Thursday, March 01, 2012

वार्षिक संगीतमाला 2011 :सरताज गीत - ऐ रंगरेज़ मेरे, ऐ रंगरेज़ मेरे ये कौन से पानी में तूने कौन सा रंग घोला है !

वार्षिक संगीतमाला 2011 के सफ़र में दो महिने साथ चलते चलते वक़्त आ गया है सरताज गीत की घोषणा का। इस गीत का दारोमदार सँभाल रही है एक युवा संगीतकार और गीतकार की जोड़ी जिन्होंने अपने पहले प्रयास में वो कर दिखाया है,जिसे करने में मँजे हुए कलाकारों को वर्षों लगेंगे। इस फिल्म के गीत संगीत को मिल रही मक़बूलियत का अंदाज़ा शायद उन्हें भी इसे बनाते वक़्त ना रहा हो। ये गीत है फिल्म तनु वेड्स मनु का जिसे लिखा है राजशेखर ने और जिसकी धुन बनाई है कृष्णा ने। इस गीत के दो रूप हैं जिसमें एक में स्वर है वडाली बंधुओं का और दूसरा वर्जन जो फिल्म में प्रयुक्त हुआ है उसे आवाज़ दी है कृष्णा ने। तो आइए जानते हैं पहले इन दोनों प्रतिभावान गीतकार संगीतकार की जोड़ी के बारे में। 


इस गीत के सिलसिले में राजशेखर से मेरी लंबी बातचीत हुई और सच बताऊँ बड़ा अच्छा लगा उत्तर बिहार में मधेपुरा के एक किसान परिवार में जन्मे इस कलाकार से बात कर। जैसा कि बिहार में आमतौर पे होता है राजशेखर को भी हाईस्कूल करने के बाद इंजीनियरिंग की कोचिंग के लिए पटना भेजा गया। राजशेखर उन दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि कैलकुलस के सवाल देखते ही उनका दिमाग शून्य हो जाया करता था। कोचिंग आने जाने से ज्यादा उन्हें रास्ते में हिंदी किताबों की दुकानों पर बैठ कर साहित्यिक पुस्तकों के पन्ने पलटना अच्छा लगता। एक दिन पिता से साफ साफ कह दिया कि ये पढ़ाई अब मेरे से नहीं होगी और जा पहुँचे दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज। वहीं से हिंदी में एमए किया। कॉलेज में रहते ही उन्हें रंगमंच का चस्का लगा और केएमसी की नाट्य संस्था “द प्लेयर्स” से बतौर अभिनेता और निर्देशक बने। कुछ दिनों तक NDTV में नौकरी भी की पर वो भी उन्हें रास नहीं आई। दिल्ली से मुंबई जाने की कहानी के बारे में वे कहते हैं  
"दोस्तों के बहकावे में आकर 2004 के एक बेनाम दिन मुँह उठाए और एक बैग लिए मुंबई आए। जाने माने निर्देशकों को एसिस्ट करने के नाम पर क्लर्की कबूल नहीं की और फिल्म लेखन की दुनिया में आ गए। बीच-बीच में ‘अनवर’ और ऐसी ही दूसरी फिल्मों में छोटे-मोटे रोल कर दोस्तों को अपने मुंबई में रहने और स्ट्रगल करने का भान कराते रहे। 2011 में अपनी शादी इसलिए नहीं की क्योंकि तन्नू और मन्नू की शादी के गीत लिखने थे।"
राजशेखर की मुलाकात तनु वेड्स मनु के निर्देशक आनंद राय से उनके एक मित्र व फिल्म के पटकथा लेखक हिमांशु ने करवाई। फिल्म के लिए वैसे तो पहला गीत उन्होंने 'मन्नू भैया का करिहें' लिखा जो आनंद को पसंद आ गया। पर जब उन्होने आनंद को रंगरेज़ सुनाया तो वे एकदम से सन्न रह गए और फिर उन्होंने राजशेखर को गले से लगा लिया। गीतों का चुनाव तो हो चुका था अब खोज थी एक अदद संगीतकार की जो की कृष्णा के रूप में पूरी हुई।

राजशेखर की तरह ही कृष्णा को गीत संगीत विरासत में नहीं मिला था। अहमदाबाद के NID से फिल्म और वीडिओ कम्यूनिकेशन पढ़ने वाले कृष्णा अपने सांगीतिक हुनर का श्रेय गुरु जवाहर चावड़ा को देते हैं। मुंबई में अपने शुरुआती दौर में कृष्णा विज्ञापन फिल्मों, डाक्यूमेंट्री में संगीत देने का काम करते रहे और साथ ही गुरु से संगीत की शिक्षा भी लेते रहे। राजशेखर के ज़रिए आनंद से हुई मुलाकात ने उन्हें फिल्म संगीतकार बनने का पहला मौका दिला दिया।

राजशेखर और कृष्णा से तो आप मिल लिए आइए अब जानते हैं कि रंगरेज़ को अपने गीत कें केंद्रबिंदु में रखने का ख्याल राजशेखर को आया कैसे? राजशेखर इस बारे में कहते हैं..

" जब मैं कॉलेज में था तो अक्सर लड़कियों को बेरंगी चुन्नियों को रंगवाने पास के कमला नगर मार्केट ले जाते देखता था। मुझे तभी से रंगरेज़ की शख्सियत से एक तरह का फैसिनेशन यानि लगाव हो गया था। जब आनंद ने मुझे गीत की परिस्थितियाँ बतायीं  तो मन की तहों में दबे उस रंगरेज़ का चेहरा मेरे फिर सामने आ गया।"
राजशेखर के बोल तो लाजवाब हैं ही कृष्णा की सांगीतिक समझ की भी दाद देनी होगी कि जिस तरह से इस मुश्किल से गीत को कम्पोज किया। कृष्णा इस बारे में कहते हैं

"मुझे पता था कि ये गीत एक ऐसे प्रेमी के दिल के हाल को व्यक्त कर रहा है जो पूरी तरह अपनी प्रेमिका पर आसक्त होने के बावजूद भी अपने दिल की बात नहीं कह पा रहा। जब जब व्यक्ति अपने हृदय को ऐसे चक्रवात में फँसा पाता है तो  प्रेम प्रेम नहीं रह जाता वो उससे ऊपर उठता हुआ निष्काम भक्ति का रूप ले लेता है। कव्वाली और सूफ़ियाना संगीत ऐसी भावनाओं को उभारने के लिए सबसे सटीक माध्यम हैं। बतौर संगीतकार इस गीत में मैंने मुखड़े और अंतरों के बँधे बँधाए ढर्रे से अलग कुछ करने की कोशिश की है। इस गीत को सुनने वालों ने जरूर ध्यान दिया होगा मुखड़ा शुरु के बाद फिर एकदम आख़िर में बजता है। मैं नहीं चाहता था कि राजशेखर के शब्दों का प्रवाह इंटरल्यूड्स के संगीत से टूट जाए।"
कृष्णा कितना सही कह रहे हैं ये आपको गीत सुनकर ही समझ आ जाएगा। जैसे जैसे गीत आगे बढ़ता है आप पर गीत का सुरूर छाने लगता है। गीत सुनते वक़्त मुझे तो ऐसा लगता है कि ख़ुदा की इबादत कर रहा हूँ। गीत का टेम्पो जैसे जैसे बढ़ता है मन पूर्ण समर्पण और भक्ति के पृथक संसार में जा पहुँचता है। संगीत के रूप में भारतीय वाद्यों के  साथ में ताली की उत्तरोत्तर गति पकड़ती थाप मन पर जादू सा असर करती है। तो आइए सुनें कृष्णा की आवाज़ में ये गीत !



ऐ रंगरेज़ मेरे, ऐ रंगरेज़ मेरे
ये बात बता रंगरेज़ मेरे
ये कौन से पानी में तूने कौन सा रंग घोला है
ये कौन से पानी में तूने कौन सा रंग घोला है
कि दिल बन गया सौदाई
मेरा बसंती चोला है, मेरा बसंती चोला है
अब तुम से क्या मैं शिकवा करूँ
मैने ही कहा था ज़िद कर के
रंग दे चुनरी पी के रंग में
रंग रंग दे रंग दे चुनरी पी के रंग में
पर मुए कपास पे रंग ना रुके
रंग इतना गहरा तेरा कि जान-ओ-जिगर तक को भी रंग दे
जिगर रंग दे....

रंगरेज़ तूने अफ़ीम क्या है खा ली
जो मुझसे तू यह पूछे कि कौन सा रंग
रंगों का कारोबार है तेरा
ये तू ही तो जाने कौन सा रंग
मेरा बालम रंग, मेरा साजन रंग
मेरा कातिक रंग, मेरा अगहन रंग
मेरा फाग़न रंग, मेरा सावन रंग
पल पल रंगते रंगते मेरे आठों पहर मनभावन रंग

इक बूँद इश्क़ियाँ डाल कोई तू
इक बूँद इश्क़ियाँ डाल कोई मेरे सातों समंदर जाए रंग
मेरी हद भी रंग, सरहद भी रंग दे
बेहद रंग दे, अनहद भी रंग दे
मंदिर, मस्जिद, मैकद रंग

रंगरेज़ मेरे, रंगरेज़ मेरे, रंगरेज़ मेरे
रंगरेज़ मेरे दो घर क्यूँ रहे
एक ही रंग में दोनो घर रंग दे, दोनो रंग दे
पल पल रंगते रंगते, रंगते रंगते
नैहर पीहर का आँगन रंग
पल पल रंगते रंगते रंगते रंगते
मेरे आठों पहर मनभावन रंग

नींदे रंग दे, करवट भी रंग
ख़्वाबों पे पड़े सलवट भी रंग
यह तू ही है, हैरत रंग दे
आ दिल में समा हसरत रंग दे
आजा हर वसलत रंग दे
जो आ ना सके तो फुरक़त रंग दे

दर्द-ए-हिजरां लिए दिल में,
दर्द-ए-हिजरां लिए दिल में, दर्द ए, मैं ज़िंदा रहूँ
मैं ज़िंदा रहूँ, ज़ुररत रंग दे
रंगरेज़ मेरे, रंगरेज़ मेरे
तेरा क्या है अस्ल रंग अब तो यह दिखला दे


मेरा पिया भी तू, मेरी सेज भी तू
मेरा रंग भी तू, रंगरेज़ भी तू
मेरी नैया भी तू, मँझधार भी
तुझ में डूबू, तुझ में उभरूँ
तेरी हर एक बात सर आँखों पे
मेरा मालिक तू, मेरा साहिब तू
मेरी जान, मेरी जान तेरे हाथों में
मेरा क़ातिल तू, मेरा मुनसिफ़ तू
तेरे बिना कुछ सूझे ना, तेरे बिना कुछ सूझे ना
मेरी राह भी तू, मेरा रहबर तू
मेरा सरवर तू, मेरा अकबर तू
मेरा मशरिक़ तू, मेरा मगरिब तू
ज़ाहिद भी मेरा, मुर्शिद भी तू

अब तेरे बिना मैं जाऊँ कहाँ, जाऊँ कहाँ
तेरे बिना अब जाऊँ कहाँ, तेरे बिना अब मैं जाऊँ कहाँ

तेरे बिना, तेरे बिना …..

ऐ रंगरेज़ मेरे, ऐ रंगरेज़ मेरे... मेरा बसंती चोला है
वडाली बंधुओं ने भी अपने गायन से इस गीत को एक अलग ऊँचाइयाँ दी हैं। वडाली बंधुओं इस गीत में इतना रमे कि गीत की रिकार्डिंग खत्म होने में बारह घंटे लग गए। बीच में जब उन्हें कृष्णा ने विराम लेने के लिए पूछा तो उनका जवाब था

"बेटा जब हम स्टेज पर चढ़ते हैं तो दुनिया भूल जाते हैं और आज अगर गाते गाते चौबीस घंटे भी हो जाएँ तो हम गाकर ही उठेंगे।"
तो आइए सुनते हैं पूरनचंद और प्यारेलाल वडाली द्वा गाया ये गीत...

कंगना और माधवन पर फिल्माए इस गीत को आप यहाँ देख सकते हैं..


इसी के साथ वार्षिक संगीतमाला 2011 की ये यात्रा यहीं समाप्त हुई। जो लोग इस सफ़र में साथ बने रहे उनका मैं हृदय से आभारी हूँ। पिछले छः वर्षों से चल रहे सिलसिले के प्रति आपका प्रेम ही मेरा प्रेरणास्रोत रहा है।

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18 comments:

वाणी गीत on March 01, 2012 said...

वाकई खुदा की इबादत सा ही है यह गीत !

suparna said...

i was waiting for the 'sartaj geet' :) am thrilled its this one!

when this album/song released i listened to it and talked about it so much that i almost cant say anything about it anymore except how much i love it. sheer brilliance! the lyrics and singing are super ..

loved the countdown Manish, lots of stuff i hadnt heard before. congratulations on the steady run and trust it will last a long time to come despite how busy you are :) i get breathless even thinking of how you must manage it ..

Amita Maurya on March 01, 2012 said...

lovely lyrics ... like lyrics more than music .

Amita Maurya on March 01, 2012 said...

didn't listen song earlier ... but after listening whole song now i liked music too :)))

Manish Kumar on March 01, 2012 said...

सुपर्णा जानता तो था कि तुम्हें ये गीत पसंद है पर इतना पसंद है जानकर और खुशी हुई :) आप जैसे साथी बने रहेंगे तो ये सिलसिला चलता रहेगा।

अमिता जब ये फिल्म रिलीज़ हुई थी तब मैंने इस गीत को टुकड़ों में सुना था। उस वक़्त इसे सुकून से सुनने का वक़्त नहीं मिला था । जब वार्षिक संगीतमाला में अपनी पसंद का क्रम तैयार कर रहा तब भी ये पहले नंबर पर नहीं था। पर उसके बाद जितनी बार इस गीत को सुना ये मेरे हृदय के करीब आता गया। आज हालत ये हैं कि इसे सुनता हूँ तो लगता है मैं उस ऊपरवाले की इबादत कर रहा हूँ। प्रेम में अपना सब कुछ सौंप देने का भाव मन को निर्मल कर देता है..

प्रवीण पाण्डेय on March 01, 2012 said...

इस विश्लेषण से प्रभावित हूँ, मुझे भी बहुत सुहाता है यह गीत..

Prashant Suhano on March 01, 2012 said...

वाकई यह गीत सरताज गीत ही है.. इस गीत को सुना था, बहुत पसंद भी आया था.. पर ज्यादा कुछ पता नहीं था.. इस गीत के बारे में जाननें के बाद तो यह गीत और भी पसंददीदा हो गया है..

Raj Shekhar on March 02, 2012 said...

मनीष जी..जब हमारी बात हुई थी तो ये नहीं लगा था की रंगरेज़ इस जगह होगा.. I am touched..बहुत बहुत शुक्रिया..

Smita Rajan on March 02, 2012 said...

Tanu weds manu ka sangeet n lyrics donon lazwab hain ...Train wala song bhi mast hai ...even i liked the film.Kitne Dafe...chhoo leta hai man ko ...commendable..Ye Jugal jodi badhai ke patra hain ...aap bhi

Amita Maurya on March 02, 2012 said...

Ya Manish G aap sahi kah rahen hai , kuch gane ek do baar sunne ke baad hi dil k kareeb aate hai par wo apni jagah bana leten hai , ye song bhi ishk sufiyana ki tarah hi bahut achha hai .. thnx ki aapki wajah se ye gana sunne ko mila . :)

Sandeep Pandey on March 02, 2012 said...

Raj ji ke baare mein kai saari baaten jaan ne ko mili, yeh bhi pata laga ki "Mannu bhaiya kya karihen" umr mein Ranrez se bada hai. Ya ho sakta hai main galat hovoon :

Raj Shekhar on March 02, 2012 said...

‎Sandeep Pandey :) ham umra kah lein... ek saath sadkon pe janm hua tha inka..:)

Krsna Solo on March 02, 2012 said...

Thank you manish for honoring us.

Anu Meha on March 03, 2012 said...

Manish ji,thnx for posting "Rangrez" sach main sartaj hai..rajshekhar ji ke bare main jaan ke achha laga.

Manish Kumar on March 03, 2012 said...

Krsna & Raj Shekhar you both deserve evry bit of it. In fact music lovers like us want to thank u for creating such meaningful melodies for our listening pleasure.


माँ सरस्वती का आप दोनों की कला पर आगे भी वरदहस्त रहे ऍसी मनोकामना है।

अंकित "सफ़र" on March 19, 2012 said...

जब मैंने पहली दफा ये गीत सुना था तो मुझे लगा था कि इसे शायद किसी सूफी के गीत/कलाम से उठाया गया होगा मगर मैं गलत था. राज शेखर जी को बन्दे का सलाम, क्या खूब लिखा है, हर शब्द अपना एक अलग आकाश ढूंढ रहा है, सब मिलके अनंत हो जा रहे हैं. आपको, ढेरों बधाइयाँ.

jaishree said...

Finally came back today to listen Wadali bros rendition and loved it.

parul singh on May 26, 2012 said...

Manish ji es song ke bare etni mahatvpuran jankari dene ka shukriya.ye geet maine movie dekhne se pahle nahi suna tha aur jub theatre main ye geet movie dekhte waot start hua to mai sann rah gyi geet ke music lyrics aur awaj ke digital sound effect ne mujhe kis ruhani se safar par pahuncha diya tha bayan karna muskil hai .kawalli shayad sabse khubsurat roop hai music ka ..thx again
parul singh

 

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