साधना सरगम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
साधना सरगम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, अप्रैल 06, 2015

नैना नीर बहाए.. राग भटियार पर आधारित एक मर्मस्पर्शी गीत Naina Neer

हिंदी फिल्मों में भारतीय शास्त्रीय रागों पर आधारित गीत बनाए जाते रहे हैं और वे बेहद लोकप्रिय भी हुए हैं। विगत कुछ दशकों में अगर ये संख्या घटी है तो इसका एक कारण संगीतकारों को ऐसी कहानियों का ना मिल पाना है जिसमें ऐसे गीतों को फिल्म की परिस्थिति के साथ जोड़ा जा सके।  फिर भी हर साल ऐसे इक्के दुक्के गीत बनते ही रहते हैं। वर्ष 2007 में दीपा मेहता की एक फिल्म आई थी वॉटर, संगीतकार थे ए आर रहमान। इस फिल्म में रहमान साहब ने राग भटियार पर आधारित एक बेहद खूबसूरत धुन रची थी। शास्त्रीयता अपने साथ एक गंभीरता, एक गहराई लाती है जिसमें डूबे बगैर उसके अंदर बहते रस का स्वाद नहीं लिया जा सकता। रहमान की इस सांगीतिक रचना में आप अगर एक बार डूबे तो सच मानिए आपको जल्दी किनारा नहीं मिलेगा या दूसरे शब्दों में कहूँ तो आप जल समाधि से बाहर नहीं निकलना चाहेंगे।


फिल्म का ये गीत था नैना नीर बहाए..  जिसे आवाज़ दी थी साधना सरगम ने। आज भी इसे साधना सरगम के गाए बेहतरीन गीतों में से एक माना जाता है। साधना सरगम जिनका मूल नाम साधना घाणेकर वैसे तो मराठी हैं पर आपको ये जानकर ताज्जुब होगा कि वसंत देसाई और पंडित जसराज जैसे गुरुओं के सानिध्य में शास्त्रीय और सुगम संगीत सीखने वाली ये गायिका हमारे देश की 27 भाषाओं के पन्द्रह हजार के लगभग गीत गा चुकी है। हिंदी फिल्मों में वैसे तो साधना ने सैकड़ों गीत गाए हैं पर जाबांज का हर किसी को नहीं मिलता यहाँ प्यार.. फिर तेरी कहानी याद आई का तेरे दर पर सनम..... , जुर्म का जब कोई बात बिगड़ जाए.... और फिल्म सपने के चंदा रे..... जैसे गीतों से आम जनता के बीच खासी मक़बूलियत मिली। पर मुझे तो वो हमेशा याद रहीं जो जीता वो सिंकदर के गीत पहला नशा पहला ख़ुमार.... और विश्वात्मा के गीत सात समंदर पार से...। मुझे अच्छी तरह याद है कि इंजीनियरिंग कॉलेज के उस पहले साल में हम इस गीत को बारहा सुना और गुनगुनाया करते थे। पर इन सब गीतों पर साथिया में उनका गाए गीत चुपके से.... भारी पड़ता है। वो गीत मुझे इस लिए भी अजीज़ हैं क्यूँकि उसकी भावनाओं को मेरी पूरी पीढ़ी ने दिल से जिया है। दरअसल ए आर रहमान के लिए किया उनका काम उन्हें बतौर पार्श्व गायिका एक अलग ही धरातल पर ला खड़ा करता है।

अब Water के इस गीत को ही लें। जैसा कि मैंने पहले जिक्र किया कि ये नग्मा राग भटियार पर आधारित है। राग भटियार पौ फटने की बेला के ठीक पहले यानि रात्रि के अंतिम प्रहर में गाया जाने वाला राग है। लोग ऐसा मानते हैं कि ये राग अँधेरे से निकल कर एक नई सुबह आने की उम्मीद का राग है। विरह की पीड़ा का दंश झेलती नायिका को राधा और मीरा के दृष्टांत ये विश्वास दिलाते हैं कि उसने सामाजिक प्रताड़ना का जो विष निगला है उसे प्रेम की शक्ति अमृत बना देगी। नायिका का दर्द हृदय की गहराइयों से उठता हुआ आँखों की कोर तक तो पहुँचता अवश्य है पर झर झर गिरती अश्रु धारा एक ऐसी वैतरणी का रूप लेती है जो प्रेम के सात सुरों को साथ पाकर अपने अराध्य की ओर उन्मुख हो जाती है़। 

सुखविंदर सिंह के लिखे बोलों में अंतरनिहित भावनाओं को ए आर रहमान ने एक ऐसी मधुर धुन में परिवर्तित किया है जिसे सुनकर व्यथित मन पर भी एक सुकून सा तारी होने लगता है। चित्त को शांत करती संतूर की तरंग के साथ बहती साधना सरगम की आवाज़ इंटरल्यूड्स में बाँसुरी और मृदंगम का साथ पा कर और प्रभावी हो जाती है। तो आइए सुनते हैं इस गीत को...




नैना नीर बहाए 
मुझ बिरहन का दिल साजन संग
झूम झूम कर गाए
नैना नीर बहाए

विष का प्याला काम ना आया
मीरा ने पी के दिखलाया
प्रेम तो है गंगा जल इसमें
विष अमृत बन जाए

प्रेम है गिरिधर की बाँसुरिया
प्रेम है राधा की साँवरिया
ये है सात सुरों का दरिया
झर झर बहता जाए

चलते चलते रहमान की इस संगीतबद्ध रचना का आनंद फिर लीजिए विजय कानन द्वारा बाँसुरी पर बजाई इस गीत की धुन के माध्यम से..


मंगलवार, अक्टूबर 05, 2010

चुपके से चुपके से रात की चादर तले..गुलज़ार, रहमान व साधना की सरगम में बहता संगीत...

ए आर रहमान ने बतौर गीतकार गुलज़ार के साथ कई फिल्में की हैं और जावेद साहब के साथ भी। पर जावेद अख़्तर के बोलों को उनके संगीत के साथ मैंने ज्यादा आत्मसात होते पाया है। यही वज़ह है कि स्वदेश, लगान और जोधा अकबर में इस जोड़ी द्वारा दिया गया गीत संगीत मन के बेहद करीब रहा है। पर गुलज़ार साहब के लफ़्जों के साथ रहमान साहब वो प्रभाव पैदा नहीं कर पाते हैं जो विशाल भारद्वाज करा लेते हैं। वैसे ये भी नहीं कि रावण, दिल से, साथिया, गुरु या फिर स्लमडॉग मिलनियर में इस जोड़ी ने हमें अच्छा संगीत नहीं दिया। गुरु का ऐ हैरते आशिक़ी और दिल से का सतरंगी रे... रहमान की बेहतरीन कम्पोसिशन्स में गिना जाता है। पर जब इन जैसी विभूतियाँ साथ होती हैं तो हमारी अपेक्षाएँ कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं और यही वज़ह है कि ये एलबम पूरी तरह दिल में घर नहीं कर पाते।

साल 2002 में जब साथिया प्रदर्शित हुई थी तो उसका मुख्य गीत साथिया, साथिया मद्धम मद्धम तेरी गीली हँसी.. बेहद लोकप्रिय हुआ था। इस गीत की हर एक पंक्ति पर गुलज़ार की अमिट छाप थी। वहीं ओ हमदम सुनियो रे में गुलजार के शब्दों से कही ज्यादा रहमान का वाद्य संयोजन इस क़दर हावी था कि गीत में चुपके से चाँद नंगे पाँव आ कर कब गुजर जाता था इसका पता ही नहीं लगता था।


इन आठ सालों में इस फिल्म को जो गीत मेरे साथ हमेशा ही साथ साथ ज़ेहन की वादियों में सैर करता रहा है वो है साधना सरगम का गाया चुपके से चुपके से रात की चादर तले... गीत के मुखड़े के पहले का कोरस मुझे हमेशा कॉलेज के दिनों की तरफ़ खींच ले जाता है। दोस्त यारों की वो एकतरफ़ा किस्सा गोई, किसी का रह रह कर ठंडी आहें भरना और किसी का बिलावज़ह तड़पना या उसका अभिनय करना। पर उन प्रेम में डूबे दिलों की व्यथा में शरीक होना भी हमें तब खुशी खुशी मंजूर होता था।

कोरस के बाद इस गीत में रह जाते हैं तो गुलज़ार के हृदय को सहलाते शब्द और साधना सरगम का गीत की भावनाओं में बहता स्वर। ताज़्जुब नहीं की संगीत प्रेमी इस गीत को हमेशा ही साधना सरगम के गाए दस बेहतरीन गीतों में शुमार करते हैं। इससे पहले कि इस गीत की ओर रुख करें कुछ बातें इसकी गायिका के बारे में..

महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाली साधना घाणेकर ने अपनी माँ नीलाताई घाणेकर से संगीत की आरंभिक शिक्षा ली। भारतीय शास्त्रीय संगीत इन्होंने पंडित जसराज से सीखा। हिंदी फिल्म संगीत में पाँव रखते ही वो साधना सरगम के नाम से मशहूर हुई। फिर तेरी कहानी याद आई, जुर्म, जो जीता वहीं सिकंदर, 1947 Earth में साधना के गाए गीत हमेशा से संगीतप्रेमियों की जुबान पर रहे हैं। पर हिंदी फिल्म जगत ने उन्हें वो मौके नहीं दिये जो उन्हें दक्षिण भारत में जाकर मिले। साधना सरगम आज तक 24 ज़ुबानों में गीत गा चुकी हैं। और तो और दक्षिण का ना हो के भी वर्ष 2007 में तमिल और तेलगु की सर्वश्रष्ठ पार्श्वगायिका का ख़िताब जीत चुकी हैं। ए आर रहमान उमकी गायिकी से इतने प्रभावित रहे हैं कि अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि

उसकी गिनती मैं ऐसी कुछ गायिकाओं में करता हूँ जिन्होंने अपनी अदाएगी से मुझे हर मोड़ पर अचंभित किया है। बहुत सारे गायक इस बात में निपुण होते हैं कि मैंने जैसा कहा उसे वो हू बहू अपनी गायिकी में उतार देते हैं। पर वो तो मेरे अनुदेशों से कहीं आगे गीत को इतनी सरलता से एक ऐसे धरातल पर ले जाती है जो मुझे चकित तो करता ही है और साथ ही उनके साथ काम करने के आनंद को भी बढ़ाता है।

तो आइए सुनते हैं इस गीत को जिसे सबसे पहले साधना ने तमिल में वर्ष 2000 में फिल्म स्नेहिधने के लिए गाया था। तो पहले सुनिए ये तमिल वर्जन





और उसके बाद साथिया के लिए हिंदी में गाया वही गीत..




दोस्तो से
दोस्तो से झूठी-मूठी दूसरों क नाम ले के
तेरी मेरी बातें करना
यारा रात से दिन करना
लंबी जुदाई तेरी
बड़ा मुश्किल है आहों से दिल भरना
यारा रात से दिन करना
कब ये पूरी होगी दूर ये दूरी होगी
कब ये पूरी होगी दूर ये दूरी होगी
रोज़ सफ़र करना
यारा रात से दिन करना

चुपके से चुपके से रात की चादर तले
चाँद की भी आहट ना हो बादल के पीछे चले
जले कतरा-कतरा गले कतरा-कतरा
रात भी ना हिले आधी आधी
रात भी ना हिले आधी आधी ये
चुपके से चुपके से रात की चादर तले


फ़रवरी की सर्दियों की धूप में
मूँदी-मूँदी अँखियों से देखना
हाथ की आड़ से
नीमी-नीमी ठण्ड और आग में
हौले-हौले मारवा के राग में
मीर की बात हो
दिन भी न डूबे रात ना आये शाम कभी ना ढले
शाम ढले तो सुबह न आये रात ही रात चले
चुपके से चुपके से रात की चादर तले.....

तुझ बिना पगली पुरवई
तुझ बिना पगली पुरवई
आके मेरी चुनरी में भर गई
तू कभी ऐसे ही गले लग जैसे ये पुरवई
आ गले लग जैसे ये पुरवई
साथिया सुन तू
कल जो मुझको नींद ना आये पास बुला लेना
गोद में अपनी सर रख लेना लोरी सुना देना
 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie