Thursday, March 02, 2017

वार्षिक संगीतमाला 2016 पायदान # 5 : बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है Hanikaarak Bapu

वार्षिक संगीतमाला के सरताज गीत से मुलाकात करने में पाँच कदमों का ही फासला रह गया है। पर आज पिछले कुछ महीनों में सबसे लोकप्रिय रहे गीत की बात करते हुए एक दूसरे सरताज से आपको जरूर मिलवाएँगे।

सिगरेट या तम्बाकू कै पैकेटों पर ये जुमला तो आपने दशकों से पढ़ा होगा कि इनका सेवन सेहत के लिए हानिकारक है पर सिगरेट के खाँचे में बापू को डाल देना अमिताभ भट्टाचार्य का गजब का मास्टर स्ट्रोक था। फिल्म दंगल में आमिर खान के चरित्र से ये गीत इतना जुड़ गया कि लोगों ने इसे  हाथों हाथ लिया। गाना हिट हो ही रहा था कि बाकी की प्रसिद्धि मुलायम अखिलेश प्रकरण ने दिलवा दी। अब इतना तो तय है  कि ये गीत खासकर इसका मुखड़ा तो हमेशा अपना वज़ूद बनाए रखेगा  क्यूँकि बच्चों पर सितम करने वाले बापुओं की तो ना पहले कमी थी, ना आगे रहेगी। :)

प्रीतम दा ने इस गीत में हरियाणवी लोक संगीत की महक बरकरार रखी है। अमिताभ भट्टाचार्य ने गीत तो हिंदी में लिखा पर हरियाणवी तड़का देने के लिए उन्होंने कुछ पंक्तियों के आख़िर वाले शब्दों को वहाँ की मिट्टी का रंग देने का प्रयास जरूर किया है। हिंदी में एक शब्द है घना यानि dense इसीलिए हम कहते हैं घनी आबादी, घना जंगल पर हरियाणवी में घना घणा हो जाता है और उसका अर्थ होता है कुछ ज्यादा ही। मसलन घणी बावरी हो रही है तो तू यानि कुछ ज्यादा ही बावली हो गयी है़ तू। अमिताभ ने पिता के अनुशासनात्मक आदेशों को गीत में घणा टार्चर का मजेदार रूप दिया है। बाकी तो हिंदी शब्दों में 'न 'को ' ण' कर कोई भी गीत वहाँ की टोन में गाया जाए तो हरियाणवी रंग बिखेर देता है। अमिताभ की शब्द रचना हर अंतरे में होठों पर मुस्कुराहट ले ही आती है।

दंगल के लिए अमिताभ के लिए तीन गीत इस गीतमाला में शामिल हुए हैं। उनके लिए दंगल के गीत लिखना कुछ विशेष रहा होगा क्यूँकि ये आमिर खाँ की फिल्म थी जिनके वो बचपन से प्रशंसक रहे हैं। अपने साक्षात्कार में वो कह चुके हैं कि आमिर की फिल्म जो जीता वही सिकंदर उन्होंने अपनी कक्षाएँ छोड़कर पाँच बार देखी थीं। उनके साथ काम करने का ख़्याल उन्हें कभी सपने में भी नहीं आया था। पर अमिताभ ने हानिकारक बापू के साथ साथ दंगल के अन्य गीतों में जो जान फूँकी उससे आगे भी उनका आमिर के साथ काम करने का मार्ग प्रशस्त जरूर हुआ होगा।

सरताज खान  व सरवर खान
पर बापू हमारे लिए इतने हानिकारक सिद्ध ना हुए होते अगर इन्हें सरवर खान और सरताज खान जैसी शानदार व जानदार आवाज़ों का सहारा ना मिला होता। जैसलमेर के मांगणियार समुदाय से ताल्लुक रखने वाले इन दोनों बालकों की उम्र दस से पन्द्रह के बीच की है पर जब ये गाते हैं तो इनकी आवाज़ का जोर बड़े बड़ों को मात दे सकता है। दरअसल मांगणियार समुदाय के लोगों का काम सदियों से लोक धुनों को गाना बजाना रहा है। सरवर और सरताज़ को ये हुनर अपने परिवार से मिला है। 

जब से उनका ये गीत हिट हुआ है स्कूल में उनका रुतबा बढ़ गया है। टीचर से डाँट मिलनी बंद हो गयी है और बाकी बच्चे उनसे बार करने को उत्सुक रहते हैं। जैसलमेर के आडिशन में बीस बच्चों में बाजी मारने वाले इन बच्चों को पहले अमिताभ भट्टाचार्य की आवाज़ में ये गाना सुनाया गया था जिसे टुकड़ों में उनकी आवाज़ में रिकार्ड किया गया। बहरहाल इन दोनों बच्चों की इच्छा एक गायक के तौर पर जीवन में नाम कमाने की है। ये कितने सफल होते हैं ये तो वक़्त ही बताएगा। एक श्रोता के रूप में तो हम सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना ही कर सकते हैं। 

औरों पे करम, बच्चों पे सितम
रे बापू मेरे ये ज़ुल्म ना कर, ये ज़ुल्म ना कर..
डिंग ड़ांग, डिंग ड़ांग डिंग ड़ांग..डिंग ड़ांग,
डिंग ड़ांग डिंग ड़ांग डिंग ड़ांग ओ बापू

बापू सेहत के लिए, तू तो हानिकारक है
बापू सेहत के लिए, तू तो हानिकारक है
हम पे थोड़ी दया तो करो हम नन्हा बालक है..
हम पे थोड़ी दया तो करो हम नन्हा बालक है
डिसीप्लीन इतना, डिसीप्लीन इतना
ख़ुदकुशी के लायक है, बापू सेहत के लिए, तू तो हानिकारक है
डिंग ड़ांग, डिंग ड़ांग.....ओ बापू

तन्ने बोला पिकणिक शिक्णिक जाणा है मणा
यो तो टार्चर है घाणा, रे यो तो टार्चर है घणा
रे बच्चों से ई बोले, के ना करना बचपाणा
यो तो टार्चर है घाणा, रे यो तो टार्चर है घणा

ओ बापू, टॉफ़ी चूरन खेल खिलोने, कुलचे नान पराठा
कह गए हैं टाटा, जबसे बापू तूने डाँटा
जिस उम्र में शोभा देते, मस्ती सैर सपाटा
उस उम्र को नाप रहा है, क्यूँ घड़ी का काँटा
अपनी किस्मत की गाडी की खस्ता हालत है
ओ रे म्हारे बापू, ओ आ गयो रे बापू
ओ हमारे बापू, इस गाडी के वाहन चालक हैं
बापू सेहत के लिए, हाँ तू तो हानिकारक है

तन्ने बोला खट्टा तीखा खाणा है माणा
यो तो टार्चर है घणा, रे यो तो टार्चर है घणा
मिटटी की गुड़िया से बोले, चल बॉडी बणा
यो तो टार्चर है घणा, रे यो तो टार्चर है घणा
तेल लेने गया रे बचपन, झड़ गयी फुलवारी
कर रहे हैं जाने कैसी, जंग की तैयारी
सोते जगते छूट रही है, आँसू की पिचकारी
फिर भी खुश ना हुआ मोगम्बो, हम तेरे बलिहारी
तेरी नज़रों में क्या हम, इतने नालायक हैं


रे तुझसे बेहतर तो, मन्ने छोड़ दो रे बापू
रे तुझसे बेहतर अपनी, हिंदी फिल्मो के खलनायक हैं
बापू सेहत के लिए, तू तो हानिकारक है

फिलहाल सुनते हैं साल के इस सबसे मजेदार गीत को..



वार्षिक संगीतमाला  2016 में अब तक 
5. बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है   Hanikaarak Bapu
6. होने दो बतियाँ, होने दो बतियाँ   Hone Do Batiyan
7.  क्यूँ रे, क्यूँ रे ...काँच के लमहों के रह गए चूरे'?  Kyun Re..
8.  क्या है कोई आपका भी 'महरम'?  Mujhe Mehram Jaan Le...
9. जो सांझे ख्वाब देखते थे नैना.. बिछड़ के आज रो दिए हैं यूँ ... Naina
10. आवभगत में मुस्कानें, फुर्सत की मीठी तानें ... Dugg Duggi Dugg
11.  ऐ ज़िंदगी गले लगा ले Aye Zindagi
12. क्यूँ फुदक फुदक के धड़कनों की चल रही गिलहरियाँ   Gileheriyaan
13. कारी कारी रैना सारी सौ अँधेरे क्यूँ लाई,  Kaari Kaari
14. मासूम सा Masoom Saa
15. तेरे संग यारा  Tere Sang Yaaran
16.फिर कभी  Phir Kabhie
17 चंद रोज़ और मेरी जान ...Chand Roz
18. ले चला दिल कहाँ, दिल कहाँ... ले चला  Le Chala
19. हक़ है मुझे जीने का  Haq Hai
20. इक नदी थी Ek Nadi Thi
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10 comments:

Smita Jaichandran on March 03, 2017 said...

Yeh aa gaya humarawala gaana!!!!

Manish Kumar on March 03, 2017 said...

Smita : Ha Ha.. yeah u told me before that it's fav song of the year for you .

Manish Kaushal on March 03, 2017 said...

मजेदार गीत..जब- जब सुनता हूँ, थिरकने को दिल करता है

kumar gulshan on March 04, 2017 said...

अगर इतना बदिया गाना ५ वे पायदान पे है तो एक पे आखिर होगा कोनसा ...

RAKESH/ACHHIADVICE on March 05, 2017 said...

Mast .............

Manish Kumar on March 08, 2017 said...

Manish Kaushal हाँ कुछ ऐसी ही फितरत है इस गीत की :)

Manish Kumar on March 08, 2017 said...

कुमार गुलशन : ये मजेदार गाना है फिल्म से जुड़ा गाना है पर शायद सालों बाद सिर्फ इस गीत का मुखड़ा भर याद रह जाएगा। औपर की पायदान पर तो वो गीत होते हैं जिनकी टीस दिल को ऐसा वैसा कर देती है।

Alka Kaushik on March 08, 2017 said...

Your posts are the quickest link to nostalgia :)

Manish Kumar on March 08, 2017 said...

अलका जी एक पीढी में पलने बढ़ने से वो पुरानी बातें हम जल्दी ही "रिलेट" कर लेते हैं। ;)

Kanchan Singh Chouhaan on March 10, 2017 said...

ये गीत मस्त है। 'अपने बापू इस गाड़ी के वाहन चालक हैं।' 'तुझसे बेहतर हिंदी फिल्मो के खलनायक हैं' मतलब मस्त प्रयोग।

छुटके यशस्वी को बोलना भले ना आये ये गीत पूरा याद है

 

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