Wednesday, January 24, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान 17 : चोरी से, चोरी से छुप-छुप के तिनका तिनका, चुन के सपना एक बनाया Sapne Re

जब किसी उभरती गायिका पर फिल्म बनेगी तो ज़ाहिर है उसको निभाने के लिए अभिनेत्री के साथ उसकी आवाज़ की भी तलाश होगी। सीक्रेट सुपस्टार की स्क्रिप्ट जब अद्वैत चंदन और आमिर ने संगीतकार अमित त्रिवेदी को थमाई तो साथ ही उन्हें एक किशोर  गायिका को  खोजने का दायित्व भी दे दिया जो फिल्म में ज़ायरा वसीम की आवाज़ बन सके।

अमित अपने काम में लग गए। 28 लोगों को बुलाया गया। उनमें सात आठ आवाजें छांटी गयीं और अंततः मेघना की आवाज़ में अमित वो पा गए जो वो चाहते थे। अमित ने उनकी आवाज़ को सहजता से बहता हुआ पाया। एक बार जब आमिर और अद्वैत की स्वीकृति मिल गयी तब जाकर आगे का काम शुरु हुआ। वैसे मेघना हैं कौन ये तो आप जानना चाहेंगे ही।


मेघना ग्यारहवी की छात्रा हैं और मुंबई में पली बढ़ी हैं। उनके पिता उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। पिता ख़ुद गायिकी से जुड़े हैं और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संगीत में परास्नातक हैं। गाजीपुर से मुंबई आकर उन्होंने भी अपने आप को यहाँ स्थापित करने की कोशिश की। कुछ खास मौके नहीं मिले तो संगीत सिखाने में जुट गए। मेघना की माँ एक तबला वादक हैं। इतने भरे पूरे संगीत के माहौल में मेघना नहीं गाती तो आश्चर्य था। हालांकि उनका सफ़र भी इतना आसान नहीं रहा। छठी कक्षा में इंडियन आइडल जूनियर में भाग लेने गयीं पर जल्द ही बाहर हो गयीं। फिर भी संगीत सीखना नहीं छोड़ा। एक मराठी फिल्म में गाने का मौका मिला और फिर उस फिल्म के संगीत निर्देशक ने सीक्रेट सुपरस्टार के लिए उनका नाम अमित त्रिवेदी को सुझाया।

ज़ायरा वसीम और मेघना मिश्रा 

अमित त्रिवेदी ने  मेघना से  इस फिल्म के लिए  पाँच एकल गीत गवाए । टीवी पर मैं कौन हूँ और नचदी फिरा का जोर शोर से प्रचार हुआ और नचदी फिरा के लिए फिल्मफेयर ने उन्हें इस साल की सर्वश्रेष्ठ गायिका भी घोषित कर दिया। पर उनके गाए गानों में मुझे मेरी प्यारी अम्मी जो हैं और सपने रे ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। मेरी प्यारी अम्मी की जगह तो इसी फिल्म के एक और प्यारे गीत गुदगुदी ने ले ली पर सपने रे ने मेरे दिल में अंत तक अपनी जगह बनाई रखी।

सीक्रेट सुपरस्टार एक ऐसी फिल्म थी जिसके गानों में ही फिल्म की कहानी पलती बढ़ती रही। गीत के बोलों और संगीत पर इसका खासा असर रहा। ये गीत फिल्म में तब आता है जब नायिका अपनी दोस्तों के साथ सफर पर है। साथ में है उसका गिटार। दोस्त जब गाने की फर्माइश करते हैं तो शुरुआत होती है सपने रे की।

क़ौसर मुनीर को एक किशोरी के मन में धीरे धीरे आकार ले रहे सपने को शब्द देने थे । उनकी चुनौती ये भी थी कि वो गीत में  जिस भाषा का प्रयोग करें वो स्कूल की छात्रा की भाषा हो। इसलिए क़ौसर ने मुखड़े में पक्षियों की तरह तिनका तिनका बुन के नवजात सपने को घोंसले में जगह तो दी पर जब उसे छुपाने का वक़्त आया तो डॉयरी और गुथी हुई चोटी को उन्होंने मुनासिब समझा । 

अमित के संगीत में गिटार और ताल वाद्यों का प्रमुखता से उपयोग होता है। यहाँ भी ये वाद्य उपस्थित हैं पर साथ में बाँसुरी का हल्का फुल्का तड़का भी है।

कोई भी बच्चा चाहे किसी का हो हमें कितना प्यारा लगता है। फिर आप बताइए अगर मन में शिशु के रूप में एक सपने का जन्म हो तो उसे आप गलत नज़रों से बचा कर, खूब सहेज कर रखेंगे ना। वैसे भी हम सभी अगर अपने नन्हे सपनों से प्यार नहीं करेंगे तो वो बड़े कैसे होंगे? इस प्यारी सी भावना को ये गीत श्रोताओं के दिलों तक पहुँचाता है। चलिए आज आप भी मिल आइए इस मासूम सपने से..

चोरी से, चोरी से छुप-छुप के 
मैंने चोरी से, चोरी से छुप-छुप के 
तिनका तिनका, चुन के सपना एक बनाया 
डोरी से, डोरी से बुन बुन के मैंने डोरी से, 
टुकड़ा टुकड़ा सी के सपना एक बनाया.. 
सपने रे, सपने रे.. सपने मेरे सच 
हो जाना रे हो जाना रे हो जाना रे

आजा डायरी में छुपा दूँ 
आजा तुझको चोटी में बाँधूँ 
कहीं किसी को ना दिख जाए  
सपने रे, सपने रे, सपने मेरे
हाथ तेरा कस के पकड़ लूँ 
साथ साथ तेरे मैं चल दूँ 
डर तुझे ना किसी से लग जाए 
सपने रे, सपने रे, सपने मेरे 
रातों को, रातों को जग जग के मैंने  
तारा तारा, चुन के सपना एक बनाया 
सपने रे, सपने रे सपने मेरे सच हो जाना रे हो जाना रे....




वार्षिक संगीतमाला 2017

Related Posts with Thumbnails

4 comments:

Sumit on January 25, 2018 said...

Wah!

Manish Kumar on January 28, 2018 said...

Thanks

कंचन सिंह चौहान on February 27, 2018 said...

गलत बात है भई मेरे सारे कमेंट बिना पब्लिश किये रख लिए गए :(

यह गीत बहुत प्यारा लगा मुझे। इस साल जो कुछ गाने होंठो पर चढ़े उनमें पहला शायद यही था।

Manish Kumar on February 27, 2018 said...

कंचन मेरे ख्याल से इंटरनेट कनेक्शन की कोई दिक्कत रही होगी क्यूँकि मुझे तो माडरेशन या स्पैम फोल्डर में आपका पहले का कोई भी कमेंट नहीं दिखा।

Post a Comment

 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie