Friday, September 26, 2014

तुम नाराज़ हो... मेरे कितने पास हो Tum Naraz Ho Sajjad Ali Coke Studio

ज़िदगी में बनते बिगड़ते रिश्तों को तो आपने जरूर करीब से देखा होगा। कुछ रिश्ते तो भगवान ऊपर से ही मुकर्रर कर के भेजता है, और कुछ हम स्वेच्छा से बनाते हैं। नए रिश्तों के पनपने के उस दौर में साथ जिए लमहे अक्सर खास से हो जाते हैं। दिल के लॉकर में हिफाजत से पड़े उन क्षणों को मन का ये कबूतर जब तब फुदक फुदक के देख आता है। आख़िर इन पलों को इतनी अहमियत क्यूँ? क्यूँकि जिंदगी के इन्हीं पलों में आपका दिल अंदरुनी चक्रवातों में फँसा रहता है। इन चक्रवातों में फँसने की पीड़ा और और उनसे निकलने का सुख मिला जुला कर जीवन की वो अनमोल निधि बन जाते हैं जिसमें निहित खट्टे मीठे अहसासों को आप बार बार याद करना चाहते हैं।

जब आप किसी को पसंद करने लगते हैं तो मन ही मन ये भी तो चाहते हैं ना कि उसे भी आपका साथ उतना ही प्यारा लगे। अब ये प्यारा लगना इतना आसान भी तो नहीं । चंद मुलाकातों में भला कोई किसी को क्या जान पाता है? आप ने उन्हें संदेश भेजा और जवाब नहीं आया और आप इधर उधेड़बुन में खो गए कि हे राम मैंने कुछ उल्टा पुल्टा तो नहीं लिख दिया। बड़ी मुश्किल से उपहार खरीदा पर भेजने के बाद उनका धन्यवाद भरा जवाब नहीं आया फिर वहीं चिंता। हँसी मजाक में खिंचाई कर दी उस वक़्त तो जम कर हँसे पर शाम अकेले में सोचने बैठे तो ये ख्याल दौड़ने लगा कि यार कहीं उसने बुरा तो नहीं मान लिया। लबेलुबाब ये कि आप किसी हालत में अपने पल्लवित होते रिश्ते में नाराजगी का अंश मात्र भी देखना नही चाहते। जगजीत सिंह की ग़ज़ल का वो मतला तो याद है ना आपको 

आप से गिला आप की क़सम 
सोचते रहें कर न सके हम।

पर आपके सोचने से क्या होता है? गलतियाँ फिर भी हो जाती हैं । कभी जाने में तो कभी अनजाने में। किसी से शिकायत तो तभी होती है जनाब जब वो शख़्स आपसे उम्मीदें रखता हो और किसी से उम्मीदें तब ही रखी जाती हैं जब आप दिल से उस व्यक्ति का सम्मान करते हों। इसीलिए रिश्तों में शिकवे और शिकायते हों तो समझिए कि मामला दुरुस्त है शायद इसीलिए तो इस गीत में कहा गया है
कोई शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं
और तुम्हें वो हमसे पहली सी मोहब्बत भी नहीं



बहरहाल दोस्ती या प्रेम में नारजगी पर मैंने इतनी सारी बातें की। इसके पीछे कोक स्टूडियो के सीजन 7 में सज्जाद अली का गाया ये नग्मा है जिसे मैंने हाल में सुना और जो मन में कुछ ऐसे ही भावों को जन्म देता है। सज्जाद अली पाकिस्तान के मशहूर पॉप गायकों में से एक है। इनकी अलग सी आवाज़ को पहली बार फिल्म बोल के गीत 'दिन परेशाँ है रात भारी है जिंदगी है कि तब भी ज़ारी है ' में सुना था और सुनकर मेरी आँखें नम हो उठी थीं। उनकी आवाज़ में कुछ तो है ऐसा जो दर्द और बेचैनी जेसे भावों को सहज उभार देता है।

इस गीत को सज्जाद ने सबसे पहले अपने एलबम लव लेटर्स में गाया था। पर कोक स्टूडियो में बड़ी खूबसूरती से इस गीत का संगीत संयोजन बदला गया। शुरुआत का वायलिन और गीत के अंत में सज्ज़ाद की अद्भुत आवाज़ के साथ लहराती बाँसुरी सुन कोई भी नाराज हृदय पिघल उठेगा। गीत के बोल तो साधारण ही हैं पर सज्जाद की आवाज़ और संगीत संयोजन पूरे गीत को श्रवणीय बना देता है।

छोड़ो भी गिला, हुआ जो हुआ
लहरों की जुबाँ को ज़रा समझो
समझो क्या कहती है हवा
तुम नाराज़ हो मेरे कितने पास हो
नाजुक नाजुक सी, प्यारी प्यारी सी
मेरे जीने की आस हो

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6 comments:

Anil Kumar Saharan on September 27, 2014 said...

Ek aur behtrin prastuti. Kripya ye bhi btaeye ye studio kahan h aur kesha h ?

Manish Kumar on September 27, 2014 said...

कोक स्टूडियो पाकिस्तान का एक मशहूर संगीत कार्यक्रम है जिसे भारत में भी बड़े चाव से सुना जाता है। इसकी सफलता से प्रभावित होकर MTV ने भी दो तीन साल पहले MTV@Coke Studio शुरु किया है। Coke Studio आंचलिक और गैर पारम्परिक संगीत को पश्चिमी संगीत के साथ फ्यूजन कर के पेश करता है। इस गीत में भी आपने देखा होगा कि एक ओर बाँसुरी में बहती करुणा की धार है तो दूसरी ओर संगीत को उर्जावान बनाता ड्रम और गिटार का मेल। Coke Studio द्वारा बनाए गए कार्यक्रम सारे देशों में यू ट्यूब के माध्यम से देखे जाते हैं।

Sumit on September 27, 2014 said...

Manish Ji Aabhar hai aapka. Sajjad Ali ke baare mein bahut dino baad kuch padha aur suna. Unke ek album "Babia 93" ka cassete tha mere paas jo Papa ke sonodyne music system pe suna karta tha. Uske kuch behterin gaane aaj bhi jehan mein hain jaise
'titli jaisa pyaar tumhara'
'pani ke chaadro se'
'aisa laga'

Aanso chalak jaate the un dino aisa ya toh Sajjad ka asar tha ya meri umar ka takaja.

Kuch likiye na vistaar se Sajjad ke purane gaano pe kabhi.

Aabhar.
Sumit

Manish Kumar on October 08, 2014 said...

शुक्रिया सुमित सज़्जाद इस पुराने एलबम के बारे में बताने के लिए। फुर्सत में जरूर सुनूँगा।

Vasudha Seth on October 08, 2014 said...

बहुत खूब।

Mukesh Kumar Giri on November 30, 2014 said...

मनिष भाई
बहुत बहुत शुक्रिया । सज्जाद अली साहब के बारे में पढ़ा। बहुत अच्छा लगा। धन्यवाद।

 

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