Tuesday, January 12, 2016

वार्षिक संगीतमाला 2015 पायदान # 20 : रंग दे तू मोहे गेरुआ Rang De Tu Mohe Gerua

वार्षिक संगीतमाला के इस सफ़र में हम आ पहुँचे हैं बीसवीं पायदान के गीत पर। आइसलैंड की खूबसूरत वादियाँ में फिल्माया ये चर्चित गीत है फिल्म दिलवाले का जिसे आपने पिछले महीने एफ एम रेडियो या संगीत के चैनल्स पर जरूर सुना होगा। गाना तो आप पहचान ही गए होंगे रंग दे तू मोहे गेरुआ। इस गीत के बारे में आज बातें तो होंगी ही पर साथ ही आपको बताएँगे इस गीत के अहम किरदारों के बारे में और ये भी कि ये गीत कैसे अस्तित्व में आया?


प्रीतम जब दिलवाले की धुन को रच रहे थे तब निर्देशक रोहित शेट्टी बुल्गारिया में शूटिंग कर रहे थे। शाहरुख को भी वहाँ जाना था पर जाने के पहले वो गीत को अंतिम रूप में सुन लेना चाहते थे।  वहाँ जाने के पहले तय हुआ कि शाहरुख प्रीतम के स्टूडियो में गाना सुनने आएँगे। प्रीतम ने मुखड़े की धुन तो रच ली थी पर गाना तैयार नहीं हुआ था।  उन्होंने गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य को कहा कि जब तक शाहरुख बाद्रा से अँधेरी पहुँचे तब तक हमें गीत तैयार कर लेना है। 

प्रीतम की धुन पर अमिताभ ने लिखा रांझे की दिल से है दुआ ..रंग दे तू मोहे गेरुआ । अब इसमें जो गेरुआ शब्द है वो प्रीतम को जँचा नहीं। हिंदी भाषा से वो ज्यादा परिचित नहीं थे तो उन्हें ये कम प्रयुक्त होने वाला शब्द अटपटा सा लगा। पर अमिताभ अड़े रहे। अंत में प्रीतम को झुकना पड़ा। ख़ैर पैंतालीस मिनट के भीतर गीत का मुखड़ा क्या अंतरा तक बन गया। शाहरुख ने भी गाना सुन यही कहा कि  गेरुआ सुनने में तो अच्छा लग रहा है पर पता नहीं नया शब्द होने की वज़ह से  देखने वाले उसे कैसे लेंगे पर फिर भी गीत वैसे ही बना।

अरिजीत तो बर्फी के ज़माने से ही प्रीतम के प्रिय रहे हैं। स्त्री स्वर के लिए उन्होंने नवोदित गायिका अंतरा मित्रा को चुना। ये वही अंतरा थीं जिन्होंने प्रीतम ने  आर राजकुमार में साड़ी का फॉल सा तुझे मैच किया रे में मौका दिया था। बंगाल के संथालपरगना जिले के एक छोटे से शहर से ताल्लुक रखने वाली अंतरा यूँ तो संगीत बचपन से सीखती रहीं पर इसे कैरियर बनाने का ख़्याल उन्हें तब आया जब वो इंडियन आइडल  कार्यक्रम के अंतिम पाँच प्रतियोगियों में जगह बनाने में कामयाब रहीं। वर्ना इससे पहले वो मेडिकल की प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। दिलवाले के इस गीत के लिए उन्हें एक डमी सिंगर की हैसियत से बुलाया गया था ताकि ये अंदाज़ा लगे कि स्त्री स्वर में ये गीत कैसा लग रहा है। गीत की रिकार्डिंग रात तीन बजे हुई।  बाद में रोहित व शाहरुख ने उनके उस रात गाए वर्सन को ही स्वीकृति दे दी और वो फिल्म का हिस्सा बन गया।

गीत की शुरुआत (पहले बीस सेकेंड निकलने के बाद) प्रीतम ने इसी फिल्म के दूसरे गीत जनम जनम की सिग्नेचर धुन से की है। बाकी का संगीत संयोजन कुछ deja vu सा अहसास दिलाता है। अमिताभ के बोल भी जितना मुखड़े में आकर्षित करते हैं उतनी पकड़ अंतरों में नहीं रख पाते पर संपूर्णता में गीत को सुनना अच्छा ही लगता है। 

और हाँ ये तो बताइए कि अमिताभ रंग दे तू मोहे गेरुआ द्वारा कहना क्या चाहते हैं? नायक नायिका से कहना ये चाह रहा है कि तुम मुझे अपने प्रेम में जोगी बना दो यानि गेरुए रंग में रंग दो..

धूप से निकल के, छाँव से फिसल के
हम मिले जहाँ पर, लम्हा थम गया
आसमां पिघल के, शीशे में ढल के
जम गया तो तेरा, चेहरा बन गया
दुनिया भुला के तुमसे मिला हूँ
निकली है दिल से ये दुआ
रंग दे तू मोहे गेरुआ
रांझे की दिल से है दुआ
रंग दे तू मोहे गेरुआ
हाँ निकली है दिल से ये दुआ
हो रंग दे तू मोहे गेरुआ

हो तुमसे शुरू.. तुमपे फ़ना
है सूफियाना ये दास्तां
मैं कारवाँ मंज़िल हो तुम
जाता जहाँ को हर रास्ता
तुमसे जुड़ा जो, दिल ज़रा संभल के
दर्द का वो सारा , कोहरा छन गया
दुनिया भुला के तुमसे मिला हूँ ....रंग दे तू मोहे गेरुआ

हो वीरान था, दिल का जहान
जिस दिन से तू दाखिल हुआ
इक जिस्म से इक जान का
दर्ज़ा मुझे हासिल हुआ
हाँ फीके हैं सारे, नाते जहाँ के
तेरे साथ रिश्ता गहरा बन गया
दुनिया भुला के तुमसे मिला हूँ ....रंग दे तू मोहे गेरुआ

ये गाना इस साल के सबसे खूबसूरत फिल्माए गानों की उपाधि  के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं। आइसलैंड की खूबसूरती को रोहित शेट्टी ने बड़े क़रीने से उतारा है रुपहले पर्दे पर इस गीत के माध्यम से..

वार्षिक संगीतमाला 2015

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12 comments:

कंचन सिंह चौहान on January 12, 2016 said...

ये गीत जितना हिट उतना ही बेसिर पैर का लगता है मुझे। गेरुआ का बिम्ब ही नहीं समझ आता। फिर रांझे का क्या कनेक्शन है भाई गेरुआ से भला ? जो उसकी है दिल से ये दुआ ?

एक मित्र के पिता जी कहते हैं, " कुल रंग में रंग भईले अब इहे ईगो रंग बचल रहल।" :P

Manish Kumar on January 12, 2016 said...

गीत के बोल मुझे भी औसत ही लगे रही गेरुआ की बात तो अमिताभ की सोच जिसे अंतरा ने एक जगह व्यक्त भी किया है वो ये है कि
तुम मुझे अपने प्रेम में जोगी बना दो यानि गेरुए रंग में रंग दो..

शायद लेख में देखा नहीं आपने ..इस हिसाब से उतना बेसिरपैर तो नहीं हुआ :)

कंचन सिंह चौहान on January 13, 2016 said...

लिरिक्स के ठीक ऊपर। हाँ शायद मिस हो गया। खैर फिर भी मुझे एकदम से आया हुआ वर्ड लगता है ये गीत में। बस चमत्कार करने को लाया गया और वो फंडा कामयाब भी हुआ। नयी जनरेशन एकदम नया सा कुछ समझ कर झूमती है इस गीत पर।

मन on January 13, 2016 said...

90 के दशक के गानों की याद दिलाता है ये गीत

Kumar Nayansingh on January 13, 2016 said...

ये बताएँ कि हर गाने के पीछे का इतिहास भूगोल कहाँ से ढूंढ लाते हैं आप? ये तो गाना चुनने से भी ज्यादा कठिन प्रतीत होता है।

Manish Kumar on January 13, 2016 said...

Kumar Nayan Singh ट्रेड सीक्रेट यूँ खुले आम नहीं पूछे जाते। :p बहरहाल गाने तो आप कहीं भी चुन सकते हैं पर मेरी कोशिश रहती है कि उनके पीछे के किरदारों की मेहनत और उससे जुड़ा कोई भी रोचक संस्मरण हो तो उसे सहेज कर अपने पास रखूँ और उन्हें आप सब के सामने लाऊँ ताकि गीत के बारे में पढ़कर लोग उसे और अच्छी तरह महसूस कर सके।

Jagdish Arora on January 13, 2016 said...

This song is good in this comic movie for children

Manish Kaushal on January 13, 2016 said...

गीत में गेरुए का मतलब मुझे भी नहीं पता था. हमे जानकारी देने के लिए आपकी मेहनत सच में काबिलेतारीफ है. सादर धन्यवाद

Sumit on January 13, 2016 said...

This song is beautifully picturised. That's all. Looking at the list so far it seems that year 2015 has been weak in comparison to 2014 or 2013.

Manish Kumar on January 13, 2016 said...

सुमित गानों के मामले में ये साल क्या हर नया साल पिछले साल से फीका लगता है। पर जैसे जैसे आगे बढ़ेंगे आपकी नाउम्मीदी कम होगी ऐसी आशा है।

HARSHVARDHAN on January 13, 2016 said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - लोहड़ी की लख-लख बधाईयाँ में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Manish Kumar on January 16, 2016 said...

हर्षवर्धन हार्दिक आभार !

 

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