Sunday, February 27, 2022

वार्षिक संगीतमाला Top Songs of 2021 मन भरया Man Bharryaa

लता मंगेशकर जैसे महान कलाकार के गुजर जाने की वज़ह से मैं अपनी गीतमाला को आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं था। रह रह कर उनके गाए गीत और उनसे जुड़ी बातें में मन में उमड़ घुमड़ रही थीं। इसलिए मैंने इस गीतमाला को ढाई हफ्तों का एक विराम दिया था। आज इस सिलसिले को फिर से आगे बढ़ा रहा हूँ। पिछले साल के पंद्रह शानदार गीतों की फेरहिस्त में दस की चर्चा आपसे पिछले महीने हो ही चुकी है।अब अब सिर्फ पाँच गीत बचे हैं। हालांकि इस बार वार्षिक संगीतमाला में किसी क्रम से नहीं बज रहे पर ये पाँचों गीत मेरे बेहद प्रिय हैं।

कुछ गीत ऐसे होते हैं जिनमें निहित भावों को हम फिल्म की कहानी के इतर भी अपने आस पास की ज़िंदगी से जोड़ लेते हैं। फिल्म शेरशाह के गीत मन भरया को आप ऐसे ही गीत की श्रेणी में रख सकते हैं। ज़िदगी के अलग अलग पड़ावों में हम सबने किसी ना किसी करीबी को खोया ही होगा। कुछ लोग तो उस दुख के साथ जीना सीख लेते हैं तो कुछ उस व्यक्ति के चले जाने से आई शून्यता को आजीवन भर नहीं पाते। इस गीत की पंक्तियाँ ऐसे ही लोगों के मन की व्यथा व्यक्त करती हैं।

ये फिल्म कैप्टन विक्रम बात्रा के जीवन पर बनी फिल्म है। मरणोपरान्त परम वीर चक्र से सम्मानित विक्रम बात्रा के कारगिल युद्ध में  पराक्रम के किस्से पढ़कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जब देश के लिए शहीद होते हैं तो हम सभी की आँखें नम होती हैं, सम्मान में सर झुक जाता है पर फिर हम सब भूल कर अपने काम में लग जाते हैं।  विक्रम  तो पच्चीस साल की अल्पायु में  ही शहीद  हो गए। अपने जवान बेटे या नवविवाहिता के लिए अपना पति खो देना कितना कष्टप्रद है ये शायद वही समझ सकें जिसने वो दर्द सहा हो।  

पंजाबी संगीत उद्योग में बी प्राक का नाम हमेशा सुरीले और संवेदनशील नग्मों के लिए लिया जाता रहा है। हिंदी फिल्मों में वो तेरी मिट्टी गाकर सबके चहेते बन गए। सच तो ये है कि ये गीत बी प्राक ने मूलतः शेरशाह के लिए संगीतबद्ध नहीं किया था। अपनी प्रेमिका के लिए उलाहना देते इस गीत को तब भी जानी ने ही लिखा था। मुखड़ा भी वही था पर अंतरे थोड़े अलग थे। संगीत संयोजन भी गिटार पर आधारित था। 2017 में स्पीड रिकार्डस के द्वारा रिलीज़ वो सिंगल काफी लोकप्रिय हुआ था।

धर्मा प्रोडक्शन्स के अज़ीम दयानी और करण ज़ौहर को ये गीत इतना पसंद आया कि 2019 में वो गीत उन्होंने स्पीड रिकार्ड्स से खरीद लिया। गाने के भावनात्मक असर को देखते हुए ये तय था कि इसे किसी खास फिल्म के लिए इस्तेमाल किया जाएगा जहाँ ऐसा माहौल बनाने की जरूरत होगी और दो साल के बाद जब शेरशाह अस्तित्व में आई तो ये गीत वहाँ सहज ही फिट हो गया।


शेरशाह की कहानी के अनुरूप ढालने के लिए गीत के बोलों और संगीत के मूड में बदलाव किया गया। फिर राँची से ताल्लुक रखने वाले मशहूर अरेंजर आदित्य देव की सेवाएँ ली गयीं जो कि तेरी मिट्टी का भी हिस्सा थे। बी प्राक की गहरी दमदार आवाज़ ऐसे मन को गीला करने वाले गीतों में फिट बैठती है। तेरी मिट्टी के संगीत संयोजन की तरह यहाँ भी आदित्य ने गीत की शुरुआत और मध्य में उदासी का रंग गहरा करने  के लिए तार वाद्यों का इस्तेमाल किया। तो आइये सुनते है ये गीत 


गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग बताने का वक़्त पास आ रहा है। पर उससे पहले आप इन गीतों में अपनी पसंद का क्रम भी सजा लीजिए एक इनामी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए।

Tuesday, February 08, 2022

वार्षिक संगीतमाला Top Songs of 2021 लहरा दो लहरा दो, सरकशीं का परचम लहरा दो Lehra Do

जो गीत सिनेमा की पटकथा से निकल कर आते हैं वो तभी जनता तक पहुँच पाते हैं जब फिल्म सफल होती है। 1983 विश्व कप क्रिकेट में भारत की अप्रत्याशित जीत पर बनी फिल्म 83 के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। प्रीतम का संगीत और कौसर मुनीर के लिखे गीत औसत से अच्छे थे पर उतना सुने नहीं गए जितने के वे हक़दार थे। जीतेगा जीतेगा इंडिया जीतेगा तो फिल्म की कहानी का हिस्सा नहीं बन पाया पर इसी फिल्म का अरिजीत सिंह द्वारा गाया गीत लहरा दो फिल्म में था और आज मेरी इस पिछले साल के शानदार गीतों की परेड में भी शामिल हो रहा है।


ये गीत फिल्म में तब आता है जब भारत उस प्रतियोगिता में करो और मरो वाली स्थिति में आ गया था। जितनी बात फाइनल में कपिल के पीछे भागते हुए विवियन रिचर्डस का कैच लेने की जाती है उतने ही गर्व से कपिल की उस पारी को याद किया जाता है जो उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली थी। जो क्रिकेट के शौकीन नहीं हैं वो थोड़ा असमंजस में जरूर पड़ेंगे कि आख़िर जिम्बाब्वे जैसे कमज़ोर क्रिकेट खेलने वाले देश के साथ खेली गयी पारी पर इतनी वाहवाही क्यूँ? तो थोड़ा तफसील से इसकी वजह बताना चाहूँगा आपको क्यूँकि तभी आप इस गीत का और आनंद ले पाएँगे।

83 में भारत की टीम को एकदिवसीय क्रिकेट में बेहद कमज़ोर टीमों में ही शुमार किया जाता था जिसने तब तक विश्व कप कि किसी भी प्रतियोगता में सिर्फ एक मैच ही जीता था। पर उस विश्व कप में भारत पहले मैच में वेस्ट इंडीज़ जैसे देश को हराकर सनसनी फैला दी थी। वैसा ही कारनामा जिम्बाब्वे ने आस्ट्रेलिया को हरा कर रचा था। तब ग्रुप की सारी टीमें एक दूसरे से दो दो मैच खेलती थीं। दूसरे मैच में जिम्बाब्वे को हराने के बाद अपने तीसरे और चौथे मैच में भारत, आस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज़ से बुरी तरह हारा था। 

कई खिलाड़ियों की चोट से जूझती भारतीय टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ़ अपने अगले मैच में मजबूत प्रदर्शन देने के लिए उतरी थी। कपिल ने टॉस जीता और बल्लेबाजी करने का फैसला लिया और तरोताजा होने के लिए गर्म पानी से स्नान का आनंद लेने चल दिए। इधर वो नहा रहे थे उधर भारतीय बल्लेबाज धड़ाधड़ आउट होते जा रहे थे। गावस्कर, श्रीकांत और संदीप पाटिल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने तो खाता खोलने की भी ज़हमत नहीं उठाई थी। नौ रन पर चार विकेट और फिर 17  के स्कोर पर जब पाँचवा विकेट गिरा कपिल तब भी नहाने में तल्लीन थे। बाहर से लगातार आवाज़ दी जा रही थी कि पाजी  निकल लो। कपिल हड़बड़ाकर भींगे बालों में ही निकले और उसके बाद उन्होने 175 रनों की नाबाद पारी खेल कर भारत को मैच में वापसी दिलायी।

फिल्म में ये गीत ठीक इस मैच के पहले आता है। उत्साह बढ़ाती भीड़ और लहराते झंडों के बीच अरिजीत सिंह की दमदार आवाज़ उभरती हुई जब कहती है

अपना है दिन यह आज का, दुनिया से जाके बोल दो...बोल दो
ऐसे जागो रे साथियों, दुनिया की आँखें खोल दो...खोल दो
लहरा दो लहरा दो, सरकशीं का परचम लहरा दो
गर्दिश में फिर अपनी, सरजमीं का परचम लहरा दो

तो मन रोमांचित हो जाता है।  गर्दिश में पड़ी टीम को कप्तान की आतिशी पारी उस मुहाने पर ला खड़ा करती है जहाँ से विश्व विजेता बनने का ख़्वाब आकार लेने लगता है। पूड़ी टीम कपिल की इस पारी को उस विश्व कप का टर्निंग प्वाइंट मानती है। तो आइए सुनते हैं ये गीत जिसमें प्रीतम ने अंतरों को कव्वाली जैसा रूप दिया है

हो हाथ धर के बैठने से, क्या भला कुछ होता है
हो हाथ धर के बैठने से क्या भला कुछ होता है
जा लकीरों को दिखा क्या ज़ोर बाजू होता है
हिम्मत-ए-मर्दा अगर हो संग खुदा भी होता है
जा ज़माने को दिखा दे खुद में दम क्या होता है

लहरा दो लहरा दो, सरकाशी का परचम लहरा दो
गर्दिश में फिर अपनी, सर ज़मीन का परचम लहरा दो
लहरा दो लहरा दो...परचम लहरा दो
लहरा दो लहरा दो...लहरा दो लहरा दो
लहरा दो लहरा दो...लहरा दो लहरा दो..


अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत किसी  क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी। 

Friday, February 04, 2022

वार्षिक संगीतमाला Top Songs 2021 रत्ती रत्ती रेज़ा रेज़ा, जो है तेरा ले जाना Ratti Ratti

अतरंगी रे की ही तरह मीनाक्षी सुंदरेश्वर बतौर एलबम मुझे काफी पसंद आया और इसीलिए इस फिल्म के भी कई गीत इस वार्षिक संगीतमाला में शामिल हैं। आज इसके जिस गीत की बात मैं करने जा रहा हूँ उसे आप Long Distance Relationship पर बनी इस फिल्म का आज की शब्दावली में ब्रेक अप सॉन्ग कह सकते हैं। ये गीत है रत्ती रत्ती रेज़ा रेज़ा, जो है तेरा ले जाना.....।  

मन केसर केसर का जिक्र करते हुए मैंने आपको बताया था कि इस फिल्म के संगीतकार जस्टिक प्रभाकरन तमिल हैं और हिंदी फिल्मों में संगीत देने का ये उनका पहला मौका था। आप ही सोचिए कहाँ  हिंदी पट्टी से आने वाले खालिस बिहारी राजशेखर और कहाँ जस्टिन (जिन्हें तमिल और अंग्रेजी से आगे हिंदी का क, ख, ग भी नहीं पता) ने आपस में मिलकर इतना बेहतरीन गीत संगीत रच डाला। 


मैं इनके बीच की कड़ी ढूँढ ही रहा था कि राजशेखर का एक साक्षात्कार सुना तो पता चला कि वो सेतु थे फिल्म के युवा निर्देशक विवेक सोनी। फिल्म के गीत संगीत पर तो लॉकडाउन में काम चलता रहा पर स्थिति सुधरने के बाद ये तिकड़ी साथ साथ ही सिटिंग में बैठती रही। राजशेखर बताते हैं कि उन्हें बड़ी दिक्कत होती थी जस्टिन को  गीतों के भाव समझाने में। 

राजशेखर का हाथ अंग्रेजी में तंग था और जस्टिन अंग्रेजी के शब्दों का उच्चारण भी तमिल लहजे में करते थे। जब राजशेखर ने रत्ती रत्ती रेज़ा रेज़ा मुखड़ा रचा तो उसे सुनकर जस्टिन का मासूम सा सवाल था What ..meaning ? अब राजशेखर अगर शाब्दिक अनुवाद bits & pieces बताएँ तो शब्दों के पीछे की भावनाएँ गायब हो जाती थीं तो वे ऐसे मौकों पर चुप रह जाते। ऐसे में विवेक दुभाषिए का रोल अदा करते थे।

जस्टिन प्रभाकरन , विवेक सोनी और राजशेखर 

फिल्म के गीतों पर काम करते करते जस्टिन को राजशेखर ने हिंदी के तीन चार शब्द तो रटवा ही दिए। एक मज़ेदार बात उन्होने ये सिखाई कि जस्टिन If someone asks you about lyrics you have to just say बहुत अच्छा 😀😀।

फिल्म की कथा शादी के बाद अलग अलग रह रहे नवयुगल के जीवन से जुड़ी है। वो कहते हैं ना कि जिनसे प्यार होता है उनसे उतनी जल्दी नाराज़गी भी हो जाती है। पास रहें तो थोड़ी नोंक झोंक के बाद मामला सलट जाता है पर दूरियाँ कभी कभी कई ऐसी गलतफहमियों  को जन्म देती हैं जो नए नवेले रिश्ते की नर्म गाँठ को तार तार करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगाती। 

एक बार मन टूट जाए फिर उस शख़्स से लड़ने की भी इच्छा नहीं होती। इसलिए राजशेखर लिखते हैं

जाना अगर है तो जा, मुझे कुछ नहीं कहना
ना यकीं हो रहा, संग हम दोनो का था 
बस इतना ही क्या
क्या ही कहें, क्या ही लड़ें
जब प्यार ही ना रहा

गीत का मुखड़ा तो क्या खूब लिखा है राजशेखर ने 

रत्ती रत्ती रेज़ा रेज़ा, जो है तेरा ले जाना
यादें बातें दिन और रातें, सब ले जा तू

और अंतरे में बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध ले की तर्ज पर  जीवन में  move on करने की बात करते हैं।

क्या करें कि जल्दी-जल्दी, तुझे भूल जाएँ अब
साथ वाली सारी शामें, याद फिर ना आए अब 
छोटी-छोटी यादों में हम अटके रहें क्यूँ 
पीछे जाती सड़कों पे भटके रहें क्यूँ 
जो धागा-धागा उधड़ा है -क्या ही है बचा 
जो रेशा रेशा पकड़ा है - कर दे ना रिहा

रत्ती रत्ती..सब ले जा तू

जस्टिन गीत की शुरुआत एक उदास करती धुन से करते हैं। गीत में मुख्यतः बाँसुरी और गिटार का प्रयोग हुआ है। इस युगल गीत को गाया है अभय जोधपुरकर और श्रेया घोषाल की जोड़ी ने। श्रेया तो संगीतप्रेमियों के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं। जहाँ तक अभय का सवाल है वे  शाहरुख की फिल्म ज़ीरो के गीत मेरे नाम तू में अपनी गायिकी के लिए काफी सराहे गए थे। उस वक्त मैंने यहाँ उनके बारे में लिखा भी था। 

अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत किसी  क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी। 

Wednesday, February 02, 2022

वार्षिक संगीतमाला Top Songs of 2021 जैसे रेत ज़रा सी Rait Zara Si

राँझणा और तनु वेड्स मनु जैसी कामयाब फिल्में बनाने वाले आनंद राय जब एक बार फिर धनुष को अपनी नयी फिल्म अतरंगी रे में सारा और अक्षय कुमार के साथ ले कर आए तो आशा बँधी कि फिल्म कुछ वैसा ही जादू दोहरा पाएगी। धनुष के शानदार अभिनय के बावज़ूद अपनी लचर पटकथा की वज़ह से फिल्म तो कोई कमाल दिखला नहीं सकी जैसी आशा थी अलबत्ता संगीतकार ए आर रहमान एलबम में अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह सफल हुए। यही वज़ह है कि इस फिल्म के तीन गीत पिछले साल के शानदार गीतों की इस संगीतमाला में अपनी जगह बना पाए हैं।



जहाँ तक रेत ज़रा सी का सवाल है तो यहाँ क्या मेलोडी रची है रहमान साहब ने। अगर आप दूर से भी इस गीत को सुनें तो सहज ही धुन की मधुरता आपको इसे गुनगुनाने पर मजबूर कर देगी। ज्यादातर धुनें पहले बनती हैं शब्द बाद में लिखे जाते हैं। जब भी कोई धुन बनती है तो संगीतकार या तो कच्चे बोलों से काम चलाता है या फिर अनर्गल बोलों का सहारा लेता है जिसे अंग्रेजी में Gibberish कहा जाता है। नेट पर मुझे इस गीत का ऐसा ही आडियो मिला जिसमें रहमान इस धुन को कुछ ऐसे ही बोलों से विकसित कर रहे हैं। तो सुनिए आप भी 

   

पर आकाश में सिर्फ चाँद हो तो क्या रात अपनी सारी खूबसूरती बिखेर पाएगी? नहीं ना उसे तो ढेर सारे तारों की टिमटिमाहट भी चाहिए। शब्दों की यही जगमगाहट गीतकार इरशाद कामिल लाए हैं और उस चमक को अपनी गायिकी से हम तक पहुँचाया है अरिजीत सिंह और शाशा तिरुपति की युगल जोड़ी ने।

इस गीत के मुखड़े को सुनकर  बचपन के वो दिन आ जाते हैं  जब रेत के टीले पर चढ़ते उतरते मस्ती करते हम बच्चे अपनी हथेलियों में मुट्ठी भर भर कर रेत का घर बनाने कर लिए ले जाया करते थे पर हर कदम के साथ रेत उँगलियों के कोनों से गिरती जाती और लक्ष्य तक पहुँचते हुए ज़रा सी ही रह जाती थी। 

इस फिल्म में धनुष और सारा का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही है जो रेत की तरह दिल रूपी हथेली से कभी उड़ता तो कभी फिसलता चला जाता है। इन भावों को कितनी सरलता से कामिल कुछ यूँ व्यक्त करते हैं ...रोज़ मोहब्बत पढ़ता है, दिल ये तुमसे जुड़ता है...हवाओं में यूँ उड़ता है, हो जैसे रेत ज़रा सी....हाथ में तेरी खुशबू है, खुशबू से दिल बहला है...ये हाथों से यूँ फिसला है, हो जैसे रेत ज़रा सी


होना तेरा होना, पाना तुमको पाना
जीना है ये माना, पल भर में सदियां
है सदियों में, जीना है ये माना
हाथ में तेरी खुशबू है, खुशबू से दिल बहला है
ये हाथों से यूँ फिसला है, हो जैसे रेत ज़रा सी
रोज़ मोहब्बत पढ़ता है, दिल ये तुमसे जुड़ता है
हवाओं में यूँ उड़ता है, हो जैसे रेत ज़रा सी

ये हलचल, दिल की ये हलचल
बोले आज आस पास तू मेरे
बिखरा हूँ मैं तो, कुछ पल हवा में
तेरे भरोसे को थामे
चलना भी है बदलना भी है
तुझमें ही तो ढलना भी है

दिल थोड़ा जज़्बाती है, भर जाता है बातों से
ये फिर छलके यूँ आँखों से, हो जैसे रेत जरा सी
हाथ में तेरी खुशबू है, सच पुछो तो अब यूँ है
तू चेहरे पे मेरे ठहरा, हो जैसे रेत ज़रा सी


अरिजीत तो दर्द भरे प्रेम गीतों के बेताज बादशाह हैं ही शाशा तिरुपति ने भी दिल थोड़ा जज़्बाती है.. गाते हुए उनका बखूबी साथ दिया है। शाशा का अरिजीत के साथ गाया ये तीसरा युगल गीत हैं और वो मानती हैं कि अरिजीत के साथ उनकी आवाज़ गानों में फबती है। रहमान के बारे में उनका कहना है कि वो गीत बनाते समय ही मन में एक प्रारूप बना लेते हैं हैं कि ये गीत किससे गवाना है? रहमान ने इस गीत में ताल वाद्यों के साथ बाँसुरी और सरोद का इस्तेमाल किया है। करीम कमलाकर की बजाई बाँसुरी गीत सुनने के बाद में भी मन में बजती रहती है। रहमान का गीत है तो अंतरों के बीच कोरस का होना तो स्वाभाविक ही है।

तो आइए सुनें इनकी आवाज़ में ये मीठा सा नग्मा।

 

वार्षिक संगीतमाला 2021 में अब तक

अगर आप सोच रहे हों कि मैंने हर साल की तरह इस गीत की रैंक क्यूँ नहीं बताई तो वो इसलिए कि इस साल परिवर्तन के तौर पर गीत किसी  क्रम में नहीं बजेंगे और गीतों की मेरी सालाना रैंकिंग सबसे अंत में बताई जाएगी। 

 

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