Tuesday, December 31, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 : नया साल मनाइए इन पाँच झुमाने वाले गीतों के साथ Bollywood Top 5 Dance Numbers of 2019

वार्षिक संगीतमाला में साल के नायाब गीतों की फेरहिस्त तो कल से चलती ही रहेगी। पर साल के इस आख़िरी दिन एक ब्रेक लेना तो बनता है ना। नए साल के आने की मस्ती में थोड़ा बहुत तो आप सब भी थिरकेंगे।  तो चलिए आज मिलवाते हैं उन पाँच गीतों से जिन्होंने इस साल आपमें से बहुतों को थिरकाया होगा। ये ना कहिएगा कि इनके बोल कैसे हैं आज तो जी सिर्फ बीट्स देखनी है।



अब हमारे रैप मास्टर बादशाह गीत बनाएँगे तो नायिका का विश्लेषण तो कुछ यूँ ही होगा
ओ, Baby plan बनाती है..
पर कभी ना time पे आती है..
But जब नैन मिलाती है, 
तो traffic jam कराती है.....
.............
ना बंब है, ना पटाखा है 
ये लड़की पूरी दीवाली है,

अब इस बंब गाने को सुनने के लिए पहले थोड़ी साँस तो ले लीजिए

 

अब आपने क्या सोचा की डांस सिर्फ शहर के गबरू जवान और बेबी बेबी कहने वाली कन्याओं को आता है। नहीं जी अपनी गाँव की छोरियाँ कम थोड़े हैं। ये भी बेबी बेबी गा सक्के हैं पर इनका निशाना कहीं और है। गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में कैसे गाँव का छोटा सा कमरा डांस फ्लोर बन जावे है ये देखो बस आप

इत्ती क्या fight है, अपनी तो night है

क्या wrong-right है, सब भूल जा

हो क्या जो कल्ली हो, मस्ती में टल्ली हो

थोड़ी सी झल्ली हो, सब भूल जा

अरे सोचो नहीं, अरे रोको नहीं

चाहे दुनिया कहे तुमको बोल्ड, बोल्ड, बोल्ड
ओ baby gold, gold, gold...


गाँव शहर के डांस तो देख लिए आपने पर वो पुरानी हवेली में नाचवाली का डांस तो नहीं देखा ना। दिखा देंगे दिखा देंगे पर उसके लिए आपको ऐरा गैरा नत्थू खैरा बनना पड़ेगा और नाचवालियों का चक्कर लगाएँगे तो थोड़े कलंकित भी हो जाएँगे हुजूर

रात लेके आयी है जश्न तारी, आए हाए हाए
ग़म गलत करने की है अपनी बारी, आए हाए हाए
आज नाचें गाएं ज़रा इश्क़ विश्क़ फरमाएं
और जान जलाने वाली भाड़ में जाए सारी दुनियादारी आए हाए हाए


अब सैयाँ को आप ऍरा गैरा नत्थू खैरा बनाओगे तो वो पत्नी छोड़कर वो कि तलाश में निकलेगा। पर यहाँ तो देख रहा हूँ धीमे धीमे ही सही कार्ति आर्यन जनाब दो नावों में एक साथ सवारी कर रहे हैं। हुस्न की परियों के साथ अपना scene set करने का उनका अंदाज़ तो देखिए


तेरा हुस्न तो सबसे आला है
मुझे पागल करने वाला है

आज नशा तेरा करदे

तेरा आशिक मरने वाला है

सच-सच बोल, हकीकत या ये dream है?
धीमे-धीमे, धीमे-धीमे
धीमे-धीमे, धीमे-धीमे
Set मेरा scene है, scene है, scene है

और जनाब आज की महफिल का अंजाम एक ऐसे गीत से जिसके गीत के बोलों को याद करने की जरूरत नहीं। बस एक शब्द "बाला" का बार बार जाप कीजिए और और नाचते समय भाव भंगिमा ये याद रखते हुए बनाइए कि हमारे पूर्वज बंदर थे। तो देर किस बात की चलिए शुरु करते हैं बाला बाला बाला बाला.. बाला बाला बाला बाला..ये साल भी चला गया साला 😃😃


 

तो हुज़ूर खूब नाच गा कर नए साल का स्वागत कीजिए। कल से फिर शुरु होगी वार्षिक संगीतमाला की हिट परेड। एक शाम मेरे नाम की तरफ़ से आप सबको नए साल की हार्दिक शुभकामनाएँ !

वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

Monday, December 30, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : ढूँढ रहा है पंक्षी को दाना Nuskha Tarana

कविता सेठ की आवाज़ आपको कितनी पसंद है? वैसे तो उन्होंने हिंदी फिल्मों में गिनती के गाने ही गाए हैं पर वेक अप सिड के इकतारा की गूँज आज तक दिल में रहती हैं। काकटेल का उनका गाया तु्म्हीं हो बंधु भी बेहद सफल गीत रहा था। उनकी आवाज़ में एक रुहानियत है जो आपके मूड को एकदम से बदल देती  है। 

इस साल उन्होंने एक गाना गाया है फिल्म गॉन केश (Gone Kesh)  के लिए । पहली बार जब मैंने ये गाना सुना तो इसके बोल कुछ खास समझ नहीं आए पर कविता जी की गायिकी का असर ऐसा था कि गाना रिपीट मोड में सुनता रहा। इसी दौरान फिल्म की कहानी से रूबरू हुआ और फिर गीत के बोलों का रहस्य खुलता चला गया।


जैसा कि नाम है गॉन केश एक ऐसी किशोरी की कहानी है जिसके बाल तेजी से झड़ रहे हैं। ये साल की पहली फिल्म थी जिसने गिरते बालों को अपना विषय बनाया। उसके बाद तो ख़ैर उजड़ा चमन और बाला बनी ही। बालों को लेकर लड़कियाँ कितनी सजग होती हैं ये तो हम सभी जानते हैं। समाज ने भी ऐसी कंडिशनिंग कर रखी है कि उनका तेजी से झड़ना किसी भी सामान्य व्यक्ति और खासकर लड़कियों को मानसिक अवसाद में डाल सकता है। ऐसी हालत में बालों को झड़ने से रोकने के लिए तथाकथित शुभचिंतकों द्वारा सुझाए  नुस्खों की बाढ़ आ जाती है और शायद इसीलिए नवोदित संगीतकार कनीश शर्मा ने गीतकार मजाल के साथ जो गीत बनाया उसका नाम ही रख दिया "नुस्खा तराना"।

मैंने पहली बार मजाल के लिखे गीतों को सुना है और बंदे की प्रतिभा का कायल हो गया हूँ। ऐसे कठिन विषय पर इतना खूबसूरत गाना लिखने के लिए वे शाबासी का हक़दार है। गिरते बालों के बीच उदास निराश लड़की की कल्पना उन्होंने कुछ इन शब्दों में की है 

इक काले रेशम के पिंजरे में जिंदा थी, शर्मिंदा थी शर्मिंदा थी
चुभती दवाओं दुवाओं से, कहीं बड़ी दूर हूँ छुपी
बड़ी देर हो चुकी, ढूँढ रहा है पंक्षी को दाना
मन में चला के ये नुस्खा तराना

मजाल ने गिरते बालों की उपमा पक्षी से और नुस्खों के लिए दाने का इस्तेमाल कर गीत का मुखड़ा रचा है कि ढूँढ रहा है पक्षी को दाना...मन में चला के ये नुस्खा तराना। :)

इस गीत को संगीत से सँवारने वाले कनिश शर्मा  जम्मू से ताल्लुक रखते हैं। इस बोल प्रधान गीत के पीछे गिटार की तरंगों की  झनझनाहट या कभी वॉयलिन का स्पर्श मन को सुकून देता है। तो आइए सुनते हैं ये पूरा गीत

 

ज़िंदगी भर ज़िंदगी से हारी हारी
ख्वाबों ने भी माफी मांगी बारी बारी
बेजुबानों सी इन दुकानों सी भरती रही
आँधियों से पर चिंगारी कभी डरती नहीं
आज भी ढूँढ रहा है पंक्षी को दाना
मन में चला के ये नुस्खा तराना
जिंदगी को घुँघरुओं से लगाए चल तू

इक काले रेशम के पिंजरे में जिंदा थी
शर्मिंदा थी शर्मिंदा थी
चुभती दवाओं दुवाओं से कहीं 
बड़ी दूर हूँ छुपी
बड़ी देर हो चुकी
ढूँढ रहा है पंक्षी को दाना...
मन में चला के ये नुस्खा तराना
जिंदगी को अपनी धुन पे नचाए चल तू

मसान वाली श्वेता त्रिपाठी तो याद हैं ना आपको। गॉन केश में भी इस किशोरी की भूमिका में यही प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं। मुझे तो इस फिल्म के गीतों को सुनने के बाद इसे देखने की इच्छा भी प्रबल हो गयी है। फिल्म में शायद गीत के दूसरे अंतरे का इस्तेमाल नहीं हुआ है।



वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू.  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

Sunday, December 29, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : बोलो कब प्रतिकार करोगे? Bolo Kab Pratikar Karoge ?

वार्षिक संगीतमाला में पिछली पोस्ट थी माँ को याद करते एक संवेदनशील गीत की। उसके पहले चिट्ठिये, इक मलाल और तुम ही आना जैसे गीतों से आप मिल ही चुके हैं। प्रेम, वात्सल्य  और विरह के रंगों के बाद अब बारी एक ऐसे गीत की जिसके शब्दों में इतनी ताकत है कि वो आपके शरीर में उर्जा का संचार कर दे।

प्रसून जोशी एक ऐसे गीतकार है जिन्होंने हिंदी कविता का परचम फिल्मी गीतों में बड़ी शान से फहरा रखा है। तारे ज़मीं से लेकर फिर मिलेंगे और लंदन ड्रीम्स से लेकर भाग मिल्खा भाग तक जिस खूबसूरती से उन्होंने ठेठ हिंदी शब्दों का प्रयोग किया है वो अस्सी के दशक से आज तक शायद ही किसी गीतकार के गीतों में मिलेगा। फिर मिलेंगे  के गीत के लिए जब वो कहते हैं

झील एक आदत है तुझमें ही तो रहती है और नदी शरारत है, तेरे संग बहती है
उतार ग़म के मोजे जमीं को गुनगुनाने दे कंकरों को तलवों में, गुदगुदी मचाने दे
खुल के मुस्कुरा ले तू, दर्द को शर्माने दे...


तो दिल करता है कि उनको गले लगा लूँ। इतनी प्यारी कविता गीतों में कहाँ मिुलती है। लंदन ड्रीम्स में उनका चटपटा सा गीत था मन को अति भावे और मिसाल के तौर पर ये अंतरा देखिए कि कैसे उन्होंने इसमें संकेत, निकट, क्षण जैसे ठेठ हिंदी शब्दों का इस्तेमाल कितनी सहजता से कर दिया।

संकेत किया प्रियतम ने आदेश दिया धड़कन ने
सब वार दिया फिर हमने, हुआ सफल सफल जीवन
अधरों से वो मुस्काई काया से वो सकुचाई
फिर थोड़ा निकट वो आई था कैसा अद्भुत क्षण

मैं आज ये चर्चा इसलिए छेड़ रहा हूँ क्यूंकि इस साल भी मणिकर्णिका के लिए प्रसून ने एक गीत में  अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए जोश भरते हुए ऐसे अंतरे लिखे हैं जिसे पढ़ कर  वाह वाह निकलती है।  फिल्म की कहानी से पनपा ये परिस्थिजन्य गीत इस संगीतमाला का हिस्सा है तो वो प्रसून के इन ओजमयी बोलों के लिए। उनकी लिखी इन पंक्तियों पर गौर फरमाइए

अग्नि वृद्ध होती जाती है, यौवन निर्झर छूट रहा है
प्रत्यंचा भर्रायी सी है, धनुष तुम्हारा टूट रहा है
कब तुम सच स्वीकार करोगे, बोलो, बोलो कब प्रतिकार करोगे?

गीत का दूसरा अंतरा भी उतना ही प्रभावी है

कम्पन है वीणा के स्वर में, याचक सारे छन्द हो रहे
रीढ़ गर्व खोती जाती है, निर्णय सारे मंद हो रहे
क्या अब हाहाकार करोगे?,बोलो, बोलो कब प्रतिकार करोगे?

प्रसून अपने गीतों में हिदी कविता की मशाल यूँ ही जलाए रहें आगे भी उनसे ऐसी आशा है। तो आइए सुनते हैं सुखविंदर और शंकर महादेवन के सम्मिलित स्वर में इस गीत को। इस फिल्म का संगीत दिया है शंकर अहसान और लॉय की तिकड़ी ने।


 

प्रथम पच्चीस के आस पास रहने वाले इन छः गीतों की कड़ियों में आख़िरी कड़ी होगी ऐसे गीत की जिसके बोल आप तभी समझ पाएँगे अगर फिल्म में नायिका की समस्या का आपको पहले से भान हो।

वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : ओ माँ याद आती हो O Maa from RAW

सुन रहा है ना तू और तू है कि नहीं जैसे गीतों से युवाओं के दिल में स्थान बनाने वाले अंकित तिवारी पिछले तीन चार सालों से बतौर गायक उतना प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे हैं। इसकी एक वज़ह ये भी रही कि उन्होंने ज्यादातर रूमानी गीतों तक अपनी आवाज़ को सीमित रखा और उनकी धुनों की रंगत भी बहुत कुछ एक जैसी रही। इस साल उनके तीन एकल गीतों में सबसे जानदार नग्मा रहा फिल्म रोमियो अकबर वाल्टर का जहाँ वो अपनी पहचान से अलग किस्म का गीत गाते सुनाई दिए।  

माँ को याद करते हुए इस गीत को सुनकर मेरे ज़हन में सबसे पहले शंकर महादेवन का तारे ज़मीं के लिए गाया हुआ माँ मेरी माँ याद आ गया।


अंकित तिवारी  और गीतकार प्रिंस दुबे की जोड़ी इस गीत को उस ऊँचाई तक तो नहीं ले जाती पर इतना जरूर है कि गीत खत्म होते होते आँखों के कोर नम जरूर हो जाते हैं। वैसे भी माँ को याद करता कोई भी गाना भावुक तो कर ही देता है।

अंकित अपनी आवाज़ का दर्द श्रोताओं तक पहुँचाने में सफल रहे हैं। मुखड़े के पहले बाँसुरी और अंतरों के बीच तार वाद्यों के बीच बजता सरोद गीत की गंभीरता को उभारता है। आज जैसा शोर गीतों में झलकता है उसे देखते हुए ऐसी संवेदनशीलता कानों को सुकून जरूर देती है।

तो आइए सुनते हैं अंकित को उन्हीं द्वारा संगीत निर्देशित इस गीत में।



धूप जब सताये
आँचल से ढक लेती हो
चोट जब भी आये
संग मेरे रो देती हो
तावीज़ जो मैं निकाल दूँ
परेशान हो जाती हो तुम
किसी की बुरी नज़र लग जायेगी
प्यार से बताती हो तुम
ओ माँ याद आती हो
ओ माँ याद आती हो
ओ माँ याद आती हो
कहना तेरा जो ना मानूँ
इक अजीब सा दर्द होता है
आँखें भले ही ना रोयें
पर दिल ये मेरा रोता है
मुझे भी फिकर तेरी है माँ
पर मैं कहता नहीं
तेरा यूँ चुप रहना माँ
अच्छा मुझे लगता नही
ओ माँ याद आती हो

 

वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

Saturday, December 28, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना Tum Hi Aana

साल के शानदार गीतों की फेरहिस्त में आज वो गीत जिससे पिछले गीत के उलट आप सब वाकिफ होंगे। जी हाँ ये गीत है फिल्म मरजावाँ बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना। हाँ जो बात आपको नहीं पता होगी वो ये कि इस मधुर गीत की संगीतकार पायल देव हैं जिनका मेरे शहर राँची से बेहद करीब का नाता रहा है। झारखंड के रामगढ़ से ताल्लुक रखने वाली पायल की पढ़ाई लिखाई राँची से हुई। पायल की गायिकी से मेरा परिचय उनके बाजीराव मस्तानी में गाए गीत अब तोहे जाने ना दूँगी से हुआ। बतौर संगीतकार इस साल उन्हें एक नई पारी शुरु करते देख मुझे बेहद खुशी हुई। जानना नहीं चाहेंगे कि ये गीत कैसे बना? :)


पायल ने गीत की धुन चार साल पहले ही बनाई थी और उसे उन्होंने अपनी आवाज़ में  रिकार्ड भी कर रखा था। ज़ुबीन और कुणाल से साथ संगीत की एक बैठक में काम किसी दूसरे गीत पर चल रहा था कि अचानक पायल ने अपनी धुन गुनगुनाई। धुन ज़ुबीन और गीतकार कुणाल वर्मा  को इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने उस पर तुरंत काम करना शुरु कर दिया। मिनटों में गीत लिख भी लिया गया और घने भर में ये बन कर तैयार भी हो गया। 

प्रेम या विरह गीतों के साथ सहूलियत ये होती है कि आप उन्हें बड़े मजे से किसी फिल्म की कहानी में जोड़ सकते हैं। मरजावाँ के इस गीत के साथ भी यही हुआ यानी गीत पहले बना और कहानी पीछे से आई। 

जुबीन एक बेहतरीन आवाज़ के मालिक हैं और उन्होंने इस गीत को भी पूरे दिल से निभाया है। मुखड़े में बजती पियानिका और अंतरों के बीच बाँसुरी और सारंगी की धुन भी मधुर है। संगीत निर्माण में आदित्य देव का काम बेहतरीन है। गीत का मुखड़ा मुझे जावेद अख्तर साहब की उस ग़ज़ल की याद दिला देता है जिसमें उन्होंने लिखा था

अबकि बार आना तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ अहसान जताने के लिए मत आना

उनके कहे में शिकायत थी और वहीं कुणाल के लिखे में एक कातर सा अनुरोध

बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना
इरादे फिर से जाने के नहीं लाना, तुम ही आना

तो आइए सुनते हैं ये गाना जिसे फिल्म में निभाया है सिद्धार्थ मल्होत्रा और तारा सुतारिया की जोड़ी ने 

तेरे जाने का ग़म और ना आने का ग़म
फिर ज़माने का ग़म क्या करें?
राह देखे नज़र, रात भर जाग कर
पर तेरी तो ख़बर ना मिले
बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना
इरादे फिर से जाने के नहीं लाना, तुम ही आना
मेरी दहलीज़ से होकर बहारें जब गुज़रती हैं
यहाँ क्या धूप , क्या सावन, हवाएँ भी बरसती हैं
हमें पूछो क्या होता है, बिना दिल के जिए जाना
बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना
कोई तो राह वो होगी, जो मेरे घर को आती है
करो पीछा सदाओं का, सुनो, क्या कहना चाहती है?
तुम आओगे मुझे मिलने, ख़बर ये भी तुम ही लाना
बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना

 

चिट्ठिये, एक मलाल और तुम ही आना के बाद कल बारी एक ऐसे गीत की जो शायद आपके लिए अनसुना ही होगा। तो आज के लिए यहीं इजाज़त। कल फिर मिलेंगे संगीतमाला एक ऐसे गीत से जो मेरी पसंदीदा सूची में 26 से 30 के बीच मँडराता रहा। :)

वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

Friday, December 27, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : इक मलाल है ऐसा Ek Malaal

वार्षिक संगीतमाला में चल रही है उन छः गीतों की बातें जो अंतिम 25 में स्थान बनाने में ज़रा सा के लिए रह गए। कल चिट्ठिये की चर्चा के बाद बारी है फिल्म मलाल के एक गीत की। संजय लीला भंसाली इस फिल्म के निर्माता होने के साथ साथ संगीत निर्देशक भी हैं।

संजय लीला भंसाली के संगीत के साथ  दिक्कत ये है कि कई बार उनके  गानों में संगीत का परिवेश एक सा होता है और उन्हें सुनते वक़्त Deja Vu का अहसास होता है पर दूसरा पक्ष ये भी है कि इसके बावज़ूद उनके गाने सुनने में अच्छे लगते हैं। ऐसे तो महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में रची बसी इस फिल्म के कई गीतों में मराठी तड़का है पर कत्थई कत्थई और इक मलाल विशुद्ध हिंदी गीत हैं। 

इसे गाया है शैल हाडा ने शैल संजय लीला भंसाली की फिल्मों से एक दशक से भी ज्यादा जुड़े हुए हैं। साँवरिया फिल्म का शीर्षक गीत हो या हाल फिलहाल में पद्मावत का खलबली शैल संजय की फिल्मों का अभिन्न हिस्सा रहें हैं। व्यक्तिगत तौर पर मुझे गुज़ारिश का उनका गीत तेरा जिक्र है सबसे पसंद है।





इक मलाल एक बेहद छोटा सा गीत है जिसे प्रशांत इंगोले की गहरे भाव ली हुई शब्द रचना और शैल हाडा की खूबसूरत गायिकी मन में बैठने को मजबूर कर देती है। ज़िंदगी में अचानक अपने प्रिय के चले जाने के बाद हमें अपनी गलतियाँ अपना दोष काटने दौड़ता है। साझी ख्वाहिशें का दुखंद अंत मन में कई सवाल खड़े कर देता है। शायद अगर मैंने ऐसा किया होता तो उसकी ये परिणिति नहीं हुई होती ऐसे ख्यालों या यूँ कहें मलाल बार बार मन को मथते हैं। प्रशांत इन्हीं भावों को गीत में कुछ यूँ प्रकट करते हैं।


इक मलाल है ऐसा

इक मलाल है

इक मलाल है ऐसा

इक मलाल है

बुन रहा है रंजिशों का

है ये जाल कैसा

इक मलाल है ऐसा

इक मलाल है

सोच की दीवारों पे
तारीख लिख के चला है
साँसों की मीनारों पे
ख़्वाहिश रख के चला है
रह गया है गर्दिशों में
ये सवाल कैसा
इक मलाल है ऐसा...




एक छोटी सी फिल्म का ये गाना आपमें से बहुतों के लिए अनसुना ही होगा। तो आइए सुनते हैं इस गीत कोमलाल का ये गीत नवोदित कलाकारों मीज़ान जाफरी और शरमिन पर फिल्माया गया है।


वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

Thursday, December 26, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : कितने बेचैन होते होंगे, छोटे छोटे नैन रोते होंगे Chitthiye

वार्षिक संगीतमाला की शुरुआत तो अगले साल पहली जनवरी से होगी पर उसके पहले जिक्र होगा बारी बारी से उन छः गानों का जो वार्षिक संगीतमाला के बेहद करीब आकर बाहर रह गए। भले ही ये संगीतमाला में नहीं हों पर इन्होंने मेरी गीतमाला में लगभग उतने ही अंक प्राप्त किए हैं जितने कि अंतिम के कुछ गीतों ने। अब तक आप सबने जो पसंद बताई है उसका कोई गीत इस छः गीतों में है तो आप उसे भी अपने स्कोर में शामिल कर सकते हैं।


आजकल हिंदी फिल्मी गीतों में पंजाबी बोलों का मिश्रण इस क़दर बढ़ गया है कि कई बार तो इन्हें सुनकर कोफ़्त सी होने लगती है। इसका एक कारण ये है कि जितने भी डांस या रैप नंबर हैं उनके मशहूर गायक पंजाब से आते हैं और आजकल की फिल्मों में इन्हीं गीतों की तूती बोल रही है। ऐसे गीतों में बेब्बी, सोणी, कुड़ी, रब्बा जैसे तमाम रटे रटाए पंजाबी शब्दों का इस तरह समावेश ऐसे होता है जैसे हर सब्जी में धनिया डलता हो।

इसके बावज़ूद कुछ गीत अपनी संवेदनशीलता से एक अलग पहचान छोड़ जाते हैं। ऐसा ही एक गीत संगीतमाला का हिस्सा भी है जबकि दूसरे को आज आपके सामने ले के आ रहा हूँ। इसे गाया है पंजाब के एक चर्चित सूफी गायक कँवर ग्रेवाल ने। कँवर ग्रेवाल संगीत के पुराने विद्यार्थी रहे हैं और उनकी गहरी आवाज़ इस गीत में पिता और बेटी के रिश्तों में आई खटास की पीड़ा सहज अभिव्यक्त कर देती है। रोचक कोहली का गिटार और तबला गीत में बहते दर्द में मरहम लगाने का काम करता है। गुरप्रीत सैनी के बोल तो सामान्य हैं पर गीत के एक अंतरे की ये पंक्तियाँ खास तौर पर असर डालती हैं।

कितने बेचैन होते होंगे, छोटे छोटे नैन रोते होंगे 
सहमे सहमे जागते अकेले, तन्हा सारी रात सोते होंगे 
काश कि तेरे नाल बह के, रो लैंदा तेरे दुख ले के
बोल तेरे ख्वाबाँ दी, डोर कित्थे टूटिए
जिंद मेरी रूठिये... चिट्ठिए नि चिट्ठिए

इस फिल्म में पिता और पुत्री का किरदार निभाया है वास्तविक पिता पुत्री अनिल कपूर और सोनम कपूर ने।

 

आपमें से बहुतों की पसंद में ये गीत था और मुझे भी कँवर की गायिकी भा गयी थी पर पच्चीस गीतों की बाध्यता की वज़ह से इसे अंतिम पच्चीस में स्थान नहीं मिल पाया। बहरहाल इस गीत के साथ आपमें से बहुतों का खाता खुल चुका होगा जो एक शाम मेरे नाम की इस प्रतियोगिता का हिस्सा बने हैं। अगर आपने ये गीत सुन लिया है तो इस गीतमाला की अगली पेशकश सुनना ना भूलें जिसे फिल्म मलाल से लिया गया है।

वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

Wednesday, December 11, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 : हिंदी फिल्मी गीतों में क्या रही आपकी इस साल की पसंद ? Top 25 Bollywood Songs of 2019

एक  शाम मेरे नाम पर वक़्त आ गया है इस साल की वार्षिक संगीतमाला का जिसमें चुने जाएँगे हर साल की तरह इस साल रिलीज़ हुई फिल्मों के मेरे पच्चीस पसंदीदा गीत। सोलह साल से चल रही इस संगीतमाला की शुरुआत के बारे में पिछले कई दिनों से श्रोताओं के सवाल आने शुरु हो गए हैं कि इस बार की संगीतमाला कब शुरु होगी। संगीतमाला तो हर नए साल में एक जनवरी से शुरु होती है और इस साल भी होगी।

इस साल रिलीज़ हुई सारी फिल्मों के गीतों को सुन चुकने के बाद मैंने तो लगभग अपनी राय कायम कर ली है और उसे यहाँ हर साल की तरह से सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत भी करूँगा पिछले साल की तरह इस बार भी मुझे उत्सुकता है ये जानने की कि इस साल आपने किन गीतों को पसंद किया?

तो बताइए मुझे इस साल के फिल्मी गीतों में अपनी पसंद । आप अधिकतम पच्चीस गीतों की पसंद बता सकते हैं। जिस किसी की पसंद मुझसे सबसे ज्यादा मिलेगी उसे मिलेगा एक शाम मेरे नाम की तरफ से एक छोटा सा तोहफा...। अभी से लेकर 25 दिसंबर तक आप अपनी पसंद मुझे बता सकते हैं इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में। हर एक गीत के बारे में बताते हुए उसका मुखड़ा और फिल्म का नाम अवश्य लिखें। याद रहे गीत 2019  में रिलीज़ हुई फिल्मों से ही होने चाहिए। :)

इस साल यानी  2019  में करीब एक सौ के करीब  फिल्में रिलीज हुई जिनकी पूरी सूची आप यहाँ देख सकते हैं। 



वर्ष 2018 की संगीतमाला के सितारों की चर्चा अलग से यहाँ पर हुई थी। नए पाठकों को जिन्हें एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमालाओं के बारे में जानकारी नहीं है वो पिछली संगीतमालाओं से यहाँ गुजर सकते हैं..

Sunday, November 17, 2019

नाजिया हसन : जिसने अपनी छोटी सी ज़िदगी में कमाया बड़ा सा नाम Nazia Hassan (1965-2000)

अस्सी के दशक में एक फिल्म आई थी कुर्बानी। फिरोज खान की ये फिल्म जितनी चली थी उससे भी ज्यादा इसके गाने मशहूर हुए थे। एक ओर तो लैला ओ लैला में अमजद खान की चुलबुली कुबुक कुबुक ने पर्दे पर लोगों का मन मोह लिया था तो दूसरी ओर हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे..मरने वाला कोई ज़िंदगी चाहता हो जैसे की संजीदगी भी श्रोताओं को रास आई थी।


इसी फिल्म में एक गाना था आप जैसा कोई मेरी ज़िंदगी में आए तो बात बन जाए था.. जिसे गाकर किशोर गायिका नाजिया हसन शोहरत की बुलंदियों में जा पहुँची थी। नाजिया की सफलता ने भारत में इंडी पॉप के नए रास्ते भी खोल दिए थे। जानते हैं उस वक़्त नाजिया की उम्र क्या थी? मात्र पन्द्रह साल। उसी साल उन्होंने फिल्मफेयर एवार्ड भी जीता।  इतनी कम उम्र में किसी गायिका का ये एवार्ड जीतना एक रिकार्ड ही रहा होगा। 

नाजिया तब कितनी मासूम थीं उसका अंदाजा आप तबस्सुम के साथ उनके इस प्यारे से साक्षात्कार से लगा सकते हैं। दरअसल उनकी इस मासूमियत और साफगोई को देख कर ही आज उन पर लिखने की इच्छा हुई।




अब नाजिया पन्द्रह की थीं तो हमारी पीढ़ी तो और भी छोटी थी। अगले कुछ सालों में उनके कई और कैसेट और फिल्मी एलबम मेरे घर में दाखिल हुए और पहली बार मैंने उन्हीं के ज़रिए डिस्को पॉप संगीत क्या होता है ये जाना। वो संगीत अच्छा था या बुरा इस पर तो टिप्पणी नहीं करूँगा पर इतना जरूर कहूँगा कि वो हमारे लिए नया जरूर था। स्कूल से आकर कई दिन मैं भी उनके आप जैसा कोई, बूम बूम और बोलो बोलो क्या है मेरा नाम स्टार जैसे गानों पर थिरका जरूर था। अपने भाई जोहेब हसन के साथ किया उनका पॉप एल्बम डिस्को दीवाने उस दशक के सबसे ज्यादा बिकने वाले एलबमों में एक रहा।



अस्सी के दशक में जिस तेजी से वो चमकीं, नब्बे के दशक में इतनी ही तेजी से ही संगीत परिदृश्य से गायब भी हो गयीं और उनकी जगह ऐलीशा चिनॉय और शेरोन प्रभाकर जैसी गायिकाओं ने ले लीं।

उस युग में इंटरनेट भी नहीं था और मैंने कभी जानने की कोशिश भी नही की कि नब्बे के दशक में उनके साथ क्या हुआ। सच तो ये है कि उनकी आवाज़ और उनके कुछ गीतों के आलावा मेरी यादों में कुछ भी नहीं था। यहाँ तक की उनकी तस्वीर भी नहीं। सालों बाद जब उनके छोटे से जीवन की पूरी दास्तान सुनने को मिली तो मन दुखी हो गया। बताइए भगवान ने जिससे इतनी कम उम्र में लोकप्रियता के सिंहासन पर बिठाया उसे मात्र 35 साल की उम्र में हमसे छीन भी लिया।

जीवन के अंतिम कुछ साल उनके बेहद तकलीफ़ में बीते। नब्बे के आस पास उन्हें कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी ने अपनी गिरफ्त में ले लिया।  1995 में माँ बाप के कहने से उन्होंने शादी की जो उनकी ज़िंदगी का एक गलत निर्णय साबित हुआ। कितना कष्टकर था उनका दाम्पत्य जीवन इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरने के ठीक दस दिन पहले उन्होंने अपने शौहर को तलाक दिया।

उनके रिश्तेदार बताते हैं कि वो अपना ग़म अपने तक सीमित रखने वालों में थीं। बीमारी और पारिवारिक कलह के बीच अपने सफल एलबमों से मिलने वाली रायल्टी का बड़ा हिस्सा उन्होंने सामाजिक कार्यों के लिए दान किया। उनके गानों में एक मस्ती एक उमंग थी जिसे देख कर शायद ही कोई उनके निजी जीवन की इस उदासी को पढ़ पाता।

आइए आज आपको सुनाते हैं उनके फिल्म स्टार के लिए गाया उनका ये गीत जिसे सुन कर आज भी लोग झूम उठते हैं।

Wednesday, October 23, 2019

एक सुरीली शाम स्निति के नाम ! Musical evening with Sniti Mishra

नौ साल पहले ओडिशा के छोटे से शहर बलांगिर से आई स्निति को मैंने Sa Re Ga Ma Singing Superstars में सुना था तो सूफी के रंगों में रँगी उस अलग सी आवाज़ को सुनकर प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका था। उसी वक्त एक शाम मेरे नाम पर उनके बारे में यहाँ लिखा भी था।


क्या पता था कि नौ साल बाद ऊपरवाला मुझे मौका देगा अपने शहर राँची में उसी प्रतिभाशाली गायिका की मेजबानी करने का। मौका था एक तकनीकी सेमिनार के साथ होने वाले संगीत के कार्यक्रम का, जिसमें मैंने उन्हें इस साल आमंत्रित किया था।

ऐसे सजी थी राँची में स्निति की महफिल
दो दिन हमारे साथ स्निति रहीं और उन दो दिनों में प्रैक्टिस से लेकर शो तक स्निति ने नए पुराने गीतों और ग़ज़लों का जो गुलदस्ता हमें सुनाया उसकी मिठास अब तक कानों में गूँज रही है। स्निति की आवाज़ को मंच पर श्रोताओं से रूबरू कराने के पहले मैंने कहा कि अगर आप पूछें कि उनकी आवाज़ में मुझे क्या विशिष्ट लगता है तो मैं यही कहूँगा कि उनकी आवाज़ में सूफ़ी संगीत सा ठहराव है, ग़ज़लों सी नजाकत है, पुराने हिंदी फिल्मी गानों सी मिठास है और आज के फ्यूजन सा नयापन है।

रिहर्सल में स्निति के साथ बैठना संगीत की वैतरणी में डुबकी लगाने जैसा था।

उनकी आवाज़ की इसी विशिष्टता को श्रोताओं तक पहुंचाने के लिए हमने ऐसे गीतों को चुना जिसमें उनके हुनर का हर रंग छलके।  अभी मुझ में कहीं.., मोरा सैयाँ मोसे बोले ना.., सजदा.., मितवा.. इन आंखों की मस्ती के.., जो तुम याद आए बहुत याद आए.., ज़रा सी आहट होती है.., निगाहें मिलाने को जी चाहता है..., घूमर.., लागा चुनरी में दाग..., यारा सिली सिली..., फूलगेंदवा ना मार..., आज जाने की ज़िद ना करो के माध्यम से उन्होंने संगीत के हर मूड को अपनी गायिकी से छुआ और ऐसा छुआ कि सारे संगीतप्रेमी झूम उठे।

कार्यक्रम शुरु होने के ठीक पहले मैं स्निति के साथ मंच पर
स्निति की कोशिश रहती है कि वो हर गीत में कुछ improvisation करें ताकि सुनने वाले के लिए वो अनुभव विशिष्ट हो जाए और यही हुआ भी। अधिकांश लोगों का ये मानना था कि इन कार्यक्रमों में गाने तो पहले भी सुनते थे पर विशुद्ध संगीत क्या होता है उसका स्वाद इस बार ही चखा।

प्रैक्टिस और शो के बीच के समय में उनसे सारेगामापा के पहले और बाद की उनकी सांगीतिक यात्रा पर ढेर सारी बातें हुईं। तो चलिए जानते हैं स्निति के इस सफ़र के बारे में.. 
राँची के कार्यक्रम में अपनी गायिकी में मगन स्निति
स्निति के माता पिता शास्त्रीय संगीत के प्रेमी रहे हैं। घर में शास्त्रीय संगीत खूब सुना जाता और बच्चों को सुनाया जाता। नब्बे के उस दशक में अनु कपूर की मेरी आवाज़ सुनो और सोनू निगम के सारेगामा जैसे कार्यक्रम के तैयार गायकों को देख पिता भी आश्वस्त हो चले थे कि बिना अच्छे प्रशिक्षण के वहाँ स्थान बना पाना मुश्किल है। स्निति का बालमन  किशोर सुनिधि चौहान और सोनू निगम की गायिकी से बहुत प्रभावित हो चुका था पर उनके पिताजी चाहते थे कि उनकी शिक्षा किसी काबिल शिक्षक से शुरु की जाए ताकि शास्त्रीय संगीत की जो आरंभिक नींव पड़े वो पुख्ता हो। अब बलांगिर में ऐसे शिक्षक कहाँ मिलते? वो तो स्निति का सौभाग्य था कि भुवनेश्वर से तभी स्थानांतरित हो कर शास्त्रीय संगीत के शिक्षक रघुनाथ साहू बलांगिर पधारे और स्निति ने उनसे सीखना शुरु किया। तब बारह साल की स्निति सातवीं कक्षा की छात्रा थीं।


स्निति की पढ़ाई और शास्त्रीय संगीत की शिक्षा चलती रही। इसी बीच उन्होंने सारेगामापा के ऑडिशन में भाग लेना भी शुरु कर दिया। स्निति के गुरु उन्हें शास्त्रीय संगीत के इतर गीत सुनने तक के लिए मना करते जबकि सारेगामापा के मेंटर्स को हर प्रकृति के गीत गाने वाले  हरफनमौला गायकों की तलाश रहती। स्निति अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलती रहीं। नतीजा ये हुआ कि वो सारेगामापा की आखिरी बाधा पार करने के पहले ही दो बार छँट गयीं।


स्निति थोड़ी निराश तो हुईं पर उन्होंने उससे उबरने के लिए अपनी MBA की पढ़ाई पर ध्यान देना शुरु किया जिसमें 2010 में उन्होंने दाखिला लिया था। उसी साल सारेगामापा ने अपने पैटर्न में बदलाव किया। सिंगिंग सुपरस्टार्स वाली शृंखला में नए पुराने गीतों के आलावा शास्त्रीय संगीत और ग़ज़लों के लिए अलग राउंड रखे गए थे। इसलिए मेंटर्स का ध्यान इस बार ऐसे गायकों पर था जो ऐसी विधाओं में भी पारंगत हों। अपनी माँ के उत्साहित करने पर उन्होंने फिर ऑडिशन में अपनी किस्मत आजमाई। स्निति की गायिकी इस बार के कार्यक्रम के बिल्कुल अनुकूल थी। सारेगामापाा में स्निति की आवाज़ का जादू सर चढ़कर बोला। वहाँ से लौट कर  उन्होंने अपना MBA पूरा किया और फिर  मुंबई में शिफ्ट हो गयीं।



सारेगामापा या इसके जैसे अन्य रियालिटी शो भले ही आपको कुछ समय की प्रसिद्धि दिला देते हों पर अपने पाँव ज़माने के लिए असली मेहनत उसके बाद शुरु होती है। जहाँ तक स्निति का सवाल है तो मुंबई जाने से पहले ही उनके मन में ये स्पष्टता थी कि उन्हें शास्त्रीय संगीत के इर्द गिर्द ही अपनी गायिकी को आगे बढ़ाना है


स्निति बताती हैं कि वो एक बेहद वरीय शास्त्रीय वादक से अपने मार्गदर्शन के लिए मिलीं। उन्होंने स्निति से कहा कि देखो मेरा दौर कुछ और था। अगर आज तुम्हें इस विधा में बढ़ना है तो शास्त्रीय संगीत के साथ साथ फ्यूजन का भी सहारा लेना पड़ेगा। दरअसल खालिस शास्त्रीय गायिकी में अपना मुकाम बनाने के लिए आज भी किसी घराने की विरासत बहुत काम करती है। जिसके ऊपर घरानों की छत्रछाया नहीं है उसके लिए अपने को शास्त्रीय गायिकी में स्थापित करना आसान नहीं। 

पिछले कुछ सालों में स्निति ने सूफी संगीत व सुगम शास्त्रीय संगीत के आलावा नए पुराने हिंदी फिल्मी गानों और चुनिंदा ग़ज़लों को भी अपने अलग अंदाज़ में आवाज़ें दी हैं। उन्होंने तमिल व कश्मीरी गीतों को भी बखूबी निभाया है और भविष्य में आप उनके गाए बांग्ला गीत को भी सुन पाएँगे।

स्निति की आवाज़ में एक ठुमरी
हिंदी फिल्मी गीतों को गाने से उन्हें परहेज़ नहीं बशर्ते कि उन्हें जो मौके मिलें वो उनकी प्रतिभा से न्याय कर सकें। स्निति ने अपने लिए एक उसूल बना रखा है कि वो डमी गीत नहीं गाएँगी। यही सोच उनकी आइटम नंबर्स के लिए भी है। उन्होंने अब तक जो भी प्रोजेक्ट लिए हैं उसमें इस बात का ध्यान रखा है कि वो उनकी आवाज़ के अनुरूप हों।

स्निति मानती हैं कि किसी भी गायक को  आगे बढ़ने के लिए  गीतों के कवर वर्सन के साथ साथ अपना  रचा हुए मूल संगीत भी बनाना जरूरी है जिसे आज दुनिया Independent Music  के नाम से जानती है।


जां निसार लोन के साथ स्निति का गाया एक कश्मीरी गीत

स्निति ऐसा सोचती हैं कि जिस तेजी से डिजिटल काटेंट आजकल बनाया और इंटरनेट पर उपभोग किया जा रहा है वो कुछ दिनों में इसे फिल्मों और टीवी के समकक्ष या उससे भी सशक्त माध्यम बना देगा। इसलिए अभी उनका ध्यान इसी माध्यम पर अपनी नई प्रस्तुतियाँ देने का है। आने वाले सालों के लिए उनकी योजना है कि ना केवल वो गाएँ बल्कि अपने गीतों को कंपोज भी करें। एक सपना उन्होंने और भी पाल रखा है और वो है एक प्रोडक्शन हाउस बनाने का जिसमें वे नए कलाकारों को ऐसा मंच प्रदान कर सकें जिस पर वो अपनी प्रतिभा दिखला सकें।

स्निति जितनी प्रतिभाशाली गायिका हैं उतने ही सहज और विनम्र व्यक्तित्व की स्वामिनी भी हैं। अपने कार्य के प्रति उनका समर्पण देखते ही बनता है। मुझे पूरा विश्वास है कि उन्होंने अपने लिए जो संगीत की राह तय की है उस पर उनकी ये सुरीली यात्रा चलती रहेगी।
 

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स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

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