जिन्दगी यादों का कारवाँ है.खट्टी मीठी भूली बिसरी यादें...क्यूँ ना उन्हें जिन्दा करें अपने प्रिय गीतों, गजलों और कविताओं के माध्यम से!
अगर साहित्य और संगीत की धारा में बहने को तैयार हैं आप तो कीजिए अपनी एक शाम मेरे नाम..
स्वतंत्र संगीत की ये खासियत होती है कि वो निर्बाध बहता है। एक ख़्याल, जब शब्दों के आंचल से छुपता छुपाता बाहर आकर एक आकार लेता है तो उस पर पटकथा की बंदिश नहीं होती, उसके पीछे होती है तो सृजन करने वाले की सोच। इस सोच को एक प्यारे गीत की शक्ल लेने के लिए पार करनी होती है एक सुरीली धुन रूपी पगडंडी।
वार्षिक संगीतमाला की अगली सीढ़ी पर एक सहज पर प्यारा सा गीत मेरी जान.. एक ऐसा ही स्वतंत्र नग्मा है जो गीतकार संगीतकार गायक स्वानंद और उनके युवा पर बेहद सुरीली सहगायिका हंसिका पारीक, गिटारिस्ट श्रेय गुप्ता, भरत और तार वाद्यों पर अपनी महारत रखने वाले तापस दा के सम्मिलित प्रयासों से इस रूप में आया है।
किसी भी शख़्स के व्यक्तित्व में ढेर सारे रंग होते हैं। उन रंगों में कुछ तो अपने मन के अनुरूप होते हैं तो कुछ ऐसे जिनका होना हमें कचोटता है। पर एक बार जब वो व्यक्ति पसंद आने लगता है तो हम उसके हर पहलू को अपनाने को तैयार हो जाते हैं। यही तो है प्रेम की ताकत! ये गीत बस इसी बात को रेखांकित करता है।
इस गैर फिल्मी गीत को लिखा और इसकी धुन बनाई है स्वानंद किरकिरे ने और इस युगल गीत को उनके साथ आवाज़ दी है नवोदित गायिका हंसिका पारीक ने। नई आवाज़ों में हंसिका मुझे बेहद सुरीली लगती हैं। बतौर गायिका मैं उनके संगीत का पिछले दो तीन सालों से अनुसरण कर रहा हूं। अपनी मीठी आवाज़ के साथ साथ उन्हें शास्त्रीय संगीत की भी अच्छी पकड़ है। अजमेर से ताल्लुक रखने वाली 23 वर्षीय हंसिका संगीत विशारद हैं।
इंडियन आइडल जूनियर से टीवी पर हलचल मचाने के बाद उन्होंने स्वतंत्र संगीत की राह पकड़ी और फिर वो संगीतकार विशाल मिश्रा की नज़र में आईं। फिल्मों में विशाल ने ही उन्हें पहला मौका दिया। इस साल उन्होंने सय्यारा और आज़ाद फिल्म के हिट गीतों में अपना योगदान दिया है। इस संगीतमाला में उनका एकल गीत रतिया पहले ही बज चुका है।
स्वानंद की धुन सुनते ही मन इस गीत को गुनगुनाने का करने लगता है। शब्दों का उनका चयन भी इस गीत के प्रति श्रोताओं के लगाव को बढ़ाता है। ज़री वाली साड़ी की बात तो हम सभी करते हैं पर उस शब्द ज़री के जरिए किसी के स्वभाव का कितना सटीक खाका खींचा है स्वानंद ने.. वैसे नाज़ुक है ज़री सी, चुभती भी है अच्छी खासी। गीत के साथ बजते गिटार की कमान संभाली है श्रेय गुप्ता ने जो स्वानंद के कार्यक्रमों में अक्सर उनके साथ दिखाई पड़ते हैं।
पर गीत के अंतरों के बीच मेंडोलिन पर असली कमाल दिखला गए हैं तापस राय साहब जिनका बजाया संगीत का टुकड़ा मन को आनंदित कर देता है। स्वानंद के शब्दों में ये गीत अपनी कमियों और अच्छाइयों को स्वीकार करने वाला प्रेम गीत है। तो आइए सुनते हैं उनकी और हंसिका के स्वरों में ये युगल गीत
उसकी बातों में खनक है, उसकी आँखों में उदासी
उसके चलने में लचक है, पर वो सहमी है ज़रा सी उसके भीतर एक अगन है,पर वो शीतल है हवा सी वैसे नाज़ुक है ज़री सी, चुभती भी है अच्छी खासी
मेरी जान जान जान, मेरे दिल का ये मकान टूटा फूटा ही सही तू, बन जा इसका मेहमान मेरी जान जान जान, मेरे दिल का ये मकान
दर्द की एक टीस है तू, और है खुशियों की मुनादी ज़ख्म है तू गहरा दिल का, तू ही मरहम भी है साथी यादों वाली ख्वाबों वाली, हर गली क्यों तुझको भाती तू ख़यालों में तो रहता, पर समझ ना तुझको पाती मेरी जान जान जान, मेरे दिल का ये मकान टूटा फूटा ही सही तू, बन जा इसका मेहमान मेरी जान जान जान, मेरे दिल का ये मकान...
मेरी जान जान जान, मेरा इतना कहना मान दो अधूरी सांसें मिलकर, कर ले ज़िंदगी आसान कि तेरे बिन जिया नहीं जाए, कि चैना ना आए तेरे बिन
वार्षिक संगीतमाला की 24 वीं पायदान पर गाना वो जिसे संगीतबद्ध किया सागनिक कोले ने और गाया हंसिका पारीक ने। ये गीत किसी फिल्म से नहीं बल्कि स्वतंत्र संगीत की उपज है जो आजकल इंटरनेट की सर्वसुलभता की वज़ह से तेजी से अपनी जड़ें जमा रहा है। इस गीत का शीर्षक है रतियाँ।
रतियाँ एक प्यारा सा गीत है जिसमें चाँद तारों के माध्यम से नायिका बड़ी शिद्दत से अपने प्रेमी को याद कर रही है। बांग्ला और हिंदी दोनों भाषाओं में लिखने वाले गीतकार सोहम मजूमदार के बोल सहज हैं पर दिल को छूते हैं। इतना तो तय है कि जिन लोगों ने तन्हाई के पलों में छत पर लेटे लेटे चांद सितारों से दीप्तमान आकाश को घंटों निहारते हुए अपने प्रिय को याद किया होगा उन्हें ये गीत जरूर अच्छा लगेगा।
वैसे चाँद तारे तो फ़िल्मी गीतों के अभिन्न अंग रहे हैं। कितने ही सदाबहार गीत इन बिंबों को ले के लिखे गए हैं। चाँद फिर निकला मगर तुम न आए, वो चाँद हंसा वो तारे खिले ये रात अजब मतवाली है, ऐ चाँद खूबसूरत, ऐ आसमान के तारे तुम मेरे संग ज़मीन पर थोड़ी तो रात गुजारो, तू मेरा चाँद मैं तेरी चांदनी, चाँद तारे तोड़ के लाऊँ बस इतना सा ख्वाब है , मतलब जितना सोचिये उतने गीत निकलते जाएंगे। सोहम भी इसी सिलसिले को एक और रूप देते हुए लिखते हैं...
ऐसा कभी हुआ है क्या तारों के बिन रात बनी चंदा के आने से रात में वो बात बनी माना कि इश्क़ मेरा जैसा कोई हो सितारा
तेरे ही आसमां में ढूँढे जो कोई बसेरा भाए ना रे उसे निंदिया, जागे सारी सारी रतियाँ तारों भरी कारी अँखियाँ, जागे सारी सारी रतियाँ
मौसमी ये प्रीत नहीं वो जो बीत जाए दूर ही सही हम दोनों, पर हैं नहीं पराए
जैसे सदियों से ही मिलते नहीं चाँद तारे
फिर भी आसमां में लगते दोनों कितने प्यारे
ये तो जाने सारी दुनिया, जागे सारी सारी रतियाँ तारों भरी कारी अँखियाँ, जागे सारी सारी रतियाँ
अब कुछ बातें इस गीत की गायिका के बारे में। हंसिका पारीक एक उभरती हुई युवा गायिका हैं। पिछले दो साल से मैं उन्हें सुन रहा हूँ। वे एक बेहद सुरीली गायिका तो हैं ही साथ ही शास्त्रीय संगीत में उनके पाँव भली भांति जमे हैं। राजस्थान के अजमेर में पली बढ़ी इस संगीत विशारद ने 23 साल की छोटी उम्र में ही विशाल मिश्रा, अमित त्रिवेदी और स्वानंद किरकिरे जैसे कलाकारों के साथ काम किया है और इस साल तो फिल्म आज़ाद में अरिजीत सिंह के साथ गया उनका गाना बेहद पसंद किया जा रहा है।
बांसुरी और तार वाद्यों से सजा सागनिक कोले का संगीत और हंसिका की सुरीली आवाज़ इस गीत को और श्रवणीय बनाती हैं। तो आइये हंसिका के मीठी सुरीली आवाज़ में सुने ये गीत
नाको झील: किन्नौर का एक खूबसूरत पड़ाव
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नाको, जो कभी एक छोटा सा गाँव था, आज एक कस्बे का रूप ले चुका है। पर्यटन के
लिहाज़ से देखा जाए तो किन्नौर जिले का आखिरी छोर होने की वजह से, जो भी
रिकांगपिओ स...
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