Monday, August 27, 2007

यादें किशोर कीः फ़रमाइश आप सब की ! आपके अनुरोध पे मैं ये गीत सुनाता हूँ.....


जैसे-जैसे ये श्रृंखला चल रही है आप सब अपनी पसंद के गीत भी मुझे बता रहे हैं। मैंने सोचा कि इससे पहले कि ये फेरहिस्त ज्यादा लंबी हो जाए, किशोर की कहानी को आगे बढ़ाने से पहले इन गीतों को आपको सुनाता चलूँ। दरअसल इतने मँजे हुए कलाकार के दस गीतों को चुनना समुद्र की गहराई नापने के बराबर है। आपने जिन गीतों का जिक्र किया वो मेरे भी प्रिय रहे हैं पर मैं उन्हें पहले दस की सूची में समेटने में असमर्थ रहा।

तो आइए आज की शुरुआत करें आलोक मलिक जी की पसंद 'मेरे अपने' के इस गीत से जिसकी धुन बनाई थी सलिल दा ने और लिखा था गुलज़ार नें। अब गुलज़ार का जिक्र हो और आँख, ख्वाब और नींद जैसे लफ्ज ना आएँ ऐसा हो सकता है भला ! किशोर ने अपने ज़िगर का सारा दर्द अपने गायन में उड़ेल सा दिया है। जिंदगी में अकेलेपन का अहसास कितनी भयावहता के साथ आपको तोड़ सकता है, ये इस गीत को सुनकर आप महसूस कर सकते हैं।

आँखों में नींद न होती
आंसू ही तैरते रहते
ख़्वाबों में जागते हम रात भर
कोई तो ग़म अपनाता
कोई तो साथी होता
कोई होता जिसको अपना...

कोई होता जिसको अपना
हम अपना कह लेते यारों
पास नहीं तो दूर ही होता
लेकिन कोई मेरा अपना


इस गीत को सुनना चाहें तो यहाँ क्लिक करें अन्यथा विनोद खन्ना पर फिल्माए गीत का आनंद आप यहाँ देख कर उठा सकते हैं।


अब सुनिए हैदराबाद की अन्नपूर्णा जी की पसंद फिल्म 'जहरीला इंसान' से। काफी मुलायमित से गाया है मजरूह के लिखे इस गीत को किशोर ने। पंचम ने इस गीत में धुन भी कमाल की दी थी। अभी हाल में पंचम दा के गीतों का इस्तेमाल कर एक फिल्म बनी थी ..दिल विल प्यार व्यार ! उसमें भी इसे रखा गया था।
O Hansini - Zehree...



ओ हंसिनी मेरी हंसिनी कहां उड़ चली
मेरे अरमानों के पंख लगाकर कहां उड़ चली
देर से लहरों में कमल सँभाले हुए मन का
जीवन ताल में भटक रहा रे तेरा हंसा


मजरूह का लिखे एक और गीत को सुनना चाहा था नीरज रोहिल्ला और समीर जी ने ! अब किशोर के रूमानी गीतों में "रात कली एक ख्वाब में आयी" अव्वल नंबर पर आता है। कैरोके तो मेरे बस का नहीं भाई तो सिर्फ गुनगुना भर रहा हूँ
raat kali.mp3

पूरा गीत यहाँ से सुनें या फिर देख ही लें



ममता जी ने फिल्म 'दूर गगन की छाँव' से "आ चल के तुझे मैं ले के चलूँ .." सुनवाने की इच्छा ज़ाहिर की थी। गौरतलब है कि निर्देशन के आलावा इस फिल्म का संगीत और बोल भी किशोर कुमार ने ही दिए थे। सहज शब्दों में इतने प्यारे बोल लिखना किशोर की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है ...

सूरज की पहली किरण से, आशा का सवेरा जागे
चंदा की किरण से धुल कर, घनघोर अंधेरा भागे

कभी धूप खिले कभी छाँव मिले
लम्बी सी डगर न खले
जहाँ ग़म भी नो हो, आँसू भी न हो ..

बस प्यार ही प्यार पले

आ चल के तुझे मैं ले के चलूँ
इक ऐसे गगन के तले
जहाँ ग़म भी नो हो, आँसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले


तो लीजिए ममता जी सुनिए अपना पसंदीदा नग्मा
Aa Chal Ke Tujhe M...



अब वो गीत जो कि मेरी दस की लिस्ट में शामिल होते होते रह गया। दरअसल 'मिली' के सारे गीत मुझे बेहद पसंद हैं। इस फिल्म में उदासी का पुट काफी ज्यादा है और फिल्म के हर इक नग्मे में ये परिलक्षित भी होता है। दुख की बात ये भी रही की महान संगीतकार एस. डी. बर्मन की बनाई आखिरी धुन बड़ी सूनी सूनी है... इसी फिल्म से है। इस गीत की धुन बनाने के बाद बर्मन दा कोमा में चले गए। इस फिल्म के गीत योगेश ने लिखे हैं और सारे गीत दिल को छू लेते हैं। अब इसी गीत को लें जिसे सुनना चाहा है लखनऊ की कंचन चौहान ने!इस गीत का ये अंतरा मुझे बेहद मर्मस्पर्शी लगता है।

जब मैं रातों को तारे गिनता हूँ
और तेरे कदमों की आहट सुनता हूँ
लगे मुझे हर तारा तेरा दरपन
आए तुम याद मुझे ...

हर पल मन मेरा मुझसे कहता है
जिसकी धुन में तू खोया रहता है
भर दे फूलों से उसका दामन
आए तुम याद मुझे ...


आए तुम याद मुझे
गाने लगी हर धड़कन
खुशबू लाई पवन, महका चंदन....


जया और अमिताभ बच्चन पर फिल्माए इस गीत को यहाँ देखें


तो ये थी आपकी फर्माइश के कुछ गीत..शीघ्र लौटूँगा इस श्रृंखला के अगले गीतों के साथ....
Related Posts with Thumbnails

8 comments:

Anonymous said...

सुंदर!

Neeraj Rohilla on August 27, 2007 said...

बहुत खूबसूरत नग्मे सुनवाये आपने,
आजकल ब्लाग जगत पर संगीत के बारे में खूब पढने/सुनने को मिल रहा है । आप अपनी श्रॄंखला जारी रखिये ।

अपनी आवाज में "रात कली एक ख्वाब में आयी" सुनवाने के लिये धन्यवाद ।

अफ़लातून on August 27, 2007 said...

दूर का राही का गीत 'पंथी हूँ मैं उस पथ का ,अन्त नहीं जिसका'। एक रवीन्द्र संगीत के शब्द (अनुवाद) और धुन पर है। सुनवा दें।

Sagar Chand Nahar on August 27, 2007 said...

मनीष भाई
बहुत बढ़िया गाने सुनवा रहे हैं , लगे हाथ अगर मिल जाये तो, मरने कि दुवायें क्यूं मांगू, जीने की तमन्ना कौन करे... किशोरदा का पहला गाना सुनवा दीजिये।

Divine India on August 27, 2007 said...

सार्थक प्रयास मजा आगया भाई…।
मेरी फरमाईस है…
कोई रोको न दिवानो को प्रियतमा फिल्म से… अगली कड़ी में इंतजार रहेगा।

Udan Tashtari on August 28, 2007 said...

तीन दिन के अवकाश (विवाह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में) एवं कम्प्यूटर पर वायरस के अटैक के कारण टिप्पणी नहीं कर पाने का क्षमापार्थी हूँ. मगर आपको पढ़ रहा हूँ. अच्छा लग रहा है.

--बहुत सही....

कंचन सिंह चौहान on August 29, 2007 said...

अरे! मेरी पसंद भी सुना दी गई और मुझे पता भी नही चला!....शुक्रिया शुक्रिया !

Manish on August 30, 2007 said...

अफलातून जीं , दिव्यभ और सागर भाई आप सब की पसंद नोट कर ली गई है इसी पोस्ट में एक साथ सम्मिलित करने का प्रयास करूँगा.

 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie