Thursday, March 08, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान # 8 : दिल दीयाँ गल्लाँ, आख़िर क्या कहना चाहा है इरशाद कामिल ने इन पंजाबी बोलों में? Dil Diyan Gallan

इस संगीतमाला में बजने वाले पिछले कई गीत आपने नहीं सुने होंगे पर आज जिस गीत की बात आपसे करने जा रहा हूँ वो दिसंबर से ही लोकप्रियता की सारी सीढ़ियाँ धड़ल्ले से तय करता आ रहा है। ये गीत है फिल्म टाइगर जिंदा है का दिल दीयाँ गल्लाँ। अब एक हल्की फुल्की पंजाबी में लिखा गीत अगर इस तरह से लोगों के ज़ेहन में चढ़ जाए फिर उसकी  धुन और गायिकी तो कमाल की होनी ही है। 

कुछ तो है आतिफ असलम की आवाज़ में जो श्रोताओं को अपनी ओर बार बार खींचता है। आज से ग्यारह साल पहले तेरे बिन मैं यूँ कैसे जिया से पहली बार इस संगीतमाला में दाखिला लेने वाला आतिफ की आवाज़ साल दर साल किसी ना किसी गीत के माध्यम से लोगों के दिल में चढ़ती ही रही है। तेरा होने लगा हूँ (2009), मैं रंग शर्बतों का (2013)  दहलीज़ में मेरे दिल की (2015) और तेरे संग यारा (2015) जैसे उनके गाए गीत तो याद ही होंगे आपको।


पर विशाल शेखर के साथ गाया उनका ये पहला गीत है। विशाल कहते हैं कि सालों से उनके साथ काम करने के लिए कोशिश हो रही थी पर टाइगर जिंदा है के गीत के लिए संपर्क करते ही बात बन गयी। वहीं शेखर का कहना था कि उन्होंने गीत में नीचे के सुरों का इस्तेमाल करते हुए भी अपनी आवाज़ का जादू बरक़रार रखा है। 

इस गीत की लय में जो मधुरता है वो आपको शुरु से अंत तक बाँध कर रखती है। विशाल शेखर का संगीत संयोजन हिंदुस्तानी और पश्चिमी वाद्य यंत्रों का अद्भुत मिश्रण है जो कानों को सोहता है।

इस गीत के बोल लिखे हैं इरशाद कामिल ने। इस गीत के बारे में वे कहते हैं कि रोमांस में जो थोड़ी बहुत नाराज़गी चलती रहती है, जो थोड़ा बहुत मनमुटाव रहता है ये गाना उसी नाराज़गी को प्यार से दूर करने की बात कहता है। तो आइए देखें कि इन पंजाबी बोलों में आख़िर इरशाद साहब ने कहा क्या है.. 

कच्ची डोरियों, डोरियों, डोरियों से
मैनू  तू बाँध ले
पक्की यारियों, यारियों, यारियों में
होंदे ना फासले
ये नाराज़गी कागज़ी सारी तेरी
मेरे सोणया सुन ले मेरी
दिल दीयाँ गल्लाँ
कराँगे नाल नाल बह के
अँख नाल अँख नूँ मिला के
दिल दीयाँ गल्लाँ हाय
कराँगे रोज़ रोज़ बह के
सच्चियाँ मोहब्बताँ निभा के

हमारी यारी इतनी मजबूत है कि अगर तू मुझे कमजोर डोरियों से भी बाँधे तो हमारे बीच का फासला कभी बढ़ेगा नहीं। ये जो तुमने चेहरे पर नाराज़गी ओढ़ रखी है ना, मैं जानता हूँ वो सारी बनावटी है। ओ मेरी प्रिये, सुनो तो, हम दोनों साथ साथ बैठेंगे और एक दूसरे की आँखों में आँखें डाल अपने दिल का सारा हाल एक दूसरे से कह देंगे  दिल से दिल की बातों का सिलसिला रोज़ यूँ ही चलता रहे तभी तो हम अपनी सच्ची मोहब्बत को आजीवन निभा सकेंगे।

सताये मैनू क्यूँ
दिखाए मैनू क्यूँ
ऐवें झूठी मुट्ठी रूस के रूसाके
दिल दीयाँ गल्लाँ हाय...मिला के
तैनू लाखाँ तों छुपा के रखाँ
अक्खां ते सजा के तू ऐं मेरी वफ़ा
रख अपना बना के
मैं तेरे लइयाँ तेरे लइयाँ यारा
ना पाविं कदे दूरियाँ
मैं जीना हाँ तेरा..
मैं जीना हाँ तेरा
तू जीना है मेरा
दस्स लेना कि नखरा दिखा के
दिल दीयाँ गल्लाँ हाय...मिला के

तू मुझे बिना बात के सताती क्यूँ है? क्यूँ झूठी त्योरियाँ चढ़ा कर रखती है? मैं तो तुझे दुनिया की नज़रों से  छुपा कर अपने पास रखना चाहता हूँ। तुम मेरी आँखों का तारा हो, मेरा प्यार हो। मुझे अपना बना के रखो। मैं तो सिर्फ तुम्हारे लिए हूँ और तुमको अपने दूर जाता देख भी नहीं सकता। हम दोनों एक दूसरे की जिंदगी हैं। फिर इन बेकार के झगड़ों का क्या फायदा?

राताँ कालियाँ, कालियाँ, कालियाँ ने
मेरे दिन साँवले
मेरे हानियाँ, हानियाँ, हानियाँ जे
लग्गे तू ना गले
मेरा आसमाँ मौसमाँ दी ना सुने
कोई ख़्वाब ना पूरा बुने
दिल दीयाँ गल्लाँ हाय...मिला के
पता है मैनू  क्यूँ छुपा के देखे तू
मेरे नाम से नाम मिला के
दिल दीयाँ गल्लाँ हाय...मिला के

अगर तुम मुझसे अभी भी गले ना लगी तो मेरा दिन साँवला ही रह जाएगा और रातें काली। ये जो मेरे दिल का आसमान है ना, वो भी मौसमों के हिसाब से रंग बदलना छोड़ देगा। फिर उसमें मैं कैसे कोई ख़्वाब बुन पाऊँगा? मैं जानता हूँ कि सामने भले तुम मुझसे नाराज़गी ज़ाहिर करती हो पर मेरे पीछे मेरे नाम के साथ अपना नाम जोड़ मन ही मन खुश होती रहती हो।

इस गीत की शूटिंग आस्ट्रिया में हुई है और इसे फिल्माया गया है सलमान और कैटरीना पर। वैसे मुझे एक बात ये समझ नहीं आई गीत में नायक रूठी नायिका को प्यार से मना रहा है पर पर्दे पर तो कैटरीना रूठी नहीं दिखतीं। आपका इस बारे में क्या ख्याल है?

तो आइए सुनते हैं ये गीत आतिफ़ असलम की आवाज़ में। वैसे इस गीत का एक unplugged version भी है जिसे नेहा भसीन ने गाया है..

 

वार्षिक संगीतमाला 2017

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6 comments:

Manish Kaushal on March 10, 2018 said...

इस साल के सबसे कर्णप्रिय गीतों में एक.. आतिफ असलम की गायकी अच्छी लगी

Manish Kumar on March 10, 2018 said...

नेट पर एक ख़बर में चर्चा थी कि इस गीत को अरिजीत सिंह से गवाया जाना था। पर सलमान को अरिजीत का गाना स्वीकार्य नहीं था और इसीलिए इसे गाने के लिए आतिफ़ असलम को चुना गया और उन्होंने गीत को बखूबी निभाया।ऐसी बातें चल रही थीं कि इस गीत को अरिजीत सिंह से गवाया जाए। पर सलमान को अरिजीत का गाना स्वीकार्य नहीं था और इसीलिए इसे गाने के लिए आतिफ़ असलम को चुना गया और उन्होंने गीत को बखूबी निभाया।

Sumit on March 11, 2018 said...

Arre iss gaane ko bhi? Wo last year bhi Sultan ka ek gaana Arijit se le ke Rahat ko de diya tha. Salman meharban to Pakistani Singers itminan.

Sumit on March 11, 2018 said...

Hindi filmo mein Punjabi gaana mujhe kabhi pasand nahi aaya. Ye Punjabi producer directors ki thopi hui Punjabi pop culture hi lagti rahi hai. Lekin ye gaana madhur hai.

Sumit on March 11, 2018 said...

Sochiye bhala.....ek gujrati character new York mein Punjabi gaana gane lag jaata hai.... Ek Hindi film mein....hudd kar dete hain ye Johars n chopras bhi.

Manish Kumar on March 11, 2018 said...

सुमित अरिजीत से सलमान की पुरानी नाराज़गी है। एक पुरस्कार समारोह में स्टेज, पर दोनों के बीच छींटाकशी हो गयी थी तबसे अपनी फिल्मों में सलमान अरिजीत को देखना पसंद नहीं करते।

जहाँ तक पंजाबी या किसी आंचलिक भाषा के शब्दों का हिंदी गानों में आने का सवाल है तो मुझे लगता है कि ये कहानी के हिसाब से होना चाहिए। उड़ता पंजाब में इक कुड़ी का इस्तेमाल मुझे इसीलिए बेहद जँचा था।

मैंने टाइगर ज़िदा है नहीं देखी इसलिए मैं इस पर कुछ कहने में असमर्थ हूँ।

 

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