रविवार, जून 24, 2018

हुण मैं अनहद नाद बजाया.. अपने दिल का हाल सुनाया Anhad Naad by Sona Mohapatra

सोना महापात्रा एक ऐसी आवाज़ की मालकिन हैं जो सुरीलेपन के साथ साथ भरपूर उर्जा से भरी है। उनकी आवाज़ से मेरी पहली दोस्ती उनके गैर फिल्मी एलबम सोना के गीत अभी ना ही आना सजना मोहे थोड़ा मरने दे, इंतजार करने दे से हुई थी और उसके बाद तो ये बंधन फिर छूटा ही नहीं । वो एक ऐसी कलाकार हैं जिन्होंने हिंदी फिल्मी गीतों के इतर अपना मुकाम बनाया। चाहे उनके हिंदी पॉप एलबम हों या टीवी शो सत्यमेव जयते और कोक स्टूडिओ  के लिए उनके गाए गीत उनकी आवाज़ हमेशा चर्चा में रही। हिंदी फिल्मों में उनको अपने हुनर के हिसाब से काम नहीं मिला पर इसकी उन्होंने कभी परवाह नहीं की। अम्बरसरिया, नैना, मन तेरा जो रोग है जैसे यादगार गीतों को आवाज़ देने वाली सोना ने अपने पति और संगीतकार राम संपत के साथ मिलकर  लाल परी मस्तानी के नाम से संगीत की एक नई यात्रा शुरु की है जिसके गीतों में अपने व्यक्तित्व के विविध रंगों को प्रकट करेंगी। अब तक इस श्रृंखला के तीन गीत आ चुके हैं। 

पहला गीत श्याम के रंग में रँगी मीरा का प्रेम अनुरोध था जिसे श्याम पिया के नाम से रिलीज़ किया गया जबकि दूसरा अमीर खुसरों का लिखा गीत तोरी सूरत के बलिहारी  निजामुद्दीन औलिया को समर्पित था। ये गीत तो अपनी जगह प्यारे थे ही पर इस श्रृंखला का जो तीसरा गीत पिछले हफ्ते आया वो एक बार ही सुनकर मन में ऐसा रच बस गया है कि निकलने का नाम ही नहीं लेता। बुल्ले शाह और कबीर के सूफी रंगों में समाया ये गीत है अनहद नाद और इसे लिखा सोना और राम संपत की टीम के स्थायी सदस्य मुन्ना धीमन ने। 


पर इससे पहले की हम इस गीत के बारे में कुछ और बातें करें ये जानना आपके लिए दिलचस्प होगा कि आख़िर इस श्रृंखला को सोना ने लाल परी मस्तानी का नाम क्यूँ दिया है? सोना इस बारे में अपने साक्षात्कारों कहती रही हैं कि

"ये दिल्ली की बात है जब मैं एक गेस्ट हाउस में ठहरी थी। वहाँ संसार के विभिन्न भागों से आए अन्य यात्री भी ठहरे थे। उनमें एक फ्रेंच महिला भी थी जो अफगानिस्तान से आई थी। उसने मुझे बताया कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान की जो सीमा है वो सूफी संगीत का एक मुख्य केंद्र था। जब वहाँ तालिबान आए तो उन्होंने संगीत पर रोक लगा दी और औरतों को घर के अंदर बुर्कों में रहने की सख्त ताकीद कर दी। वहाँ एक औरत सदा लाल लिबास में रहती थी। वो एक बेखौफ़ स्त्री थी जो तालिबान की परवाह किए बिना दरगाह में गाती रही। उसके द्वारा बताई ये छवि मेरे दिमाग में छप सी गयी। एक ऐसी स्त्री की छवि जो तालिबान की कालिमा को ललकारती हुई गाती रही , नाचती रही ये कहते हुए कि संगीत हराम नहीं है। पन्द्रह साल पहले की इस घटना ने मेरे दिमाग में लाल परी मस्तानी का रूप गढ़ दिया।
मुझे लाल रंग से प्यार रहा है। हमारी संस्कृति में इसका बहुत महत्त्व रहा है। मेरे लिए लाल रंग शक्ति, नारीत्व और उर्जा का प्रतीक है। मेरे प्रशंसक भी लाल रंग से मेरे प्रेम की वजह से  मुझे लाल परी मस्तानी के नाम से संबोधित करते थे और इसीलिए इस सिलसिले को मैंने लाल परी मस्तानी का नाम दिया है।"

इस गीत का शीर्षक है अनहद नाद। ये अनहद नाद आख़िर है क्या? शाब्दिक रूप से देखें तो अनहद मतलब जिसकी कोई हद ना हो और नाद मतलब ध्वनि। यानि ऐसी ध्वनि जिसका कोई अंत ना हो। अध्यात्म में अनहद नाद उस अवस्था को कहते हैं जब व्यक्ति ध्यान में यूँ मगन हो जाता है कि उसे बाहरी ध्वनियाँ नहीं सुनाई देतीं। मन को इतनी गहरी चुप्पी में ले जाते हैं कि सुनाई देता है तो सिर्फ अंदर का मौन।

ड्रम पर हैं बैंगलोर के यदुनंदन नागराज

मुन्ना धीमन इस गीतों के बोलों में ध्यान की इसी अवस्था का जिक्र करते हुए दिल के  प्रफुल्लित होने की बात करते हैं। इस अवस्था का अहसास कुछ ऐसा है जो बारिश में पेड़ को नहाते वक्त होता होगा, जो रोम रोम के तरंगित होने से होता होगा। मुन्ना ने इस अहसास को दूसरे अंतरे में जिस तरह एक पंक्षी को कंधे पे रखने या नदिया को गोद में उठाने की कल्पना से जोड़ा है उसे सोना की आवाज़ में सुनकर मन सच में आनंद विभोर हो उठता है।
सोना और राजस्थान के ढोल वादक 

राम संपत ने पहली बार इस गीत को सोना और शादाब फरीदी की आवाज़ में कोक स्टूडियो सीजन चार में इस्तेमाल किया था पर वहाँ सोना की बुलंद आवाज़ के सामने शादाब की जुगलबंदी कुछ जम नहीं पाई थी। अपने इस नए रूप में इस बार गीत के वीडियो शूट के लिए जैसलमेर की गडसीसर झील को चुना गया। अब शूटिंग राजस्थान में थी तो संगीत को आंचलिक रंग देने के लिए वहाँ के स्थानीय ढोल वादकों को भी संगीत संयोजन में शामिल किया गया। चानन खाँ, स्वरूप खाँ, पापे खाँ और  सत्तार खाँ की चौकड़ी ने ड्रम्स के साथ गीत में जो रस घोला उसे आप गीत सुनते हुए महसूस कर सकेंगे। पर मुझे संगीत का टुकड़ा जो सबसे अधिक भाया वो था संचित चौधरी की वायलिन पर बजाई कमाल की धुन जो अंतरों के बीच में लगभग 1m 25s-1m 45s में आती है। 

हुण मैं अनहद नाद बजाया
अपने दिल का हाल सुनाया
हुण मैं अनहद नाद बजाया
अपने दिल का हाल सुनाया
हाल सुना के लुत्फ़ वो पाया
हो..जो बरखा विच पेड़ नहाया
हाए हाल सुना के लुत्फ़ वो पाया
हो..जो बरखा विच पेड़ नहाया
रोम रोम मेरे घुँघरू छनके
हो.. रोम रोम मेरे घुँघरू छनके
लोग कहें मस्ताना आया हुण मैं अनहद
हुण मैं अनहद नाद बजाया

अपने दिल का हाल सुनाया

नच नच मैं गलियाँ विच घूमा
इसदा उसदा माथा चूमा
हाय नच नच मैं गलियाँ विच घूमा
हो इसदा उसदा माथा चूमा
इक पंछी कंधे पर रक्खा
हो इक पंछी कंधे पर रक्खा
इक नदिया को गोद उठाया
हुण मैं अनहद
हुण मैं अनहद नाद बजाया..नाद बजाया
अपने दिल का हाल सुनाया..हाल सुनाया.

सोना ने जिस मस्ती के साथ इस गीत को निभाया है वो गीत को बार बार सुनने पर मजबूर कर देता है। तो आइए सुनें ये प्यारा सा नग्मा


 

एक शाम मेरे नाम पर सोना महापात्रा

Related Posts with Thumbnails

5 टिप्पणियाँ:

radha tiwari( radhegopal) on जून 24, 2018 ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (25-06-2018) को "उपहार" (चर्चा अंक-3012) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

शिवम् मिश्रा on जून 24, 2018 ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, वीरांगना रानी दुर्गावती का ४५४ वां बलिदान दिवस “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Manish Kumar on जून 24, 2018 ने कहा…

शुक्रिया राधा जी और शिवम मिश्रा इस प्रविष्टी को चर्चा अंक में स्थान देने के लिए !

DR.N.K.Singh on जून 29, 2018 ने कहा…

बहुत सुंदर

Manish Kumar on जून 30, 2018 ने कहा…

Dr N K Singh jee गीत पसंद करने के लिए शुक्रिया !

 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie