Monday, January 18, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत # 17 : जो इक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम Mar Jaayein Hum

विधु विनोद चोपड़ा अपनी फिल्मों के खूबसूरत फिल्मांकन और संगीत के लिए जाने जाते रहे हैं। बतौर निर्देशक परिंदा, 1942 A love story, करीब और मिशन कश्मीर का संगीत काफी सराहा गया था। इस साल थियेटर में रिलीज़ उनकी फिल्म शिकारा के गीत उतने तो सुने नहीं गए पर अगर आपको शांत बहता संगीत पसंद हो तो ये एल्बम आपको एक बार जरूर सुनना चाहिए। अगर मैं अपनी कहूँ तो मुझे इस संगीत एल्बम में ऐ वादी शहज़ादी... की आरंभिक कविता जिस अंदाज़ में पढ़ी गयी वो बेहद भायी पर जहाँ तक पूरे गीत की बात है तो इस गीतमाला में इस फिल्म का एक ही गीत शामिल हो पाया और वो है श्रद्धा मिश्रा और पापोन का गाया युगल गीत मर जाएँ हम..


मर जाएँ हम एक प्यारा सा प्रेम गीत है ये जो संदेश शांडिल्य की लहराती धुन और झेलम नदी में बहते शिकारे के बीच इरशाद कामिल के शानदार बोलों की वज़ह से मन पर गहरा असर छोड़ता है। दरअसल जब आप  अपने अक़्स को भूल कर किसी दूसरे व्यक्तित्व की चादर को खुशी खुशी ओढ़ लेते हैं तभी प्रेम का सृजन होता है। इरशाद इन्ही भावनाओं को पहले अंतरे में उभारते हैं। 

गीत के दूसरे अंतरे में उनका अंदाज़ और मोहक हो जाता है। अब इन पंक्तियों की मुलायमियत तो देखिए। कितने महीन से अहसास जगाएँ हैं इरशाद कामिल ने अपनी लेखनी के ज़रिए... तू कह रहा है, मैं सुन रही हूँ,मैं खुद में तुझको ही, बुन रही हूँ,....है तेरी पलकों पे फूल महके,...मैं जिनको होंठों से चुन रही हूँ,...होंठों पे आज तेरे मैं नमी देख लूँ,...तू कहे तो बुझूँ मैं, तू कहे तो चलूँ

संगीत संयोजन में संदेश शांडिल्य ने गिटार और ताल वाद्यों के साथ संतूर का प्रयोग किया है। गीत का मुखड़ा जब संतूर पर बजता है तो मन सुकून से भर उठता है। संतूर पर इस गीत में उँगलिया थिरकी हैं रोहन रतन की।

जो इक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम,
जो एक पल तुमसे दूर जाएँ तो मर जाएँ हम,
तू दरिया तेरे साथ ही भीगे बह जाएँ हम,
जो इक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम...

मैं तेरे आगे बिखर गयी हूँ,
ले तेरे दिल में उतर गयी हूँ,
मैं तेरी बाँहों में ढूँढूँ खुद को,
यहीं तो थी मैं किधर गयी हूँ,
खो गयी है तू मुझमें, आ गयी तू वहाँ,
मिल रहे हैं जहाँ पे, ख्वाब से दो जहां,
जो एक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम..

तू कह रहा है, मैं सुन रही हूँ,
मैं खुद में तुझको ही, बुन रही हूँ,
है तेरी पलकों पे फूल महके,
मैं जिनको होंठों से चुन रही हूँ,
होंठों पे आज तेरे मैं नमी देख लूँ,
तू कहे तो बुझूँ मैं, तू कहे तो चलूँ
जो एक पल तुमको ना देखें... तो मर जाएँ हम,
तू दरिया तेरे साथ ही भीगे..
तू नदिया तेरे साथ ही भीगें, बह जाएँ  हम

नवोदित गायिका श्रद्धा की आवाज़ की बनावट थोड़ी अलग सी है जो कि आगे के लिए संभावनाएँ जगाती हैं जबकि पापोन तो हमेशा की तरह अपनी लय में हैं। शिकारा में इस गीत को फिल्माया गया है आदिल और सादिया की युवा जोड़ी पर..

 

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

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4 comments:

Manish on January 19, 2021 said...

श्रद्धा मिश्रा की आवाज़ अलीशा चिनॉय की याद दिलाती है!!

Manish Kumar on January 19, 2021 said...

@Manish हाँ कुछ वैसी ही तो है पर उन्हें और सुनूँगा तब कोई राय बना पाऊँगा।

Sumit on January 22, 2021 said...

Wah!

Manish Kumar on February 06, 2021 said...

@Sumeet :)

 

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