Saturday, February 27, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 6 - मेरे लिए तुम काफी हो.. Mere liye tum kafi ho...

तनिष्क बागची और वायु श्रीवास्तव की संगीतकार जोड़ी  जिन्हें लोग तनिष्क वायु के नाम से जानते हैं के संगीत पर मेरा ध्यान फिल्म शुभ मंगल सावधान के गीत कान्हा से गया था। तनु वेड्स मनु रिटर्न के गीत बन्नो से ये जोड़ी पहली बार चर्चा में आई थी पर शुभ मंगल सावधान के बाद इनके गीतों में मुझे ऐसी कोई खास बात नज़र नहीं आई। तनिष्क ने इन गुजरे सालों  में  तो अपनी छवि संगीतकारों के रिमिक्स किंग की ही बना ली। वायु भी कमरिया जैसे गीतों के आगे अपनी लेखनी को विस्तार नहीं दे पाए।

पर शुभ मंगल ज्यादा सावधान के इस गीत में वायु ने वो कमाल कर दिखलाया जो उनके अपनी कला में हुनरमंद होने का प्रमाण दे गया। एक गीतकार की सफलता इस बात में है कि वो सहज से शब्दों में दिल को छूती बात कह जाए और वार्षिक संगीतमाला 2020 की छठी पायदान के गीत संगीत में तनिष्क वायु की जोड़ी यही करने में सफल रही है।

इस गीत को गाया है हर दिल अज़ीज़ आयुष्मान खुराना ने। आयुष्मान इस गीत के बारे में कहते हैं कि
"हम फिल्म में ऐसा गीत डालना चाहते थे जो प्यार और रूमानियत की वैश्विक भावना को उभार सके। ये एक ऐसा गीत है जिसमें प्रेम से जुड़ी सारी भावनाएँ समाहित हैं और जिसे सुनकर हम किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचेंगे जो हमारी ज़िदगी में खास है। हमारा मकसद ये भी बताना था कि जैसा आम प्रेमी युगल एक दूसरे के बारे में महसूस करते हैं वैसी ही भावना दो लड़कों के बीच भी हो सकती है।"
मैंने ये फिल्म नहीं देखी पर इस गीत को पहली बार सुनते ही मन में एक खुशनुमा अहसास मन में तारी हो गया था। वैसे तो वायु का लिखा पूरा गीत ही मुझे पसंद है पर जिस तरह उन्होंने युगल प्रेमियों को सितारों की तरह टूटने और टकराने की बात की या उनकी आपसी तकरार को साथ चलते दो चक्कों के घिसने रगड़ने से जोड़ा वो मुझे बेहद प्यारा लगा।

तेरी मेरी ऐसी जुड़ गई कहानी
कि जुड़ जाता जैसे दो नदियों का पानी
मुझे आगे तेरे साथ बहना है
जाना तुम्हें तो है ये बात जानी
कि ये ज़िन्दगी कैसे बनती सुहानी
मुझे हर पल तेरे साथ रहना है

तुम कुछ अधूरे से हम भी कुछ आधे
आधा आधा हम जो दोनों मिला दे
तो बन जाएगी अपनी इक जिंदगानी
ये दुनिया मिले ना मिले हमको
खुशियाँ भगा देंगी हर ग़म को
तुम साथ हो फिर क्या बाकी हो
मेरे लिए तुम काफी हो

मेरे लिए तुम काफी हो...मेरे लिए तुम काफी हो 

इक आसमां के हैं हम दो सितारे 
कि टकराते हैं टूटते हैं बेचारे
मुझे तुमसे पर ये कहना है
चक्के जो दो साथ चलते हैं थोड़े 
तो घिसने रगड़ने में छिलते है थोड़े

पर यूँ ही तो कटते हैं कच्चे किनारे
ये दिल जो ढला तेरी आदत पे
शामिल किया है इबादत में
थोड़ी ख़ुदा से भी माफी हो
मेरे लिए तुम काफी हो...

तनिष्क ने तार वाद्यों के हल्की मदद से गीत की कर्णप्रियता आखिर तक बनाए रखी। कुल मिलाकर ये एक ऐसा गीत है जिसे फिल्म की कहानी से परे भी हर शख्स अपनी ज़िंदगी से जोड़ पाएगा। तो आइए सुनते हैं आयुष्मान खुराना की आवाज़ में ये गीत जिसे फिल्माया गया है आयुष्मान और जितेन्द्र कुमार पर


वार्षिक संगीतमाला में अब तक




Tuesday, February 23, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 7 छपाक से पहचान ले गया Chhapaak se pehchaan le gaya

वार्षिक संगीतमाला 2020 की सातवीं पायदान पर है मेरे प्रिय गीतकार गुलज़ार का लिखा गीत। एसिड अटैक पर पिछले साल की जनवरी में एक बेहद संवेदनशील फिल्म आई थी छपाक। फिल्म के प्रदर्शन के समय विवादों के बादल घिर आए जिसने इस जरूरी विषय पर बनी फिल्म के संदेश को आंशिक रूप से ही सही पर ढक लिया। 

मेघना गुलज़ार की फिल्मों में उनके पिता ही गीतकार की भूमिका निभाते हैं। मेघना कहती हैं कि ऐसी फिल्मों में गीतों की गुंजाइश कम ही होती है। फिर भी उन्होंने इस फिल्म में गीत रखे क्यूँकि भारतीय फिल्म संस्कृति में गीत फिल्म का चेहरा होते हैं और कई बार तो उनमें ही फिल्म की आत्मा बसती है।



अब छपाक के इस शीर्षक गीत को ही लें। गीत के शानदार मुखड़े में ही पूरी फिल्म का कथा सार छुपा है... कोई चेहरा मिटा के और आँख से हटा के..चंद छींटे उड़ा के जो गया..छपाक से पहचान ले गया। चंद लफ़्जों में इतनी गहरी बात आज के युग में गुलज़ार ही कर सकते हैं। तेज़ाब की चंद बूँदें. किसी की ज़िदगी की गाड़ी को किस तरह बेपटरी कर सकती हैं ये अंदाजा पिछले कुछ साल की नृशंस घटनाओं से हम सब बड़ी आसानी से लगा सकते हैं। ऐसे में गुलज़ार के शब्द दिल में तीर की तरफ चुभते हैं। अंतरे में गुनहगार के व्यक्तित्व का भी वो कितना बढ़िया  खाका खींचते हुए लिखते हैं.. बेमानी सा जुनून था बिन आग के धुआँ...ना होश ना ख्याल सोच अंधा कुआँ 

कोई चेहरा मिटा के और आँख से हटा के 
चंद छींटे उड़ा के जो गया 
छपाक से पहचान ले गया 
एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा 
जैसे धूप को ग्रहण लग गया 
छपाक से पहचान ले गया 

ना चाह न चाहत कोई ना कोई ऐसा वादा है 
ना चाह न चाहत कोई ना कोई ऐसा वादा 
है हाथ में अँधेरा और आँख में इरादा 
कोई चेहरा मिटा ..पहचान ले गया 

बेमानी सा जुनून था, बिन आग के धुआँ 
बेमानी सा जुनून था बिन आग के धुआँ 
ना होश ना ख्याल सोच अंधा कुआँ 

कोई चेहरा मिटा ..पहचान ले गया 

आरज़ू थी शौक थे वो सारे हट गए, कितने सारे जीने के तागे कट गए 
आरज़ू थी शौक थे वो सारे हट गए कितने सारे जीने के तागे कट गए 
सब झुलस गया 
कोई चेहरा मिटा ..पहचान ले गया 

शंकर अहसान लॉय ने इस गीत के लिए अरिजीत की आवाज़ का इस्तेमाल किया। गीत के शब्दों में दबी पीड़ा को उभारने के लिए उन्होंने संगीत संयोजन में बाँसुरी और रबाब का प्रयोग किया है। बाँसुरी वादन नवीन ने और रबाब पर तापस राय की उँगलियाँ थिरकी हैं। इस गीत की रिलीज़ के समय संगीतकार शंकर महादेवन ने अपने एक साक्षात्कार में कहा था कि इस गीत को बनाने के लिए गुलज़ार के साथ बैठना अपने आप में एक उपलब्धि थी। छपाक जैसी संवेदनशील फिल्म के साथ जुड़ना हमारे लिए फक्र की बात थी और इसीलिए इसका संगीत हमारे लिए हमेशा कोहिनूर ही बना रहेगा क्यूँकि वर्षों बाद भी इन गीतों की चमक फीकी नहीं पड़ेगी।

तो आइए सुनते हैं ये गीत अरिजीत की आवाज़ में..

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Sunday, February 21, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत # 8 : या तो बर्बाद कर दो या फिर आबाद कर दो Aabaad Barbaad

वार्षिक संगीतमाला की आठवीं पायदान पर है गीत फिल्म लूडो का जिसे अपनी शानदार आवाज़ दी है युवाओं के चहेते अरिजीत सिंह ने और जिसकी धुन बनाई प्रीतम ने अनुराग बसु के निर्देशन में। संगीतकार प्रीतम और  निर्माता निर्देशक अनुराग बसु की जोड़ी जब भी किसी फिल्म के लिए बनती है उस फिल्म के संगीत का श्रोताओं को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। प्रीतम यूँ तो ऐसे भी बेहद सफल संगीतकार हैं पर अनुराग के लिए उनका काम एक अलग स्तर पर ही पहुँच जाता है। इस करिश्माई जोड़ी की संगीतमय फिल्मों को याद करूँ तो हाल फिलहाल में जग्गा जासूस और बर्फी और उसके पहले Gangster और Life In a Metro जैसी फिल्मों का बेहतरीन संगीत याद आ जाता है। 

लूडो के भी तमाम गाने पसंद किए गए। ज़ाहिर है इस गीतमाला में इस फिल्म के गीतों की भागीदारी आगे भी रहेगी। ये एलबम लोगों की नज़र में और चढ़ता यदि फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जा पाता। महामारी की वज़ह से अप्रैल में प्रदर्शित होने वाली ईस फिल्म को नवंबर में नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ किया गया।



फिल्म लूडो के इस गीत को लिखा है संदीप श्रीवास्तव ने जो प्रीतम की फिल्मों में पहले भी कुछ गीत लिख चुके हैं। संदीप पटकथा लेखक भी रहे हैं। बतौर गीतकार उन्होंने शिवाय, कहानी, न्यूयार्क और Life In a Metro के गीतों के लिये जाना जाता है। एकतरफे प्रेम में दूसरे की स्वीकृति की कितनी चाहत होती है ये गीत इसी भावना को व्यक्त करता है। मुखड़े में संदीप लिखते हैं कि अगर हाँ कहकर तुमने मेरी ज़िंदगी को आबाद नहीं किया तो फिर ये जीवन बर्बादी की राह खुद चुन लेगा। अरिजीत नायक की बैचैनी और तड़प को बड़ी खूबी से अपनी आवाज़ में उतारते हैं। नायक की मायूसी को शब्दों में उतारती संदीप की ये पंक्तियाँ ख़्वाबों को जगह ना मिली आँखों में, वहाँ पहले से ही सैलाब था...नग्मे बनाता फिरा साज़ों पे, दिल अपना फ़क़त मिज़राब था प्रभावित करती हैं।

गीतकार अक्सर अपने गीतों में नवीनता भरने के लिए उर्दू के अप्रचलित शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं। संदीप ने भी यहाँ मिज़राब का प्रयोग किया है जिसका अर्थ तार वाद्यों को बजाने वाले छल्ले से है। शायद संदीप ये कहना चाहते हैं प्रेम रूपी संगीत में वाहवाही साज़ की हुई और उनका दिल उस छल्ले सा उपेक्षित रहा जिसने साज़ में अपने रंग भरे। 

इस गीत का सबसे मजबूत पक्ष प्रीतम की धुन और संगीत संयोजन है जो एक बार सुनते ही मन में रमने लगती है। पश्चिमी बीट्स के साथ गिटार, वॉयला और क्लारिनेट गीत में मस्ती का रंग भरता है तो तीन मिनट के बाद बजती गुलाम अली की सारंगी दर्द का अहसास जगाती है। कहने की जरूरत नहीं कि अरिजीत ऊँचे सुरों जो कि उनका ट्रेडमार्क बन गया है आसानी से साधते हैं। तो आइए सुनते हैं ये पूरा गीत..


या तो बर्बाद कर दो या फिर आबाद कर दो 
वो ग़लत था ये सही है झूठ ये आज कह दो 
इतना एहसान कर दो इतना एहसान कर दो 
पूरे अरमान कर दो 

लब पे आ कर जो रुके हैं, ढाई वो हर्फ़ कह दो 
मेरी साँसों से जुड़ी है तेरी हर साँस कह दो 
मुश्किल आसान कर दो मुश्किल आसान कर दो 
या तो बर्बाद कर दो या फिर आबाद कर दो 

मीठा सा ये ज़हर मैं तो पीता रहूँगा 
तू ख़ुदा ना सही मैं तो सजदे करूँगा  
तुम जो शीरी ना हुए क्या हमको फरहाद कर दो 
मेरी साँसों ...आबाद कर दो

ख्वाबों को जगह ना मिली आँखों में
वहाँ पहले से ही सैलाब था
नग्मे बनाता फिरा साज़ों पे
दिल अपना फ़क़त मिज़राब था
मेरी बेजां हसरतों को, काबिल-ए-दार करदो
मेरी साँसों ...आबाद कर दो



वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Tuesday, February 16, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 9 तारे गिन, तारे गिन सोए बिन, सारे गिन Taare Ginn...

हिंदी फिल्मों में ए आर रहमान का संगीत आजकल साल में इक्का दुक्का फिल्मों में ही सुनाई देता है। रहमान भी मुंबई वालों की इस बेरुखी पर यदा कदा टिप्पणी करते रहे हैं। तमाशा और मोहनजोदड़ो के बाद पिछले पाँच सालों में उनको कोई बड़े बैनर की  फिल्म मिली भी नहीं है। दिल बेचारा पर भी शायद लोगों का इतना ध्यान नहीं जाता अगर सुशांत वाली अनहोनी नहीं हुई होती। फिल्म रिलीज़ होने के पहले रहमान ने सुशांत की याद में एक संगीतमय पेशकश रखी थी जिसमें एलबम के सारे गायक व गायिकाओं ने हिस्सा भी लिया था। रहमान के इस एलबम में उदासी से लेकर उमंग सब तरह के गीतों का समावेश था। इस  फिल्म के दो गीत इस साल की गीतमाला में अपनी जगह बना पाए जिनमें पहला तारे गिन संगीतमाला की  नवीं पायदान पर आसीन है। 


इस गीत की सबसे खास बात इसका मुखड़ा है। कितने प्यारे बोल लिखे हैं अमिताभ भट्टाचार्य ने। इश्क़ का कीड़ा जब लगता है तो मन की हालत क्या हो जाती है वो इन बोलों में बड़ी खूबी से उभर कर आया है। जहाँ तक तारे गिनने की बात है तो एकाकी जीवन में अपने हमसफ़र की जुस्तज़ू करते हुए जिसने भी खुली छत पर तारों की झिलमिल लड़ियों को देखते हुए रात बिताई हो वे इस गीत से ख़ुद को बड़ी आसानी से जोड़ पाएँगे। 

जब से हुआ है अच्छा सा लगता है
दिल हो गया फिर से बच्चा सा लगता है 
इश्क़ रगों में जो बहता रहे जाके 
कानों में चुपके से कहता रहे 
तारे गिन, तारे गिन सोए बिन, सारे गिन 
एक हसीं मज़ा है ये, मज़ा है या सज़ा है ये 

अंतरे में भी अमिताभ एक प्रेम में डूबे हृदय को अपनी लेखनी से टटोलने में सफल हुए हैं।

रोको इसे जितना, महसूस हो ये उतना 
दर्द ज़रा सा है थोड़ा दवा सा है 
इसमें है जो तैरा वो ही तो डूबा है 
धोखा ज़रा सा है थोड़ा वफ़ा सा है 
ये वादा है या इरादा है 
कभी ये ज़्यादा है कभी ये आधा है 
तारे गिन, तारे गिन सोए बिन, सारे गिन 

श्रेया घोषाल और मोहित चौहान पहले भी रहमान के चहेते गायक रहे हैं और इस युगल जोड़ी ने अपनी बेहतरीन गायिकी से रहमान के विश्वास को बनाए रखने की पुरज़ोर कोशिश की है। 

रहमान अपने गीतों में हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते रहते हैं। यहाँ उन्होंने श्रेया की आवाज़ को अलग ट्रैक पर रिकार्ड कर मोहित की आवाज़ पर सुपरइम्पोज़ किया है।  पर रहमान के इस नए प्रयोग की वज़ह से अंतरे में गीत के बोल (खासकर श्रेया वाले) उतनी सफाई से नहीं समझ आते। अंत में रहमान स्केल बदलकर गीत का समापन करते हैं।

मुझे इस गीत का पहले दो मिनटों  का हिस्सा बहुत भाता है और मन करता है कि आगे जाए बिना उसी हिस्से को रिपीट मोड में सुनते रहें। काश रहमान इस गीत की वही सहजता अंतरे में भी बनाए रहते ! गीत का आडियो वर्जन एक मिनट ज्यादा लंबा है और इस वर्जन के के आख़िर में वॉयलिन का एक खूबसूरत टुकड़ा भी है जिसे संजय ललवानी ने बजाया है। तो आइए सुनते हैं इस गीत का वही रूप...


वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Thursday, February 11, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत #10 : सुन सुर जो कहानियाँ सी कहते हैं Sun Sur Jo Kahaniyan Si Kahte Hain

वक़्त आ गया है वार्षिक संगीतमाला के आख़िरी चरण में पहली दस सीढ़ियों को चढ़ने का। गीतमाला की दसवीं पॉयदान पर गीत वो जिसकी धुन बनाई रचिता अरोड़ा ने और जिसे अपने काव्यात्मक बोलों से सँवारा गरिमा ओबराह ने। ये गीत है अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित फिल्म Choked ... पैसा बोलता है से जो पिछले साल जून में नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई। अगर आपने ये फिल्म नहीं देखी तो इस गीत की गूँज आप तक पहुंचने की उम्मीद कम ही है क्यूँकि OTT प्लेटफार्म पर प्रदर्शित फिल्मों का संगीत कम ही प्रमोट होता है। अगर आप मुझसे पूछें कि आख़िर ऐसा क्या खास  है ढाई मिनट के इस छोटे से गाने में तो मैं यही कहूँगा कि गरिमा के गहरे शब्द, रचिता की शांत बहती सी धुन और उनकी मीठी आवाज़ जो गीत सुनने के बाद भी बड़ी देर तक मन में बनी रहती है।


रचिता के संगीत निर्देशन और गायिकी का ज़ायका आप सब मुक्केबाज के गीत बहुत दुखा मन में चख ही चुके होंगे। उस लेख में मैंने आपको बताया था कि किस तरह मुंबई में बतौर फिल्म संगीतकार उनके सफ़र की शुरुआत हुई। रचिता से इस गीत के संबंध में जब बातचीत हुई तो मेरा एक सवाल ये भी था कि बतौर संगीतकार किसी गाने के लिए अपनी आवाज़ का चुनाव करना उनके लिए कितना मुश्किल रहता है? उन्होंने बताया कि उनके मन में बस यही बात रहती है कि उस चरित्र के लिए कौन सी आवाज़ मुनासिब रहेगी। 

वे ख़ुद अपनी आवाज़ का  इस्तेमाल करने में झिझकती रही हैं। बहुत दुखा मन उन्हें रेखा भारद्वाज से गवाने का मन था पर निर्देशक अनुराग कश्यप ने उनसे कहा कि ये गाना तुम्हें गाना चाहिए और तब जाकर वो गीत उनकी आवाज़ में रिकार्ड हुआ। रचिता इस मामले में अपने को सौभाग्यशाली मानती हैं कि अब तक जितने भी निर्माता निर्देशकों के साथ उन्होने काम किया है उन सब ने उन्हें पर्याप्त स्पेस दिया है अपने तरीके से संगीत रचने का।

रचिता अरोड़ा 

रचिता तो अनुराग कश्यप के साथ पहले भी काम कर चुकी हैं पर गरिमा को अनुराग ने इस फिल्म में बतौर गीतकार उनकी पहली फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता में किए गए काम से प्रभावित होकर लिया। गीत की परिस्थिति के बारे में उन्होंने दोनों को साथ साथ ही बताया। ये गीत इस फिल्म का रिकार्ड किया जाने वाला सबसे पहला गीत था जो तीसरे ड्राफ्ट में जाकर अपना मूर्त रूप ले सका। 

विज्ञापन जगत से लेकर बतौर गीतकार प्रसून जोशी की सफलता के किस्से से तो आप सभी परिचित होंगे। उनकी तरह गरिमा की पृष्ठभूमि भी विज्ञापन जगत की है जहाँ वे जिंगल लिखा करती थीं। गरिमा ने सोचा नहीं था कि वे कभी फिल्मों में गीतकार की भूमिका निभाएँगी। उन्हें कविता लिखना हमेशा से अच्छा लगता था। जब कभी कोई उनका अर्थपूर्ण जिंगल संगीत के साथ बाहर निकलता तो उनका आनंद बढ़ जाता। ऐसे ही एक जिंगल पर उन्होंने वासन बाला साहब के साथ काम किया। बाला ने उनसे वादा किया कि जब वे फिल्म बनाएँगे तो उनको जरूर मौका देंगे। बाला ने उनको ये मौका मर्द को दर्द नहीं होता फिल्म के लिए  दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

गरिमा ओबरा

Choked एक निम्न मध्यमवर्ग के ऐसे परिवार की कहानी है जहाँ घर सँभालने से लेकर नौकरी करने की जिम्मेदारी नायिका पर है। उसका पति अधिकतर निठल्ला ही बैठा रहता है। ये गाना फिल्म में एक फ्लैशबैक की तरह आता है जब नायिका दिन रात के इस तनाव के बीच उन खुशनुमा पलों को याद करती है जब वो दोनों गाने बनाते थे। 

हमसफ़र तो वही होता है ना जो हमारे हाव भाव लहजों से ही हमारे मन की बात पढ़ सके। कई बार हमारे चेहरे की एक शिकन, हमारी आवाज़ की बुनावट अपने आप में एक दास्तान बयाँ कर देती है। सच्चा साथी तो वही है जो इन भावनाओं को समझ सके। उन बातों का मर्म ग्रहण करे जो पीड़ा सहकर होठों से निकली हैं। इसीलिए गरिमा गीत के मुखड़े में बड़ी खूबसूरती से लिखती हैं....सुन सुर जो कहानियाँ सी कहते हैं.. चुन लब मनमानियाँ जो सहते हैं 


गीत के अंतरों में नायिका के प्रेम और समर्पण का भाव और प्रबलता के साथ उभरता है जो आप गीत के बोलों को पढ़कर महसूस कर सकते हैं। आपसी प्रेम से भरे जब दो क्रियाशील प्राणी मिलकर कुछ नया रचते हैं उसमें अपना कुछ कहने को रह नहीं जाता और गीतकार का मानना है कि इस तरह रचा संगीत व साझे शब्द उनके रिश्ते को ख़ैरियत ही तो बख्शेंगे। इसीलिए उन्होंने लिखा.....
तेरे मेरे सुरों में कैसा बैर हर लफ़्ज़ ख़ैर।

रचिता बताती हैं कि जिस तरह एक स्त्री की भावनाओं को गरिमा अपने शब्दों में लाई हैं वो उनके मन को छू गया। रचिता ने इस भाव प्रधान गीत में नाममात्र के वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया है। इनमें घटम औेर बीच बीच में बजते  गिटार की टुनटुनाहट तो आप आसानी से पहचान लेंगे। रचिता की आवाज़ की मिठास गीत के प्रेमसिक्त बोलों के साथ पूरा न्याय करती है। हालांकि ऐसा मुझे लगा कि आलाप थोड़ा और बेहतर हो सकता था।तो आइए सुनते हैं इस गीत को..

सुन सुर जो कहानियाँ सी कहते हैं
चुन लब मनमानियाँ जो सहते हैं
बातें तेरी मीठे से बोल है
तेरी हँसी हर सुर टटोले है
तेरे मेरे सुरों में कैसा बैर
हर लफ़्ज़ ख़ैर

लफ़्ज़ पिरो कर ला दो
मेरा गीत वही है
अपनी आवाज़ मिला दो
मेरा गीत वही है

धुनकी मैं सब भूला दूँ चलो ये सही
जो तुम गुननगुना दो मेरा गीत वही
हाथ तेरे मिश्री सा साज है
साथ मेरे तेरी आवाज़ है
तेरे मेरे सुरों में कैसा बैर
हर लफ़्ज़ ख़ैर

 
तो बताइए कैसा लगा आपको ये नग्मा?

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Sunday, February 07, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 11 ओ मेहरबाँ क्या मिला यूँ जुदा हो के बता Meharbaan

वार्षिक संगीतमाला की ग्यारहवीं सीढ़ी पर जो गीत आपका इंतजार कर रहा है उसके शीर्षक को ले कर थोड़ा विवाद है। जब पहली बार मैंने फिल्म लव आज कल का ये गीत सुना था तो समझ नहीं आया कि इसे मेहरमा लिख कर क्यूँ प्रचारित किया जा रहा है। उर्दू में इससे एक मिलता जुलता शब्द जरूर है महरम जिसका शाब्दिक अर्थ होता है एक बेहद अतरंग मित्र। अगर आपको याद हो तो फिल्म कहानी के सीक्वल कहानी 2 ने इसी शब्द को केंद्र में रखकर अमिताभ भट्टाचार्य ने एक गीत भी लिखा था। गीत में गायक दर्शन रावल इस शब्द को मेहरवाँ जैसा उच्चारित करते हैं जो कि मेहरबाँ के करीब है। 


क़ायदे से बात माशूका की मेहरबानी की हो रही थी तो इसे मेहरबां नाम से ही प्रमोट किया जाना चाहिए था। पता नहीं इरशाद कामिल जैसे नामी गीतकार और निर्देशक इम्तियाज़ अली का ध्यान इस ओर क्यूँ नहीं गया। बहरहाल लव आज कल का ये गीत आज गीतमाला की इस ऊँचाई पर पहुँचा है तो इसके सबसे बड़े हक़दार इसके संगीतकार प्रीतम हैं। 

प्रीतम के बारे में एक बात सारे निर्देशक कहते हैं कि वो संगीत रिलीज़ होने के अंत अंत तक अपनी धुनों में परिवर्तन करते रहते हैं। उनकी इस आदत से निर्माता निर्देशक खीजते रहते हैं पर वे ये भी जानते हैं कि प्रीतम की ये आदत संगीत को और परिष्कृत ढंग से श्रोताओं को पहुँचाने की है। मैंने पिछली पोस्ट में प्रीतम के गीतों में सिग्नेचर ट्यून के इस्तेमाल का जिक्र किया था। यहाँ भी उन्होंने शिशिर मल्होत्रा की बजाई वॉयला की आरंभिक धुन से श्रोताओं का दिल जीता है।

प्रीतम ने इस गीत में दर्शन रावल और अंतरा मित्रा की आवाज़ों का इस्तेमाल किया है। अंतरा प्रीतम की संगीतबद्ध फिल्मों का अभिन्न हिस्सा रही हैं। उनकर गाए सफल गीतों में दिलवाले का गेरुआ और कलंक का ऐरा गैरा याद आता है जिनमें प्रीतम का ही संगीत निर्देशन था। यहाँ उन्हें एक ही अंतरा मिला है नायिका के तन्हा मन को टटोलने का। 

दर्शन रावल पहली बार एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमाला का हिस्सा बने हैं। इसलिए मेरा फर्ज बनता है कि उनसे आप सब का परिचय करा दूँ। यू ट्यूब के स्टार तो वो पहले ही से थे पर चोगड़ा तारा की सफलता के बाद से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाले चौबीस वर्षीय दर्शन रावल गुजरात के अहमदाबाद शहर से ताल्लुक रखते हैं। बचपन से उन्हें कविता लिखने और उसे गाने का शौक़ लग चुका था। स्कूल में जब उन्हें समूह गान में पीछे की पंक्ति में रखा जाता था तो वे उतना ही जोर से गाने लगते थे ताकि उनकी आवाज़ अनसुनी ना रह जाए। अपनी इस आदत की वज़ह से उन्हें कई बार उस सामूहिक गीत से ही हटा दिया जाता था। इंजीनियरिंग में भी वे खुराफात करते रहे और एक बार पर्चा लीक करने की क़वायद में कॉलेज से बाहर कर दिए गए। पर उन्हें तो हमेशा से गायक ही बनना था और देखिए स्कूल व कॉलेज का वही नटखट लड़का अब अपनी आवाज़ की बदौलत युवाओं में कितना लोकप्रिय हो रहा है। 

नायक नायिका के बिछोह से उपजे इस गीत का दर्द भी उनकी आवाज़ में बखूबी उभरा है।  तो आइए सुनते हैं एक बार फिर इस गीत को

चाहिए किसी साये में जगह, चाहा बहुत बार है 
ना कहीं कभी मेरा दिल लगा, कैसा समझदार है 
मैं ना पहुँचूँ क्यों वहां पे. जाना चाहूँ मैं जहाँ 
मैं कहाँ खो गया, ऐसा क्या हो गया 
ओ मेहरवाँ क्या मिला यूँ जुदा हो के बता 
ओ मेहरवाँ क्या मिला यूँ जुदा होके बता 
ना ख़बर अपनी रही ना ख़बर अपनी रही 
ना रहा तेरा पता ओ मेहरवाँ ... 

जो शोर का हिस्सा हुई वो आवाज़ हूँ 
लोगो में हूँ पर तन्हा हूँ मैं, हाँ तन्हा हूँ मैं 
दुनिया मुझे मुझ से जुदा ही करती रहे 
बोलूँ मगर ना बातें करूँ, ये क्या हूँ मैं 

सब है लेकिन मैं नही हूँ 
वो जो थोड़ा था सही, 
वो हवा हो गया, क्यों खफा हो गया 
ओ मेहरवाँ क्या मिला.... 


 .

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Friday, February 05, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत # 12 : ओ हीरिये मेरी सुन ज़रा, है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना ... Heeriye

इस संगीतमाला की शुरुआत में मैंने आपको हीमेश रेशमिया की फिल्म हैप्पी हार्डी और हीर के दो गाने सुनाए थे। पहला गीत था आदत और दूसरा तेरी मेरी कहानी । वे दोनों गीत तो बीस के नीचे की पायदानों पर सिमट गए थे।आज बारहवीं पायदान पर इस फिल्म का तीसरा और इस संगीतमाला में शामिल होने वाला आखिरी गीत ले कर आया हूँ जिसे गाया है अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने। 

ये बात मैंने गौर की है कि प्रीतम की तरह ही हीमेश भी अपने गीतों में सिग्नेचर ट्यून का बारहा इस्तेमाल करते हैं। सिग्नेचर ट्यून मतलब संगीत का एक छोटा सा टुकड़ा जो पूरे गीत में बार बार बजता है। इन टुकड़ों की कर्णप्रियता इतनी ज्यादा होती है कि उसे एक बार सुन लेने के बाद आप उसके गीत में अगली बार बजने का इंतज़ार करते हैं। 

एक खूबसूरत आलाप से ये गीत शुरु होता है और फिर पहले गिटार और उसी धुन का साथ देते तबले का जादू गीत के प्रति श्रोता का आकर्षण तेजी से बढ़ा देता है।  सिग्नेचर ट्यून की तरह इस गीत की एक सिग्नेचर लाइन भी है जो हर अंतरे के बात लगातार दोहराई जाती है। वो पंक्ति है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना ओ हीरिये मेरी सुन ज़रा, है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना। इस गीत को लिखने वाले का नाम पढ़ कर मैं चकित रह गया। जी हाँ इस गीत को लिखा है संगीतकार विशाल मिश्रा ने जो संगीतमाला की पिछली पायदान पर गायक की भूमिका निभा रहे थे।



इश्क की भावनाओं से लबरेज इस गीत में विशाल के बिंब और बोलों का प्रवाह देखने लायक है। खासकर शब्दों का दो बार बार दोहराव सुनने में मन को सोहता है। 

है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना, है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना 
ओ हीरिये मेरी सुन ज़रा, है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना 
इश्क़ मज़हब जैसे ख़ुदा, इश्क़ निस्बत जैसे दुआ 
ओ हीरिये मेरी सुन ज़रा है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना 
है इश्क मेरा सरफिरा फ़साना 

तेरी आँखों में हम अपनी ज़िन्दगी का हर एक सपना देखते हैं ओ रांझणा 
ओ हीरिये मेरी सुन ज़रा है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना 
है इश्क मेरा सरफिरा फ़साना ...आ आ..

धूप में तुझसे ठंडक, सर्द में तुझसे राहत
रूह की तुम शिद्दत, आह की तुम चाहत
दवा दवा में तू है, ज़फा ज़फा में तू है
सफ़ा सफ़ा में तू है, मेरे ख़ुदा मेरे ख़ुदा
इश्क़ सोहबत जैसे वफ़ा, इश्क़ फितरत जैसे नशा
ओ हीरिये मेरी सुन ज़रा है इश्क मेरा सरफिरा फ़साना 

अश्कों में तेरी खुशियाँ पल में बस बीती सदियाँ 
दिन सी ये लगती रतियाँ, खट्टी मीठी ये बतियाँ 
सबा सबा में तू है, हवा हवा में तू है 
घटा घटा में तू है मेरे ख़ुदा, मेरे ख़ुदा, मेरे ख़ुदा.. 
इश्क कुदरत जैसे फ़ना, इश्क़ तोहमत जैसे सज़ा 
ओ हीरिये मेरी सुन ज़रा है इश्क़ मेरा सरफिरा फ़साना ....

श्रेया घोषाल को इस गीत में दो ही पंक्तियाँ मिली हैं पर उतने में ही वो अपना कमाल दिखा जाती हैं। अब इस मिश्री सी मधुर धुन को अरिजित की आवाज़ का साथ मिले तो गीत कैसे ना पसंद आए। तो आइए सुनते हैं हीमेश, विशाल, श्रेया और अरिजीत के इस सम्मिलित कमाल को जो ऐश्वर्या मजूमदार, ॠतुराज, सलमान  शेख और अनु दत्त के कोरस और आलापों से और श्रवणीय हो गया है।


वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Wednesday, February 03, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 : गीत # 13 : आप हमारी जान बन गए Jaan Ban Gaye

एक महीने का सांगीतिक सफ़र जो हमें ले आया है वार्षिक संगीतमाला के पच्चीस गीतों की फेरहिस्त के ठीक मध्य में। गीतमाला के अगले दोनों गीत मेलोडी और रूमानियत से भरपूर हैं। गीतमाला की तेरहवीं सीढ़ी है पर है फिल्म ख़ुदाहाफिज़ का एक और गीत। ख़ुदाहाफिज़ फिल्म के इस गीत को लिखा और संगीतबद्ध किया है मिथुन शर्मा ने जो फिल्म उद्योग में सिर्फ मिथुन के नाम से जाने जाते हैं। मज़े की बाद ये  है कि इसे गाया भी एक संगीतकार ने ही है। जी हाँ, इस गीत की पीछे की आवाज़ है विशाल मिश्रा की जो अपनी संगीतबद्ध रचनाओं को पहले भी आवाज़ दे चुके हैं।

पिछले साल उनका कबीर सिंह में गाया गीत तू इतना जरूरी कैसे हुआ खासा लोकप्रिय हुआ था। जहाँ तक एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमालाओं की बात है तो विशाल का फिल्म करीब करीब सिंगल का संगीतबद्ध गीत जाने दे साल 2017 का रनर्स अप गीत रह चुका है। वैसे आपको ताज्जुब होगा कि विशाल एक समय कानून के विद्यार्थी रहे हैं और उन्होंने संगीत सुन सुन के सीखा है। आज देखिए अपने हुनर को माँजते माँजते वो गाने के साथ ढेर सारे वाद्य यंत्र बजाने की महारत भी रखते हैं। विशाल ने इस गीत को गाया भी बहुत डूब के है और यही वज़ह है कि इस गीत में उनकी आवाज़ सीधे दिल में उतर जाती है। 

इस गीत में विशाल का साथ दिया है असीस कौर ने जिनकी आवाज़ को पहले बोलना (Kapoor & Sons) और फिर पिछले साल वे माही (केसरी) में काफी सराहा गया था। पानीपत की इस कुड़ी ने गुरुबानी गा कर संगीत का ककहरा पढ़ा था जो बाद में गुरुओं की संगत में और निखरा। रियालटी शो उन्हें मायानगरी तक खींच लाया। उनकी आवाज़ की बनावट थोड़ी हट के है जो उनकी गायिकी को एक अलग पहचान देने में सफल रही है।

मिथुन गिटार और तबले के नाममात्र संगीत संयोजन में भी शुरु से अंत तक धुन की मधुरता की बदौलत श्रोताओं को बाँधे रहते हैं। फिल्म में ये गीत नायक नायिका के पनपते प्रेम को दर्शाते इस गीत को उन्होंने बड़ी सहजता से अपनी लेखनी में बाँधा है।

अहसास की जो ज़ुबान बन गए
दिल में मेरे मेहमान बन गए
आप की तारीफ़ में क्या कहें
आप हमारी जान बन गए
आप ही रब आप ईमान बन गए
आप हमारी जान बन गए

किस्मत से हमें आप हमदम मिल गए
जैसे कि दुआ को अल्फाज़ मिल गए
सोचा जो नहीं वो हासिल हो गया
चाहूँ और क्या की खुदा दे अब मुझे

रब से मिला एक अयान बन गए
ख्वाबों का मेरे मुकाम बन गए
आप की तारीफ़ में क्या कहें
आप हमारी जान बन गए

दीन है इलाही मेरा मान है माही
मैं तो सजदा करूँ उनको
अर्ज रुबाई मेरी फर्ज़ दवाई मेरी
इश्क़ हुआ मुझको...जान बन गए

तो आइए सुनते हैं इस मीठे मुलायम गीत को..



वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Thursday, January 28, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत # 14 : जुगनू जुगनू जुगनू जैसे हैं...अरमान Jugnu

वार्षिक संगीतमाला की अगली पेशकश है फिल्म पंगा से। कंगना रणौत की ये फिल्म लगभग एक साल पहले पिछली जनवरी में प्रदर्शित हुई थी। शंकर अहसान लॉए द्वारा संगीत निर्देशित इस फिल्म के गीत जावेद अख्तर ने लिखे थे। जावेद साहब जैसे मँजे हुए गीतकार आजकल फिल्मों के लिए कम ही लिखते हैं और इसीलिए जब उनकी उपस्थिति किसी फिल्म में देखता हूँ तो उनके लिखे बोलों पर मेरी खास नज़र रहती है।

 

पंगा एक ऐसी महिला कबड्डी खिलाड़ी की कहानी थी जो शादी और उसके बाद मातृत्व की जिम्मेदारियाँ सँभालने के लिए खेल से जुड़ा अपना सफल कैरियर छोड़ देती है पर ये बात उसे दिल में कहीं ना कहीं कचोटती रहती है कि वो इस खेल के माध्यम से जिस मुकाम पर जाना चाहती थी, वहाँ नहीं पहुँच पाई। 

जावेद साहब को नायिका के इन्हीं दबे हुए अरमानों को ध्यान में रखते हुए एक गीत लिखना था और उन्होंने एक बड़ा ही प्यारा गीत रचा जिसका नाम था जुगनू। मुखड़े में देखिए किस तरह नायिका के मन में चल रही उधेड़बुन का वो खाका खींचते हैं..दो रंगो में रँगी है, दो रूप में ढली...ऐसी हैं ज़िंदगी सबकी...मायूसी भी है थोड़ी, अरमान भी कई....ऐसी है ज़िंदगी सबकी...गहरे अँधेरों… में भी..पल पल चमकते हैं जुगनू से जो....अरमान हैं वो तेरे..

जीवन का यथार्थ समेट लिया जावेद जी ने इन पंक्तियों में। जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों हमारे मन में कुछ अरमान हर पल मचलते ही रहते हैं। बिना किसी सपने के ज़िदगी के रंग फीके नहीं हो जाएँगे?

अगले अंतरे में जो कि फिल्म में शामिल नहीं हुआ जावेद साहब की पंक्तियाँ फिर वाह वाह करने को मजबूर करती हैं। गीत के शानदार बोलों को शंकर महादेवन के साथ साथ इंडियन आइडल में हर किसी के चहेते रहे सनी हिंदुस्तानी की आवाज़ का भी साथ मिला है। शंकर महादेवन जिस गीत को भी गाते हैं उसमें शास्त्रीयता का पुट जरूर भरते हैं। गीत सरगम के बाद एक छोटे आलाप से शुरु होता है और फिर शंकर की आवाज़ में गीत के शब्दों का जादू मन में उतरने लगता है।

दो रंगो में रँगी है, दो रूप में ढली
ऐसी हैं ज़िंदगी सबकी
मायूसी भी है थोड़ी, अरमान भी कई
ऐसी है ज़िंदगी सबकी
गहरे अँधेरों… में भी
पल पल चमकते हैं जुगनू से जो
अरमान हैं वो तेरे..
जुगनू जुगनू जुगनू जैसे हैं
जुगनू जैसे हैं अरमान अरमान..
जुगनू जुगनू जुगनू जैसे हैं
जुगनू जैसे हैं अरमान अरमान
हो.. अरमाां…
नींदों के देश में है सपनो का इक नगर
जहाँ हैं डगर डगर जुगनू
सौ आँधियाँ हैं चलती साँसों में रात भर
बुझते नही मगर जुगनू
गहरे अँधेरों… में भी
पल पल चमकते हैं जुगनू से जो
अरमान हैं वो तेरे..
 
जुगनू जुगनू जुगनू ...हो.. अरमाां…
 
लम्हा बा लम्हा, लम्हा बा लम्हा
कुछ ख़्वाब तो होते हैं
रफ़्ता बा रफ़्ता हम, रफ़्ता बा रफ़्ता
बेताब तो होते हैं… 

ओ.. तू माने चाहे ना माने तू
दिल है अगर तो है आरज़ू
आँखों के प्याले खाली नहीं
कोई तमन्ना होगी कहीं
गहरे अँधेरों… में भी
पल पल चमकते हैं जुगनू से जो
अरमान हैं वो तेरे..
जुगनू जुगनू जुगनू ...हो.. अरमाां…

भटिंडा के रेलवे स्टेशन पर बूट पालिश करने वाले सनी मलिक उर्फ सनी हिंदुस्तानी की कहानी तो इंडियन आइडल के माध्यम से पिछले साल पूरा भारत जान ही गया है इसलिए उसे मुझे दोहराने की जरूरत नहीं। इस गीत में शंकर महादेवन जैसे कमाल के गायक के सामने उनकी आवाज़ की चमक थोड़ी फीकी जरूर लगी पर उन्होंने अपनी झोली में आए गीत के हिस्से बखूबी निभाए। गीत में कोरस व ताली, ढोलक, तबले के साथ हारमोनियम का बेहतरीन इस्तेमाल हुआ है। हारमोनियम की मधुर धुन आप तक पहुँचाई है वादक आदित्य ने।

तो आइए सुनते हैं पहले इस गीत का आडियो वर्जन जिसमें इसके दोनों अंतरे हैं।


फिल्म का वीडियो कंगना पर फिल्माया गया है..


वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Tuesday, January 26, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत # 15 : कुड़ी नूँ नचने दे Kudi Nu Nachne De

वार्षिक संगीतमाला में अब है शुरुआती पन्द्रह गीतों की बारी। यकीन कीजिए यहाँ से पहली पॉयदान तक का सफ़र बड़ा मज़ेदार होने वाला है। पन्द्रहवीं पॉयदान का गीत वो जिसे एक बार सुनकर ही आप थिरकने पर मजबूर हो जाएँगे। ये गीत है फिल्म अंग्रेजी मीडियम का जो अभिनेता इरफान खान की आख़िरी फिल्म थी। इरफान इस फिल्म में एक ऐसे पिता का रोल निभा रहे थे जिसकी बेटी का सपना हर हाल में विदेश जाकर पढ़ाई करने का है। 

मार्च में सिनेमा हॉल और फिर कोरोना काल में फिर से ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ हुई ये फिल्म अपनी पूर्ववर्ती हिंदी मीडियम की तरह उतनी सफल नहीं हो पाई पर इसके कुछ गाने खासे लोकप्रिय हुए जिसमें कुड़ी नूँ नचने दे का जलवा अपनी आकर्षित करती धुन और गीत में निहित संदेश की वज़ह से फिल्म के प्रदर्शित होने के महीनों बाद भी बरक़रार है।


ये गीत अंग्रेजी मीडियम की नायिका का ही नहीं बल्कि उन सारी लड़कियों की आवाज़ बन गया जिन्होंने अपने जीवन के लिए कुछ सपने देखे हैं और उनको मूर्त रूप देने के लिए अपनी सोच और मन मुताबिक राह चुनना चाहती हैं। अंग्रेजी मीडियम के इस गीत को संगीतबद्ध किया सचिन जिगर की जोड़ी ने। 

सचिन जिगर सिमरन बदलापुर, भूमि, हैप्पी एंडिंग, मेरी प्यारी बिंदु, शुद्ध देशी रोमांस और शोर इन दि सिटी जैसी फिल्मों के गीतों के ज़रिए पिछले एक दशक से एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमालाओं में दस्तक देते रहे हैं। अंग्रेजी मीडियम के इस गीत को उन्होंने एक ऐसी धुन में ढाला है जिसे एक बार सुनकर ही मन झूम उठता है। जिगर की पत्नी और गीतकार प्रिया सरैया ने पंजाबी बोलों की सरलता बनाए रखी है ताकि उसके भाव आम जनता को भी आसानी से समझ आ सकें। लड़कियों को अपने मन की करने की आज़ादी के लिए प्रेरित करते इस गीत में अपनी दमदार आवाज़ से उर्जा भरी है विशाल ददलानी ने।


हो मीठी-मीठी सी ये मुनिया
सर पे डाले है ये चुनिया क्यूँ..हाँ क्यूँ
हो सोणी-सोणी सी कुड़ी नूँ
मौज में रहने दे ना दुनियाँ क्यूँ, हाँ दुनियाँ क्यूँ
है किन्नी शानदार कुड़ी ये कर देगी कमाल
इसे झूमने दे अपनी बीट ते, 
कुड़ी नूँ नचने दे, हाँ नचने दे
तू आज लगाने दे ठुमके
हाँ जमके
कुड़ी नु नचने दे हाँ नचने दे
तू सारियाँ फ़िकरां नूँ छड के
बन-ठन के
कुड़ी नूँ नचने दे, नचने दे
हाँ नचने दे, नचने दे
तू आज लगाने दे ठुमके
हाँ जमके, कुड़ी नूँ नचने दे...बन-ठन के

हो वड्डी-वड्डी बात तेरी
छोटी-छोटी सोच क्यूँ है जी, ओहो पाजी
हो उखड़े-उखड़े क्यूँ खड़े जी
हँस दो तो, हँस देगी दुनिया भी, हाँ हाँ हाँ जी
हो आये जो ऑन द फ्लोर कुड़ी तो खूब मचाये शोर
तू भी झूम लेना इसकी बीट पे
कुड़ी नूँ नचने दे...बन-ठन के

इस गीत की एक खास बात ये है कि इसमें एक दो नहीं बल्कि आठ अभिनेत्रियाँ आपको एक ही गीत में नज़र आएँगी। इन नामी सिनेतारिकाओं द्वारा लॉकडाउन में अपने अपने घरों के आसपास शूट किए गए टुकड़ों को निर्देशक होमी अदजानिया ने इस खूबसूरती से पिरोया है कि देखने वाला गीत गुनगुनाने के साथ इन नायिकाओं के साथ ही थिरकने पर मजबूर हो जाता है। आलिया भट्ट, अनुष्का शर्मा, कैटरीना कैफ़, अनन्या पांडे, जान्ह्वी कपूर, कियारा आडवाणी, कृति सैनन के साथ राधिका मदान ने अपने रचनात्मक नृत्य के ज़रिये इस गीत को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

आशा है ये गीत सुन और देख कर आप भी उतने ही आनंदित होंगे जितना मैं हुआ हूँ..



वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Wednesday, January 20, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत # 16 : हाँ आज दिल से झगड़ा किया, हाँ आज फिर थोड़ा रोए हैं हम Ye Jo Shahar Hai

वार्षिक संगीतमाला का आज दूसरा चरण पूरा हो रहा है यानी साल के पच्चीस शानदार नग्मों में दस गीतों के बारे में आप जान चुके हैं। अब तक आपने गीतमाला में रूमानियत भरे कुछ हल्के फुल्के तो कुछ संज़ीदा गीत सुने। आज थोड़ा मूड बदलने की बारी है। एक उदास सा गीत है सोलहवीं पॉयदान पर जिसे फिल्म मी रक़्सम के लिए लिखा, संगीतबद्ध और गाया है युवा संगीतकार रिपुल शर्मा ने।


अगर आप इस फिल्म के थोड़े अलग से नाम की वज़ह जानना चाह रहे हों तो बता दूँ कि मी रक़्सम का अर्थ है मैं नृत्य करूँगी। ये एक छोटी सी बच्ची की कहानी है जो मुस्लिम घर में पैदा होने के बावज़ूद मन में भरतनाट्यम में महारत हासिल करने का सपना पाले बैठी है। बाप दर्जी है। पैसों की भी तंगी है पर पिता अपनी बेटी के अरमानों को पूरा करने के लिए पूरे समाज से टकराने के लिए तैयार है। 

इस फिल्म को बनाया है कैफ़ी आज़मी के बेटे बाबा आज़मी ने। ऐसा कहते हैं कि कैफ़ी के मन में ये बात थी कि आज़मगढ़ जिले के उनके पैतृक गाँव मिजवां को केंद्र में रखते हुए एक फिल्म बनाई जाए और इसीलिए मी रक्सम की शूटिंग वहाँ हुई। फिल्म पिछले साल अगस्त में रिलीज़ हुई और समीक्षकों द्वारा काफी सराही गयी।

फिल्म में दो ही गीत है जिसकी जिम्मेदारी रिपुल को सौंपी गयी। ये जो शहर है समाज के उस बदलते स्वरूप को उभारता है जहाँ घृणा, ईर्ष्या और एक दूसरे के प्रति द्वेष है, जहाँ सच और अच्छाई मुँह छुपाए बैठी हैं, जहाँ साँसों में एक घुटन है और लोगों के चेहरों से मुस्कुराहट गायब है। 

ये जो शहर है जहाँ तेरा घर है
यहाँ शाम और रात भी दोपहर है
ख्वाबों के जुगनू जल बुझ रहे हैं
हवाओं में फैला ये कैसा ज़हर है
यहाँ रोज़ थोडा सा मरते हैं हम
हाँ आज फिर दिल से झगड़ा किया
हाँ आज फिर थोड़ा सोए हैं कम
हाँ आज दिल से झगड़ा किया
हाँ आज फिर थोड़ा रोए हैं हम

यहाँ आदमी आदमी से ख़फा है
यहाँ जिस्म से रुह क्यूँ लापता है
कोई ना कभी हाल ना पूछे किसी का
यहाँ भीड़ सी हर तरफ बेवज़ह है
यहाँ शक़्ल में बादलों की धुँआ है
यहाँ साँस भी लें तो घुटता है दम
हाँ आज फिर दिल से झगड़ा किया
..
यहाँ बचपनों सी खुमारी नहीं है
यहाँ भूख पे भी उधारी नहीं है
बदन तोड़ देगी सुकूँ छीन लेगी
यहाँ सच सी कोई बीमारी नहीं है
यहाँ कोई क्यूँ मुस्कुराता नहीं है
यहाँ आदमी से परेशाँ है ग़म
हाँ आज फिर दिल से झगड़ा किया

रिपुल ने अब तक कई वेब सिरीज़ और कुछेक फिल्मों में संगीत देने का काम किया है पर मी रक़्सम में उन्होंने आपके काम के द्वारा अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया है। ये गीत अगर इस गीतमाला में अपना स्थान बना पाया है तो इसकी एक बड़ी वज़ह इसके गहरे बोल और इसकी प्यारी धुन है। रिपुल की आवाज़ भी अच्छी है पर कहीं कहीं गीत में वो उखड़ती नज़र आती है। बेहतर होता कि इसे वो अन्य स्थापित गायकों से गवाते। तो जरूर सुनिए और देखिए इस गीत को 

 

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Monday, January 18, 2021

वार्षिक संगीतमाला 2020 गीत # 17 : जो इक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम Mar Jaayein Hum

विधु विनोद चोपड़ा अपनी फिल्मों के खूबसूरत फिल्मांकन और संगीत के लिए जाने जाते रहे हैं। बतौर निर्देशक परिंदा, 1942 A love story, करीब और मिशन कश्मीर का संगीत काफी सराहा गया था। इस साल थियेटर में रिलीज़ उनकी फिल्म शिकारा के गीत उतने तो सुने नहीं गए पर अगर आपको शांत बहता संगीत पसंद हो तो ये एल्बम आपको एक बार जरूर सुनना चाहिए। अगर मैं अपनी कहूँ तो मुझे इस संगीत एल्बम में ऐ वादी शहज़ादी... की आरंभिक कविता जिस अंदाज़ में पढ़ी गयी वो बेहद भायी पर जहाँ तक पूरे गीत की बात है तो इस गीतमाला में इस फिल्म का एक ही गीत शामिल हो पाया और वो है श्रद्धा मिश्रा और पापोन का गाया युगल गीत मर जाएँ हम..


मर जाएँ हम एक प्यारा सा प्रेम गीत है ये जो संदेश शांडिल्य की लहराती धुन और झेलम नदी में बहते शिकारे के बीच इरशाद कामिल के शानदार बोलों की वज़ह से मन पर गहरा असर छोड़ता है। दरअसल जब आप  अपने अक़्स को भूल कर किसी दूसरे व्यक्तित्व की चादर को खुशी खुशी ओढ़ लेते हैं तभी प्रेम का सृजन होता है। इरशाद इन्ही भावनाओं को पहले अंतरे में उभारते हैं। 

गीत के दूसरे अंतरे में उनका अंदाज़ और मोहक हो जाता है। अब इन पंक्तियों की मुलायमियत तो देखिए। कितने महीन से अहसास जगाएँ हैं इरशाद कामिल ने अपनी लेखनी के ज़रिए... तू कह रहा है, मैं सुन रही हूँ,मैं खुद में तुझको ही, बुन रही हूँ,....है तेरी पलकों पे फूल महके,...मैं जिनको होंठों से चुन रही हूँ,...होंठों पे आज तेरे मैं नमी देख लूँ,...तू कहे तो बुझूँ मैं, तू कहे तो चलूँ

संगीत संयोजन में संदेश शांडिल्य ने गिटार और ताल वाद्यों के साथ संतूर का प्रयोग किया है। गीत का मुखड़ा जब संतूर पर बजता है तो मन सुकून से भर उठता है। संतूर पर इस गीत में उँगलिया थिरकी हैं रोहन रतन की।

जो इक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम,
जो एक पल तुमसे दूर जाएँ तो मर जाएँ हम,
तू दरिया तेरे साथ ही भीगे बह जाएँ हम,
जो इक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम...

मैं तेरे आगे बिखर गयी हूँ,
ले तेरे दिल में उतर गयी हूँ,
मैं तेरी बाँहों में ढूँढूँ खुद को,
यहीं तो थी मैं किधर गयी हूँ,
खो गयी है तू मुझमें, आ गयी तू वहाँ,
मिल रहे हैं जहाँ पे, ख्वाब से दो जहां,
जो एक पल तुमको ना देखें तो मर जाएँ हम..

तू कह रहा है, मैं सुन रही हूँ,
मैं खुद में तुझको ही, बुन रही हूँ,
है तेरी पलकों पे फूल महके,
मैं जिनको होंठों से चुन रही हूँ,
होंठों पे आज तेरे मैं नमी देख लूँ,
तू कहे तो बुझूँ मैं, तू कहे तो चलूँ
जो एक पल तुमको ना देखें... तो मर जाएँ हम,
तू दरिया तेरे साथ ही भीगे..
तू नदिया तेरे साथ ही भीगें, बह जाएँ  हम

नवोदित गायिका श्रद्धा की आवाज़ की बनावट थोड़ी अलग सी है जो कि आगे के लिए संभावनाएँ जगाती हैं जबकि पापोन तो हमेशा की तरह अपनी लय में हैं। शिकारा में इस गीत को फिल्माया गया है आदिल और सादिया की युवा जोड़ी पर..

 

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Saturday, January 16, 2021

वार्षिक संगीतमाला गीत #18 : तू जर्दे की हिचकी,गुलकंद का तोला .. Do Ka Chaar

वार्षिक संगीतमाला की अठारह वीं पायदान पर है एक बार फिर सोनू निगम की आवाज़। फिल्म एक बार फिर से चमनबहार। इस फिल्म के एक अन्य गीत के बारे में लिखते हुए मैं बता ही  चुका हूँ कि चमनबहार एक पान की दुकान चलाने वाले नवयुवक की इकतरफा प्रेम कहानी है। छत्तीसगढ़ के छोटे से कस्बे लोरमी में रची बसी इस कहानी को इसी राज्य के बिलासपुर शहर से ताल्लुक रहने वाले अपूर्व धर हैं जो प्रकाश झा की फिल्मों में कई बार सहायक निर्देशक की भूमिका निभा चुके हैं।


इकतरफा प्रेम तो आप जानते ही है कि ख़्वाबों खयालों में पलता है। निर्देशक अपूर्व धर (Apurva Dhar Badgayin) जो इस गीत के गीतकार भी हैं ने इस गीत के माध्यम से नायक के सपनों की मीठी उड़ान भरी है। ज़ाहिर सी बात है कि जब सैयाँ पानवाले हों तो उनकी छबीली जर्दे की हिचकी और गुलकंद के तोले जैसी ही थोड़ी तीखी थोड़ी मीठी होगी। इसीलिए गीत की शुरुआत वे कुछ इन शब्दों से करते हैं । 😀😀😀

दो का चार तेरे लिए सोलह 
तू जर्दे की हिचकी,गुलकंद का तोला 
तू मीठा पान मैं कत्था कोरिया 
देखा जो तुझको मेरा दिल ये बोला 

दूसरे अंतरे में भी अपूर्व की लेखनी नायक द्वारा नायिका को कई अन्य मज़ेदार बिंबों में बाँधती नज़र आती है।

तू राज दुलारी मैं शंभू भोला 
तू मन मोहिनी मेरा बैरागी चोला 
तू तेज़ चिंगारी मैं चरस का झोला 
तू मीठी रूहफज़ा मैं बर्फ का गोला 
उड़ती है खुशबू किमामी 
होता नशा जाफरानी 
मैं बेतोड़ दर्द की कहानी 
तू ही तो है मेरा मलहम यूनानी 
दो का चार तेरे लिए गल्ला 
तू ही तो अल्लाह तू ही मोहल्ला दो का चार....

गीत का संगीत रचा है अंशुमन मुखर्जी ने। गीत की शुरुआत और खासकर अंतरों के बीच में तार वाद्यों के साथ वॉयलिन का प्रयोग कर्णप्रिय लगता है। गीत के फिल्मांकन में नायक की भूमिका में जीतेन्द्र कुमार का अभिनय किसी भी आम से लड़के को इस इकतरफा प्रेम कहानी से जोड़ेगा। सोनू की आवाज़ का सुरीलापन तो आकर्षित करता ही है, साथ ही जिस तरह वो गीत की भावनाओं में रम कर गाते हैं वो भी काबिलेतारीफ है।

तो आइए सुनें सोनू निगम की आवाज़ में ये चुलबुला नग्मा



वार्षिक संगीतमाला में अब तक

 

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