Saturday, January 20, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान #19 : नज़्म नज़्म.. त्रुटिपूर्ण भाषा की मार सहती एक मधुर धुन ! Nazm Nazm

वार्षिक संगीतमाला की 19 वीं पायदान पर गाना वो जो मेरे आरंभिक आकलन के बाद सुनते सुनते कई सीढ़ियाँ नीचे की ओर लुढ़का है। पर अब भी अगर ये मेरी गीतमाला में शामिल  है तो उसकी वज़ह है इसके मुखड़े का शानदार भाव और इसकी धुन की मधुरता। ये गीत है फिल्म 'बरेली की बर्फी' का जिसे रचा है अर्को ने।


अर्को प्रावो मुखर्जी के गीतों से मेरा प्यार और दुत्कार वाला रिश्ता रहा है। बतौर संगीतकार वो मुझे बेहद प्रभावित करते हैं। उनके शायराना हृदय के खूबसूरत भाव  रह रह कर उनके गीतों में झलकते हैं। पर भाषा पर पकड़ न होने के कारण वो एक गीतकार की भूमिका में खरे नहीं उतरते और ये बात वो जितनी जल्द समझ लें उतना अच्छा। 

अब बरेली की बर्फी के इस गीत को लीजिए। कितना रूमानी ख्याल था मुखड़े में कि मेरी प्रेयसी एक नज़्म की तरह मेरे होठों पर ठहर जाए और मैं उसकी आँखों में  मैं एक ख़्वाब बनकर जाग जाऊँ। वाह भई वाह! अर्को इस मुखड़े के लिए तो आप शाबासी के हकदार हैं पर ये क्या आपने तो नज़्म का लिंग ही बदल दिया। अरे नज़्म की बातें करते हुए कम से कम गुलज़ार की इन पंक्तियों को याद कर लेते तो मुखड़े में ऐसी गलती नहीं करते 

नज़्म उलझी हुई है सीने में 
मिसरे अटके हुए हैं होठों पर 
उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह 
लफ़्ज़ काग़ज़ पे बैठते ही नहीं 

कब से बैठा हुआ हूँ मैं जानम 
सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा
बस तेरा नाम ही मुकम्मल है 
इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी

इसलिए आपको कहना चाहिए था
तू नज़्म नज़्म सी मेरे होंठो पे ठहर जा 
मैं ख्वाब ख्वाब सा तेरी आँखों में जागूँ रे 

लिंग की ये गलतियाँ इत्र सा (सी) और तेरे (तेरी) कुर्बत और मेरे (मेरी) साँसों में भी बरक़रार रहती हैं और गीत सुनने के आनंद को उसी तरह बाधित करती हैं जैसे चावल में कंकड़। मुझे समझ नहीं आता कि इतनी गलतियाँ  निर्देशिका और उनकी पूरी टीम को नज़र कैसे नहीं आई? गायक के तो उसे पकड़ने का सवाल ही नहीं उठता क्यूंकि इस गीत की लिखने और संगीतबद्ध करने के साथ गाने की भी जिम्मेदारी अर्को ने सँभाली थी। 

फिर भी गीत की गिटार प्रधान धुन ऐसी है जो तुरंत ज़हन में बस जाती है और आपको मुखड़े को गुनगुनाने पर विवश कर देती है। अर्को के रचे इंटरल्यूड्स कर्णप्रिय हैं। गीत का फिल्मांकन नायक नायिका के बीच एक ओर खिलती दोस्ती और दूसरी ओर पनपते प्यार के छोटे छोटे पलों को अच्छी तरह पकड़ता है इसलिए इसे देखना भी मन को रूमानियत से भर देता है। तो आइए सुने ये गीत इस उम्मीद के साथ कि अर्को ऐसी गलतियों से बाज आएँगे।

तू नज़्म नज़्म सा (सी) मेरे होंठो पे ठहर जा 
मैं ख्वाब ख्वाब सा तेरी आँखों में जागूँ रे 
तू इश्क़ इश्क़ सा मेरे रूह में आ के बस जा 
जिस ओर तेरी शहनाई उस ओर मैं भागूँ रे 

हाथ थाम ले पिया करते हैं वादा 
अब से तू आरजू तू ही है इरादा 
मेरा नाम ले पिया मैं तेरी रुबाई 
तेरे ही तो पीछे-पीछे बरसात आई, बरसात आई 

तू इत्र इत्र सा (सी) मेरे (मेरी) साँसों में बिखर जा 
मैं फ़कीर तेरे (तेरी) कुर्बत का तुझसे तू माँगूँ रे 
तू इश्क इश्क सा मेरे रूह में आ के बस जा 
जिस ओर तेरी शहनाई उस ओर मैं भागूँ रे 

मेरे दिल के लिफाफे में तेरा ख़त है जाणिया 
तेरा ख़त है जाणिया .. 
नाचीज़ ने कैसे पा ली किस्मत ये जाणिया वे 
तू नज़्म नज़्म सा (सीमेरे होंठो पे ठहर जा। 

Friday, January 19, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान 20 :मीर-ए-कारवाँ Meer e Kaarwan

एक हफ्ते के विराम के बाद वार्षिक संगीतमाला का कारवाँ फिर चल पड़ा है साल के बचे हुए बीस शानदार गीतों के सफ़र पर  संगीतमाला की बीसवीं पायदान पर गीत वो जिसे लिखा नवोदित गीतकार अधीश वर्मा ने, धुन बनाई संगीतकार रोचक कोहली ने और जिसमें आवाज़े दीं नीति मोहन व अमित मिश्रा ने । जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ फिल्म लखनऊ सेंट्रल के गीत मीर ए कारवाँ की।

चंडीगढ़ से ताल्लुक रखने वाले रोचक कोहली का सितारा पहली बार आयुष्मान के साथ रचे उनके गीत पानी दा रंग के साथ चमका था। आरंभिक कुछ सालों में आयुष्मान के साथ अपना फिल्म संगीत की शुरुआत करने वाले रोचक कोहली इस साल नाम शबाना, करीब करीब सिंगल और लखनऊ सेंट्रल से बतौर संगीतकार अपनी व्यक्तिगत पैठ बनाते दिखे। चाहे विकी डोनर का पानी दा रंग हो या हवाईज़ादा कासपना है निजाम का ,रोचक की गिटार पर महारत देखते ही बनती है।


मीर ए कारवाँ में भी मुखड़े के पहले  गिटार के साथ तबले का अद्भुत मेल श्रोताओं का ध्यान एक बार ही में आकर्षित कर लेता है। गिटार और तबले की ये संगत ऐसी है जिसे बार बार सुनने का मन  होता है और रोचक इसीलिए उसका प्रयोग इंटरल्यूड्स में भी करते हैं। ये कहना लाजिमी होगा कि संगीत का ये टुकड़ा इस गीत की सिग्नेचर ट्यून बन कर उभरा है। रोचक कोहली ने अधीश की मदद से इस गीत को सूफियत का जामा पहनाने की कोशिश की है। पर गीत के कुछ हिस्से "मितवा" की याद दिला देते हैं जिससे बचा जा सकता था।

फिल्म के गीतकार अधीश वर्मा का फिल्मों के लिए लिखा गया दूसरा गीत है। इससे पहले वे रोचक के साथ बैंक चोर  का एक गीत लिख चुके थे। मीर ए कारवाँ एक ऐसा गीत है जो फिल्म की कहानी में ज़िंदगी की अलग अलग राहों से भटकते हुए किरदारों को संगीत के माध्यम से जोड़ता है। जेल की सलाखों में बंद इन किरदारों को एक नयी मंज़िल की तलाश है।

अधीश ने गीत में मीर-ए-कारवाँ का जुमला उछाला है। दरअसल सफ़र में साथ चलने वाले समूह के नेता को ही 'मीर-ए-कारवाँ' कहा जाता  है। पर अधीश ने इस गीत में कहना चाहा है कि जब हम जीवन की जटिल राहों में अकेले ही संघर्ष करते हैं तो हमारी उम्मीद की किरण, हमारे सफ़र का मसीहा यानि हमारा मीर ए कारवाँ बस एक ऊपर वाला होता है। अधीश इसी मीर ए कारवाँ से अपने किरदारों (जो जीवन की इस गहरी स्याह रात से होकर गुज़र रहे हैं ) के लिए नए उजाले की दुआ करते हैं। 

बहार क्यूँ तेरे दर ना आती.. वाले अंतरे में अधीश किरदारों की अपने आस पास की परिस्थितियों से उपजी हताशा को बखूबी रेखांकित करते हैं। नीति मोहन की आवाज़ मुझे हमेशा से प्यारी लगती रही है। इस गीत में उनका अमित मिश्रा  ने भी बखूबी साथ दिया  है तो आइए सुनें इन दोनों के स्वर में फिल्म लखनऊ सेंट्रल का ये गाना...


ओ बंदेया ओ बंदेया
ओ बंदेया ओ बंदेया
ओ बंदेया ओ बंदेया

तेरी मंज़िलें हुईं गुमशुदा
फिर भी रास्ता है तेरा मेहेरबां
ओ मीर-ए-कारवाँ 
तेरी राहों पे रवाँ
कि मेरे नसीबों में
हो कोई तो दुआ
ओ मीर-ए-कारवाँ
ले चल मुझे वहाँ
ये रात बने जहाँ सुबह
मीर-ए-कारवाँ, ओ मीर-ए-कारवाँ

ओ बस कर दिल अब बस कर भी
हो बस कर दिल अब बस कर भी
उस राह मुझे जाना ही नहीं
पल दो पल का साथ सफ़र फिर
होगी जुदा रहगुज़र
नदिया थाम के जो बहते रहे
मिलते हैं वो किनारे कहाँ

ओ मीर-ए-कारवाँ, तेरी राहों पे रवाँ...

बहार क्यूँ तेरे दर ना आती
है क्या भरम जो नज़र दिखाती
अब और कितनी ये रात बाक़ी
है रात बाक़ी, ये रात बाक़ी
निगल ना जायें तुझे ये साये
गले में घुटती हैं सर्द आहें
बता ओ बंदे क्यूँ मात खाये
क्यूँ मात खाये रे

लागे ना दिल अब लागे नहीं
लागे ना दिल अब लागे नहीं
मेरे पैरों तले निकली जो ज़मीं
इस बस्ती में था मेरा घर
उसे किस की लगी फिर नज़र
वो जो सपनों का था काफ़िला
ऐसा झुलसा की अब है धुआँ

ओ मीर-ए-कारवाँ, तेरी राहों पे रवाँ...
चल अकेला राही, चल चल अकेला राही
हाफ़िज़ तेरा इलाही, हाफ़िज़ तेरा इलाही



वार्षिक संगीतमाला में अब तक


21. गुदगुदी गुदगुदी करने लगा  हर नज़ारा 
22. दिल उल्लू का पठ्ठा है 
23. स्वीटी  तेरा ड्रामा 
24. गलती से mistake 
25 .तेरी मेरी इक कहानी है 

Thursday, January 11, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान 21 : गुदगुदी , गुदगुदी करने लगा है हर नज़ारा Gudgudi

वार्षिक संगीतमाला की 21 वीं सीढ़ी पर गाना है फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार का। जग्गा जासूस की तरह ही सीक्रेट सुपरस्टार भी पिछले साल की एक म्यूजिकल थी। अमित त्रिवेदी पूरे एलबम के संगीत संयोजन में प्रीतम जैसा तो कमाल नहीं दिखा सके फिर भी उन्होंने एक अलग तरह के विषय पर बनाई फिल्म में कौसर मुनीर के शब्दों को अपनी धुनों से मधुर बनाने की अच्छी कोशिश जरूर की है।


गीतमाला में इस फिल्म का जो पहला गीत शामिल हुआ है वो है "गुदगुदी" जिसे गाया है सुनिधि चौहान ने। अमित त्रिवेदी को फिल्मों में ज्यादातर गाने ऐसे मिले हैं जो फिल्म की कहानी से पूरी तरह गुथे होते हैं। ये गीत भी इसी प्रकृति का है। कहानी एक किशोरी की है जो प्रतिभावान है, गायिका बनना चाहती है पर घर की बंदिशों ने उसकी बाहरी दुनिया तक पहुँचने की हसरत को नाउम्मीदी में बदल दिया है। ऐसे में जब उसकी माँ एक लैपटाप ले आती हैं तो इंटरनेट के माध्यम से उसे खुशियों का खजाना सा मिल जाता है क्यूँकि अब वो यू ट्यूब के माध्यम से अपने गाने रिकार्ड को दुनिया को सुना सकती है।

अगर हम मन से प्रसन्न हो ना तो छोटी से छोटी बात में खुशी ढूँढ लेते हैं। गीतकार कौसर मुनीर मन के इसी भाव को "गुदगुदी" के रूपक में बाँधा है। अक्सर आप किसी के प्यारे दोस्त के बारे में बात करें तो उसके प्रफुल्लित चेहरे को देख कर कहते हैं क्यूँ उसका जिक्र सुनकर दिल में गुदगुदी हुई ना?

यहाँ हमारी ये किशोर नायिका तो ख़ैर इतनी खुश है कि माँ का लाड़, छोटे भाई की तकरार और सहपाठी का प्यार सब मन में गुदगुदी ही जगा रहा है। तभी तो कौसर उनकी आवाज़ बनकर लिखती हैं..

अभी अभी आँखों ने सीखा मटकना
अभी अभी दाँतों ने सीखा चमकना
लगता है जैसे अभी अभी इस दिल ने
सीखा दिल से हँसना

अभी अभी बालों ने सीखा है खुलना
अभी अभी दागों ने सीखा है धुलना
लगता है जैसे अभी अभी इस दिल ने
सीखा दिल से हँसना

गुदगुदी , गुदगुदी करने लगी बिंदियाँ
गुदगुदी , गुदगुदी करने लगी चोटियाँ
गुदगुदी , गुदगुदी करने लगा है हर नज़ारा

गुदगुदी , गुदगुदी करने लगी तितलियाँ
गुदगुदी , गुदगुदी करने लगी चिड़ियाँ
गुदगुदी , गुदगुदी करने लगा है हर नज़ारा

अमित त्रिवेदी ने गीत के इंटरल्यूड्स में मैंडोलिन और सैक्सोफोन के मधुर टुकड़े डाले हैं। बीच बीच में कोरस भी गीत में नया जोश सा भरता है। गीत के मस्ती और शोखी के मूड को सुनिधि ने अपनी धारदार गायिकी से जीवंत कर दिया है।  हफ्ते भर पहले वो वास्तविक जीवन में माँ भी बनी है। उम्मीद है कि इस गीत के साथ ही नया साल उनकी ज़िंदगी को खुशियों से भर दे। तो आइए सुनते हैं उनकी आवाज़ में  इस प्यारे से गीत को..


Tuesday, January 09, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान 22 : संगमरमर के बँगले बनाता है, दिल अकबर का पोता है

फिल्मों गीतों में गालियों को मुखड़ों में इस्तेमाल करने का रिवाज़ नया नहीं है। दरअसल गीतों में उनका प्रयोग  कुछ इस तरह से हुआ है कि अव्वल तो वो गालियाँ रही नहीं बल्कि एक तरह की उलाहना बन गयीं हैं। मजे की बात है कि गीतकारों की सारी खुंदस मुए इस दिल पर ही उतरी है। दिल बदमाश भी है (बदमाश दिल तो ठग है बड़ा..सिंघम)और बदतमीज़ भी ( बदतमीज़ दिल YZHD)। गुलज़ार साहब तो एक स्तर और बढ़ गए और उसे 'कमीना' ही बना दिया। पर इस कमीने दिल पर क्या खूब कहा था उन्होंने..    

क्या करे ज़िन्दगी, इसको हम जो मिले
इसकी जाँ खा गये, रात दिन के गिले
रात दिन गिले...
मेरी आरज़ू कमीनी, मेरे ख्वाब भी कमीने
इक दिल से दोस्ती थी, ये हुज़ूर भी कमीने..

इसलिए जब जग्गा जासूस में अमिताभ भट्टाचार्य ने इस दिल को 'उल्लू के पठ्ठे' की संज्ञा दे दी तो लगा कि इस बेचारे दिल को ना जाने आगे और कितने बुरे दिन देखने हैं। कसूर भी क्या जाना ना हो जहाँ वहीं जाता है..फूटी तक़दीर आज़माता है। अब बात भले सही हो पर ज़िंदगी में जो कुछ भी अच्छा है वो तो इसी दिल की बदौलत है। भले ये काबू में नहीं रहता, दिमाग से लड़ झगड़ कर हमसे उल्टी सीधी हरक़ते  करवा लेता है पर ये तो उन लहरों की तरह है जो अगर तट पर उथल पुथल ना मचाएँ तो शरीर रूपी सागर बिल्कुल बेजान हो जाए।



वैसे सच बताऊँ तो  इस गाने ने मेरा ध्यान अपनी ओर गाली वाली हुक लाइन से नहीं बल्कि प्रील्यूड में प्रीतम के गिटार के शानदार संयोजन की वज़ह से आकर्षित किया था। प्रीतम ने इस गीत में इलेक्ट्रिक और एकॉस्टिक गिटार के आलावा फ्लोमेनको गिटार का इस्तेमाल किया जो स्पेन से प्रचलन में आया।फ्लोमेनको गिटार का ऊपरी सिरा परंपरागत गिटार से थोड़ा पतला होता है। स्पेनिश नृत्य में पैरों की थाप के बीच तेज आवाज़ की जरूरत होती है जो इस गिटार के आधार को रोजवुड जैसी मजबूत लकड़ी से बनाए जाने से उत्पन्न की जा सकती है। 

इस गीत को अपनी आवाज़ दी है अरिजीत सिंह और निकिता गाँधी ने और गीत के मूड के साथ उनकी गायिकी जँची भी है। गीत में अमिताभ ने दिल की शान में कुछ मजेदार पंक्तियाँ रची हैं। मिसाल के तौर पर संगमरमर के बँगले बनाता है, दिल अकबर का पोता है या फिर आजकल के प्रेम के परिपेक्ष्य में उनका कहना जैसे आता है चुटकी में जाता है दिल सौ सौ का छुट्टा है। अमिताभ की मस्तिष्क की इस उर्वरता को देख मन मुस्कुराए बिना नहीं रह पाता।

पर्दे पर चेहरे पर शून्यता का भाव लिए  हुए रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ ने जो रोबोट सदृश लटके झटके किये हैं वो भी दर्शकों का दिल लुभाते हैं। तो आइए इस गीत की मस्ती के साथ मन को थोड़ा आनंदमय कर लें ...


और हाँ अगर वीडियो देख के आप के मन में ये सवाल उठ रहा हो कि ये किस देश में फिल्माया गया तो बता दूँ कि रणवीर कैटरीना का ये गाना उत्तर अफ्रीका के देश मोरक्को में शूट हुआ था।😊

Sunday, January 07, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान #23 : स्वीटी तेरा ड्रामा मचा दे हंगामा... Sweety Tera Drama

वार्षिक संगीतमाला के पिछले गीत गलती से मिस्टेक के साथ अगर आप थिरकने से रह गए हों तो कोई बात नहीं गीतमाला की 23वीं सीढ़ी पर के गीत में झटके मटके कम नहीं हैं। एक बार इसकी बीट्स सुनकर रजाई से बाहर झटक लिए तो फिर पूरे गीत में मटकते ही रहेंगे। इस गीत की झुमाने वाली धुन बनाई है एक ऐसे संगीतकार ने जिसने हिंदी फिल्मों में प्रवेश ही दो साल पहले लिया था।

हिंदी फिल्म उद्योग हर साल नए संगीतकारों को जन्म दे रहा है। यू ट्यूब की उपलब्धता संगीत से जुड़े फ़नकारों को सीधे जनता तक पहुँचने का एक अच्छा माध्यम दे रही है। पर पिछले कुछ सालों से मैं ये भी देख रहा हूँ कि ये नए संगीतकार जितनी शुरुआती सफलता के साथ अपना नाम बनाते हैं उस स्तर को  बनाए नहीं रख पाते। बहरहाल इस साल क्षितिज पर जिस संगीतकार का नाम चमका है उनका नाम है तनिष्क बागची। वैसे तो तनिष्क ने सबसे पहले अपने जोड़ीदार वायु के साथ मिलकर तनु वेड्स मनु रिटर्न के गीत बन्नो तेरा स्वैगर में खासा धमाल मचाया था। फिर 2016 में कपूर एंड स्स के गीत बोलना में वे सुरीली धुन देने में कामयाब रहे थे।


पर 2017 में तो उन्होंने बद्रीनाथ की दुल्हनिया, हाफ गर्लफ्रेंड और शुभ मंगल सावधान के लिए खासी लोकप्रियता अर्जित की है। वैसे अब तक वे ज्यादातर वैसे एलबमों में अपनी भागीदारी कर पाए हैं जिसमें एक से ज्यादा संगीतकार थे। शायद आने वाले साल में ये स्थिति बदले। कोलकाता से ताल्लुक रखने वाले तनिष्क फिल्मों में मौका पाने के पहले टीवी शोज़ में संगीत संयोजन का काम देखते थे।  इस गीत के संगीत संयोजन के बारे में तनिष्क कहते हैं

"इस गीत का संगीत रचते हुए मुझे बस यही ख्याल रहा कि चूँकि ये बरेली के लिए गीत बन रहा है तो इसमें खूब सारी ढोलक होनी चाहिए । इसी लिए मैंने भारतीय वाद्यों का चयन किया ताकि एक देशी माहौल बन सके।"

तनिष्क और उनके साथियों ने ढोलक और सारंगी के साथ अन्य ताल वाद्यों का ऐसा सम्मिश्रण किया कि गीत की शुरुआती बीट्स को सुनकर ही आपका मन झूमने को कर उठे। उत्तराखंड से उभरते नवोदित गायक देव नेगी की गायिकी भी गीत की उर्जा के अनुरूप रही। गीत में देव का साथ दिया पवनी पांडे और श्रद्धा पंडित ने जबकि रैप का मोर्चा सँभाला प्रवेश मलिक ने।

इस गीत में फिल्म के सारे किरदार इकठ्ठे थे और इस गीत की वज़ह से सबको अपने हाथ पैर सीधे करने का मौका मिल गया 😉। ज्यादातर गंभीर किस्म का किरदार निभानेवाले राजकुमार राव का कहना था कि

"मुझे तो अपनी फिल्मों में शायद ही कभी नाचने का मौका मिलता है जबकि मुझे ऐसा करना पसंद है इसलिए इस गीत के फिल्मांकन का मैंने खूब आनंद उठाया।"

तो आइए एक बार फिर थोड़ा हंगामा मचा लें इस गीत के साथ

Friday, January 05, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान # 24 यही उमर है कर ले गलती से मिस्टेक! Galti Se Mistake

वार्षिक संगीतमाला की चौबीसवीं सीढ़ी पर गाना वो जिसमें मेरी समझ से इस साल की सबसे बेहतरीन कोरियोग्राफी हुई है। गाने में प्रयुक्त संगीत ऐसा कि आप चाहे भी तो अपने को थिरकने से नहीं रोक सकते। संगीतकार प्रीतम की ये खासियत रही है कि वो पश्चिमी संगीत के साथ लोक संगीत का इस तरह मिश्रण करते हैं कि हर वक़्त एक नई आवाज़ बाहर निकल कर आती है।


इस बार प्रीतम ने असम के लोक नृत्य के साथ के संगीत को अपने इस गीत में समाहित किया है। प्रीतम के सहायक ध्रुवदास जिन्होंने इस गीत की प्रोग्रामिंग की है ने इसका खुलासा करते हुए अपने एक साक्षात्कार में बताया था कि
"असमी बिहू नृत्य गीतों का अंत द्रुत लय में होता है जिसकी बहुत सारी तहें होती हैं। शुरुआत में धीमी लय ज्यादा ऊँची और तेज होती चली जाती है। इस गीत में बिहु के रूप को बरक़रार रखा गया है।"
ध्रुवदास क्या कहना चाहते हैं वो आप गीत के शुरुआती पन्द्रह सेकेंड और फिर अंत के आधा मिनट (2.15 - 2.45 तक ) में सुन कर महसूस कर सकते हैं।  बिहु में असम के लोकवाद्य पेपा (जो भैंस के सींग से बनाया जाता है और तुरही जैसा दिखता है) के साथ ढोल की अद्भुत संगत होती है जिसका एक नमूना आप को यहाँ सुनने को मिलेगा।

  


जग्गा जासूस के इस गीत में पेपा का स्वर देर तक गूँजा है। वैसे जहाँ प्रीतम रहेंगे वहाँ थोड़े विवाद भी जरूर रहेंगे। गीत के रिलीज़ होने के बाद उँगली उठी कि गीत की धुन मेक्सिको के एक बैंड के इस गीत से मिलती जुलती है। मेंने जब दोनों गीतों को सुना तो पाया कि दोनों में इस्तेमाल हुई ताल वाद्यों की बीट्स मिलती जुलती हैं लेकिन संगीत निर्माता का कहना है कि ये बीट्स एक Common tribal music library से लिए गए हैं इसलिए ये आरोप बेबुनियाद हैं। 

ये गीत किशोर और युवा होते लड़कों का गीत है। गीत के बोल मजाहिया लहजे में युवावस्था में प्रवेश करते लड़कों को गलती से mistake करने को प्रोत्साहित करते हैं। गीत में एक पागलपन हैं जो गीत की कोरियोग्राफी में उभर कर सामने आता है। दरअसल लड़कों के हॉस्टल में जिसने भी कुछ समय बिताया हो वो इस पागलपन से ख़ुद को सहज ही जोड़ सकता है।😊😊

इस गीत की सफलता में संगीतकार, गीतकार और गायक के आलावा निर्देशक अनुराग बसु, अदाकार रणवीर कपूर और कोरियाग्राफर टीम का बराबर का हाथ है। मजे की बात ये है कि इस गीत में अनुराग सांता क्लॉज बनकर आते हैं। तो अगर मन और तन दोनों को को तरंगित करना चाहते हैं तो अरिजीत सिंह और अमित मिश्रा की आवाज़ और प्रीतम के संगीत के साथ झूमना ना भूलें..

Wednesday, January 03, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 पायदान #25 : तेरी मेरी इक कहानी है Ik Kahani

पुराना साल बीत गया और नया शुरु भी हो गया पर एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमाला चालू ही नहीं हो पाई। अब क्या करें जनाब यूँ तो नए पुराने गानों पर तो हमेशा नज़र रहती है और  एक महीने से तो लगातार ही पिछले साल की फिल्मों को चुन चुन कर उसके गीत सुन रहे हैं पर कहना जरूर होगा कि इस साथ सुरीले गीतों की कड़की जरूर रही। ऊपर से पद्मावती के पद्मावत बनने के प्रकरण की वजह से इस फिल्म के गीतों को गीतमाला से अलग करना पड़ा। नतीजा ये रहा कि साल के पच्चीस बेहतरीन गीतों की फेरहिस्त पूरी करने का मामला थोड़ा खिंच गया।

तो वार्षिक संगीतमाला 2017 की शुरुआत एक सिंगल से। पश्चिमी देशों की तरह भारत में भी आजकल फिल्मों के इतर इकलौते गीत रिलीज़ किए जा रहे हैं और उनमें कुछ खासे लोकप्रिय भी हुए हैं। पच्चीसवीं सीढ़ी पर विराजमान ये गीत एक हल्का फुल्का रोमांटिक गीत है जिसे गजेंद्र वर्मा में गाया, लिखा और संगीतबद्ध किया है।


गजेंद्र वर्मा यूँ तो हरियाणा के सिरसा से ताल्लुक रखते हैं पर वे पहली बार 2011 में अजीबो गरीब वाक़ये के कारण चर्चा में आए। इंटरनेट पर एक गीत Emptiness रोहन राठौड़ के नाम से आया जिसमें दावा किया गया कि IIT गुवहाटी के इस छात्र ने ये गीत अपनी प्रेमिका के ठुकराए जाने पर लिखा था और गीत रिकार्ड करने के पन्द्रह दिनों बाद  कैंसर की बीमारी की वज़ह से चल बसा। अब कहानी और इस गीत का दर्द सोशल मीडिया पर यूँ गूँजा कि देखते ही देखते ये लाखों लोगों की पसंद बन गया। बाद में पता चला कि रोहन राठोड़ के नाम से तो IIT गुवहाटी में कोई है ही नहीं और इस के असली रचयिता गजेंद्र हैं।

कुछ लोगों ने इसे उनका पब्लिसिटी स्टंट माना पर गजेंद्र ने आरापों को खारिज करते हुए इसे किसी की शरारत बताया। बहरहाल गजेंद्र उसके बाद गाहे बगाहे हिंदी फिल्मों में बतौर संगीत देते रहें हैं और ख़ुद के सिंगल्स भी निकालते हैं। उनकी मुलायम आवाज़ हिंदी व अंग्रेजी दोंनों में गाए रूमानी गीतों में खासा असर छोड़ती है।

तो आइए सुनते हैं ये गाना जिसके शब्द तो मामूली हैं पर धुन ऐसी कि गुनगुनाने का मन करे। वैसे भी जिसके साथ आपकी कहानी जम गयी हो उसके लिए ये कहना तो पसंद करेंगे ना आप...

जिक्र बिना तेरे होंगी ना बातें मेरी
चाँद, बिना तेरे पूरी ना रातें मेरी
भीनी भीनी सी तेरी महक को
शाम ओ सुबह तो ढूँढें हैं साँसें  मेरी

तू ही मेरी जिंदगानी है 
तेरी मेरी इक कहानी है

Monday, January 01, 2018

वार्षिक संगीतमाला 2017 की तैयारियाँ और एक नज़र पिछली संगीतमालाओं पर...

नया  साल आ चुका है और एक शाम मेरे नाम पर वार्षिक संगीतमालाओं के लिए साल भर के पच्चीस बेहतरीन गीत चुनने की क़वायद ज़ारी है। दिसंबर से ही एक बोझ सा आ जाता है मन में कि क्या पच्चीस गीतों की फेरहिस्त आसानी से पूरी हो पाएगी। पर हर साल प्रदर्शित हुई लगभग सौ से ज़्यादा फिल्मों के गीतों से गुजरता हूँ तो कभी कभी गीतों के अटपटेपन से मन में कोफ्त सी हो जाती है पर जैसे जैसे गीतों को चुनने की प्रक्रिया अपने आख़िरी चरण में पहुँचती है अच्छे गीतों को सुनकर सारा कष्ट काफूर हो जाता  है और चुनने लायक गीतों की संख्या पच्चीस से भी अधिक होने लगती है। फिर समस्या आती है कि किसे छोड़ूँ और किसे रखूँ? हालांकि इस साल गीतों के गिरते स्तर से ये क़वायद उतनी कठिन नहीं रही।

जैसा कि मैं पहले भी इस चिट्ठे पर कह चुका हूँ कि वार्षिक संगीतमालाएँ मेरे लिए नए संगीत में जो कुछ भी अच्छा हो रहा है उसको आप तक संजों लाने की कोशिश मात्र है। बचपन से रेडिओ सीलोन की अमीन सयानी की बिनाका और फिर विविधभारती पर नाम बदल कर आने वाली सिबाका गीतमाला सुनता रहा। उसका असर इतना था कि जब 2005 के आरंभ में अपने रोमन हिंदी ब्लॉग की शुरुआत की तो मन में एक ख्वाहिश थी कि अपने ब्लॉग पर अपनी पसंद के गीतों को पेश करूँ।

तो आइए एक नज़र डालें पिछली  संगीतमालाओं की तरफ। मैंने अपनी पहली संगीतमाला की शुरुआत 2004  के दस बेहतरीन गानों से की जिसे 2005 में 25 गानों तक कर दिया। 2006 में जब खालिस हिंदी ब्लागिंग में उतरा तो ये सिलसिला इस ब्लॉग पर भी चालू किया। इस साल मैंने पिछली सारी संगीतमालाओं में बजने वाले गीतों को एक जगह इकठ्ठा कर दिया है ताकि नए पाठकों को भी इस सिलसिले (जो अपने 12वें साल से गुजर रहा है) की जानकारी हो सके। गर आपको किसी साल विशेष से जुड़े गीत संबंधित आलेख तक पहुँचना है तो उस साल की सूची देखिए और गीत मिलने से उससे जुड़ी लिंक पर क्लिक कीजिए। आप संबंधित आलेख तक पहुँच जाएँगे। 

वार्षिक संगीतमाला  2016 


1. चन्ना मेरेया Channa Mereya
2. इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत गुम है गुम है गुम है Ikk Kudi
3. जग घूमेया थारे जैसा ना कोई Jag Ghoomeya
4. पश्मीना धागों के संग कोई आज बुने ख़्वाब Pashmina
5. बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है   Hanikaarak Bapu
6. होने दो बतियाँ, होने दो बतियाँ   Hone Do Batiyan
7.  क्यूँ रे, क्यूँ रे ...काँच के लमहों के रह गए चूरे'?  Kyun Re..
8.  क्या है कोई आपका भी 'महरम'?  Mujhe Mehram Jaan Le...
9.   जो सांझे ख्वाब देखते थे नैना.. बिछड़ के आज रो दिए हैं यूँ ... Naina
10. आवभगत में मुस्कानें, फुर्सत की मीठी तानें ... Dugg Duggi Dugg
11.  ऐ ज़िंदगी गले लगा ले Aye Zindagi
12. क्यूँ फुदक फुदक के धड़कनों की चल रही गिलहरियाँ   Gileheriyaan
13. कारी कारी रैना सारी सौ अँधेरे क्यूँ लाई,  Kaari Kaari
14. मासूम सा Masoom Saa
15. तेरे संग यारा  Tere Sang Yaaran
16.फिर कभी  Phir Kabhie
17 चंद रोज़ और मेरी जान ...Chand Roz
18. ले चला दिल कहाँ, दिल कहाँ... ले चला  Le Chala
19. हक़ है मुझे जीने का  Haq Hai
20. इक नदी थी Ek Nadi Thi

वार्षिक संगीतमाला 2015




वार्षिक संगीतमाला 2014

वार्षिक संगीतमाला 2013

वार्षिक संगीतमाला 2013  में गीतों की फेरहिस्त से साल के गीतकार का चयन करूँ तो वो तमगा इरशाद क़ामिल को ही जाएगा। इरशाद ने इस साल कौन मेरा, मेरा क्या तू लागे जैसे मधुर गीत लिखे तो दूसरी ओर जिसको ढूँढे बाहर बाहर वो बैठा है पीछे छुपके जैसे सूफ़ियत के रंग में रँगे गीत की भी रचना की। इतना ही नहीं इरशाद क़ामिल ने आमिर खुसरो की कह मुकरनी की याद ऐ सखी साजन से ताज़ा तो की ही, दो प्रेम करने वालों को पिछले साल शर्बतों के रंग और मीठे घाट के पानी जैसे नए नवेले रूपकों से नवाज़ा।


 वार्षिक संगीतमाला 2013 संगीत के सितारे

इरशाद क़ामिल के आलावा अमिताभ भट्टाचार्य ने भी  सँवार लूँ, ज़िदा, कबीरा व तितली जैसे कर्णप्रिय गीत रचे। प्रसून जोशी ने भी भाग मिल्खा भाग के लिए कमाल के गीत लिखे। पर धुरंधरों में जावेद अख़्तर की अनुपस्थिति चकित करने वाली थी। मेरे पसंदीदा गीतकार गुलज़ार ने विशाल भारद्वाज की फिल्मों मटरू की बिजली.. और एक थी डायन के गीत लिखे। उनका लिखा गीत ख़ामख़ा मुझे बेहद पसंद है पर विशाल अपनी आवाज़ और धुन से उन बोलों के प्रति न्याय नहीं कर सके वैसे भी गुलज़ार की कविता कभी कभी गीत से ज्यादा यूँ ही पढ़ने में  सुकून देती है..विश्वास नहीं होता तो गीत के इस अंतरे को पढ़ कर देखिए

सारी सारी रात का जगना
खिड़की पे सर रखके उंघते रहना
उम्मीदों का जलना-बुझना
पागलपन है ऐसे तुमपे मरना
खाली खाली दो आँखों में
ये नमक, ये चमक, तो ख़ामख़ा नहीं...


संगीतकारों में इस साल की सफलताओं का सेहरा बँट सा गया। लुटेरा में अमित त्रिवेदी, रांझणा में ए आर रहमान और भाग मिल्खा भाग में शंकर एहसान लॉय ने कमाल का संगीत दिया। नये संगीतकारों में अंकित तिवारी ने सुन रहा है के माध्यम से काफी धूम मचाई। सचिन जिगर ने शुद्ध देशी रोमांस में अब तक का अपना सबसे बेहतर काम दिखाया। प्रीतम बर्फी जैसा एलबम तो इस साल नहीं दे पाए पर  ये जवानी है दीवानी, फटा पोस्टर निकला हीरो, Once upon a time in Mumbai दोबारा के उनके कुछ गीत बेहद सराहे गए।

गायकों में ये साल बिना किसी शक़ अरिजित सिंह के नाम रहा। तुम ही हो और लाल इश्क़ जैसे गीतों को जिस तरह डूब कर उन्होंने गाया है वो आम लोगों और समीक्षकों दोनों द्वारा सराहा गया है। वैसे कुछ नए पुराने कलाकारों ने पिछले साल अपनी खूबसूरत आवाज़ की बदौलत कुछ गीतों को यादगार बना दिया। चैत्रा अम्बादिपुदी द्वारा बेहद मधुरता से गाया कौन मेरा, मिल्खा के पैरों में जोश भरते आरिफ़ लोहार,मस्तों का झुंड में थिरकने पर मजबूर करते दिव्य कुमार, ये तूने क्या किया वाली कव्वाली में अपनी गहरी आवाज़ का जादू बिखेरते जावेद बशीर, अपनी आवाज़ की मस्ती से स्लो मोशन अंग्रेजा में झुमाने वाले सुखविंदर सिंह,भागन के रेखन की बँहगिया में एक प्यारी बन्नो का अपने परिवार से जुदाई का दर्द उभारती मालिनी अवस्थी  और झीनी झीनी में अपनी शास्त्रीय गायिकी से मन मोहते उस्ताद राशिद खाँ पिछले साल की कुछ ऐसी ही मिसालें हैं।

साल के सरताज गीत के बारे में तो आप अगली प्रविष्टि में जानेंगे (वैसे ये बता दूँ कि ऊपर के कोलॉज  में सरताज गीत से जुड़े सभी कलाकारों की तसवीर मौज़ूद है।) तब तक एक नज़र इस संगीतमाला के पिछले चौबीस गीतों पर एक नज़र...

वार्षिक संगीतमाला 2012 

संगीतकारों की बात करूँ तो ये साल प्रीतम के नाम रहा। बर्फी के संगीत ने ये साबित कर दिया कि प्रीतम हमेशा 'inspired' नहीं होते और कभी कभी उनके संगीत से भी 'inspired' हुआ जा सकता है। ऐजेंट विनोद फिल्म चाहे जैसी रही हो वहाँ भी प्रीतम का दिया संगीत श्रोताओं को खूब रुचा। Cocktail के गीतों ने भी झूमने पर मजबूर किया। अमित त्रिवेदी ने भी इस साल इश्क़ज़ादे, इंग्लिश विंग्लिश और अइया के लिए कुछ खूबसूरत और कुछ झूमने वाले नग्मे दिए। अजय अतुल का अग्निपथ के लिए किया गया काम शानदार था। नवोदित संगीतकार स्नेहा खानवलकर ने GOW-I और GOW-II में जिस तरह एक बँधे बँधाए दर्रे से हटकर एक नए किस्म के संगीत और बोलों पर काम किया वो निश्चय ही प्रशंसनीय है। शंकर अहसान लॉय, सलीम सुलेमान, विशाल शेखर के लिए ये साल फीका फीका सा ही रहा।

 


 वार्षिक संगीतमाला 2011  

वर्ष 2011 में क्रस्ना और राजशेखर की नवोदित जोड़ी ने तनु वेड्स मनू के लिए कमाल का गी संगीत दिया और रंगरेज़ जैसे बेमिसाल गीत की बदौलत सरताज गीत का सेहरा अपने सर बाँध लिया। 

  

वार्षिक संगीतमाला 2010 

2009 की बादशाहत गुलज़ार ने 2010 में भी कायम रखी दिल तो बच्चा है जी में राहत के गाए शीर्षक गीत के द्वारा।
2010 की गीतमाला में  गीतों की फेरहिस्त कुछ यूँ थी...
  1.  दिल तो बच्चा है जी संगीत:विशाल भारद्वाज, गीत : गुलज़ार, गायक : राहत फतेह अली खाँ, चलचित्र :दिल तो बच्चा है जी
  2. नैन परिंदे पगले दो नैन.., संगीत: आर आनंद, गीत :स्वानंद किरकिरे, गायिका: शिल्पा राव चलचित्र :लफंगे परिंदे
  3. सजदा तेरा सजदा दिन रैन करूँ , संगीत: शंकर अहसान लॉए, गीत : निरंजन अयंगार, गायक : राहत फतेह अली खाँ, चलचित्र : My Name is Khan
  4. फूल खिला दे शाखों पर पेड़ों को फल दे मौला, संगीत: रूप कुमार राठौड़, गीत : शकील आज़मी, गायक : जगजीत सिंह, चलचित्र : Life Express 
  5.  बिन तेरे बिन तेरे कोई ख़लिश है, संगीत: विशाल शेखर, गीत : विशाल ददलानी, गायक : शफ़कत अमानत अली खाँ, सुनिधि चौहान, चलचित्र : I hate Luv Storys
  6. तेरे मस्त मस्त दो नैन, संगीत:साज़िद वाज़िद, गीत : फ़ैज़ अनवर, गायक : राहत फतेह अली खाँ, चलचित्र : दबंग
  7.  सुरीली अँखियों वाले, संगीत:साज़िद वाज़िद, गीत : गुलज़ार, गायक : राहत फतेह अली खाँ, चलचित्र : वीर
  8. तू ना जाने आस पास है ख़ुदा, संगीत: विशाल शेखर, गीत : विशाल ददलानी, गायक : राहत फतेह अली खाँ, चलचित्र : अनजाना अनजानी
  9. मन के मत पे मत चलिओ, संगीत: प्रीतम, गीत : इरशाद क़ामिल, गायक : राहत फतेह अली खाँ, चलचित्र : आक्रोश
  10. मँहगाई डायन खात जात है, संगीत:राम संपत, गायक :रघुवीर यादव, चलचित्र : पीपली लाइव
  11. देश मेरा रंगरेज़ ऐ बाबू, संगीत:Indian Ocean, गीत :स्वानंद किरकिरे, संदीप शर्मा , गायक :राहुल राम, चलचित्र : पीपली लाइव
  12. कान्हा बैरन हुई रे बाँसुरी, संगीत:साज़िद वाज़िद, गीत : गुलज़ार, गायक : रेखा भारद्वाज, चलचित्र : वीर
  13. चमचम झिलमिलाते ये सितारों वाले हाथ, संगीत:शैलेंद्र बार्वे, गीत : जीतेंद्र जोशी, गायक : सोनू निगम, चलचित्र : स्ट्राइकर
  14. बहारा बहारा हुआ दिल पहली बार वे, संगीत: विशाल शेखर, गीत : कुमार, गायक : श्रेया घोषाल, चलचित्र : I hate Luv Storys
  15. आज़ादियाँ, संगीत: अमित त्रिवेदी, गीत : अमिताभ भट्टाचार्य, गायक : अमित व अमिताभ, चलचित्र : उड़ान
  16. तुम जो आए, संगीत: प्रीतम, गीत : इरशाद क़ामिल, गायक : राहत फतेह अली खाँ, चलचित्र : Once Upon A Time in Mumbai
  17. सीधे सादे सारा सौदा सीधा सीधा होना जी , संगीत: प्रीतम, गीत : इरशाद क़ामिल, गायक : अनुपम अमोद, चलचित्र : आक्रोश
  18. पी लूँ तेरे गोरे गोरे हाथों से शबनम, संगीत: प्रीतम, गीत : इरशाद क़ामिल, गायक :मोहित चौहान चलचित्र : Once Upon A Time in Mumbai
  19. Cry Cry इतना Cry करते हैं कॉय को, संगीत: ए आर रहमान, गीत : अब्बास टॉयरवाला, गायक : राशिद अली, श्रेया घोषाल, चलचित्र : झूठा ही सही
  20. नूर ए ख़ुदा , संगीत: शंकर अहसान लॉए, गीत : निरंजन अयंगार, गायक : शंकर महादेवन, अदनान सामी, श्रेया घोषाल , चलचित्र : My Name is Khan
  21. मन लफंगा बड़ा अपने मन की करे, संगीत: आर आनंद, गीत :स्वानंद किरकिरे, गायक :मोहित चौहान चलचित्र :लफंगे परिंदे
  22. गीत में ढलते लफ़्जों पर, संगीत: अमित त्रिवेदी, गीत : अमिताभ भट्टाचार्य, गायक : अमित व अमिताभ, चलचित्र : उड़ान
  23. यादों के नाज़ुक परों पर, संगीत: सलीम सुलेमान, गीत :स्वानंद किरकिरे, गायक :मोहित चौहान चलचित्र :आशाएँ
  24. खोई खोई सी क्यूँ हूँ मैं, संगीत: अमित त्रिवेदी, गीत : जावेद अख़्तर, गायक : अनुषा मणि, चलचित्र : आयशा
  25. तुम हो कमाल, तुम लाजवाब हो आयशा , संगीत: अमित त्रिवेदी, गीत : जावेद अख़्तर, गायक : अमित त्रिवेदी, चलचित्र : आयशा 

वार्षिक संगीतमाला 2009  

साल 2009  में पहली बार मेरे चहेते गीतकार गुलज़ार पहली पायदान पर कमीने फिल्म के लिए विशाल भारद्वाज के संगीतबद्ध गीत इक दिल से दोस्ती के सहारे कब्जा जमाया।

2009 की गीतमाला में बाकी गीतों की फेरहिस्त कुछ यूँ थी...

 वार्षिक संगीतमाला 2008   

में सरताज गीत का  का सेहरा बँधा युवा संगीतकार अमित त्रिवेदी के सर पर। सरताज गीत था शिल्पा राव के गाए और अमिताभ द्वारा लिखे इस बेहद संवेदनशील नग्मे के बोल थे इक लौ इस तरह क्यूँ बुझी मेरे मौला !.

2008 की गीतमाला में बाकी गीतों का सिलसिलेवार क्रम ये था..

वार्षिक संगीतमाला 2007 में एक बार फिर प्रसून जोशी के लिखे और शंकर अहसान लॉए के संगीतबद्ध, 'तारे जमीं पर' के गीतों के बीच ही प्रथम और द्वितीय स्थानों की जद्दोजहद होती रही। पर माँ...जैसे नग्मे की बराबरी भला कौन गीत कर सकता था


2007 की गीतमाला में बाकी गीतों की फेरहिस्त कुछ यूँ थी..

वार्षिक संगीतमाला 2006 में ओंकारा और गुरु के गीत छाए रहे पर बाजी मारी 'उमराव जान' के संवेदनशील गीत 'अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो' ने। इस गीत और दूसरे नंबर के गीत 'मितवा ' को लिखा था जावेद अख्तर साहब ने


2006 की गीतमाला में बाकी गीतों की फेरहिस्त कुछ यूँ थी.
  1. अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो (उमराव जान)
  2. मितवा... ( कभी अलविदा ना कहना )
  3. ओ साथी रे दिन डूबे ना... (ओंकारा)
  4. जागे हैं देर तक हमें कुछ देर सोने दो (गुरू)
  5. तेरे बिन मैं यूँ कैसे जिया... (बस एक पल )
  6. बीड़ी जलइ ले, जिगर से पिया.... (ओंकारा)
  7. अजनबी शहर है, अजनबी शाम है.... ( जानेमन )
  8. तेरे बिना बेसुवादी रतिया...(गुरू)
  9. मैं रहूँ ना रहूँ ....( लमहे-अभिजीत )
  10. लमहा लमहा दूरी यूँ पिघलती है...(गैंगस्टर)
  11. नैना ठग लेंगे...... (ओंकारा)
  12. तेरी दीवानी.... ( कलसा- कैलाश खेर)
  13. रूबरू रौशनी है...... (रंग दे बसंती)
  14. क्या बताएँ कि जां गई कैसे...(कोई बात चले)
  15. ये हौसला कैसे झुके.. ( डोर )
  16. ये साजिश है बूंदों की.....( फना )
  17. सुबह सुबह ये क्या हुआ....( I See You.)
  18. मोहे मोहे तू रंग दे बसन्ती....( रंग दे बसंती )
  19. चाँद सिफारिश जो करता.... ( फना )
  20. बस यही सोच कर खामोश मैं......( उन्स )

वार्षिक संगीतमाला 2005 में बाजी मारी स्वानंद किरकिरे और शान्तनु मोइत्रा की जोड़ी ने जब परिणिता फिल्म का गीत 'रात हमारी तो चाँद की सहेली' है और हजारों ख्वाहिशें ऍसी के गीत 'बावरा मन देखने चला एक सपना' क्रमशः प्रथम और द्वितीय स्थान पर रहे थे।




वार्षिक संगीतमाला 2004 में मेरी गीतमाला के सरताज गीत का सेहरा मिला था फिर मिलेंगे में प्रसून जोशी के लिखे और शंकर अहसान लॉए के संगीतबद्ध गीत "खुल के मुस्कुरा ले तू" को जबकि दूसरे स्थान पर भी इसी फिल्म का गीत रहा था कुछ खशबुएँ यादों के जंगल से बह चलीं। ये वही साल था जब कल हो ना हो, रोग, हम तुम, मीनाक्षी और पाप जैसी फिल्मों से कुछ अच्छे गीत सुनने को मिले थे।




अब ये स्पष्ट कर दूँ कि इस गीतमाला का पॉपुलरटी से कोई लेना देना नहीं है। गायिकी, संगीत , बोल और इनका सम्मिलित प्रभाव इन सभी आधारों को बराबर वज़न दे कर मैं अपनी पसंद के गीतों का क्रम तैयार करता हूँ। कई बार ये स्कोर्स लगभग बराबर होते हैं इसलिए गीतों को ऊपर नीचे करना बड़ा दुरुह होता है।
 

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स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

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