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गुरुवार, फ़रवरी 11, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत #10 : सुन सुर जो कहानियाँ सी कहते हैं Sun Sur Jo Kahaniyan Si Kahte Hain

वक़्त आ गया है वार्षिक संगीतमाला के आख़िरी चरण में पहली दस सीढ़ियों को चढ़ने का। गीतमाला की दसवीं पॉयदान पर गीत वो जिसकी धुन बनाई रचिता अरोड़ा ने और जिसे अपने काव्यात्मक बोलों से सँवारा गरिमा ओबराह ने। ये गीत है अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित फिल्म Choked ... पैसा बोलता है से जो पिछले साल जून में नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई। अगर आपने ये फिल्म नहीं देखी तो इस गीत की गूँज आप तक पहुंचने की उम्मीद कम ही है क्यूँकि OTT प्लेटफार्म पर प्रदर्शित फिल्मों का संगीत कम ही प्रमोट होता है। अगर आप मुझसे पूछें कि आख़िर ऐसा क्या खास  है ढाई मिनट के इस छोटे से गाने में तो मैं यही कहूँगा कि गरिमा के गहरे शब्द, रचिता की शांत बहती सी धुन और उनकी मीठी आवाज़ जो गीत सुनने के बाद भी बड़ी देर तक मन में बनी रहती है।


रचिता के संगीत निर्देशन और गायिकी का ज़ायका आप सब मुक्केबाज के गीत बहुत दुखा मन में चख ही चुके होंगे। उस लेख में मैंने आपको बताया था कि किस तरह मुंबई में बतौर फिल्म संगीतकार उनके सफ़र की शुरुआत हुई। रचिता से इस गीत के संबंध में जब बातचीत हुई तो मेरा एक सवाल ये भी था कि बतौर संगीतकार किसी गाने के लिए अपनी आवाज़ का चुनाव करना उनके लिए कितना मुश्किल रहता है? उन्होंने बताया कि उनके मन में बस यही बात रहती है कि उस चरित्र के लिए कौन सी आवाज़ मुनासिब रहेगी। 

वे ख़ुद अपनी आवाज़ का  इस्तेमाल करने में झिझकती रही हैं। बहुत दुखा मन उन्हें रेखा भारद्वाज से गवाने का मन था पर निर्देशक अनुराग कश्यप ने उनसे कहा कि ये गाना तुम्हें गाना चाहिए और तब जाकर वो गीत उनकी आवाज़ में रिकार्ड हुआ। रचिता इस मामले में अपने को सौभाग्यशाली मानती हैं कि अब तक जितने भी निर्माता निर्देशकों के साथ उन्होने काम किया है उन सब ने उन्हें पर्याप्त स्पेस दिया है अपने तरीके से संगीत रचने का।

रचिता अरोड़ा 

रचिता तो अनुराग कश्यप के साथ पहले भी काम कर चुकी हैं पर गरिमा को अनुराग ने इस फिल्म में बतौर गीतकार उनकी पहली फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता में किए गए काम से प्रभावित होकर लिया। गीत की परिस्थिति के बारे में उन्होंने दोनों को साथ साथ ही बताया। ये गीत इस फिल्म का रिकार्ड किया जाने वाला सबसे पहला गीत था जो तीसरे ड्राफ्ट में जाकर अपना मूर्त रूप ले सका। 

विज्ञापन जगत से लेकर बतौर गीतकार प्रसून जोशी की सफलता के किस्से से तो आप सभी परिचित होंगे। उनकी तरह गरिमा की पृष्ठभूमि भी विज्ञापन जगत की है जहाँ वे जिंगल लिखा करती थीं। गरिमा ने सोचा नहीं था कि वे कभी फिल्मों में गीतकार की भूमिका निभाएँगी। उन्हें कविता लिखना हमेशा से अच्छा लगता था। जब कभी कोई उनका अर्थपूर्ण जिंगल संगीत के साथ बाहर निकलता तो उनका आनंद बढ़ जाता। ऐसे ही एक जिंगल पर उन्होंने वासन बाला साहब के साथ काम किया। बाला ने उनसे वादा किया कि जब वे फिल्म बनाएँगे तो उनको जरूर मौका देंगे। बाला ने उनको ये मौका मर्द को दर्द नहीं होता फिल्म के लिए  दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

गरिमा ओबरा

Choked एक निम्न मध्यमवर्ग के ऐसे परिवार की कहानी है जहाँ घर सँभालने से लेकर नौकरी करने की जिम्मेदारी नायिका पर है। उसका पति अधिकतर निठल्ला ही बैठा रहता है। ये गाना फिल्म में एक फ्लैशबैक की तरह आता है जब नायिका दिन रात के इस तनाव के बीच उन खुशनुमा पलों को याद करती है जब वो दोनों गाने बनाते थे। 

हमसफ़र तो वही होता है ना जो हमारे हाव भाव लहजों से ही हमारे मन की बात पढ़ सके। कई बार हमारे चेहरे की एक शिकन, हमारी आवाज़ की बुनावट अपने आप में एक दास्तान बयाँ कर देती है। सच्चा साथी तो वही है जो इन भावनाओं को समझ सके। उन बातों का मर्म ग्रहण करे जो पीड़ा सहकर होठों से निकली हैं। इसीलिए गरिमा गीत के मुखड़े में बड़ी खूबसूरती से लिखती हैं....सुन सुर जो कहानियाँ सी कहते हैं.. चुन लब मनमानियाँ जो सहते हैं 


गीत के अंतरों में नायिका के प्रेम और समर्पण का भाव और प्रबलता के साथ उभरता है जो आप गीत के बोलों को पढ़कर महसूस कर सकते हैं। आपसी प्रेम से भरे जब दो क्रियाशील प्राणी मिलकर कुछ नया रचते हैं उसमें अपना कुछ कहने को रह नहीं जाता और गीतकार का मानना है कि इस तरह रचा संगीत व साझे शब्द उनके रिश्ते को ख़ैरियत ही तो बख्शेंगे। इसीलिए उन्होंने लिखा.....
तेरे मेरे सुरों में कैसा बैर हर लफ़्ज़ ख़ैर।

रचिता बताती हैं कि जिस तरह एक स्त्री की भावनाओं को गरिमा अपने शब्दों में लाई हैं वो उनके मन को छू गया। रचिता ने इस भाव प्रधान गीत में नाममात्र के वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया है। इनमें घटम औेर बीच बीच में बजते  गिटार की टुनटुनाहट तो आप आसानी से पहचान लेंगे। रचिता की आवाज़ की मिठास गीत के प्रेमसिक्त बोलों के साथ पूरा न्याय करती है। हालांकि ऐसा मुझे लगा कि आलाप थोड़ा और बेहतर हो सकता था।तो आइए सुनते हैं इस गीत को..

सुन सुर जो कहानियाँ सी कहते हैं
चुन लब मनमानियाँ जो सहते हैं
बातें तेरी मीठे से बोल है
तेरी हँसी हर सुर टटोले है
तेरे मेरे सुरों में कैसा बैर
हर लफ़्ज़ ख़ैर

लफ़्ज़ पिरो कर ला दो
मेरा गीत वही है
अपनी आवाज़ मिला दो
मेरा गीत वही है

धुनकी मैं सब भूला दूँ चलो ये सही
जो तुम गुननगुना दो मेरा गीत वही
हाथ तेरे मिश्री सा साज है
साथ मेरे तेरी आवाज़ है
तेरे मेरे सुरों में कैसा बैर
हर लफ़्ज़ ख़ैर

 
तो बताइए कैसा लगा आपको ये नग्मा?

वार्षिक संगीतमाला 2020


बुधवार, जनवरी 09, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान # 17 बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन हाथ तोरा जब छूटा Bahut Dukha Man

वार्षिक संगीतमाला का अगला गीत जरा हट के है। कई बार हम सब संगीतप्रेमियों की शिकायत होती है कि आजकल का नया संगीत तेज शोर वाले डांस नंबर या एक जैसे लगने वाले रूमानी गीतों से भरा पड़ा है। साल भर के सौ से ज्यादा फिल्मों के संगीत को सुनते हुए ये शिकायत गलत नहीं लगती लेकिन ये भी जानना जरूरी है कि ऐसा आखिर क्यूँ है? अच्छे और अलग पहचान बनाने वालों गीतों के लिए ठोस पटकथाओं का होना आवश्यक है जो संगीतकारों और गीतकारों को कहानी और उसके परिवेश के हिसाब से नई नई चुनौतियाँ पेश कर सकें पर होता ये है कि ज्यादातर एलबमों में रोमांटिक, रैप, आइटम नंबर मसाले की तरह मिलाए जाते हैं। नतीजा है कि ऍसे एलबमों का ज़ायका कुछ दिनों तक होठों पर रहकर ऐसा उड़ता है कि फिर दोबारा नहीं लौटता। हालांकि कुछ निर्माता निर्देशक आज भी ऐसे हैं जो लीक से हटकर चलते हैं। संगीत उनकी फिल्मों के लिए फिलर नहीं बल्कि कहानी का हिस्सा होता है। अनुराग कश्यप ऐसे ही एक निर्माता हैं जिनकी फिल्म का संगीत कहानी को आगे बढ़ाता है। यही वजह है कि हिचकी की तरह ही मुक्केबाज इस साल के एलबमों में नयी हवा के झोंके की तरह उभरा है।

ये भी एक सुखद संयोग है कि हिचकी और दास देव के आजाद कर की तरह ही मुक्केबाज का संगीत एक नवोदित महिला संगीतकार ने रचा है। ये संगीतकार हैं रचिता अरोड़ा जो जसलीन व अनुपमा राग की तरह ही एक गायिका भी हैं। फर्क ये है कि जहाँ जसलीन खुद से संगीत सीख कर आगे बढ़ी हैं वहीं अनुपमा व रचिता ने बकायदा शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रखी है। दिल्ली में पली बढ़ी रचिता ने संगीत निर्देशन का काम वहाँ मंचित होने वाले नाटकों में संगीत देकर शुरु किया। मुंबई में पृथ्वी थियेटर में एक नाटक की रिहर्सल के दौरान उनकी मुलाकात मकरंद देशपांडे से हुई। उनका काम देखकर मकरंद ने उन्हें अनुराग कश्यप से मिलने को कहा। रचिता अनुराग से बतौर गायिका मिलने गयी थीं पर वहाँ से लौटीं फिल्म के लिए संगीतकार का काम ले के। अनुराग ने सबसे पहले सुनील जोगी की डेढ़ दशक पुरानी कविता मुश्किल है अपना मेल प्रिये रचिता से संगीतबद्ध करवाई। हास्य का पुट लिए इस गीत के आलावा मुक्केबाज में लोक संगीत का तड़का भी है और सत्ता के खिलाफ स्वर देता गीत भी। 

जब मैं इस संगीतमाला के लिए गीतों का चयन कर रहा था तो सबसे पहले मेरा ध्यान इस फिल्म के गीत छिपकली पर अटका। दोहरे चरित्र वाले लोगों पर ऐसी व्यंग्यात्मक धार वाले गीत हाल फिलहाल में कम ही बने हैं। वैसे इस फिल्म का सबसे मधुर गीत मुझे बहुत दुखा मन लगा जिसे  खुद रचिता ने आदित्य देव के साथ मिलकर गाया है। 

छिपकली और बहुत दुखा मन दोनों गीतों को ही लिखा है हुसैन हैदरी ने। चार्टेड एकाउटेंट और फिर मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले हैदरी को कविता का शौक़ कॉलेज के दिनों से ही था। अपनी पढ़ाई पूरी कर के वो कोलकाता की एक कंपनी का वित्त विभाग सँभाल रहे थे। उन्हें ऐसा लगा कि  कविता कहने और पढ़ने का शौक़ तो मुंबई जा कर ही पूरा हो सकता हैं क्यूँकि वहाँ खुले मंच पर तब तक कविताएँ पढ़ने का चलन शुरु हो गया था। साथ ही वो फिल्मी गीतों के लेखन में भी हाथ आज़माना चाहते थे। हैदरी को लगा कि गर मन में इच्छा है तो जोखिम अभी ही लेना पड़ेगा। 2015  में उन्होंने नौकरी छोड़ दी ये सोच कर कि अगर पाँच सालों में मुंबई में पैर जम गया तो ठीक नहीं तो वे वापस लौट आएँगे। इसी बीच उनकी कविता "हिंदुस्तानी मुसलमान" इंटरनेट पर काफी सराही गयी। गुड़गाँव और करीब करीब सिंगल के कुछ गीतों को लिखने के बाद उन्हें मुक्केबाज में मौका मिला और इस फिल्म में लिखे उनके तीनों गीतों को काफी सराहा गया है।

रचिता अरोड़ा व हुसैन हैदरी
साँझ का घोर अँधेरा मोहे
रात की याद दिलावे
रात जो सिर पर आवे लागे
लाख बरस कट जावे

आस का दरपन कजलाया रे
लागे मोहे झूठा
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

चिट्ठी जाए ना ऊ देस
जो देस गए मोरे सजना
हवा के पर में बाँध के भेजे
हम सन्देस का गहना

बिरहा ने पतझड़ बन के
पत्ता-पत्ता लूटा
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

धूप पड़ी जो बदन पे मोरे
अगन-सी ताप लगावे
छाँव में थम के पानी पिए तो
पानी में जहर मिलावे

तन की पीड़ तो मिट गई मोरी
मन का बैर न टूटा
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

मोरे हाथ में तोरे हाथ की
छुवन पड़ी थी बिखरी
बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन
हाथ तोरा जब छूटा

बहुद दुखा मन एक विरह गीत है जो कि राग पूरिया धनश्री पर आधारित है। ये सांयकालीन राग अक्सर उदासी के रंगो को स्वरलहरी देने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। रचिता अरोड़ा ने इसीलिए शायद इस विरह गीत में इस राग का प्रयोग किया है। हुसैन हैदरी ने विरह की पीड़ा को जिन शब्दों में चित्रित किया है वो एक कविता सरीखा ही लगता है। आस का दरपन कजलाया रे..लागे मोहे झूठा, बिरहा ने पतझड़ बन के...पत्ता-पत्ता लूटा, मोरे हाथ में तोरे हाथ की...छुवन पड़ी थी बिखरी जैसे सटीक काव्यांश दिल की टीस को और गहरा कर देते हैं। हुसैन हैदरी के इन कमाल के शब्दों को रचिता की मीठी आवाज़ सहलाती हुई निकल जाती है। आदित्य देव ने भी अपनी पंक्तियाँ बखूबी निभाई हैं। रचिता की धुन ऐसी नहीं है कि एक ही बार में आपका ध्यान खींचे। ये गीत धीरे धीरे मन में घर बनाने वाला गीत है। इसलिए जब भी इसे सुनें फुर्सत से सुनें..

 


वार्षिक संगीतमाला 2018  
1. मेरे होना आहिस्ता आहिस्ता 
2जब तक जहां में सुबह शाम है तब तक मेरे नाम तू
3.  ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
4.  आज से तेरी, सारी गलियाँ मेरी हो गयी
5.  मनवा रुआँसा, बेकल हवा सा 
6.  तेरा चाव लागा जैसे कोई घाव लागा
7.  नीलाद्रि कुमार की अद्भुत संगीत रचना हाफिज़ हाफिज़ 
8.  एक दिल है, एक जान है 
9 . मुड़ के ना देखो दिलबरो
10. पानियों सा... जब कुमार ने रचा हिंदी का नया व्याकरण !
11 . तू ही अहम, तू ही वहम
12. पहली बार है जी, पहली बार है जी
13. सरफिरी सी बात है तेरी
14. तेरे नाम की कोई धड़क है ना
15. तेरा यार हूँ मैं
16. मैं अपने ही मन का हौसला हूँ..है सोया जहां, पर मैं जगा हूँ 
17. बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन हाथ तोरा जब छूटा
18. खोल दे ना मुझे आजाद कर
19. ओ मेरी लैला लैला ख़्वाब तू है पहला
20. मैनू इश्क़ तेरा लै डूबा  
21. जिया में मोरे पिया समाए 
24. वो हवा हो गए देखते देखते
25.  इतनी सुहानी बना हो ना पुरानी तेरी दास्तां
 

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