जिन्दगी यादों का कारवाँ है.खट्टी मीठी भूली बिसरी यादें...क्यूँ ना उन्हें जिन्दा करें अपने प्रिय गीतों, गजलों और कविताओं के माध्यम से!
अगर साहित्य और संगीत की धारा में बहने को तैयार हैं आप तो कीजिए अपनी एक शाम मेरे नाम..
2024 की मेरी संगीतमाला बेहद धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ी है। इसका एक कारण तो कार्यालय में बढ़ती जिम्मेदारियां हैं। जो लोग मुझे जानते हैं वो ये भी जानते होंगे कि मेरा खाली वक़्त संगीत के अलावा सैर सपाटे, चिड़ियों और तितलियों की तस्वीरें लेने और उनके बारे में लिखने में लगता है। यही वज़ह है कि 2026 आ गया और मैं अभी तक 2024 की संगीतमाला की आख़िरी कुछ पायदानों में अटका हूं। पाठक गण से मैं अपनी इस मंथर गति के लिए क्षमा प्रार्थी हूं🙏।
खैर धीरे धीरे ही सही मेरी गीतमाला की ये पैसेंजर ट्रेन आ पहुंची है अपनी पांचवी पायदान पर जिस पर फिल्म अमर सिंह चमकीला का गाना वो जो पहली बार सुनते ही मेरा मनपसंद गीत बन गया था वो भी तब जबकि इसे गाया था एक अनजान गायिका ने जिन्हें इस गीत के पहले मैंने सुना ही नहीं था।
जी हां आपने सही पहचाना ये गायिका हैं यशिका सिक्का। यशिका का परिवार संगीत से जुड़ा परिवार नहीं है पर उनके पिता को संगीत सुनने का बड़ा शौक़ था। उन्हें अपनी बेटी की आवाज़ पर इतना भरोसा था कि न केवल उन्होंने यशिका को संगीत की तालीम दिलवाई पर साथ ही संगीत से जुड़े रियलिटी शो में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। वो अलग बात है कि यशिका की आवाज़ की बनावट परंपरागत न होने के कारण उन्हें ज्यादातर नाकामयाबी मिली। यशिका को भी ये बात मन में बैठने लगी कि शायद वो पार्श्व गायिकी के लायक नहीं हैं। पर पिता के विश्वास का कमाल था कि उन्हें जिंगल, कच्चे गीत और स्वतंत्र संगीत करने के प्रस्ताव मिलने लगे।
यशिकासिक्का
करीब एक दशक के संघर्ष के बाद अमर सिंह चमकीला में उन्हें नरम कलेजा गाने के लिए बुलाया गया। हुआ यूं कि रहमान को चमकीला के लिए पंजाबी गायकों की तलाश थी। फिल्म के संगीत को अंतिम रूप देने के पहले तमाम कलाकारों को बुलाकर उनसे ढेर सारे गाने गवाए गए। इन गायकों में यशिका भी एक थीं जिनकी आवाज़ रहमान को बिल्कुल अलग सी लगी। हालांकि नरम कलेजा में उनके हिस्से में बस गीत का छोटा टुकड़ा ही आया।
इस बात के दस महीने बीतने के बाद अचानक ही उन्हें तू क्या जाने मेरे यार को गाने के लिए एक रात दस बजे बुलाया गया। दो बजे संगीत के जादूगर रहमान आए और उन्होंने 15 मिनट में धुन तैयार कर दी जिसे यशिका ने अगले दस मिनट में गा भी दिया और इस तरह गीत का मूल स्वरूप अस्तित्व में आया। गीत में परिवर्तन अगले कुछ महीने में होते रहे पर यशिका के मन में ये सवाल चलता रहा कि क्या उनकी आवाज़ अंततः फिल्म में रहेगी?
दरअसल इस गीत के लिए भी इम्तियाज़ अली और रहमान श्रेया घोषाल का नाम पहले सोच रहे थे पर जब इम्तियाज़ ने यशिका वाला वर्जन सुना तो वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा कि इसे ही रहने देते हैं। वैसे भी यशिका की आवाज़ फिल्म के पंजाबी किरदार पर खूब जमी भी है।
यशिका बताती हैं कि इस गीत की सबसे कठिन जगह अंतिम वाले अंतरे में आती है जब सच्चियाँ मोहब्बतां के आगे की कुछ पंक्तियां उन्हें बिना बीच में सांस लिए ही गानी थीं और उन्होंने उसे क्या खूब निभाया है। गीत के अंत में उनकी गुनगुनाहट को बार बार सुनने का दिल करता है। रिलीज़ होने के बाद बेहद लोकप्रिय हुआ पर दुख की बात ये थी कि यशिका के पिता जिन्होंने उनके संगीत की नींव रखी, ये देखने के लिए जीवित नहीं रहे।
गीतकार इरशाद कामिल ने इस गीत में एक युवा स्त्री की आसक्तियों, उसकी आकांक्षाओं को भली भांति शब्दों में बांधा है। उनके शब्दों के चुनाव को देखिए तन का ताज भी मन का राज भी,अपना आज भी तुझपे है देना वार। प्रेम में डूबी हुई स्त्री के पूर्ण समर्पण का भाव कितनी स्पष्टता से उभरा है यहां। उसी भाव को आगे और गहरा कर के वे लिखते हैं
जीत लूं ज़माने से मैं जंग करके, तुझ पे दुपट्टे वाला रंग करके, सूट से अपने मैं लूंगी मिला, रखना तुझे सीने पे अब मैंने
अपने प्रिय को इन पंक्तियों में अपने दिल के पास रखने का क्या नायाब तरीका ढूंढा है यहां नायिका ने!
मुखड़े के पहले ताल वाद्यों के साथ तुम्बी (विजय यमला) और मेंडोलिन (एस एम सुभानी) का रिदम मन को लुभाता है जिसे पराग छाबड़ा ने अरेंज किया है। पंजाबी लोक संगीत का स्वाद इन्हीं वाद्यों की वज़ह से गीत में उभर कर आया है। वहीं मुखड़े के बाद प्रतीक श्रीवास्तव का बजाया सरोद ध्यान खींचता है।
तू क्या जाने मेरे यार, हाय तू क्या जाने मेरे यार छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ, छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ नैना चोर से, इक दिन जोर से, करना है तुझको प्यार, हाय...... नैना चोर से इक दिन जोर से, करना है तुझको प्यार तू क्या जाने मेरे यार, हाय.... तू क्या जाने मेरे यार
तन का ताज भी मन का राज भी, अपना आज भी तुझपे है देना वार, तू क्या जाने मेरे यार, हाय.... तू क्या जाने मेरी जान
सच्चियाँ मोहब्बतां बुलंद करके,रखना पिटारी में तू बंद करके रुसना भी हंसना भी नाल तेरे, सबसे छुपा रखना अंग संग मैंने हाय आय आय आए जीत लूं ज़माने से मैं जंग करके, तुझ पे दुपट्टे वाला रंग करके, सूट से अपने मैं लूंगी मिला, रखना तुझे सीने पे अब मैंने हाय आय आय आए। ..
छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ, छुप छुप तकती हूँ, कह ना सकती हूँ, तू क्या जाने मेरे यार, तू क्या जाने मेरे यार
हो संग ना छोड़ दे इश्क़ निचोड़ दे, बजने दे तन के तार, हाय संग ना छोड़ दे इश्क़ निचोड़ दे, बजने दे तन के तार तू क्या जाने मेरे यार, हाय तू क्या जाने मेरी जान
तो आइए सुनते हैं यशिका की आवाज़ में पांचवीं पायदान का ये गीत
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