शनिवार, अक्तूबर 27, 2018

कैसा रहा बतौर संगीतकार जगजीत सिंह का फिल्मी सफ़र? : ज़ख़्म जो आप की इनायत है Zakhm jo aapki inayat hai

जगजीत सिंह से जुड़ी इन कड़ियों में आपसे बात हो रही थी ऐसी हिंदी फिल्मों की जिनके संगीतकार की भूमिका निभाई जगजीत सिंह नेप्रेम गीत की शानदार सफलता के बाद अगले ही साल 1982 में एक और फिल्म जगजीत की झोली में आई और वो थी अर्थ। जगजीत सिंह ने जितनी भी फिल्मों का संगीत निर्देशन किया उसमें सबसे अधिक सफल यही फिल्म रही। फिल्म महेश भट्ट की थी और फिल्म का कथानक पति पत्नी व प्रेमिका के टूटते जुड़ते रिश्तों पर आधारित था। जगजीत ने कहानी की परिस्थितियों को कैफ़ी आज़मी की लिखी ग़ज़लों और नज़्मों में ऍसा ढाला कि फिल्म का हर एक गीत यादगार बन गया। झुकी झुकी सी नज़र और तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो और तू नहीं तो ज़िदगी में और क्या रह जाएगा..तो क्या आम क्या खास सबके दिलों में छा गया। अपनी बात करूँ तो उन दिनों एकाकी पलों में इस फिल्म की नज़्म कोई ये कैसे बताया कि वो तन्हा क्यूँ है आँखों में नमी पैदा कर देती थी। 


जगजीत जी के सम्मान में हुए एक कार्यक्रम में फिल्म की नायिका शबाना आज़मी ने अर्थ के संगीत को याद करते हुए कहा था कि "मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि अर्थ के तीन गाने मेरे ऊपर फिल्माए गए थे। उन्होंने संगीत के साथ शब्दों में दर्द को इस तरह पिरोया था कि मेरे पास करने लायक कुछ रह नहीं गया था।"

फिल्म साथ साथ में भी जगजीत व चित्रा की गायिकी सराही गयी पर इस फिल्म का संगीत जगजीत ने नहीं बल्कि उनके मित्र कुलदीप सिंह ने दिया था। जगजीत जी को अर्थ की सफलता के बाद फिल्म संगीत रचने के जितने मौके मिलने चाहिए थे उतने नही मिले। शायद इसकी वज़ह जगजीत का अपने निजी एलबमों को ज्यादा तवज्जोह देना भी रहा हो। उन्हें जो मौके मिले भी वो छोटे बैनर या लीक से हटकर बनी फिल्मों के लिए मिले। 

1983 में शत्रुघ्न सिन्हा ने एक फिल्म कालका बनाई जिसमें अपनी गायिकी और संगीत के ज़रिए जगजीत ने शास्त्रीयता का एक अलग ही रूप दिखाया। अगर आपको अर्धशास्त्रीय संगीत पसंद है तो जगजीत के रचे "कैसे कैसे रंग दिखाए कारी रतिया", "तराना" और "बिदेशिया" को सुनना ना भूलिएगा। 

इसी साल उन्होंने निर्वाण का भी संगीत दिया। इसका एक गीत चित्रा सिंह ने गाया है जिसके संगीत में आपको जगजीत के चिरपरिचित ग़ज़ल वाले संगीत की छाया तक नहीं मिलेगी। राही मासूम रज़ा के लिखे इस गीत का मुखड़ा था "रातें थीं सूनी सूनी, दिन थे उदास मेरे..तुम मिल गए तो जागे सोए हुए सवेरे "। बाद में इसे जगजीत ने अपने एलबम Rare Moments में शामिल कर लिया। 

एक साल बाद उन्हें एक और फिल्म मिली जिसका नाम था रावण। इसी फिल्म के लिए उन्होंने अपनी मशहूर ग़ज़ल "हम तो यूँ अपनी ज़िंदगी से मिले अजनबी जैसे अजनबी से मिले....." रची थी जो आप सबने सुनी ही होगी। 

निर्वाण,रावण और उसके बाद संगीत निर्देशित तुम लौट आओ के गीत तो ज्यादा चर्चित नहीं रहे पर ये इतनी छोटे बजट की फिल्में थी कि इनके संगीत तक आम जनता की कभी पहुँच ही नहीं हुई। पर इन फिल्मों के कुछ गीत निश्चय ही श्रवणीय थे। आज इन्हीं फिल्मों में से "तुम लौट आओ" का एक प्यारा सा नग्मा आपको सुनवाने जा रहा हूँ जिसे लिखा था सुदर्शन फ़ाकिर साहब ने और जिसका शुमार जगजीत चित्रा के कम सुने गीतों में होता है।

फिल्म में नायक विदेश जाने की तमन्ना में अपने प्यार और उससे अंकुरित बीज को प्रेमिका के गर्भ में छोड़ कर जाने को तत्पर हो जाता है। सुदर्शन जी ने प्रेम में टूटी और दिग्भ्रमित नायिका की बात को बड़ी खूबी से इन लफ़्ज़ों में बयाँ किया है रात सपना बहार का देखा, दिन हुआ तो ग़ुबार सा देखा..बेवफ़ा वक़्त बेज़ुबाँ निकला, बेज़ुबानी को नाम क्या दें हम। वहीं नायक इसे अपनी नहीं बल्कि जवानी की भूल बताकर जीवन में आगे बढ़ने को लालायित है। गीत के तीनों अंतरे इस परिस्थिति की दास्तान को बखूबी श्रोताओं के समक्ष रख देते हैं। 


ज़ख़्म जो आप की इनायत है, इस निशानी को नाम क्या दें हम
प्यार दीवार बन के रह गया है, इस कहानी को नाम क्या दें हम

आप इल्ज़ाम धर गये हम पर, एक एहसान कर गये हम पर
आप की ये भी मेहरबानी है, मेहरबानी को नाम क्या दें हम

आपको यूँ ही ज़िन्दगी समझा, धूप को हमने चाँदनी समझा
भूल ही भूल जिस की आदत है, इस जवानी को नाम क्या दें हम

रात सपना बहार का देखा, दिन हुआ तो ग़ुबार सा देखा
बेवफ़ा वक़्त बेज़ुबाँ निकला, बेज़ुबानी को नाम क्या दें हम



ग़ज़ल के बारे में लिखते हुए जगजीत का गाया ये अंतरा गुनगुनाने का मन हुआ तो उसे यहाँ शेयर कर रहा हूँ..




मुझे आशा है कि इस आलेख में उल्लेख किए गए कुछ गीत आपके लिए भी अनसुने होंगे। फिलहाल तो इजाज़त दीजिए। फिर लौटूँगा जगजीत जी की  संगीत निर्देशित कुछ और फिल्मों के साथ।

Related Posts with Thumbnails

12 टिप्पणियाँ:

Manish Kaushal on अक्तूबर 27, 2018 ने कहा…

इस खूबसूरत गीत से अब तक अनजान थे... फ़िल्म का नाम तक नही सुने थे। जानकारी के लिए धन्यवाद सर

Manish Kumar on अक्तूबर 27, 2018 ने कहा…

हां उनके संगीतबद्ध अनजान गीतों को ही सुनवाने का इरादा है इस श्रंखला में:)

Radhe Mundhra on अक्तूबर 27, 2018 ने कहा…

Very nice

Manish Kumar on अक्तूबर 27, 2018 ने कहा…

Thanks

HARSHVARDHAN on अक्तूबर 27, 2018 ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जतीन्द्रनाथ दास और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Unknown on अक्तूबर 29, 2018 ने कहा…

ये गीत तो पहली बार सुना.......
आपकी पोस्ट से पता चला की जगजीत सिंह जी के ऐसे बहुत सारे फ़िल्मी गीत हे जो आज तक मैंने सुने ही नहीं.. रेडियो पर प्रेम गीत, अर्थ, साथ साथ के गीत बहुत बार सुने, इसके अलावा शायद ही उनका कोई फ़िल्मी गीत सुना हो... आपकी ये श्रंखला हम सभी के लिए बहुत ख़ास होने वाली हे.. :)

Manish Kumar on अक्तूबर 31, 2018 ने कहा…

हर्षवर्धन हार्दिक आभार !

Manish Kumar on अक्तूबर 31, 2018 ने कहा…

हाँ स्वाति मेरे लिए भी इनमें से कुछ गीत नए थे। कई गीत जो नहीं चले वो जगजीत जी ने एक दशक बाद अपने एलबमों में कहीं ना कहीं शामिल किए पर कुछ ऐसे भी गीत हैं जो उनके संगीतनिर्देशन में दूसरे गायकों ने गाए। वो तो बिल्कुल अनसुने हैं।

Shashank Sharma on नवंबर 30, 2018 ने कहा…

बहुत दिनों बाद जगजीत सिंह के बारे में पढ़ा. आपका धन्यवाद्

Anu Shukla on मार्च 29, 2019 ने कहा…

बेहतरीन

कोटि कोटि नमन !

Manish Kumar on मार्च 29, 2019 ने कहा…

यहाँ पधारने और अपनी राय देने के लिए शुक्रिया शशांक !

Manish Kumar on मार्च 29, 2019 ने कहा…

अनु शुक्ला धन्यवाद

 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie