सोमवार, जनवरी 26, 2009

वार्षिक संगीतमाला 2008 - पायदान संख्या 16 : मर जावाँ... भीगे भीगे सपनों का जैसे खत है

आज बारी है इस संगीतमाला के गीत नम्बर सोलह की और इस पायदान पर गीत वो जिसकी, गायिका, संगीतकार और यहाँ तक की गीतकार भी इस साल पहली बार अपनी जगह बना रहे हैं। ये गीत मैंने तब सुना जब मैं इस संगीतमाला की सारी २५ पायदानें की सूची तैयार कर चुका था। पर इस साल की सा रे गा मा पा की विजेता वैशाली म्हाणे को जब मैंने ये गीत गाते सुना तो मुझे लगा कि इस गीत के लिए तो जगह बनानी पड़ेगी। पहली बार इस गीत को सुनते ही गायिका श्रुति पाठक की पीठ थपथपाने की इच्छा होती है। इस गीत में नीचे के सुरों को जिस तरह उन्होंने निभाया है वो निसंदेह तारीफ के काबिल है।

पर इस प्रशंसा की हक़दार सिर्फ श्रुति नहीं हैं। अगर श्रुति की गहरी आवाज़ का जादू आप पर होता है तो वो इरफ़ान सिद्दकी के बोलों की वज़ह से। प्रेम में डूबी एक लड़की की भावनाओं को जब वो इरफ़ान के इन शब्दों में हम तक पहुँचाती हैं तो मन बस गुलजारिश हो जाता है।

सोचे दिल कि ऍसा काश हो
तुझको इक नज़र मेरी तालाश हो
जैसे ख्वाब है आँखों में बसे मेरी
वैसे नीदों पे सिलवटें पड़े तेरी
भीगे भीगे अरमानों की राहत है
हाए गीली गीली ख्वाहिश भी तो बेहद है
मर जावाँ मर जावाँ तेरे इश्क़ पे मर जावाँ......
इरफान सिद्दकी एक युवा गीतकार हैं और गुलज़ार से खासे प्रभावित भी। वे कहते हैं कि गुलज़ार हल्के फुल्के शब्दो के साथ गहरे शब्दों के मिश्रण की कला जानते हैं। इरफ़ान वैसे तो गीत के बोल सहज रखने पर विश्वास रखते हैं पर वो ये भी महसूस करते हैं कि उर्दू शब्दों का प्रयोग करने से गीत का असर और बढ़ जाता है। जैसे इसी गीत की चर्चा करते हुए वे कहते हैं कि उन्होंने नीचे की पंक्तियों में 'खत' और 'लत' का इस्तेमाल इसी लिहाज़ से किया
भीगे भीगे सपनों का जैसे ख़त है
हाए! गीली गीली चाहत की जैसे लत है
इसी गीत के साथ पहली बार बतौर संगीतकार सलीम सुलेमान ने इस साल की संगीतमाला में प्रवेश कर लिया है। सलीम सुलेमान इससे पहले पिछले साल डोर और चक दे इंडिया के गीतों के साथ वार्षिक संगीतमालाओं का हिस्सा बन चुके हैं। इस गीत में सलीम मर्चेंट ने अंतरे के बीच अरबी बोलों का समावेश किया है जो कुछ सुनने में इस तरह लगते हैं

रादी क्राह दी क्रावा, वल हवा वसाबाह
वादी क्राह हितावह्त, अल्लाह दुखा वसाबाह
लातेह्वाल फलाहवह्त, अल्लाह दुखा वसाबाह
वादी क्राह हितावह्त, अल्लाह दुखा वसाबाह

अब इस की लिखनें में भूलें तो अवश्य हुई होंगी पर चूंकि अरबी का जानकार नहीं हूँ इसलिए इसे नज़रअंदाज कर दीजिएगा। अंतरजाल पर इसके अनुवाद से इन लफ्ज़ों के भावों का अंदाज़ लगता है जो कुछ इस तरह से है...."भगवान साक्षी है कि तेरी याद में तरसने और अपना गुनाह कुबूल करने के बावजूद तुमने अपना वादा नहीं निभाया"

खैर सलीम का ये तरीका गाने में एक नयापन लाता है पर मुझे लगता है कि अरबी बोलों के बिना भी और हल्के संगीत संयोजन से भी गीत की प्रभाविकता बनी रहती। तो आइए सुने और देखें फैशन फिल्म का ये गीत

मर जावाँ मर जावाँ
तेरे इश्क़ पे मर जावाँ
भीगे भीगे सपनों का जैसे खत है
हाए गीली गीली चाहत की जैसे लत है
मर जावाँ मर जावाँ तेरे इश्क़ पे मर जावाँ......

सोचे दिल कि ऍसा काश हो
तुझको इक नज़र मेरी तालाश हो
जैसे ख्वाब है आँखों में बसे मेरी
वैसे नीदों पे सिलवटें पड़े तेरी
भीगे भीगे अरमानों की राहत है
हाए गीली गीली ख्वाहिश भी तो बेहद है
मर जावाँ मर जावाँ तेरे इश्क़ पे मर जावाँ......


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11 टिप्पणियाँ:

archana on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

good song .but its already in low scale.

Manish Kumar on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

अर्चना जी शायद मैं अपनी बात सही तरह से रख नहीं पाया। मैंने संगीत संयोजन यानि सलीम सुलेमान के musical arrangements को और low key में रखने की बात कहनी चाही थी। साथ ही अगर अंतरे के बीच में र सलीम अपनी आवाज़ नहीं भी लाते तो गायन और बोल की बदौलत ये गीत अपनी मिठास कायम रखता।

Udan Tashtari on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

उम्दा चयन.,.

आपको एवं आपके परिवार को गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

अनिल कान्त on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

hmmmmm...theek hai ....


अनिल कान्त
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Vinay on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

---आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें

हरकीरत ' हीर' on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

Manish ji geet bhot acche lage....BDHAI....!

संगीता पुरी on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

बहुत अच्‍छा.....गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) on जनवरी 26, 2009 ने कहा…

मैं तो बस यही कहूँगा.......वाह-वाह.......वाह-वाह.........!!

कंचन सिंह चौहान on जनवरी 27, 2009 ने कहा…

pahali baar suna ye geet, Fashion film dekhi to thi, lekin ya to CD me ye geet nahi tha ya fir mujhe yaad nahi aa raha.

Urvashi on जनवरी 27, 2009 ने कहा…

One of my favorite songs of 2008! It's lovely!

Urvashi on जनवरी 28, 2009 ने कहा…

I can't leave a comment on Dil Haara...

 

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