Friday, January 09, 2015

वार्षिक संगीतमाला 2014 पायदान # 21 : आख़िर क्या है सूहा साहा ? Sooha Saaha

हिन्दी फिल्मों में अभिनेताओं और अभिनेत्रियों का पार्श्व गायक या गायिका का किरदार निभाना कोई नई बात नहीं। पर्दे के आगे से माइक्रोफोन के पीछे तक का ये सफ़र पहले भी तय हुआ है और आप तो जानते ही हैं कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन इस परंपरा के अग्रदूत रहे हैं। पर इस साल तो इस चलन ने और ज़ोर पकड़ा और कमाल की बात ये रही कि तीन मशहूर अभिनेत्रियों ने जिन गीतों को आवाज़े दी वो काफी सराहे भी गए। 

श्रद्धा कपूर ने एक विलेन में तेरी गलियाँ ... में अपना गला तो आज़माया ही सुरेश वाडकर के साथ हैदर में कश्मीरी बोलों को भी वे अपनी आवाज़ देती दिखीं। प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म मेरी कॉम में जो लोरी गाई उससे ये तो प्रमाणित हो ही गया कि एक अच्छी अदाकारा के साथ साथ वो एक अच्छी गायिका भी हैं। पर अपनी आवाज़ की सीमाओं के बीच हाइवे और हम्पटी शर्मा की दुल्हनिया के गीत गाकर सबसे ज्यादा लोकप्रियता अलिया भट्ट ने बटोरी।

इन्हीं अलिया का जएब बंगेश के साथ गाया युगल गीत वार्षिक संगीतमाला की 21 वीं पायदान की शोभा बढ़ा रहा है। पाकिस्तानी गायिका जएब (Jeb) के बारे में पहले कोक स्टूडियो पाकिस्तान और फिर शान्तनु स्वानंद के साथ उनके गाए गीतों की चर्चा करते समय आपको बता ही चुका हूँ। वैसे सोचने वाली बात है कि इस लोरी में जएब जैसी सधी हुई गायिका के साथ अलिया को गवाने का ख्याल निर्देशक इम्तियाज़ अली को कैसे आया?
Zeb Bangesh & Alia Bhatt
इम्तियाज़ बताते हैं कि हाइवे की शूटिंग के वक़्त अलिया फुर्सत के पलों में गाने गुनगुनाने बैठ जाती थीं और उनका पसंदीदा गीत हुआ करता था जिया जिया रे जिया रे..। ये बात जब उन्होंने रहमान को बताई तो रहमान साहब को ये विचार सूझा कि क्यूँ ना फिल्म के इस गीत में अलिया की आवाज़ का प्रयोग किया जाए। अलिया ने ये चुनौती स्वीकार तो कर ली पर रहमान सर के लिए ठीक से गा पाना उनके लिए बड़ा इम्तिहान था। वो अपनी इस परीक्षा में पास होने का सारा श्रेय गीत की रिकार्डिंग के समय ए आर रहमान द्वारा बरते गए संयम को देती हैं।

अब रहमान साहब का संगीत है तो बोलों की जिम्मेदारी तो काबिल गीतकार इरशाद क़ामिल के कंधों पर ही होनी थीं। फिल्म की कहानी के अनुरूप इस लोरी के बोल उन्होंने ऐसे रखे जिसमें गाँव की मिट्टी की सुगंध हो। पिछली पोस्ट में बात हो ही रही थी कि गीतकार आजकल गीतों में ऐसे शब्दों को लाने का प्रयास करते हैं जिससे कि सुनने वालों का गीत के प्रति कौतूहल बढ़ जाए। इरशाद क़ामिल के लिखे इस गीत में एक ऐसा ही शब्द रखा गया सूहा साहा। निश्चय ही आप में से जो इस आंचलिक शब्द से अनिभिज्ञ हैं उन्हें उत्सुकता होगी कि आख़िर सूहा साहा क्या है ? सूहा साहा का शाब्दिक अर्थ है लाल खरगोश और इस लोरी में इरशाद भाई ने एक बच्चे को माँ की नज़रों में लाल खरगोश बना दिया है।

लोरियों का उद्देश्य ही होता है इधर उधर की कहानियाँ सुना बच्चे को नींद की गोद में ढकेल देना। कहानियों के पात्र भी अजीबो गरीब और रँगीले रखे जाते हैं ताकि बाल मन उनके बारे में सोचते हुए ऐसा उलझे कि कब पलकें झपक जाएँ ये पता ही ना चले। इरशाद अपने शब्दों से इस गीत में यही करते दिखते हैं।

गीत की शुरुआत में माँ अपने बच्चे से कहती है कि मेरे इस प्यारे से लाल खरगोश को मैना खोए के मीठे मीठे खेतों में खेलने के लिए ले जाएगी। पर पता नहीं वहाँ उसके संगी साथी हो ना हों। पर जो भी हो पेड़ों पर बैठे तोते को भी तो यही लग रहा है कि मेरे इस लाल खरगोश की नींद में कोई विघ्न नहीं डाल पाएगा। देखो तो कोयले सी काली इस रात में तारों के इस बिछौने पर मेरे मुन्ने को कैसे हौले हौले नींद की झपकियाँ आएँगी। फिर तो वो चैन से सोएगा और उठकर गोटे लगे पुराने कपड़ों में मैना के साथ खेलने जाएगा।

है ना ये घुमावदार कल्पनाएँ ?

मैना ने सूहा साहा ले जाना खोय की
मीठी मीठी खेती में खेलन हो
तोता बोले पेड़ों पे, पेड़ से, पूड़ी से
सूहा साहा नींदन में ओखा ना हो
संगी साथी, हन सूने थारे हो ना हो
सूहा साहा, अम्मा का...
सूहा साहा, अम्मा का...

रैना, कारी कारी कोयलां सी रैना
नींदी तोला, तोला लाए ना
तारों का बिछौना, चैन से सोना
गोटा-गोटा गुदड़ी में घूमेगा घामेगा
सूहा साहा मैना ने ले जाना हो

फ्लैशबैक से जब ये गीत वर्तमान में आता है तब अलिया वाला गाया हिस्सा शुरु होता है..

टूटा तारा सा, छोटा सा
तारा सा, टूटा रे
पूछे वो देखूँ तेरे ही बारे
क्यूं ना सोये, क्यूं तू रोये
क्यूं तू खोये यूं परदेस में हो
क्यूं तू रूठा, किससे रूठा
क्या है छूटा तेरा देस में हो
जो भी है रूखा-सूखा
मन में वो बोलो तो
खोलो राहें बातों की, बाहें हो

तोता बोले पेड़ों पे, पेड़ से, पूड़ी से
सूहा साहा नींदन में...

तो आइए सुनें जएब और अलिया का गाया ये गीत

 

ये गीत एक परिस्थितिजन्य गीत है जिसके मर्म को फिल्म देख के समझा जा सकता है। जिन्होंने ये फिल्म नहीं देखी उनको बस इतना बताना चाहूँगा कि इस गीत में एक व्यस्क के आज के स्वाभाव के पीछे उसके बचपन के परिवेश को टटोलने की कोशिश की गई है। गीत के बोल और धुन ऐसे हैं जो धीरे धीरे आपके मन में बैठते हैं और एक बार बैठ जाने के बाद रुह को सुकून देते हुए से महसूस होते हैं।रणदीप हूदा और अलिया भट्ट पर फिल्माए इस गीत का वीडियो ये रहा...

 


वार्षिक संगीतमाला 2014
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8 comments:

Anonymous said...

Manish ji, sabse pahle to aapko anek anek dhanyavad apni is varshik sangeetmaala ke jariye is prakar ke behatreen parantu kinhi vazuhaat se ansune, geeton ko hamen sunvane ke liye jo ki, otherwise, bina sune hi rah jane vale the.
Aapne is geet "suha saha" ke bare mein bilkul theek likha hai ki ek baar sunane ke baad iski dhun man mein kahin gahare baith jati hai aur
rooh ko sukoon deti hui maloom padati hai.
Once again, heartfelt thanks for
sharing such beautiful songs with us.

Rajesh Goyal
Ghaziabad

Manish Kumar on January 10, 2015 said...

राजेश गोयल जी बहुत से लोग आज के संगीत को बिना सुने हुए एकदम से ख़ारिज़ कर देते है। नए संगीत में जो कुछ भी अच्छा हो रहा है वार्षिक संगीतमाला उसे आप जैसे सुधी श्रोताओं तक ले जाने का छोटा सा प्रयास है। साल के इन कुछ सुने अनसुने गीतों का ये सिलसिला आपको अच्छा लगा जानकर प्रसन्नता हुई।

आशा है इस संगीतमाला में आगे भी आपके विचारों का साथ मिलता रहेगा।

Sumit on January 10, 2015 said...

Beautiful Composition. Beautifully sung. Manish Ji, ab tak bahut achcha chal raha hai ye countdown.
Aashao aur apne high standard ke anuroop.

Aage aane wale gaano ke intejaar mein..

Sumit

Manish Kumar on January 11, 2015 said...

शुक्रिया सुमित साथ बने रहने के लिए..

Ankit Joshi on January 15, 2015 said...

बेहद खूबसूरत लोरी है। आपने इस के अर्थ को अच्छे से स्पष्ट कर दिया है। शुक्रिया
पहले पहल अर्थ कुछ भी समझ नहीं आया था लेकिन ये धुन की खासियत थी कि बारहा सुन ने का मन हो उठता था।

Manish Kumar on January 19, 2015 said...

ये लोरी तुम्हें भी पसंद आई जानकर प्रसन्नता हुई।

Anurag Upadhyay on January 20, 2015 said...

Kya samicha hai......i even didn't knew and noticed that these beautiful ladies have sung last year......i just enjoyed the songs and movies.

कंचन सिंह चौहान on February 08, 2015 said...

ओह्ह ये लोरी सुरीली तो लगी थी मूवी देखते समय, मगर अर्थ ज्यादा न समझ में आने के कारण दोबारा सुनने की कोशिश नहीं की.

यह गीत अलिया भट्ट का गया हुआ है इस बात की जानकारी नहीं. ईश्वर ने सौन्दर्य के साथ सुरीलापन जो भरपूर दिया, वह अद्भुत है.

 

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