Monday, January 11, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 19 : रात है काला छाता... Raat Hai Kala Chhata

आज जिस गीत को आपके सामने ले के आ रहा हूँ वो ज्यादातर लोगों के लिए अनजाना ही होगा। दरअसल ये एक ऐसा गीत है जो उस दौर के गीत संगीत की याद दिला आता है जिसे फिल्म संगीत का स्वर्णिम काल कहा जाता है। श्री वल्लभ व्यास के लिखे इस गीत के बोल थोड़े अटपटे से हैं पर उसे स्वानंद किरकिरे अपनी खुशमिजाज़ आवाज़ से यूँ सँवारते हैं कि उन्हें सुनते सुनते इस गीत को गुनगुनाने का दिल करने लगता है। वही ठहराव और वही मधुरता जो आजकल के गीतों में बहुत ढूँढने से मिलती है।

ये गीत है फिल्म सीरियस मेन का जो नेटफ्लिक्स पर पिछले अक्टूबर में रिलीज़ हुई थी। वैज्ञानिकों के बीच छोटे पद पर काम करते हुए अपने को कमतर माने जाने की कसक नायक के दिलो दिमाग में इस कदर घर कर जाती है कि वो प्रण करता है कि अपने बच्चे को ऐसा बनाएगा कि सारी दुनिया उसकी प्रतिभा को नमन करे। पर इस काली रात से सुबह के उजाले तक पहुँचने के लिए वो अपने तेजाबी झूठ का ऐसा जाल रचता जाता है कि गीतकार को कहना पड़ता है...रात है काला छाता जिस पर इतने सारे छेद.... तेजाब उड़ेला किसने इस पर जान ना पाए भेद


इस गीत की मूल धुन का क्रेडिट गीत में फ्रांसिस मेंडीज़ को दिया गया है पर इसे इस रूप में लाने का श्रेय है असम से ताल्लुक रखने वाले अनुराग सैकिया को जो पहले भी अनुभव सिन्हा की फिल्मों में अपने बेहतरीन काम से हिंदी फिल्म जगत में अपना सिक्का जमा चुके हैं। प्रवासी मजदूरों पर गीतकार सागर के लिखे लोकप्रिय गीत मुंबई में का बा का संगीत निर्देशन भी उन्होंने ही किया था। इस गीत के संगीत संयोजन में उन्होंने गिटार और बैंजो के आलावा पियानिका और मेंडोलिन का प्रयोग किया है। इन वाद्य यंत्रों पर उँगलियाँ थिरकी हैं सोमू सील की।

रात है काला छाता जिस पर इतने सारे छेद
तेजाब उड़ेला किसने इस पर जान ना पाए भेद
ता रा रा रा.रा रा ... रा रा रा.रा रा .

अब खेलेगा खेल विधाता, चाँद बनेगा बॉल, बॉल... 
सभी लड़कियाँ सीटी होंगी सारे शहर को कॉल
खेल में गड़बड़ नहीं चलेगी, सीटी हरदम बजी रहेगी
जारा ध्यान से इसे बजाना, खुल जाएगी पोल

हम आवारा और लफंगे हैं, लेते सबसे पंगे हैं
लेकिन पंगे सँभल के लेना, वर्ना पड़ जाएगा लेने को देना
रात है काला छाता जिस पर इतने सारे छेद...

तो आइए सुनें स्वानंद की आवाज़ में सीरियस मेन के इस गीत को..


है ना मजेदार गाना? वैसे अगर आप में से किसी ने इसकी मूल धुन सुनी हो तो मुझे जरूर बताएँ। 

Sunday, January 10, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 20 : तेरे संग हूँ आख़़िरी क़दम तक ... Aakhiri Kadam Tak

वार्षिक संगीतमाला अब अपने दूसरे चरण यानी शुरु के बीस गानों के पड़ाव तक पहुँच चुकी है और इस पड़ाव से आगे का रास्ता दिखा रहे हैं सोनू निगम। सोनू निगम ज्यादा गाने आजकल तो नहीं गा रहे पर जो भी काम उन्हें मिल रहा है वो थोड़ा अलग कोटि का है। पियानो और की बोर्ड पर महारत रखने वाले संगीतकार मिथुन शर्मा को ही लीजिए। मेरी संगीतमाला में पिछले पन्द्रह सालों से उनके गीत बज रहे हैं पर ये पहला मौका है उनकी बनाई किसी धुन को सोनू निगम की आवाज़ का साथ मिल रहा है। 


पिछले साल ये मौका आया फिल्म ख़ुदाहाफिज़ में। डिज़्नी हॉटस्टार पर रिलीज़ हुई इस फिल्म का संगीत भी हैप्पी हार्डी एंड हीर की तरह काफी प्रभावशाली रहा। इस फिल्म के तीन गाने इस गीतमाला  में शामिल होने की पंक्ति में थे पर इसी फिल्म का अरमान मलिक का गाया हुआ गाना मेरा इंतज़ार करना बड़े करीब से अंतिम पच्चीस की सूची के बाहर चला गया। 

बहरहाल जहाँ तक इस गीत में सौनू और मिथुन की पहली बार बनती जोड़ी का सवाल है तो लाज़िमी सा प्रश्न बनता है कि आख़िर मिथुन को इतनी देर क्यूँ लगी सोनू को गवाने में ? मिथुन का मानना है कि सोनू निगम तकनीकी रूप से सबसे दक्ष गायक हैं। उनकी प्रतिभा से न्याय करने के लिए मिथुन को एक अच्छी धुन की तलाश थी जो  ख़ुदाहाफिज़ के गीत 'आख़िरी कदम तक' पर जाकर खत्म हुई। 

मिथुन ने जब सोनू को इस गीत को गाने का प्रस्ताव दिया तो वो एक बार में ही सहर्ष तैयार हो गए। वैसे तो मिथुन के संगीतबद्ध ज्यादातर गीत सईद क़ादरी लिखते आए हैं पर इधर हाल फिलहाल में अपने गीतों को लिखना भी शुरु कर दिया है। शायद आशिकी 2 में उनके लिखे गीत क्यूँकि तुम ही हो की सफलता के बाद उन्हें अपनी लेखनी पर ज्यादा आत्मविश्वास आ गया हो। अब दिक्कत सिर्फ ये थी कि सोनू निगम लॉकडाउन में दुबई में डेरा डाले थे जबकि मिथुन मुंबई में। पर तकनीक के इस्तेमाल ने इन दूरियों को गीत की रिकार्डिंग में आड़े नहीं आने दिया। 

ख़ुदाहाफिज़ एक ऐसे मध्यमवर्गीय युवा दम्पत्ति की कहानी है जो शादी के बाद देश में बेरोज़गार हो जाने पर विदेश में नौकरी कर करने का फैसला लेता है। कथा में नाटकीय मोड़ तब आता है जब नायिका परदेश में गुम हो जाती है। पर नायक हिम्मत नहीं हारता और अपने जी को और पक्का कर जुट जाता है अपनी माशूका की खोज में। उसे बताया जाता है कि उसका क़त्ल हो चुका है। साथ साथ जीवन और मरण का जो सपना नायक ने देख रखा था वो पल में चकनाचूर हो जाता है। अपनी पत्नी की अंतिम यात्रा में नायक के मन में उठते मनोभावों को मिथुन कुछ इस तरह शब्दों में ढालते हैं।

नज़रों से करम तक 
ईमां से धरम तक, हक़ीक़त से लेकर भरम तक 
दुआ से असर तक, ये सारे सफ़र तक 
फरिश्तों के रोशन शहर तक, आँसू से जशन तक 
जन्मों से जनम तक, सेहरे को सजा के कफ़न तक 
तेरे संग हूँ आख़़िरी क़दम तक
....

ये रात काली ढल जाएगी 
उल्फ़त की होगी फिर से सुबह 
जिस देश आँसू ना दर्द पले 
है वादा मैं तुझसे मिलुँगा वहाँ 
ज़ख़्मों से मरहम तक, जुदा से मिलन तक 
डोली में बिठा के दफ़न तक 
तेरे संग हूँ आख़़िरी क़दम तक 
तेरे संग हूँ आख़़िरी क़दम तक ...

गीत की शुरुआती पंक्तियाँ वाकई बेहद संवेदनशील बन पड़ी हैं। शब्दों के अंदर बिखरे भावनाओं के सैलाब को सोनू निगम ने अपनी आवाज़ में इस तरह एकाकार किया कि नायक का दर्द सीधे दिल में महसूस होता है। सोनू की सशक्त आवाज़ के पीछे मिथुन ने नाममात्र  का संगीत संयोजन रखा है जो उनके प्रिय पियानो तो कभी गिटार के रूप में प्रकट होता है। अगर आप सोनू निगम की आवाज़ और गायिकी के प्रशंसक हैं तो ये गीत अवश्य पसंद करेंगे।


वैसे सोनू निगम की आवाज़ से इस संगीतमाला में एक बार फिर आगे भी मुलाकात होगी हालांकि वो गीत बिल्कुल अलग मूड लिये हुए है।
वार्षिक संगीतमाला में अब तक

20. तेरे संग हूँ आख़़िरी क़दम तक..

Thursday, January 07, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत #21 बाजे दिल धुन धुन .. दिल धुन धुन धुन धुन बाजे रे Dhun Dhun

वार्षिक संगीतमाला की इक्कीसवीं पायदान का गीत वो जिसमें छत्तीसगढ़ी लोक गीत की मिठास है। इस गीत को गाया है रोमी ने लिखा और धुन बनाई अमित प्रधान ने। चमनबहार के इस गीत को सुनना मेरे लिए एक सुखद आश्चर्य रहा क्यूँकि बहुत दिनों बाद मुखड़े के पहले हारमोनियम की मधुर धुन सुनाई दी इस गीत में। वैसे भी ताल वाद्यों के साथ हारमोनियम हमारे लोकगीतों की जान होता आया है।


चमनबहार इस साल नेटफ्लिक्स पर जून में रिलीज़ हुई। ये फिल्म एक छोटे शहर में पान की दुकान चलाने वाली बिल्लू की कहानी है। बिल्लू जी वनप्रहरी की नौकरी पर लात मात कर अपना ड्रीम जॉब पान की दुकान खोल लेते हैं। दुकान खुल तो जाती है पर चलती नहीं और बिल्लू बेचारे अपनी नीरस चलती ज़िदगी से अनमने से हो जाते हैं कि अचानक उनकी तक़दीर का दरवाजा खुलता है और दुकान के सामने के घर में आ जाती है एक किशोर कन्या जिसपर बिल्लू क्या पूरा शहर ही फिदा हो जाता है। मतलब एक ओर तो बिल्लू की दुकान सामने लगने वाली अड्डेबाजी की वज़ह से  चकाचक चलने लगती है तो दूसरी ओर उन दिल भी फकफकाने लगता है।

पूस के जाड़ा में आम फल जाए 
सपना मा जब गोरिया आए रे 
सुंदरी भंवरा जैसे मन हर घुमरे 
आंकी चांकी सब लागे रे
बाजे दिल धुन धुन 
दिल धुन धुन धुन धुन बाजे रे 
दिल धुन धुन धुन धुन धुन 
धुन धुन धुन धुन धुन धुन धुन बाजे रे 
ओ..सतरंगी सपना, सतरंगी सपना आ 
सतरंगी सपना जब आँखी में आए 
रंगी रंगी सब लागे रे 
जेठ महीना फागुन जस लागे 
धुन धुन धुन धुन मांदर बाजे रे 
सतरंगी सपना जब आँखी में आए 
रंगी रंगी सब लागे रे 
परसा के पेड़ से टेसु हा झड़ते 
जादू जादू सब लागे रे 
धिन धिन फक फक 
धिन धिन फक फक 
भाग हर मोर बोले रे 
दिल धुन धुन धुन धुन बाजे रे 

बिल्लू की इसी मनोदशा को संगीतकार और गीतकार की दोहरी भूमिका निभाते हुए अमित प्रधान ने निर्देशक अपूर्वा धर बडगायन के साथ (जो कि ख़ुद छत्तीसगढ़ के हैं) इस गीत में उतारने की कोशिश की है। गीत में इकतरफे प्रेम का उल्लास फूट फूट पड़ता है। इसीलिए नायक को पूस के जाड़े में भी आम फले दिखते हैं और परसा के पेड़ से टेसू की बहार आई लगती है। 😀 

आज के इस पाश्चात्य माहौल में संगीत के सोंधेपन के साथ जब देशी बोली की छौंक सुनने को मिलती है तो आनंद दुगना हो जाता है। प्रदीप पंडित ने पूरे गीत में हारमोनियम पर अपना कमाल दिखलाया ही है पर गीत की शुरुआत में उनकी बजाई धुन कानों को मस्ती भरे गीत वाले मूड के लिए तैयार कर देती है।

बतौर गायक रोमी की गायिकी का मैं उनके फिल्लौरी के लिए गाए गीत साहिबा से मुरीद हो चुका हूँ। यहाँ भी उन्होंने अपनी छवि पर दाग नहीं लगने दिया है। तो आइए आज आपको सुनाते हैं ये गीत इसके बोलों के साथ। मेरा यकीं है कि इसे सुन कर आपका दिल भी धुन धुनाने लगेगा।


Wednesday, January 06, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 22 : तेरी मेरी कहानी... Teri Meri Kahani...

वार्षिक संगीतमाला की आज की पायदान पर जो गीत है उसे अगर यू ट्यूब की मानें तो उसे पिछले साल करोड़ों लोगों ने सुना। इस साल की संगीतमाला में शामिल होने वाला ये हैप्पी हार्डी एंड हीर का दूसरा गाना है। हम भारतीयों को ये हमेशा बड़ी खुशी देता है कि कोई आम सा व्यक्ति अपनी प्रतिभा के बल पर रातों रात स्टार बन जाए। ऐसे शख़्स के प्रति जम के प्यार उड़ेलना हमारी फितरत है।

कहाँ रानू मंडल बंगाल के राणाघाट स्टेशन पर इक प्यार का नग्मा जैसे गीत सुना कर दान में जो भी मिलता उससे अपनी जीविका चलाती थीं और अपने वीडियो के वायरल होने के बाद कहाँ वो सीधे मायानगरी मुंबई में हीमेश रेशमिया जैसे संगीतकार के लिए गाने रिकार्ड करने लगीं। 



हीमेश की धुनें ऐसे भी कर्णप्रिय होती हैं उस पर रानू की आवाज़ को फिल्मी गीत में सुनने की सबकी उत्सुकता और फिर उनकी मीठी आवाज़ का हीमेश द्वारा सधा हुआ इस्तेमाल। गाना तो मशहूर होना ही था और  हुआ भी। हीमेश ने भी इस गीत में बखूबी साथ दिया रानू का।

गीतकार शब्बीर अहमद ने भी दो प्रेमियों की कहानी कहने के लिए कुछ अच्छे बिंब  ढूँढ निकाले मसलन 

कभी उड़ती महक, कभी गीली फ़िज़ा, कभी पाक दुआ 
कभी धूप कड़क, कभी छाँव नरम कभी सर्द हवा 
तेरी मेरी, तेरी मेरी तेरी मेरी कहानी...

सच ही लिखा शब्बीर ने ज़िंदगी की कोई भी कहानी इन बदलते रंगों के बिना कहाँ पूरी हो पाती है? जीवन के इस घूमते पहिए को समझने के लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं। अब रानू की जीवन कथा को ही लीजिए एक हिट गाने ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया पर कोरोना काल में उन्हें आगे कोई विशेष काम ही नहीं मिला और फिलहाल वो फिर राणाघाट में अकेले समय बिताने को विवश हैं।

संगीतमाला के अगले गीत में है लोकगीत वाली मिठास सुनना ना भूलिएगा।


वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Tuesday, January 05, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 23 : अँखियाँ बरस बरस जाएँ ..

वार्षिक संगीतमाला की तेइसवीं सीढ़ी इंतज़ार कर रही है तनिष्क बागची के द्वारा रचे दुर्गामती फिल्म के उस गीत का जो बी प्राक की जानदार आवाज़ में आप पर बरस बरस जाना चाहता है। अपने जोड़ीदार वायु श्रीवास्तव से गीत लिखाने वाले तनिष्क ने इस गीत में गीतकार की भूमिका भी ख़ुद ही निभाई है।।


तनिष्क बागची की गणना इस साल के सबसे व्यस्त संगीतकारों में करनी चाहिए। इस साल वो करीब दस फिल्मों में संगीत देते नज़र आए। मेरी संगीतमाला में शामिल उनका ये पाँचवा संगीतबद्ध गीत है। मुझे सबसे ज्यादा खुशी उनके गीत कान्हा (फिल्म : शुभ मंगल सावधान) ने  ने दी थी जो कि वार्षिक संगीतमाला 2017 में दसवीं पॉयदान तक जा पहुँचा था। अब जब उन्होंने पिछले साल इतनी फिल्में की हैं तो देखिए वो अपना रिकार्ड इस संगीतमाला में सुधार पाते हैं या नहीं।

तनिष्क अपनी संगीतबद्ध रचनाओं से अक्सर अपनी प्रतिभा का परिचय देते रहे हैं पर कई बार उनका संगीत बेहद औसत भी रहता है। उन्होंने पिछले कुछ सालों में इतने सारे गानों के रिमिक्स बनाए हैं कि अब तो उनका नाम किसी फिल्म में देख कर ये लगता है कि लो अब एक और रिमिक्स आ गया। अपनी इस पहचान से वो जितना जल्दी आगे निकलें वो बेहतर होगा।

दुर्गामती फिल्म के इस गीत की शुरुआत होती है अल्तमश फरीदी के सुकून देने वाले आलाप से और फिर गूँजता है स्वर बी प्राक का 

उनकी ये नज़र जो नज़र से मिली
मैं पिघलता रहा उसमें ही कहीं 
मैं ख़ुदा से हाँ ख़ुदा से कहूँ तू मेरा, तू मेरा हाँ 
कि अँखियाँ बरस बरस जाएँ 
नैना तरस तरस जाएँ 
मोहे दरस दिखा जा रे पिया रे

मुखड़े की धुन अपनी ओर खींचती है और बी प्राक तनिष्क के सामान्य से बोलों में भी अपनी अदायगी से प्राण भर देते हैं। ऊँचे सुरों पर उनकी पकड़ तेरी मिट्टी की सफलता के बाद किसी से छिपी नहीं है। गीत के अंत में वादक तापस रॉय जब मेंडोलिन पर मुखड़े की धुन बजाते हैं तो मुँह से अनायास ही वाह वाह निकल पड़ती है।

तो आइए संगीतमाला की आज की कड़ी में सुनते हैं भूमि पेडनेकर और करण कपाड़िया पर फिल्माए इस मधुर गीत को


Monday, January 04, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 24 : बड़ी ही नशीली संगत तेरी... तू है मेरी आदत बुरी

वार्षिक संगीतमाला की चौबीसवीं सीढ़ी पर है एक रूमानी गीत फिल्म हैप्पी हार्डी और हीर का जिसे संगीतबद्ध किया है हीमेश रेशमिया ने।

हीमेश रेशमिया एक मँजे हुए संगीतकार हैं। 
गा तो वो लेते ही थे अब तो कई फिल्मों में अभिनय भी कर चुके हैं। गीत संगीत के साथ वो उसकी मार्केटिंग भी बढ़िया कर लेते हैं। पिछले साल रानू मंडल को सड़कों से सीधे बॉलीवुड के स्टूडियो तक पहुँचाने का भी श्रेय उनको ही जाता है।  जिस कदर रानू का वीडियो वॉयरल हुआ, उससे उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा उन्हें था जिसका उन्होंने हैप्पी हार्डी और हीर के गानों में बखूबी इस्तेमाल किया।


यही वजह थी कि लॉकडॉउन के पहले आई ये फिल्म भले औसत चली पर इसके संगीत को अच्छी खासी मकबूलियत मिली। अब इस फिल्म के गीत आदत को ही लीजिए। इस गीत का सबसे प्यारा हिस्सा इसकी शुरुआत है जिसमें असीस कौर की गायी गीत की ये पंक्तियां मन मोह लेती हैं

जो कदी छूटे ना, वो चाहत बुरी
मान ले इश्क है, आफ़त बुरी

इन पंक्तियों के पहले तार वाद्यों से जो संगीत का टुकड़ा हीमेश ने रचा है वो तो बस लाजवाब है। गीत के बीच जब जब वो बजता है मन खुशी से आनंदित हो जाता है। आडियो वर्जन में असीस दूसरे अंतरे में भी आती हैं और बड़ी खूबसूरती से अपनी उपस्थिति जतला कर निकल जाती हैं। गीत में रब्बी शेरगिल पंजाबियत की मस्ती और और रानू मंडल मिठास घोलते नज़र आते हैं। अगर साधारण है तो हीमेश की गायिकी जो अन्य गायकों जैसी असरदार नहीं। 

तो पहले इस गीत का लंबा आडियो वर्जन सुनिए।

   

और ये है गीत का वीडियो जिसे फिल्माया गया है हीमेश और सोनिया मान पर। अरे एक बात तो बतानी रह ही गयी। इस गीत के बोल लिखे हैं सोनिया कपूर ने जो हीमेश की पत्नी भी हैं।

 

इस गीत को सुन कर इन चार गायकों में से आप किस के लिए कहेंगे ..बड़ी ही नशीली संगत तेरी...तू है मेरी आदत बुरी

Sunday, January 03, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 25 : तू तो साडी केयर नि करदा

कोरोना ने हमारी इस साल ऐसी मनःस्थिति कर दी कि हम ढंग से पिछले साल के गीत संगीत का ठीक ही लुत्फ ही नहीं उठा सके। अगर साल के पहले तीन महीनों को छोड़ दें तो इस साल कोरोना के चक्कर में ना फिल्में बड़े पर्दे पर रिलीज़ हुईं और ना ही उनका संगीत गली मोहल्लों में गूँजा।

ओटीटी प्लेटफार्म पे फिल्में जरूर बनीं और रिलीज़ हुईं पर उनके बेहद कम गीत ही आम जनता तक पहुँच सके। इनमें से तो कई फिल्में ऐसी थी जिनमें गीत थे ही नहीं। वैसे भी आजकल के कई युवा निर्देशक गीतों को फिल्म की कहानी में एक व्यवधान की तरह ही मानते हैं। ऐसे में इस साल की संगीतमाला बाकी सालों जैसी विविधता और कुछ हद तक वो गुणवत्ता तो लिए हुए नहीं है फिर भी मैंने कोशिश की है हर साल की तरह आपके लिए पिछले साल रिलीज़ हुई फिल्मों के पच्चीस बेहतरीन गीतों को सामने लाऊँ। 

हालांकि कुछ लोगों का ऐसा भी मत था कि इनमें वेब सिरीज़ के गीतों को भी शामिल किया जाए। वाकई इस साल कुछ बेहद उम्दा काम फिल्मों के इतर भी हुआ है। वेब सिरीज़ के अलावा लॉकडाउन में बहुत सारे कलाकारों ने अपनी व्यक्तिगत कोशिश से मिलजुल कर गाने बनाए जो बेहद सुरीले थे। पर उन गीतों के बारे में अलग से लिखूँगा इस संगीतमाला के खत्म होने के बाद।


फिलहाल तो संगीतमाला की शुरुआत पच्चीस पॉयदान के गीत से जिसे मैंने फिल्म छलाँग से लिया है। ये बड़ा मज़ेदार सा गीत है जो मियाँ बीवी की शिकायतों को बड़े हल्के फुल्के अंदाज़ में पेश करता है। अब आप ही बताइए इग्नोर करने की, केयर और शेयर ना करने की शिकायत तो आम तौर पर हर पत्नी को अपने पति से होती है। बस इस केयर और इग्नोर करने का मापदंड थोड़ा बदल गया है। आज के युग में फोन का घड़ी घड़ी ना आना, सोशल मीडिया पर लाइक या कमेंट नहीं करना, मेसेज अनसीन ही किये रखना जैसी बातें झगड़े के लिए वाजिब शिकायतों की सूची में शामिल हैं।

अब जिस गीत के लिखने और गाने में हनी सिंह का हाथ हो उसमें पंजाबी के साथ हिंग्लिश का तड़का तो होगा ही। पर तारीफ़ की बात ये है कि जो जुमले हनी ने अन्य गीतकारों की मदद से डाले हैं वैसे उलाहने आज की इस डिजिटल संस्कृति में आम हैं।

तो सुनिए कि इस गीत में नुसरत भड़ूचा, राजकुमार राव पर क्या  इल्जाम लगा रही हैं और बदले में राजकुमार राव अपनी सफाई में कैसी दलीलें पेश कर रहे हैं। इस गीत की धुन बनाई है हितेश सोनी ने और आवाज़ें दी हैं स्वीतज बरार और हनी सिंह ने। 



अच्छा ये बताइए कि ऐसी शिकायतें क्या आप भी करते हैं?

 

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