो जो अपने लाजवाब संगीत और बेहद मधुर गायिकी के दम पर जा पहुँचा है ग्यारहवीं पायदान पर। शुभ मंगल सावधान के इस सुरीले गीत को संगीतबद्ध किया और लिखा है तनिष्क वायु की जोड़ी ने और इसे गाया है नवोदित गायिका शाशा तिरुपति ने।
तो आखिर क्या खास है इसके संगीत संयोजन में। पानी की लहर की तरह इस गीत की धुन शुरु होती है और एक कोरस से गुजरते हुए सरोद की मीठी झनकार तबले की संगत में श्रोताओं को मुखड़े तक ले आती है। गीत की पहली पंक्ति के उतार चढाव के साथ ही आप शाशा तिरुपति की आवाज़ के कायल हो जाते हैं। पहले इंटरल्यूड का 23 सेकेंड का टुकड़ा इस साल की सबसे सुरीली पेशकश में से एक गिने जाने का हक़दार है ।
क्या कमाल रचा है तनिष्क बागची और वायु श्रीवास्तव की जोड़ी ने राग भीम पलासी से प्रेरित इस रचना में। वॉयलिन की धुन आपके रोंगटे खड़े करती है और फिर सरोद और उसके पीछे की बाँसुरी दिल के कोरों को सहलाते हुए निकल जाती है। गीत के अंत में वायलिन की धुन उसी मिठास की याद दिलाती हुई दुबारा बजती है और मन वाह वाह किए बिना नहीं रह पाता। इस गीत में वॉयलिन पर मानस हैं और सरोद बजाया है प्रदीप बारोट ने। आप दोनों को मेरा दिल से नमस्कार और बधाई।
शाशा तिरुपति इस साल की सबसे उभरती हुई गायिका हैं। श्रीनगर में जन्मी और कनाडा की नागरिकता प्राप्त शाशा एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी कलाकार हैं। वैसे तो हिंदी फिल्मों में पिछले सात आठ सालों से इक्के दुक्के गीत गाती रहीं। पर इस साल ओके जानू के गाने हम्मा ने लोगों का ध्यान उनकी ओर आकृष्ट किया। दस साल की उम्र से ही शास्त्रीय संगीत सीखने वाली शाशा को फिल्मों में गाने की इच्छा गुरु के गीत तेरे बिना बेस्वादी रतियाँसुन कर हुई।
वे ए आर रहमान की जबरदस्त प्रशंसक रही हैं। कोक स्टूडियो 3 के दौरान उनका रहमान से परिचय हुआ। ए आर रहमान ने ही उन्हें तमिल फिल्मों में गाने का मौका दिया और फिर उनका कैरियर चल निकला । तीस वर्षीय शाशा अब तक दस अलग अलग भाषाओं में गा चुकी हैं। कान्हा के लिए उन्हें इस साल की बेहतरीन गायिका के लिए कई पुरस्कारों में नामांकित भी किया गया।
तनिष्क बागची वैसे तो संगीतकार हैं ही पर वे अपने जोड़ीदार वायु श्रीवास्तव के साथ गीत भी साथ ही लिखते हैं। शुभ मंगल सावधान का ये गाना एक ऐसे युगल की कहानी बयाँ करता है जिनकी शादी होने वाली है पर भावी दूल्हे राजा पहले से ही मिलन को व्याकुल हैं। तनिष्क वायु ने बड़ी चतुरता से नायक के लिए नटखट कान्हा वाला रूप चुना और ब्रज की मीठी बोली के माध्यम से इशारों ही इशारों में कान्हा की बेसब्री को शब्दों में बाँधा। फिल्म और नायक के मूड के हिसाब से गीत में हास्य का पुट भरने के लिए उन्होंने मुखड़े और अंतरे में ट्रिक और क्विक जैसे अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल किया।
शाशा की इस बात के लिए दाद देनी होगी कि उन्होंने अपनी गायिकी में गीत की शास्त्रीयता भी बरकरार रखी और जहाँ शोख होने की जरूरत हुई वैसे ही अपनी आवाज़ को ढाल दिया। तो आइए सुनें उनकी आवाज़ में ये नग्मा जो कि कान्हा की तरह ही नटखट मिज़ाज का है।
ऊँची ऊँची डोरियों पे बाँधो रे गगर पर ना माने ना ...कान्हा माने ना जग जो बिछाये हर जाल काट ले मक्खन चुराए हर माल छाँट ले मुरली से करे ऐसी ट्रिक टिक टिक टिक पनघट की है बड़ी.. पनघट की है बड़ी कठिन डगर पर ना माने ना ...कान्हा माने ना रोके मोहे, टोके मोहे काटे रे डगर ओ रे यमुना के तट की लाज नाही, काज नाही मारे जो कंकरिया तो फूटे मोरी मटकी वाक चतुर भरमाए प्रेम जाल उलझाए.. जो भी करे, करे सब quick quick quick quick कहूँ मैं पिया जी थोडा कर लो सबर पर ना माने ना ...कान्हा माने ना
जिस तरह शाशा कान्हा के नहीं मानने की बात करती हैं वैसे ही आप भी इस गीत के खत्म होते ही कहेंगे बस इतना ही! अभी तो मन ही नहीं भरा था। कोई बात नहीं जनाब आपके लिए इस गीत का और अंतरा मैं जोड़ दिए देता हूँ जो कि फिल्म में नहीं है पर जिसे आयुष्मान खुराना ने अपनी आवाज़ दी है।
बृज आवे लाज काहे बदरा बुलाए काहे धीर धरे सजनी सुरमयी रुत भई, आ जा दोनों यमुना के तीर चलें संगनी मन में भ्रमर गुनगुनावे काहे सखी तू घबरावे प्रेम तेरा मेरा बड़ा फिट फिट फिट आज तू बहाने चाहे कितने भी कर पर ना माने ना..कान्हा माने ना
वार्षिक संगीतमाला में अब बची है आखिरी की पन्द्रह सीढ़ियाँ। पन्द्रहवीं सीढ़ी पर गाना वो जिसमें रूमानियत भी है और मधुरता भी। इस गीत का संगीत दिया है फिर एक बार तनिष्क बागची ने और इसे लिखा है अराफात महमूद ने। फिल्म हाफ गर्लफ्रेंड के इस गाने को तो आप पहचान ही गए होंगे। जी हाँ ये गाना है 'बारिश'। अब बारिश की बूँदों चाहे हौले हौले गिरें या तड़तड़ाकर, इनका स्पर्श मन में मखमली सा अहसास तो जगा ही देता है।
आप किसी को चाहते हैं पर उसे कह नहीं पाते तो होता ये है कि आपकी सारी भावनाएँ मन में ही घनीभूत होती रहती हैं। गीतकार अराफात महमूद के पास संगीतकार तनिष्क बागची कहानी की ऐसी ही एक परिस्थिति लेकर आए और कहा कि कुछ ऐसा लिखो कि तुम्हारे शब्दों किसी की भी प्रेमिका प्रभावित हो जाए। तनिष्क की चुनौती स्वीकार करते हुए अराफात ने लिखा कभी तुझमें उतरूँ, तो साँसों से गुजरूँ...तो आए दिल को राहत.मैं हूँ बे ठिकाना, पनाह मुझको पाना..हैं तुझमें दे इजाज़त। अराफात इसे अपना गीत का पसंदीदा टुकड़ा मानते हैं।
वैसे अराफात महमूद में एक दशक से फिल्म जगत में सक्रिय हैं पर बमुश्किल उन्होंने बीस के लगभग गीत लिखे होंगे। पहली बार उनका लिखा नग्मा वार्षिक संगीतमाला 2014 में शामिल हुआ था। गाने के बोल थे मैं ढूँढने को ज़माने में जब वफ़ा निकला पता चला कि गलत ले के मैं पता निकला। तभी से मुझे उनकी काबिलियत का अंदाजा हो गया था।
बंगाल के आसनसोल से ताल्लुक रखने वाले अराफात ने तालीम AMU से हासिल की। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि वो एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। शायरी से उनका प्रेम उन्हें मुंबई खींच लाया जहाँ आठ नौ सालों की जद्दिज़हद के बाद उन्होंने सफलता का स्वाद चखा। उनका मानना है कि वही काम करना चाहिए जिसमें मजा आए और सीखने की हसरत कभी कम ना हो। अपने वरीय गीतकारों के अच्छे काम को सुनने से ही उन्हें और अच्छा लिखने की प्रेरणा मिलती है।
अराफात गीत के दूसरे अंतरे हवाओं और परिंदों का जिक्र कर मन को गुदगुदाते हैं तो वहीं मौन रहकर भी अपनी प्रेयसी से उनके दिल की बात समझ लेने की गुजारिश भी करते हैं।
संगीतकार तनिष्क गीत की शुरुआत संतूर की मधुर तान से करते हैं और इंटल्यूड्स के समय साथ में गिटार और वायलिन भी ले आते हैं। अपने एक साक्षात्कार में वो ये कहना नहीं भूले कि ये गीत उन्हें उनकी प्रेम कहानी की याद दिला देता है। इस गीत को तनिष्क ने गवाया है ऐश किंग से तो आइए सुनते हैं अर्जुन और श्रद्धा कपूर पर अभिनीत ये गाना...ये गीत आपको अपने किसी ऐसे दोस्त की याद जरूर दिला जाएगा जिसे बारिश से बेहद प्यार हो।
चेहरे में तेरे, खुद को मैं ढूँढूँ आँखों के दर्मियाँ तू अब है इस तरह ख़्वाबों को भी जगह ना मिले... ये मौसम की बारिश ये बारिश का पानी ये पानी की बूँदें तुझे ही तो ढूँढें ..... ये मिलने की ख्वाहिश, ये ख्वाहिश पुरानी हो पूरी तुझी से.. मेरी ये कहानी कभी तुझमें उतरूँ, तो साँसों से गुजरूँ तो आए दिल को राहत. मैं हूँ बे ठिकाना, पनाह मुझको पाना हैं तुझमें दे इजाज़त ना कोई दर्मियाँ, हम दोनों हैं यहाँ फिर क्यों हैं तू बता फासले ये मौसम की बारिश... मेरी ये कहानी ना ना .....ला ला ... हवाओं से तेरा पता पूछता हूँ अब तो आजा तू कहीं से परिंदों की तरह यह दिल है सफ़र में तू मिला दे ज़िन्दगी से .... बस इतनी इल्तजा तू आके इक दफा जो दिल ने ना कहा जान ले ...... ये मौसम की बारिश... मेरी ये कहानी
साल के पच्चीस बेहतरीन गीतों की फेरहिस्त में आज चर्चा उस गीत की जिसे जनता जनार्दन ने पिछले साल हाथों हाथ लिया था । गीत की धुन तो इतनी लोकप्रिय हुई कि नक्कालों ने इसका इस्तेमाल कर जो भी पैरोडी बनाई वो भी हिट हो गयी। जी हाँ, बात हो रही है रश्के क़मर की जिसे मूलरूप में कव्वाली के लिए नुसरत फतेह अली खाँ ने संगीतबद्ध किया और गाया था। इसे लिखा था फ़ना बुलंदशहरी ने जिनके पुरखे भले भारत से रहे हों पर उन्होंने अपना काव्य पाकिस्तान में रचा।
बहुत से लोग इस गीत के मुखड़े का अलग मतलब लगा लेते हैं क्यूँकि "क़मर" और "रश्क" जैसे शब्द उनकी शब्दावली के बाहर के हैं। उनकी सुविधा के लिए बता दूँ कि शायर ने मुखड़े में कहना चाहा है कि तुम्हारी खूबसरती तो ऐसी हैं कि चाँद तक को तुम्हें देख कर जलन होती है। ऐसे में तुमसे नज़रें क्या मिलीं दिल बाग बाग हो गया। तुम्हें देख के ऐसा लगा मानो आसमान में बिजली सी चमक गयी हो। अब तो जिगर जल सा उठा है पर इस अगन का मज़ा ही कुछ और है ।
मेरे रश्के क़मर तूने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गयी काम ही कर गयी आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया जाम में घोल कर हुस्न की मस्तियाँ चाँदनी मुस्कुराई मज़ा आ गया चाँद के साए में ऐ मेरे साकिया तू ने ऐसी पिलाई मज़ा आ गया नशा शीशे में अंगड़ाई लेने लगा बज़्म ए रिन्दाँ में सागर खनकने लगे मैकदे पे बरसने लगी मस्तियाँ जब घटा गिर के छाई मज़ा आ गया बेहिजाबाँ जो वो सामने आ गए और जवानी जवानी से टकरा गयी आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से देख कर ये लड़ाई मज़ा आ गया मेरे मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया आँख में थी हया हर मुलाक़ात पर सुर्ख आरिज़ हुए वस्ल की बात पर उसने शर्मा के मेरे सवालात पे ऐसे गर्दन झुकाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर .....मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गयी ...मज़ा आ गया शेख साहिब का ईमान बिक ही गया देख कर हुस्न-ए-साक़ी पिघल ही गया आज से पहले ये कितने मगरुर थे लुट गयी पारसाई मज़ा आ गया ऐ फ़ना शुक्र है आज बाद-ए-फ़ना उसने रख ली मेरे प्यार की आबरू अपने हाथों से उसने मेरी क़ब्र पर चादर-ए-गुल चढ़ाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
नुसरत साहब ने इस कव्वाली में अपनी हरक़तें डालकर इसके शब्दों को एक अलग ही मुकाम पे पहुँचा दिया था। इसलिए अगर आप नुसरत प्रेमी हैं तो मैं चाहूँगा कि इस कव्वाली पर आधारित गीत को सुनने के पहले मूल रचना को अवश्य सुनें। फ़ना साहब की शायरी में जो शोखी और रसीलापन है वो जरूर आपके मन में आनंद जगा जाएगा..
फिल्म बादशाहो के निर्माता भूषण कुमार ने नुसरत की ये गाई ग़ज़ल जब सुनी थी तभी से इसे गीत की शक्ल में किसी फिल्म में डालने का विचार उनके मन में पनपने लगा था। निर्देशक मिलन लूथरा ने जब उन्हें फिल्म में नायक नायिका के पहली बार आमने सामने होने की परिस्थिति बताई तो भूषण को लगा कि नुसरत साहब की उस कव्वाली को इस्तेमाल करने की ये सही जगह होगी। मिलन ख़ुद नुसरत प्रेमी रहे हैं। मजे की बात ये है कि उनकी पिछली फिल्म कच्चे धागे का संगीत निर्देशन भी नुसरत साहब ने ही किया था और उस फिल्म में भी अजय देवगन मौज़ूद थे। यही वज़ह रही कि भूषण जी का विचार तुरंत स्वीकृत हुआ।
गीत के बोलों को आज के दौर के हिसाब से परिवर्तित करने का दायित्व गीतकार मनोज मुन्तशिर को सौंपा गया। संगीत की बागडोर सँभाली इस साल सब से तेजी से उभरते संगीतकार तनिष्क बागची ने। अगर आपने नुसरत साहब की कव्वाली सुनी होगी तो पाएँगे कि मूल धुन से तनिष्क बागची ने ज़रा भी छेड़ छाड़ नहीं की है। कव्वाली में हारमोनियम के साथ तालियों के स्वाभाविक मेल को उन्होंने यहाँ भी बरक़रार रखा है। जोड़ा है मेंडोलिन को जो कि इंटरल्यूड्स में बजता सुनाई देता है। कव्वाली और गीत के बोलों के मिलान आप समझ जाएँगे कि मुखड़े और बर्क़ सी गिर गई वाले अंतरे को छोड़ बाकी के बोल मनोज मुन्तशिर के हैं।
ये अलग बात है कि मनोज अक़्सर कहते रहे हैं कि पुराने गीतों को नया करने का ये चलन उन्हें पसंद नहीं है क्यूँकि इसमें गीतकार और संगीतकार को श्रेय नहीं मिल पाता। बात सही भी है अगर इस गीत को कोई याद करेगा तो वो सबसे पहले नुसरत और फ़ना का ही नाम लेगा। तो आइए सुनते हैं ये गीत जिसे गाया है राहत फतेह अली खाँ साहब ने
ऐसे लहरा के तू रूबरू आ गयी धड़कने बेतहाशा तड़पने लगीं तीर ऐसा लगा दर्द ऐसा जगा चोट दिल पे वो खायी मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तूने पहली नज़र जब नज़र से मिलायी मज़ा आ गया जोश ही जोश में मेरी आगोश में आके तू जो समायी मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर .... मज़ा आ गया रेत ही रेत थी मेरे दिल में भरी प्यास ही प्यास थी ज़िन्दगी ये मेरी आज सेहराओं में इश्क़ के गाँव में बारिशें घिर के आईँ मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तूने पहली नज़र ...
रांझा हो गए हम फ़ना हो गए ऐसे तू मुस्कुरायी मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तूने पहली नज़र जब नज़र से मिलायी मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गयी काम ही कर गयी आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया
चलते चलते ये भी बता दूँ कि आज इस गीत की लोकप्रियता का ये आलम है कि मुखड़े में हास्यास्पद तब्दीलियाँ करने के बावज़ूद मेरे रश्क़ ए क़मर तूने आलू मटर इतना अच्छा बनाया मजा आ गया जैसी पंक्तियाँ भी उतने ही चाव से सुनी जा रही हैं।
वार्षिक संगीतमाला के पिछले गीत गलती से मिस्टेक के साथ अगर आप थिरकने से रह गए हों तो कोई बात नहीं गीतमाला की 23वीं सीढ़ी पर के गीत में झटके मटके कम नहीं हैं। एक बार इसकी बीट्स सुनकर रजाई से बाहर झटक लिए तो फिर पूरे गीत में मटकते ही रहेंगे। इस गीत की झुमाने वाली धुन बनाई है एक ऐसे संगीतकार ने जिसने हिंदी फिल्मों में प्रवेश ही दो साल पहले लिया था।
हिंदी फिल्म उद्योग हर साल नए संगीतकारों को जन्म दे रहा है। यू ट्यूब की उपलब्धता संगीत से जुड़े फ़नकारों को सीधे जनता तक पहुँचने का एक अच्छा माध्यम दे रही है। पर पिछले कुछ सालों से मैं ये भी देख रहा हूँ कि ये नए संगीतकार जितनी शुरुआती सफलता के साथ अपना नाम बनाते हैं उस स्तर को बनाए नहीं रख पाते। बहरहाल इस साल क्षितिज पर जिस संगीतकार का नाम चमका है उनका नाम है तनिष्क बागची। वैसे तो तनिष्क ने सबसे पहले अपने जोड़ीदार वायु के साथ मिलकर तनु वेड्स मनु रिटर्न के गीत बन्नो तेरा स्वैगर में खासा धमाल मचाया था। फिर 2016 में कपूर एंड स्स के गीत बोलना में वे सुरीली धुन देने में कामयाब रहे थे।
पर 2017 में तो उन्होंने बद्रीनाथ की दुल्हनिया, हाफ गर्लफ्रेंड और शुभ मंगल सावधान के लिए खासी लोकप्रियता अर्जित की है। वैसे अब तक वे ज्यादातर वैसे एलबमों में अपनी भागीदारी कर पाए हैं जिसमें एक से ज्यादा संगीतकार थे। शायद आने वाले साल में ये स्थिति बदले। कोलकाता से ताल्लुक रखने वाले तनिष्क फिल्मों में मौका पाने के पहले टीवी शोज़ में संगीत संयोजन का काम देखते थे। इस गीत के संगीत संयोजन के बारे में तनिष्क कहते हैं
"इस गीत का संगीत रचते हुए मुझे बस यही ख्याल रहा कि चूँकि ये बरेली के लिए गीत बन रहा है तो इसमें खूब सारी ढोलक होनी चाहिए । इसी लिए मैंने भारतीय वाद्यों का चयन किया ताकि एक देशी माहौल बन सके।"
तनिष्क और उनके साथियों ने ढोलक और सारंगी के साथ अन्य ताल वाद्यों का ऐसा सम्मिश्रण किया कि गीत की शुरुआती बीट्स को सुनकर ही आपका मन झूमने को कर उठे। उत्तराखंड से उभरते नवोदित गायक देव नेगी की गायिकी भी गीत की उर्जा के अनुरूप रही। गीत में देव का साथ दिया पवनी पांडे और श्रद्धा पंडित ने जबकि रैप का मोर्चा सँभाला प्रवेश मलिक ने।
इस गीत में फिल्म के सारे किरदार इकठ्ठे थे और इस गीत की वज़ह से सबको अपने हाथ पैर सीधे करने का मौका मिल गया 😉। ज्यादातर गंभीर किस्म का किरदार निभानेवाले राजकुमार राव का कहना था कि
"मुझे तो अपनी फिल्मों में शायद ही कभी नाचने का मौका मिलता है जबकि मुझे ऐसा करना पसंद है इसलिए इस गीत के फिल्मांकन का मैंने खूब आनंद उठाया।"
तो आइए एक बार फिर थोड़ा हंगामा मचा लें इस गीत के साथ
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