Saturday, February 16, 2008

वार्षिक संगीतमाला २००७ : पायदान ७ - मैं जहाँ रहूँ, मैं कहीं भी हूँ, तेरी याद साथ है

वार्षिक गीतमाला की ७वीं पायदान पर गीत वो जिसमें पहली बार गीतकार जावेद अख्तर ने काम किया है संगीत निर्देशक हीमेश रेशमिया के साथ है। मैंने इस चिट्ठे पर कई बार कहा है कि मुझे हीमेश की गायन शैली कभी पसंद नहीं रही, पर बतौर संगीत निर्दैशक मुझे कई फिल्मों में उनका काम पसंद आया है।

अब इसी गीत को लें, नमस्ते लंदन के इस गीत में जावेद साहब के खूबसूरत बोलों पर कमाल की धुन बनाई है हीमेश रेशमिया ने। जैसे ही गीत की मधुर धुन के साथ राहत का स्वर गीत के मुखड़े में आता है, आपको लग जाता है कि इस गीत में कुछ खास बात है। इस गीत से मेरी पहली मुलाकात कोलकाता में टैक्सी यात्रा के दौरान व्यस्त ट्राफिक के बीच बगल की गाड़ी में बजते एफ एम चैनल से हुई और तभी से ये मेरा चहेता बन गया।


राहत फतेह अली खाँ की गायिकी का अंदाज मुझे हमेशा ही भाता रहा है। चाहे 'पाप' में गाया उनका गीत लगन लागी तुझसे मन की लगन.... हो या 'कलयुग ' के लिए गाया गीत जिया धड़क धड़क जाए... या पिछले साल 'ओंकारा ' में गाया उनका गीत नैना डस लेंगे, वो हर साल एक ना एक गीत ऍसा अवश्य देते हैं जो दिल के आर पार हो जाता है। इसमें कोई शक नहीं कि वो अपनी गायिकी से अपने चाचा नुसरत फतेह अली खान का नाम रोशन कर रहे हैं। इस गीत में उनका साथ दिया है कृष्णा ने जो ऊँचे सुरों को बड़े कौशल से निभा जाते हैं।

पर अगर शब्दों में जोर नहीं रहता तो ये गायक भी क्या कर पाते। जावेद साहब ने अपने सहज बोलों से हम सभी के मन को छुआ है।
अब आप ही बताएं भला यादें किस मनुष्य का पीछा नहीं करतीं ? तनहाई का कौन शिकार नहीं होता?
वो शेर याद है ना आपको निदा फाज़ली साहब का

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाईयों का शिकार आदमी

जिंदगी का मुकद्दर सफ़र दर सफ़र
आखिरी साँस तक बेकरार आदमी

तो जनाब ये बेकरारी और तनहाई आप के दिल में एक नासूर की तरह चुभ रही है तो ये गीत आपके लिए ही है..शायद आपको दिल की आवाज़ प्रतिध्वनित होकर सुनने को मिले

मैं जहाँ रहूँ, मैं कहीं भी हूँ
तेरी याद साथ है
किसी से कहूँ, के नहीं कहूँ
ये जो दिल की बात है
कहने को साथ अपने इक दुनिया चलती है
पर छुपके इस दिल में तनहाई पलती है
बस याद साथ है
तेरी याद साथ है...तेरी याद साथ है...तेरी याद साथ है...
मैं जहाँ रहूँ.....साथ है

कहीं तो दिल में यादों की इक सूली गड़ जाती है
कहीं हर इक तसवीर बहुत ही धुंधली पड़ जाती है
कोई नई दुनिया के रंगों में खुश रहता है
कोई सब कुछ पा के भी, ये मन ही मन कहता है
कहने को साथ अपने इक दुनिया चलती है
पर छुपके इस दिल में तनहाई पलती है
बस याद साथ है
तेरी याद साथ है...तेरी याद साथ है...तेरी याद साथ है...

कहीं तो बीते दिल की जड़ें दिल में ही उतर जाती हैं
कहीं जो धागे टूटे तो मालाएँ बिखर जाती हैं
कोई दिल में जगह नई, बातों के लिए रखता है
कोई अपनी पलकों पर, यादों के दीये रखता है
.कहने को साथ अपने इक दुनिया चलती है
पर छुपके इस दिल में तनहाई पलती है
बस याद साथ है
तेरी याद साथ है...तेरी याद साथ है...तेरी याद साथ है...




इस संगीतमाला के पिछले गीत

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9 comments:

डॉ. राम चन्द्र मिश्र on February 16, 2008 said...

मुझे भी ये गीत बहुत पसन्द है, शुक्रिया विडियो दिखाने के लिये भी।

नितिन बागला on February 16, 2008 said...

भाई, २००७ का ये मेरा सबसे पसंदीदा गाना है। और भी टची लगता है जब आप इसे इसके मूल वीडियो के साथ सुनें..अपने जो वीडियो लगाया है वो मूल वीडियो नही है।
फिल्म में यह गाना शुरुआत में फिल्म का नाम आने के समय आता है, लंदन की भीड में खोये खोये चेहरों पर (खासकर एशियाई)फोकस करता हुआ।
अगर घर से दूर रहते हों तो यह गाना लम्बे समय तक चुभता है।

अजय यादव on February 17, 2008 said...

मनीष भाई! आपने सच कहा कि यादें किस का पीछा नहीं करतीं? बहुत सुंदर गीत है.

- अजय यादव
http://merekavimitra.blogspot.com/
http://ajayyadavace.blogspot.com/
http://intermittent-thoughts.blogspot.com/

कंचन सिंह चौहान on February 18, 2008 said...

mujhe bhi pasand hai ye geet.
shukriya

charu on February 18, 2008 said...

sahi kaha aapne ki yaadein kiska peecha nahi karti hain. aur agar yaadein aise vyakti se judi hoon jisne aapke pyaar ke badle dhokha diya ho to chubhati bhi hain. ye gaana himesh reshamiya ka sangeet nirdeshak ke roop me sabse accha gaana hai. aapne shayad zee t.v. ke saregamapa par dekha hoga. is geet ko wahan mussarrat abbas ne bade hi khoobsurat andaaz me gaaya tha.

Manish on February 18, 2008 said...

राम चंद्र मिश्र, कंचन,अजय गीत को पसंद करने का शुक्रिया

नितिन आपने सही कहा घर से दूर रहने के संबंध में। आपकी प्रतिक्रिया पढ़ने पर मैंने मूल वीडिओ तलाश करने की कोशिश की पर सफल नहीं हो पाया। वैसे मैंने ये फिल्म अभी तक देखी नहीं है।

चारु हाँ ये तो है ही। करीबी लोगों से धोखा होता है तो मन टूट सा जाता है।

Manish on February 18, 2008 said...

और हाँ चारू सा रे गा मा पर मैंने इस गीत को मुसरर्त को गाते सुना था। बेहतरीन परफारमेन्स थी उसकी। इस गीत के बाद हीमेश ने भी मुखड़े को गुनगुनाया था।

नितिन बागला on February 19, 2008 said...

http://www.youtube.com/watch?v=zug_E0Biy7g

मनीष, गाने के मूल वीडियो का लिंक...(हालांकि बहुत साफ नही है)

Phoenix Rises on March 09, 2008 said...

I like this song a lot too! Even I think that Himesh bhai is a better music composer than singer.

 

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