Monday, July 16, 2012

कावा वा नागारेते डोको डोको इकू नो- हाना.. दिल को छूता जापानी लोकगीत

जापान के इस दक्षिण पश्चिमी भाग आए हुए लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं। भोजन को छोड़ दें अब तक इस देश में रहना एक बेहद सुखद अनुभव रहा है। इतनी बातें हैं बताने को यहाँ के बारे में पर उन सबको सिलसिलेवार ढंग से रखने के लिए वक़्त नहीं है। अपनी इस व्यस्तता के बीच अगर आज आपसे मुख़ातिब हो पाया हूँ तो अपनी जापानी मैम के कारण। हम यहाँ आए तो उर्जा संरक्षण तकनीक के बारे में जानने के लिए हैं पर उसके साथ हमारी सहूलियत के लिए काम भर की जापानी भाषा भी सिखाई जा रही है। वैसे आप सहज कल्पना कर सकते हैं कि इस उम्र में वर्णमाला व १,२,३,४ पढ़ना कैसा लग सकता है। पर ये जो जापानी मैम है ना वो हमें सारी गिनती गिनवा के ही दम लेती हैं। इनकी क्लास देर रात को लगती है पर मजाल है जो हमें पहले छोड़ दें। सो वो हँस हँस कर बोलती हैं और हम तोते की तरह रटते हैं। पिछली क्लास में दाएँ बाएँ वाले दिशा ज्ञान को समझाने के लिए पूरी क्लॉस को ही ट्रेन बनाकर छुक छुक गाड़ी वाला खेल खिला दिया। पर उनकी बताई टूटी फूटी जापानी से ही हम यहाँ की सड़कों पर अपरिचितों के चेहरों पर मुस्कुराहट या कई बार तो हँसी के फव्वारे ले आते हैं।

हमारी मैम हमें हर कक्षा के बाद हमें एक जापानी गीत सुनाती है। ऐसा ही एक गीत था हाना जो पहली बार सुनकर ही हम सबको खूब पसंद आया। जापानी में हाना का मतलब होता है 'फूल'। हाना एक लोकगीत है जिसकी उत्पत्ति जापान के सुदूर दक्षिण के द्वीप समूह ओकीनावा (Okinava) में हुई । इसलिए इस गीत की धुन पश्चिमी रंग में रँगे आज के जापानी पॉप से सर्वथा अलग है और एक भारतीय मन को सहज ही अपनी ओर खींच लेती है। अपने मन को फूलों की तरह खिलाने की बात करता ये गीत रिमी नात्सुकावा (Rimi Natsukawa) की आवाज़ में बेहतरीन लगता है। रिमी के बारे में तो आप यहाँ जान सकते है्। इस गीत के बोलों का मैंने हिंदी में भावानुवाद करने की कोशिश की है। पर बिना अर्थ समझे भी रिमी की गायिकी दिल को छू जाती है। वो कहते हैं ना संगीत की कोई सरहदें नहीं होती।

तो आइए सुनते हैं ये गीत

Kawa wa nagarete doko doko iku no
Hito mo nagarete doko doko iku no
Sonna nagare ga tsuku koro niwa
Hana toshite hana toshite sakassete aguetai
Nakinasai Warainasai
Itsuno hi ka itsu no hi ka hana wo sakasoyo

सोचो तो ये नदी कहाँ जाती है ? या यूँ कहूँ कि हमारा नदी की तरह बहता जीवन ही आखिर हमें कहाँ ले जाता है ? जब तक वो नदी अपने गन्तव्य तक नहीं पहुँच जाती उसे फूलों की तरह खिलने दो। इस जीवन में हँसना भी है और रोना भी पर अपने हृदय को हमेशा फूलों की तरह खिलाकर रखो।
Namida nagarete doko doko iku no
Ai mo nagarete doko doko iku no
Sonna nagare wo kono uti ni
Hana toshite hana toshite Mukaette aguetai
Nakinasai Warainasai
Itsuno hi ka itsu no hi ka hana wo sakasoyo

ये आँसू बह कर कहाँ जाते हैं? प्यार का बहाव हमें कहाँ ले जाता है? मैं इस बहाव को अपने दिल में समा लेना चाहती हूँ। फूलों की तरह खिलकर उनका स्वागत करना चाहती हूँ। इस जीवन में हँसना भी है और रोना भी पर अपने हृदय को हमेशा फूलों की तरह खिलाकर रखो।

Hana wa hana toshite warai mono dekiru
Hito wa hito toshite namida mo nagassu
sorega shizen no utananossa
kokoro no naka ni kokoro no naka ni hana wo sakasoyo
Nakinasai Warainasai
itsu itsu mademo itsu itsu mademo
hana wo tsukamoyo
Nakinasai Warainasai
itsu itsu mademo itsu itsu mademo
hana wo tsukamoyo
Nakinasai Warainasai
Itsuno hi ka itsuno hi ka hana wo tsukamoyo


एक फूल, फूल की तरह हँस सकता है। एक आदमी, आदमी की तरह रो सकता है। सुख और दुख तो प्रकृति के दिए हुए जीवन के सत्य हैं। बस अगर हमारा मन पुष्पित रहे और जीवन की हर परिस्थिति में अपने अंदर के इस फूल को हम अपने से अलग ना होने दें इससे अच्छा और क्या हो सकता है।

तो अगली पोस्ट तक सारे मित्रों को देवामाता यानि see you later..
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17 comments:

सुशील on July 16, 2012 said...

थोडी़ सी जापानी
हमको भी आ गयी !
बहुत अच्छा है!!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी on July 16, 2012 said...

उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन on July 16, 2012 said...

बहुत बढिया! मयखाना वाले मुनीश भाई भी अभी जापान में ही हैं। देखिये शायद वहाँ रहते आप दोनों की मुलाक़ात हो सके।

Prashant Suhano on July 16, 2012 said...

:)

दिलीप कवठेकर on July 17, 2012 said...

Pahli Baar suna, magar sureelaa.

दिलीप कवठेकर on July 17, 2012 said...

Alag hi Chord lagi hai. ajab.

Abhishek Ojha on July 17, 2012 said...

badhiya :)

दीपिका रानी on July 17, 2012 said...

वापस लौटकर आप यहां पर जापानी क्लास लगा लीजिए..:)

expression on July 17, 2012 said...

वाह...
बहुत बढ़िया...
मेरा बेटा पागल है जेपनीस सीखने के लिए....स्क्रिप्ट मुश्किल है...बाकी हिंदी से जेपनीज अनुवाद तो कर लेता है.कोई साईट है क्या जो सिखा दे बाकयेदा???

आभार
अनु

Ashok Kumar Mehra on July 17, 2012 said...

bahoot aanand aa raha hain

प्रवीण पाण्डेय on July 18, 2012 said...

बहुत ही सुन्दर गीत, संगीत और स्वर।

JAGDISH said...

बहुत अछा लगा PHUR कर. आज कल देर रात ऑफिस में रुकना पड़ता है. थक जाता हु तो तुम्हारा ब्लॉग पसंदीदा में डाल रखा है. देख लेता हु. बहुत अछा लगा. मज़ा आ गया.

Manish Kumar on July 24, 2012 said...

Anu ji maine jyada explre to nahin kiya hai par Japanese Brodcasting Service ki hindi sewa mein mujhe aisi hi ek series sunne ko mili. Link ye hai

http://www.nhk.or.jp/lesson/hindi/

अर्शिया अली on July 25, 2012 said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Manish Kumar on August 13, 2012 said...

सुशील जी जान कर खुशी हुई।

चतुर्वेदी जी पोस्ट पसंद करने के लिए आभार !

अरोड़ा सर, प्रवीण, अशोक जी , अभिषेक ये जापानी लोकगीत आप सबको पसंद आया जान कर खुशी हुई।

दिलीप जी सही कह रहे हैं अलग तरह के ऊँचे सुर और उसपर भी गजब की पकड़।

दीपिका क्लॉस तो लगा लें पर ये बताइए आप पढ़ने आ रही हैं क्या :)

Manish Kumar on August 13, 2012 said...

अनुराग भाई मुनीश जी से तोक्यो में तो मिलना नहीं हो पाया पर टेलीफोन के माध्यम से रेडिओ जापान के लिए एक लंबी बातचीत हुई जिसकी रिकार्डिंग यहाँ लगाई है।

ravinder dhillon on September 21, 2012 said...

dear sir ,please help me i want to learn japanes lenguage . plz help.

 

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