Tuesday, January 18, 2022

वार्षिक संगीतमाला 2021 Top 15 : जीतेगा जीतेगा, इंडिया जीतेगा Jeetega Jeetega from 83

वार्षिक संगीतमाला की शुरुआत तो हुई राताँ लंबियाँ से। चलिए आपको आज गीतमाला की दूसरी पेशकश में प्रेम के मैदान से ले चलें खेल के मैदान में।तीन दशक से भी ज्यादा हो गए जब पहली बार भारत ने विश्व कप क्रिकेट का वो अनूठा मुकाबला इंग्लैंड के ऐतिहासिक लार्ड्स के मैदान में जीता था और उस अप्रत्याशित जीत की यादें ताज़ा करने के लिए 83 बनाई गयी। फिल्म ऐसे समय आई जब ओमिक्रान का भय लोगों के दिलों में पाँव पसार चुका था। युवा भी इस अनदेखी विजय से उस तरह से नहीं जुड़ नहीं पाए जैसा अन्य खेल आधारित फिल्मों के साथ होता रहा है। शायद यही वज़ह रही कि फिल्म के साथ साथ उसका संगीत उतना लोकप्रिय नहीं हुआ जितना हो सकता था।
 
मैं तो फिल्म देखने के पहले ही प्रीतम द्वारा संगीतबद्ध और कौसर मुनीर के लिखे गीतों से सजे इस एलबम को सुन चुका था। पर फिल्म में बहुत सारे गीत इस्तेमाल हुए ही नहीं या हुए भी तो एक आध पंक्ति तक सीमित रह गए। इसी फिल्म का ऐसा ही गीत रहा जीतेगा जीतेगा, इंडिया जीतेगा। जीतेगा...मन में संघर्ष कर जीतने की भावना जगाता ऐसा गीत है जो अरिजीत की आवाज़ पाकर जीवंत हो उठता है।


निर्देशक कबीर खान ने फिल्म में इसका पूरा उपयोग नहीं किया तो उसकी एक वज़ह थी। सच बात तो ये है कि भारत की टीम तब वहाँ जीतने के लिए गयी ही नहीं थी। वहाँ जाने के पहले हमारा रिकार्ड विश्व कप में इतना बुरा था कि उससे पहले तक हमारी एकमात्र जीत पूर्वी अफ्रीका जैसी दूसरे दर्जे की टीम के खिलाफ़ दर्ज़ थी। टीम के मन में तो ये था कि कुछ मैच जीत लें तो बहुत है। बाहर की ट्रिप्स तब लगती नहीं थी। ऐसा पेड हॉलीडे और इंग्लैंड की गोरी मेमों से मिलने का मौका मिलना कहाँ था। पूरे दौरे में दिन में टीम के कप्तान कपिल हुआ करते थे और रात में संदीप पाटिल जो अपने युवा साथियों के मनोरंजन का बीड़ा उठाते थे। टीम की ऐसी मनःस्थिति के बीच जीतेगा इंडिया जैसा गीत निर्देशक कबीर खाँ फिल्म में डालते भी तो कहाँ? ☺

भगवान की दया से उस वक़्त ना आज का सोशल मीडिया ना दिन भर जीत का हुंकार भरते टीवी चैनल। हम जैसे क्रिकेट प्रेमियों की तब उम्मीद इतनी ही थी कि भारत बस पहले से बेहतर करे। 

लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि कौसर मुनीर का लिखा इस गीत के खेल के मैदान में देश का Winning Anthem बनने के सारे गुण मौज़ूद हैं। सहज शब्दों में भी उनकी लेखनी दिल में वो भाव भरती है जिसके लिए ये गीत लिखा गया।

आगे आगे सबसे आगे, अपना सीना तान के
आ गये मैदान में, हम साफा बांध के
आगे आगे सबसे आगे, अपना सीना तान के
आ गये मैदान में, हम झंडे गाड़ने
हो अब आ गये है, जो छा गये है़
जो दम ये ज़माना देखेगा
देखो जूनून क्या होता है, ज़िद्द क्या होती है
हमसे ज़माना सीखेगा
जीतेगा जीतेगा, इंडिया जीतेगा
है दुआ हर दिल की, है यक़ीन लाखों का
जीतेगा जीतेगा, इंडिया जीतेगा
वादा निभायें आ

सर उठा के यूँ चलेंगे आ
फिर झुका ना पाये जो ये जहाँ
डर मिटा के यूँ लड़ेंगे आ
फिर हरा ना पाये जो ये जहाँ
हो अब आ ...इंडिया जीतेगा

प्रीतम का ताल वाद्यों की मदद से ताल ठोंकता संगीत और अरिजीत की उत्साही आवाज़ उसे और असरदार बनाती है। जब जब देश की टीम किसी भी खेल में विपक्षी टीम के साथ दो हाथ करेगी ये गीत दर्शकों और खिलाडियों में जोश भरने में पीछे नहीं रहेगा। तो आइए आज सुनते हैं फिल्म 83 का ये नग्मा



अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत नीचे से ऊपर के क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी। और हाँ अगर आप सब का साथ रहा तो अंत में गीतमाला की आख़िरी लिस्ट निकलने के पहले 2019 की तरह एक प्रतियोगिता भी कराई जाएगी जिसमें अव्वल आने वालों को एक छोटा सा पुरस्कार मिलेगा। ☺☺

Sunday, January 16, 2022

वार्षिक संगीतमाला 2021 की शुरुआत राताँ लंबियाँ से Raatan Lambiyan

इस बार थोड़ी देर से ही सही वार्षिक संगीतमाला 2021 का आगाज़ हो रहा है थोड़े बदले हुए रूप में जिसके बारे में पिछली पोस्ट में आपको बता ही चुका हूँ। तो आज बात करते हैं पिछले साल के ऐसे गीत की जिसने ये सिद्ध कर दिया कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती। भाषा की दीवार अच्छी धुनों के आड़े नहीं आती। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ राता लंबियाँ की जिसने कोविड के मायूसी के माहौल में करोड़ों संगीतप्रेमियों को खुशी के कुछ पल तो दिये ही औेर साथ ही थिरकने का मौका भी।


जुबीन नौटियाल ने इस गीत को बखूबी गाया है पर इस गीत की लोकप्रियता के सच्चे हक़दार तनिष्क बागची हैं जिनके ऊपर पिछले कुछ सालों से रिमिक्स किंग का ठप्पा लगता रहा है। तनिष्क ने अपनी इस छवि को बदलने की खास कोशिश नहीं की हालांकि अपनी अच्छी मूल धुनों से भी कभी कभी वो प्रभावित करते रहे हैं। पिछले साल का मेरे लिए तुम काफी हो और उससे पहले कान्हा माने ना मुझे जरूर पसंद आए थे। मज़े की बात है कि तनिष्क ने इस गीत के बोल भी लिखे हैं। कई बार ऐसा होता है कि अगर अच्छी सी धुन हो तो उस पर बेहद सहज से बोल भी लोगों के दिल में गहरी पैठ कर जाते हैं। 

तनिष्क बागची 

फिल्म शेरशाह का ये गीत रिकार्ड तो आज से करीब तीन साल पहले हुआ था जब कोविड की धमक गूँजी भी नहीं थी। जुबीन नौटियाल युवाओं के चहेते गायक रहे हैं।  जुबीन कहते हैं कि जब ये गीत बना तभी उन्हें लगा कि ये कुछ ज्यादा ही कमाल करेगा और उनकी बात सच साबित हुई। इस गीत में जुबीन का साथ दिया है असीस कौर ने।

अब इस धुन का ही कमाल था जिससे प्रभावित होकर तंजानिया के टिक टॉकर किली पॉल ने अपनी बहन नईमा के साथ मिलकर ऐसा लिप सिंग किया कि वो वीडियो भारत में वायरल हो गया। आवारा का गीत मेरा जूता है जापानी जिस तरह रूस में लोकप्रिय हो गया था वहीं ये गीत भी तंजानिया में किली की वज़ह से भारतीय फिल्मों में लोगों की रुचि बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। वैसे क्या आपको पता है कि स्वाभाव से विनम्र और बेहद मामूली परिवेश से आने वाले किली का नाम वैसे तो यूसुफ़ है पर पिताजी वहाँ स्थित माउंट किलीमंजारो के नाम की वज़ह से उन्हें बचपन से किली बुलाया करते थे। 

पर इस गीत के चर्चे तंजानिया तक ही नहीं है बल्कि यूक्रेन की तेरह वर्षीय वॉयलिन वादक कैरोलीना प्रोटसेनको अमेरिका की सड़कों पर इस गीत की धुन को सड़कों पर बजा कर मंत्रमुग्ध दर्शकों और यू ट्यूब फॉलोवर्स की वाहवाही लूट रही हैं। कैरोलीना के माता पिता ख़ुद भी वादक रह चके हैं और अब अमेरिका में ही रहते हैं। बॉलीवुड के गीत वैसे भी विश्व के हर उस कोने में गूँजते रहे हैं जहाँ दक्षिण एशियाई मूल के लोग रहते हैं पर तनिष्क ने अपनी इस मधुर धुन से उसके आगे की भी सीमाएँ लाँघ ली हैं ।

 

रही भारत की बात तो यहाँ इस गीत पर ढेर सारे डांस वीडियो बने हैं जिन्हें देखना चाहें तो आप नेट खँगाल सकते हैं। फिलहाल अगर ये गीत अब तक आपने ना सुना हो तो यहाँ सुन लीजिए।

 

अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत नीचे से ऊपर के क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी। 

और हाँ अगर आप सब का साथ रहा तो अंत में गीतमाला की आख़िरी लिस्ट निकलने के पहले 2019 की तरह एक प्रतियोगिता भी कराई जाएगी जिसमें अव्वल आने वालों को एक छोटा सा पुरस्कार मिलेगा। ☺☺

Wednesday, January 05, 2022

एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमाला 2021

आप सोच रहे होंगे कि हर साल की तरह एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमाला क्यूँ नहीं शुरु हुई। दरअसल कोविड के इस दौर में पिछले साल से कई बहुप्रतीक्षित फिल्में रिलीज़ ही नहीं हो पायीं। ज्यादातर फिल्में OTT प्लेटफार्म पर रिलीज़ हुईं। इन फिल्मों में कई बार गीत होते ही नहीं या होते भी हैं तो प्रचारित नहीं किये जाते। ऐसे हालातों में साल की सारी फिल्मों के गीतों को ढूँढना और सुनकर एक क्रम में सजाना एक बड़ा ही दुरूह कार्य हो गया है।


वैसे भी पिछले साल का फिल्म संगीत भी कुछ खास उल्लेखनीय नहीं रहा है। आधा दर्जन फिल्मों को छोड़ दें तो बाकी कुछ ऐसा खास नहीं कि पच्चीस की गिनती भी पूरी की जा सके। सच तो ये है कि कई सिंगल्स फिल्मी गीतों से बेहद प्रभावी बने हैं इसलिए इस साल उनका जिक्र करना अब जरूरी सा लगने लगा है। इसलिए हर साल की तरह जैसे मेरी संगीतमाला एक एक कर पच्चीस सीढ़ियाँ चढ़ती थी वैसा इस साल नहीं होगा। 2021 में कुछ फिल्मों के गीत श्रवणीय बन पड़े हैं जिनमें शेरशाह, अतरंगी रे, मीनाक्षी सुंदरेश्वर, पगलेट और तिरासी का विशेष उल्लेख करना चाहूँगा। ऐसे हालातों में हो सकता है कि मेरी गीतमाला दस गीतों तक ही सिमट जाए।

वैसे आपकी नज़र में इन फिल्मों के आलावा कोई ऐसा एल्बम हो जिसे शायद मैं ना सुन पाया हूँ तो जरूर बताएँ।



 

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