Saturday, July 04, 2020

यूँ ही कभी हो जाता है.. पंचम के संगीत की याद दिलाता एक प्यारा नग्मा

पिछले हफ्ते  संगीतकार पंचम का जन्मदिन था। जैसा कि अक्सर होता है जन्मदिवस पर हम उस व्यक्ति विशेष की कृतियाँ याद करते हैं। उनके बनाए गीत सुनते हैं, गाते हैं, उससे जुड़ी यादें साझा करते हैं और यही कल बहुत लोगों ने किया भी। पर इन सारी पेशकश में सबसे अलग था दो कलाकारों का एक मौलिक प्रयास जो हमें हर पल में पंचम के संगीत की याद दिला रहा था।

एक साझा और बेहद प्यारी कोशिश आश्विन श्रीनिवासन और रोंकिनी गुप्ता की युगल जोड़ी की तरफ से भी हुई। दोनों ही कलाकार शास्त्रीय संगीत की अलग अलग विधाओं में पारंगत हैं। रोंकिनी की शास्त्रीय गायिकी कमाल की है वही आश्विन की उँगलियाँ बचपन से ही बाँसुरी पर थिरकती रही हैं। दोनों ही ऐसे कलाकार हैं जिनका हुनर एक विधा तक सीमित नहीं हैं। इन्होंने अपने संगीत के साथ काफी प्रयोग करने की कोशिश की है। हिन्दी फिल्मों में रोंकिनी के गाए गीत हर साल प्रशंसा बटोरते रहे हैं वहीं आश्विन ने भी संगीत निर्माण से लेकर गीत लिखने व गाने में नामी हस्तियों के साथ गठजोड़ किया है।


आश्विन श्रीनिवासन व  पंचम 
पंचम की संगीत रचना के बहुत सारे अवयव हैंं जैसे ताल वाद्यों की उनकी एक खास तरह की रिदम, गीत में अक्सर कुछ नई तरीके की आवाज़ पैदा करने की उनकी ललक, इंटरल्यूड्स का संगीत संयोजन, गीत के बीच तैरता आलाप, किरदारों की आपसी बातचीत और भी बहुत कुछ जिसे आप इस गीत को सुनते हुए महसूस कर सकेंगे। आश्विन (Ashwin Srinivasan) ने पंचम की इन्हीं विशिष्टताओं को बड़ी बारीकी से पकड़ा और ऐसा इसीलिए संभव हो सका कि वे पंचम के संगीत के अनन्य भक्त रहे हैं।

रोंकिनी गुप्ता 
रहा रोंकिनी (Ronkini Gupta) का सवाल तो अब तक वो जैसे गीत गाती रही हैं ये उससे हट के कुछ अलग कोटि का गीत था और बड़ी खूबी से उन्होंने इसे निभाया। या फिर मैं ऐसे कहूँ कि उन्होंने अपनी बेहतरीन गायिकी से गीत के सहज शब्दों को भी अनमोल बना दिया। मुखड़े से अंतरे में बदलता स्केल हो या इंटरल्यूड्स में संगीत के उनकी ला ला करती मीठी तान..या अंत की चंचल चुहल..ये सब गीत का मज़ा दोगुना कर देती है। कुल मिलाकर इस गीत को सुन कर ऐसा लगता है कि पंचम, आशा व किशोर की तिकड़ी साक्षात पुनः प्रकट हो गयी हो।
तो अब आप इस गीत का आनंद लीजिए आश्विन के लिखे इन शब्दों के साथ
यूँ ही कभी हो जाता है
ख़्वाबों में दिल खो जाता है
तुझसे भी तो हो जाता है
मुझमें भी तू खो जाता है
मुझमें धड़कता है..
यूँ भी कभी हो जाता है.... 

ऐसी कृतियाँ जो एक महान संगीतकार के संगीत के मुख्य पहलुओं को चंद मिनटों में यूँ सजा दें निश्चय ही सराहने योग्य हैं। तो आइए सुनते हैं इस गीत को इस युगल जोड़ी की आवाज़ में।



आश्विन एक मँजे हुए बाँसुरी वादक हैं। चूँकि आज की पोस्ट पंचम दा पर हैं तो क्यूँ ना उनकी बाँसुरी की माहिरी पंचम की बनाई हुई कुछ सदाबहार धुनों पर सुन ली जाए।


एक शाम मेरे नाम पर पंचम के कई सुरीले गीतों की चर्चा होती रही है। उन सब की फ़ेहरिस्त यहाँ पर
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6 comments:

Swati Gupta on July 04, 2020 said...

"इस गीत को सुन कर ऐसा लगता है कि पंचम, आशा व किशोर की तिकड़ी साक्षात पुनः प्रकट हो गयी हो" सही कहा आपने। बहुत सुंदर रचना। पंचम दा के लिए इससे अच्छी श्रद्धांजलि हो ही नहीं सकती

Manish Kumar on July 04, 2020 said...

Swati बिल्कुल इसीलिए इसके बारे में लिखा। ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देने की जरूरत है। :)

विकास नैनवाल 'अंजान' on July 04, 2020 said...

मुझे संगीत का इतना ज्ञान तो नहीं है लेकिन इतना कहूँगा कि गीत बड़ा प्यारा है। बार बार सुनने का मन करता है।

Manish Kumar on July 04, 2020 said...

इस गीत ने मेरी तरह आपके भी दिल को छुआ जानकर खुशी हुई विकास।

Deeshu krishna on July 20, 2020 said...

बहुत सुंदर बहुत खूब
आपकी रचनाएं बहुत खुबसरत है
हाल ही में मैंने ब्लॉगर ज्वाइन किया है आपसे निवेदन है कि आप मेरी कविताओं को पढ़े और मुझे सही दिशा निर्देश दे
https://shrikrishna444.blogspot.com/?m=1
धन्यवाद

Virendra Pratap verma on August 14, 2020 said...

Khoobsurat

 

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