Saturday, January 26, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान # 4 : आज से तेरी, सारी गलियाँ मेरी हो गयी Aaj Se Teri

अगर संगीतमाला के पिछले नग्मे ने आपको ग़मगीन कर दिया हो तो  चौथी पायदान का ये गाना आपके चेहरे पर मुस्कुराहटें बिखेरने में सफल होगा ऐसा मेरा यक़ीन है। ये गीत है फिल्म पैड मैन से जिसका संगीत दिया है लोकप्रिय युवा संगीतकार अमित त्रिवेदी ने।


अमित त्रिवेदी के लिए पिछला साल एक बेहद व्यस्त साल रहा। 2018 में उनकी एक दो नहीं बल्कि दस फिल्में रिलीज़ हुई पर उनका इकलौता गाना इस संगीतमाला में शामिल हो रहा है। हालांकि केदारनाथ ,अन्धाधुन, फन्ने खान और मनमर्जियाँ के गाने साल के बेहतरीन गीतों की सूची में आते आते रह गए। बहरहाल पैड मैन का ये नग्मा आज से तेरी तो हर संगीतप्रेमी की जुबां पर रहा। इस गीत की ना केवल धुन बेहद मधुर है बल्कि इसके शब्दों की मासूमियत भी दिल जीत लेती है। अरिजीत सिंह ने इसे निभाया भी बड़ी खूबसूरती से है। 

अमित त्रिवेदी व  क़ौसर मुनीर, 
पैड मैन के इस गीत को लिखा है कौसर मुनीर ने। महिला गीतकारों में आज की तारीख में उनका नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। वो पिछले एक दशक से गीत लिख रही हैं। मुझे याद है कि 2008 में उनका लिखा पहला गीत फलक तक चल साथ मेरे   मेरी संगीतमाला का हिस्सा बना  था। तब से वो निरंतर फिल्म उद्योग में अपना सिक्का जमाती जा रही हैं। इशकज़ादे, यंगिस्तान,बजरंगी भाईजान सीक्रेट सुपरस्टार और मेरी प्यारी बिंदु में उनके लिखे गीत काफी सराहे गए हैं। 


फिल्म का विषय तो ख़ैर सैनिटरी नैपकिन से जुड़ा है पर जहाँ तक इस गीत का सवाल है ये फिल्म की शुरुआत में उस दृश्य में आ जाता है नायक नायिका का विवाह हो रहा है। नायक अपनी पत्नी को बेहद चाहता है और उसकी जरूरतों का खासा ख्याल रखता है। निर्देशक ने शादी के बाद नायक के इसी प्रेम को इस गीत के माध्यम से दिखाना चाहा है।


बात शादी की थी तो अमित त्रिवेदी ने प्रील्यूड मे शहनाई का इस्तेमाल कर लिया। शहनाई की इस मधुर धुन को बजाया है ओंकार धूमल ने।शहनाई और ढोलक बज ही रहा होता है कि उसकी जुगलबंदी में मेंडोलिन भी आ जाता है।  मेंडोलिन की रुनझुन ढोलक के साथ इंटरल्यूड में भी बरक़रार रहती है। गीत की पंक्तियों काँधे का जो तिल है.. सीने में जो दिल है के बाद जो वाद्य बार बार बजता है उसका स्वर भी प्यारा लगता है। मेंडोलिन के पीछे की जादूगरी है तापस रॉय की। पिछले साल के गीतों में तारों को झंकृत करने वाले तरह तरह के वाद्यों  के पीछे तापस की उँगलियाँ थिरकती रहीं।

क़ौसर मुनीर के शब्दों का चयन कमाल है। एक आम कम पढ़ा लिखा आदमी किस तरह अपने प्रेम को व्यक्त करेगा ये सोचते हुए बिजली के बिल और पिन कोड के नंबर जैसी पंक्तियाँ उन्होंने गीत में डाल दीं जिसे सुनते ही श्रोताओं के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाएगी। गीत के दोनों अंतरे भी मुखड़े जैसा भोलापन साथ लिए चलते हैं। जहाँ तक मेरा प्रश्न है, मुझे उनका दूसरे अंतरे में  मूँगफलियाँ और अमिया की  याद दिलाना और सूरज को झटकने के साथ सावन को गटकने वाली बात मुग्ध कर गयी। अरिजीत सिंह ऐसे ही इतने लोगों के चहेते नहीं है। उनकी आवाज़ का ही ये असर है कि उन्हें सुनकर दिल प्रफुल्लित महसूस करने लगता है।

आज से तेरी, सारी गलियाँ मेरी हो गयी
आज से मेरा, घर तेरा हो गया
आज से मेरी, सारी खुशियाँ तेरी हो गयी
आज से तेरा, ग़म मेरा हो गया

ओ तेरे काँधे का जो तिल है
ओ तेरे सीने में जो दिल है
ओ तेरी बिजली का जो बिल है
आज से मेरा हो गया

ओ मेरे ख्वाबों का अम्बर
ओ मेरी खुशियों का समंदर
ओ मेरे पिन कोड का नंबर
आज से तेरा हो गया

तेरे माथे के कुमकुम को
मैं तिलक लगा के घूमूँगा
तेरी बाली की छुन छुन को
मैं दिल से लगा के झूमूँगा
मेरी छोटी सी भूलों
को तू नदिया में बहा देना
तेरे जूड़े के फूलों को
मैं अपनी शर्ट में पहनूँगा
बस मेरे लिए तू मालपूवे
कभी-कभी बना देना
आज से मेरी, सारी रतियाँ तेरी हो गयीं
आज से तेरा, दिन मेरा हो गया
ओ तेरे काँधे का...

तू माँगे सर्दी में अमिया
जो माँगे गर्मी में मूँगफलियाँ
तू बारिश में अगर कह दे
जा मेरे लिए तू धूप खिला
तो मैं सूरज को झटक दूँगा
तो मैं सावन को गटक लूँगा
तो सारे तारों संग चन्दा
मैं तेरी गोद में रख दूँगा
बस मेरे लिए तू खिल के कभी
मुस्कुरा देना 
आज से मेरी, सारी सदियाँ तेरी हो गयीं
आज से तेरा, कल मेरा हो गया
ओ तेरे काँधे.....मेरा हो गया



वार्षिक संगीतमाला 2018  
1. मेरे होना आहिस्ता आहिस्ता 
2जब तक जहां में सुबह शाम है तब तक मेरे नाम तू
3.  ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
4.  आज से तेरी, सारी गलियाँ मेरी हो गयी
5.  मनवा रुआँसा, बेकल हवा सा 
6.  तेरा चाव लागा जैसे कोई घाव लागा
7.  नीलाद्रि कुमार की अद्भुत संगीत रचना हाफिज़ हाफिज़ 
8.  एक दिल है, एक जान है 
9 . मुड़ के ना देखो दिलबरो
10. पानियों सा... जब कुमार ने रचा हिंदी का नया व्याकरण !
11 . तू ही अहम, तू ही वहम
12. पहली बार है जी, पहली बार है जी
13. सरफिरी सी बात है तेरी
14. तेरे नाम की कोई धड़क है ना
15. तेरा यार हूँ मैं
16. मैं अपने ही मन का हौसला हूँ..है सोया जहां, पर मैं जगा हूँ 
17. बहुत दुखा रे, बहुत दुखा मन हाथ तोरा जब छूटा
18. खोल दे ना मुझे आजाद कर
19. ओ मेरी लैला लैला ख़्वाब तू है पहला
20. मैनू इश्क़ तेरा लै डूबा  
21. जिया में मोरे पिया समाए 
24. वो हवा हो गए देखते देखते
25.  इतनी सुहानी बना हो ना पुरानी तेरी दास्तां
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10 comments:

Manish on January 26, 2019 said...

सूरज को झटकने और सावन को गटकने वाली लाइन मुझे भी सबसे अच्छी लगती है। इस साल के सबसे प्रिय गीतों में एक और गीत में अक्षय कुमार की ख़ुशी देखते ही बनती है, बहुत स्वाभाविक लगे हैं!!:)

Sumit on January 26, 2019 said...

बहुत प्यारी और सहज सरल सी देशी धुन ढोलक शहनाई और मेंडोलिन वाली. कौशर मुनीर ने अच्छा लिखा है.

Manish Kumar on January 27, 2019 said...

Manish अच्छा लगा जानकर। ये गीत मूड को खुशनुमा कर देता है और मन इसे गुनगुनाने को करने लगता है।

Manish Kumar on January 27, 2019 said...

हाँ बिल्कुल सुमित

Smita Jaichandran on January 27, 2019 said...

Jaisa aapne kaha, masoomiyat bhara yeh geet bada hi khoobsoorat ban pada hai...Akshay ne bakhoobi nibhaya bhi hai...Mera pasandeeda line hai 'kabhi kabhi malpoove' banane ki baat!

Manish Kumar on January 27, 2019 said...

वैसे आज कल के शहरी पति अगर ऐसी फरमाइश करें तो तुरंत जवाब आएगा वो तुम SWIGGY से मँगवा लेना :)

पूजा सिंह on January 28, 2019 said...

ये भी मेरी पसंद का ❤️

Manish Kumar on January 28, 2019 said...

नई शादी वालों के लिए तो तो होना भी चाहिए :p :)

मन्टू कुमार on January 30, 2019 said...

सुमित जी से सहमत हूँ।

इस गाने की धुन जबरदस्त है, एक पल के लिए बोल हटा भी दे तो धुन को सुना जा सकता है देर तक।

गाने सुनने वाले दोस्तों से जब संगीत पर डिस्कशन होती है तब मैं यही कहता हूँ कि अमित त्रिवेदी अगले a r rahman हो सकते हैं।
ये थोड़ा ज़्यादा हो गया क्या ? 😂

Manish Kumar on February 02, 2019 said...

अमित त्रिवेदी ने अब इतनी सफल फिल्में कर ली हैं कि अब उनके संगीत की अपनी एक अलग शख्सियत हो गयी है। वैसे इस साल उन्होंने काम कुछ ज्यादा ही किया पर उसकी गुणवत्ता वो नहीं रही जितनी उम्मीद थी।

इस गीत की धुन, शब्द और गायिकी तीनों लाजवाब हैं।

 

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