Tuesday, December 31, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 : नया साल मनाइए इन पाँच झुमाने वाले गीतों के साथ Bollywood Top 5 Dance Numbers of 2019

वार्षिक संगीतमाला में साल के नायाब गीतों की फेरहिस्त तो कल से चलती ही रहेगी। पर साल के इस आख़िरी दिन एक ब्रेक लेना तो बनता है ना। नए साल के आने की मस्ती में थोड़ा बहुत तो आप सब भी थिरकेंगे।  तो चलिए आज मिलवाते हैं उन पाँच गीतों से जिन्होंने इस साल आपमें से बहुतों को थिरकाया होगा। ये ना कहिएगा कि इनके बोल कैसे हैं आज तो जी सिर्फ बीट्स देखनी है।



अब हमारे रैप मास्टर बादशाह गीत बनाएँगे तो नायिका का विश्लेषण तो कुछ यूँ ही होगा
ओ, Baby plan बनाती है..
पर कभी ना time पे आती है..
But जब नैन मिलाती है, 
तो traffic jam कराती है.....
.............
ना बंब है, ना पटाखा है 
ये लड़की पूरी दीवाली है,

अब इस बंब गाने को सुनने के लिए पहले थोड़ी साँस तो ले लीजिए

 

अब आपने क्या सोचा की डांस सिर्फ शहर के गबरू जवान और बेबी बेबी कहने वाली कन्याओं को आता है। नहीं जी अपनी गाँव की छोरियाँ कम थोड़े हैं। ये भी बेबी बेबी गा सक्के हैं पर इनका निशाना कहीं और है। गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में कैसे गाँव का छोटा सा कमरा डांस फ्लोर बन जावे है ये देखो बस आप

इत्ती क्या fight है, अपनी तो night है

क्या wrong-right है, सब भूल जा

हो क्या जो कल्ली हो, मस्ती में टल्ली हो

थोड़ी सी झल्ली हो, सब भूल जा

अरे सोचो नहीं, अरे रोको नहीं

चाहे दुनिया कहे तुमको बोल्ड, बोल्ड, बोल्ड
ओ baby gold, gold, gold...


गाँव शहर के डांस तो देख लिए आपने पर वो पुरानी हवेली में नाचवाली का डांस तो नहीं देखा ना। दिखा देंगे दिखा देंगे पर उसके लिए आपको ऐरा गैरा नत्थू खैरा बनना पड़ेगा और नाचवालियों का चक्कर लगाएँगे तो थोड़े कलंकित भी हो जाएँगे हुजूर

रात लेके आयी है जश्न तारी, आए हाए हाए
ग़म गलत करने की है अपनी बारी, आए हाए हाए
आज नाचें गाएं ज़रा इश्क़ विश्क़ फरमाएं
और जान जलाने वाली भाड़ में जाए सारी दुनियादारी आए हाए हाए


अब सैयाँ को आप ऍरा गैरा नत्थू खैरा बनाओगे तो वो पत्नी छोड़कर वो कि तलाश में निकलेगा। पर यहाँ तो देख रहा हूँ धीमे धीमे ही सही कार्ति आर्यन जनाब दो नावों में एक साथ सवारी कर रहे हैं। हुस्न की परियों के साथ अपना scene set करने का उनका अंदाज़ तो देखिए


तेरा हुस्न तो सबसे आला है
मुझे पागल करने वाला है

आज नशा तेरा करदे

तेरा आशिक मरने वाला है

सच-सच बोल, हकीकत या ये dream है?
धीमे-धीमे, धीमे-धीमे
धीमे-धीमे, धीमे-धीमे
Set मेरा scene है, scene है, scene है

और जनाब आज की महफिल का अंजाम एक ऐसे गीत से जिसके गीत के बोलों को याद करने की जरूरत नहीं। बस एक शब्द "बाला" का बार बार जाप कीजिए और और नाचते समय भाव भंगिमा ये याद रखते हुए बनाइए कि हमारे पूर्वज बंदर थे। तो देर किस बात की चलिए शुरु करते हैं बाला बाला बाला बाला.. बाला बाला बाला बाला..ये साल भी चला गया साला 😃😃


 

तो हुज़ूर खूब नाच गा कर नए साल का स्वागत कीजिए। कल से फिर शुरु होगी वार्षिक संगीतमाला की हिट परेड। एक शाम मेरे नाम की तरफ़ से आप सबको नए साल की हार्दिक शुभकामनाएँ !

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

26 इक मलाल है ऐसा Ek Malaal
27. बहुत आई गयी यादें Tum Hi Aana
28. चिट्ठिये Chitthiye
29. बोलो कब प्रतिकार करोगे Bolo Kab Pratikar Karoge
30. नुस्खा तराना Nuskha Tarana
30. ओ माँ याद आती हो O Maan Yaad Aati Ho

Monday, December 30, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : ढूँढ रहा है पक्षी को दाना Nuskha Tarana

कविता सेठ की आवाज़ आपको कितनी पसंद है? वैसे तो उन्होंने हिंदी फिल्मों में गिनती के गाने ही गाए हैं पर वेक अप सिड के इकतारा की गूँज आज तक दिल में रहती हैं। काकटेल का उनका गाया तु्म्हीं हो बंधु भी बेहद सफल गीत रहा था। उनकी आवाज़ में एक रुहानियत है जो आपके मूड को एकदम से बदल देती  है। 

इस साल उन्होंने एक गाना गाया है फिल्म गॉन केश (Gone Kesh)  के लिए । पहली बार जब मैंने ये गाना सुना तो इसके बोल कुछ खास समझ नहीं आए पर कविता जी की गायिकी का असर ऐसा था कि गाना रिपीट मोड में सुनता रहा। इसी दौरान फिल्म की कहानी से रूबरू हुआ और फिर गीत के बोलों का रहस्य खुलता चला गया।


जैसा कि नाम है गॉन केश एक ऐसी किशोरी की कहानी है जिसके बाल तेजी से झड़ रहे हैं। ये साल की पहली फिल्म थी जिसने गिरते बालों को अपना विषय बनाया। उसके बाद तो ख़ैर उजड़ा चमन और बाला बनी ही। बालों को लेकर लड़कियाँ कितनी सजग होती हैं ये तो हम सभी जानते हैं। समाज ने भी ऐसी कंडिशनिंग कर रखी है कि उनका तेजी से झड़ना किसी भी सामान्य व्यक्ति और खासकर लड़कियों को मानसिक अवसाद में डाल सकता है। ऐसी हालत में बालों को झड़ने से रोकने के लिए तथाकथित शुभचिंतकों द्वारा सुझाए  नुस्खों की बाढ़ आ जाती है और शायद इसीलिए नवोदित संगीतकार कनीश शर्मा ने गीतकार मजाल के साथ जो गीत बनाया उसका नाम ही रख दिया "नुस्खा तराना"।

मैंने पहली बार मजाल के लिखे गीतों को सुना है और बंदे की प्रतिभा का कायल हो गया हूँ। ऐसे कठिन विषय पर इतना खूबसूरत गाना लिखने के लिए वे शाबासी का हक़दार है। गिरते बालों के बीच उदास निराश लड़की की कल्पना उन्होंने कुछ इन शब्दों में की है 

इक काले रेशम के पिंजरे में जिंदा थी, शर्मिंदा थी शर्मिंदा थी
चुभती दवाओं दुवाओं से, कहीं बड़ी दूर हूँ छुपी
बड़ी देर हो चुकी, ढूँढ रहा है पक्षी को दाना
मन में चला के ये नुस्खा तराना

मजाल ने गिरते बालों की उपमा पक्षी से और नुस्खों के लिए दाने का इस्तेमाल कर गीत का मुखड़ा रचा है कि ढूँढ रहा है पक्षी को दाना...मन में चला के ये नुस्खा तराना। :)

इस गीत को संगीत से सँवारने वाले कनिश शर्मा  जम्मू से ताल्लुक रखते हैं। इस बोल प्रधान गीत के पीछे गिटार की तरंगों की  झनझनाहट या कभी वॉयलिन का स्पर्श मन को सुकून देता है। तो आइए सुनते हैं ये पूरा गीत

 

ज़िंदगी भर ज़िंदगी से हारी हारी
ख्वाबों ने भी माफी मांगी बारी बारी
बेजुबानों सी इन दुकानों सी भरती रही
आँधियों से पर चिंगारी कभी डरती नहीं
आज भी ढूँढ रहा है पक्षी को दाना
मन में चला के ये नुस्खा तराना
जिंदगी को घुँघरुओं से लगाए चल तू

इक काले रेशम के पिंजरे में जिंदा थी
शर्मिंदा थी शर्मिंदा थी
चुभती दवाओं दुवाओं से कहीं 
बड़ी दूर हूँ छुपी
बड़ी देर हो चुकी
ढूँढ रहा है पक्षी को दाना...
मन में चला के ये नुस्खा तराना
जिंदगी को अपनी धुन पे नचाए चल तू

मसान वाली श्वेता त्रिपाठी तो याद हैं ना आपको। गॉन केश में भी इस किशोरी की भूमिका में यही प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं। मुझे तो इस फिल्म के गीतों को सुनने के बाद इसे देखने की इच्छा भी प्रबल हो गयी है। फिल्म में शायद गीत के दूसरे अंतरे का इस्तेमाल नहीं हुआ है।



वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Sunday, December 29, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : बोलो कब प्रतिकार करोगे? Bolo Kab Pratikar Karoge ?

वार्षिक संगीतमाला में पिछली पोस्ट थी माँ को याद करते एक संवेदनशील गीत की। उसके पहले चिट्ठिये, इक मलाल और तुम ही आना जैसे गीतों से आप मिल ही चुके हैं। प्रेम, वात्सल्य  और विरह के रंगों के बाद अब बारी एक ऐसे गीत की जिसके शब्दों में इतनी ताकत है कि वो आपके शरीर में उर्जा का संचार कर दे।

प्रसून जोशी एक ऐसे गीतकार है जिन्होंने हिंदी कविता का परचम फिल्मी गीतों में बड़ी शान से फहरा रखा है। तारे ज़मीं से लेकर फिर मिलेंगे और लंदन ड्रीम्स से लेकर भाग मिल्खा भाग तक जिस खूबसूरती से उन्होंने ठेठ हिंदी शब्दों का प्रयोग किया है वो अस्सी के दशक से आज तक शायद ही किसी गीतकार के गीतों में मिलेगा। फिर मिलेंगे  के गीत के लिए जब वो कहते हैं

झील एक आदत है तुझमें ही तो रहती है और नदी शरारत है, तेरे संग बहती है
उतार ग़म के मोजे जमीं को गुनगुनाने दे कंकरों को तलवों में, गुदगुदी मचाने दे
खुल के मुस्कुरा ले तू, दर्द को शर्माने दे...


तो दिल करता है कि उनको गले लगा लूँ। इतनी प्यारी कविता गीतों में कहाँ मिुलती है। लंदन ड्रीम्स में उनका चटपटा सा गीत था मन को अति भावे और मिसाल के तौर पर ये अंतरा देखिए कि कैसे उन्होंने इसमें संकेत, निकट, क्षण जैसे ठेठ हिंदी शब्दों का इस्तेमाल कितनी सहजता से कर दिया।

संकेत किया प्रियतम ने आदेश दिया धड़कन ने
सब वार दिया फिर हमने, हुआ सफल सफल जीवन
अधरों से वो मुस्काई काया से वो सकुचाई
फिर थोड़ा निकट वो आई था कैसा अद्भुत क्षण

मैं आज ये चर्चा इसलिए छेड़ रहा हूँ क्यूंकि इस साल भी मणिकर्णिका के लिए प्रसून ने एक गीत में  अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए जोश भरते हुए ऐसे अंतरे लिखे हैं जिसे पढ़ कर  वाह वाह निकलती है।  फिल्म की कहानी से पनपा ये परिस्थिजन्य गीत इस संगीतमाला का हिस्सा है तो वो प्रसून के इन ओजमयी बोलों के लिए। उनकी लिखी इन पंक्तियों पर गौर फरमाइए

अग्नि वृद्ध होती जाती है, यौवन निर्झर छूट रहा है
प्रत्यंचा भर्रायी सी है, धनुष तुम्हारा टूट रहा है
कब तुम सच स्वीकार करोगे, बोलो, बोलो कब प्रतिकार करोगे?

गीत का दूसरा अंतरा भी उतना ही प्रभावी है

कम्पन है वीणा के स्वर में, याचक सारे छन्द हो रहे
रीढ़ गर्व खोती जाती है, निर्णय सारे मंद हो रहे
क्या अब हाहाकार करोगे?,बोलो, बोलो कब प्रतिकार करोगे?

प्रसून अपने गीतों में हिदी कविता की मशाल यूँ ही जलाए रहें आगे भी उनसे ऐसी आशा है। तो आइए सुनते हैं सुखविंदर और शंकर महादेवन के सम्मिलित स्वर में इस गीत को। इस फिल्म का संगीत दिया है शंकर अहसान और लॉय की तिकड़ी ने।


 

प्रथम पच्चीस के आस पास रहने वाले इन छः गीतों की कड़ियों में आख़िरी कड़ी होगी ऐसे गीत की जिसके बोल आप तभी समझ पाएँगे अगर फिल्म में नायिका की समस्या का आपको पहले से भान हो।

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

26 इक मलाल है ऐसा Ek Malaal
27. बहुत आई गयी यादें Tum Hi Aana
28. चिट्ठिये Chitthiye
29. बोलो कब प्रतिकार करोगे Bolo Kab Pratikar Karoge
30. नुस्खा तराना Nuskha Tarana
30. ओ माँ याद आती हो O Maan Yaad Aati Ho

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : ओ माँ याद आती हो O Maa from RAW

सुन रहा है ना तू और तू है कि नहीं जैसे गीतों से युवाओं के दिल में स्थान बनाने वाले अंकित तिवारी पिछले तीन चार सालों से बतौर गायक उतना प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे हैं। इसकी एक वज़ह ये भी रही कि उन्होंने ज्यादातर रूमानी गीतों तक अपनी आवाज़ को सीमित रखा और उनकी धुनों की रंगत भी बहुत कुछ एक जैसी रही। इस साल उनके तीन एकल गीतों में सबसे जानदार नग्मा रहा फिल्म रोमियो अकबर वाल्टर का जहाँ वो अपनी पहचान से अलग किस्म का गीत गाते सुनाई दिए।  

माँ को याद करते हुए इस गीत को सुनकर मेरे ज़हन में सबसे पहले शंकर महादेवन का तारे ज़मीं के लिए गाया हुआ माँ मेरी माँ याद आ गया।


अंकित तिवारी  और गीतकार प्रिंस दुबे की जोड़ी इस गीत को उस ऊँचाई तक तो नहीं ले जाती पर इतना जरूर है कि गीत खत्म होते होते आँखों के कोर नम जरूर हो जाते हैं। वैसे भी माँ को याद करता कोई भी गाना भावुक तो कर ही देता है।

अंकित अपनी आवाज़ का दर्द श्रोताओं तक पहुँचाने में सफल रहे हैं। मुखड़े के पहले बाँसुरी और अंतरों के बीच तार वाद्यों के बीच बजता सरोद गीत की गंभीरता को उभारता है। आज जैसा शोर गीतों में झलकता है उसे देखते हुए ऐसी संवेदनशीलता कानों को सुकून जरूर देती है।

तो आइए सुनते हैं अंकित को उन्हीं द्वारा संगीत निर्देशित इस गीत में।



धूप जब सताये
आँचल से ढक लेती हो
चोट जब भी आये
संग मेरे रो देती हो
तावीज़ जो मैं निकाल दूँ
परेशान हो जाती हो तुम
किसी की बुरी नज़र लग जायेगी
प्यार से बताती हो तुम
ओ माँ याद आती हो
ओ माँ याद आती हो
ओ माँ याद आती हो
कहना तेरा जो ना मानूँ
इक अजीब सा दर्द होता है
आँखें भले ही ना रोयें
पर दिल ये मेरा रोता है
मुझे भी फिकर तेरी है माँ
पर मैं कहता नहीं
तेरा यूँ चुप रहना माँ
अच्छा मुझे लगता नही
ओ माँ याद आती हो

 

Saturday, December 28, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना Tum Hi Aana

साल के शानदार गीतों की फेरहिस्त में आज वो गीत जिससे पिछले गीत के उलट आप सब वाकिफ होंगे। जी हाँ ये गीत है फिल्म मरजावाँ बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना। हाँ जो बात आपको नहीं पता होगी वो ये कि इस मधुर गीत की संगीतकार पायल देव हैं जिनका मेरे शहर राँची से बेहद करीब का नाता रहा है। झारखंड के रामगढ़ से ताल्लुक रखने वाली पायल की पढ़ाई लिखाई राँची से हुई। पायल की गायिकी से मेरा परिचय उनके बाजीराव मस्तानी में गाए गीत अब तोहे जाने ना दूँगी से हुआ। बतौर संगीतकार इस साल उन्हें एक नई पारी शुरु करते देख मुझे बेहद खुशी हुई। जानना नहीं चाहेंगे कि ये गीत कैसे बना? :)


पायल ने गीत की धुन चार साल पहले ही बनाई थी और उसे उन्होंने अपनी आवाज़ में  रिकार्ड भी कर रखा था। ज़ुबीन और कुणाल से साथ संगीत की एक बैठक में काम किसी दूसरे गीत पर चल रहा था कि अचानक पायल ने अपनी धुन गुनगुनाई। धुन ज़ुबीन और गीतकार कुणाल वर्मा  को इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने उस पर तुरंत काम करना शुरु कर दिया। मिनटों में गीत लिख भी लिया गया और घने भर में ये बन कर तैयार भी हो गया। 

प्रेम या विरह गीतों के साथ सहूलियत ये होती है कि आप उन्हें बड़े मजे से किसी फिल्म की कहानी में जोड़ सकते हैं। मरजावाँ के इस गीत के साथ भी यही हुआ यानी गीत पहले बना और कहानी पीछे से आई। 

जुबीन एक बेहतरीन आवाज़ के मालिक हैं और उन्होंने इस गीत को भी पूरे दिल से निभाया है। मुखड़े में बजती पियानिका और अंतरों के बीच बाँसुरी और सारंगी की धुन भी मधुर है। संगीत निर्माण में आदित्य देव का काम बेहतरीन है। गीत का मुखड़ा मुझे जावेद अख्तर साहब की उस ग़ज़ल की याद दिला देता है जिसमें उन्होंने लिखा था

अबकि बार आना तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ अहसान जताने के लिए मत आना

उनके कहे में शिकायत थी और वहीं कुणाल के लिखे में एक कातर सा अनुरोध

बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना
इरादे फिर से जाने के नहीं लाना, तुम ही आना

तो आइए सुनते हैं ये गाना जिसे फिल्म में निभाया है सिद्धार्थ मल्होत्रा और तारा सुतारिया की जोड़ी ने 

तेरे जाने का ग़म और ना आने का ग़म
फिर ज़माने का ग़म क्या करें?
राह देखे नज़र, रात भर जाग कर
पर तेरी तो ख़बर ना मिले
बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना
इरादे फिर से जाने के नहीं लाना, तुम ही आना
मेरी दहलीज़ से होकर बहारें जब गुज़रती हैं
यहाँ क्या धूप , क्या सावन, हवाएँ भी बरसती हैं
हमें पूछो क्या होता है, बिना दिल के जिए जाना
बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना
कोई तो राह वो होगी, जो मेरे घर को आती है
करो पीछा सदाओं का, सुनो, क्या कहना चाहती है?
तुम आओगे मुझे मिलने, ख़बर ये भी तुम ही लाना
बहुत आई-गई यादें, मगर इस बार तुम ही आना

 

चिट्ठिये, एक मलाल और तुम ही आना के बाद कल बारी एक ऐसे गीत की जो शायद आपके लिए अनसुना ही होगा। तो आज के लिए यहीं इजाज़त। कल फिर मिलेंगे संगीतमाला एक ऐसे गीत से जो मेरी पसंदीदा सूची में 26 से 30 के बीच मँडराता रहा। :)

वार्षिक संगीतमाला में अब तक

Friday, December 27, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : इक मलाल है ऐसा Ek Malaal

वार्षिक संगीतमाला में चल रही है उन छः गीतों की बातें जो अंतिम 25 में स्थान बनाने में ज़रा सा के लिए रह गए। कल चिट्ठिये की चर्चा के बाद बारी है फिल्म मलाल के एक गीत की। संजय लीला भंसाली इस फिल्म के निर्माता होने के साथ साथ संगीत निर्देशक भी हैं।

संजय लीला भंसाली के संगीत के साथ  दिक्कत ये है कि कई बार उनके  गानों में संगीत का परिवेश एक सा होता है और उन्हें सुनते वक़्त Deja Vu का अहसास होता है पर दूसरा पक्ष ये भी है कि इसके बावज़ूद उनके गाने सुनने में अच्छे लगते हैं। ऐसे तो महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में रची बसी इस फिल्म के कई गीतों में मराठी तड़का है पर कत्थई कत्थई और इक मलाल विशुद्ध हिंदी गीत हैं। 

इसे गाया है शैल हाडा ने शैल संजय लीला भंसाली की फिल्मों से एक दशक से भी ज्यादा जुड़े हुए हैं। साँवरिया फिल्म का शीर्षक गीत हो या हाल फिलहाल में पद्मावत का खलबली शैल संजय की फिल्मों का अभिन्न हिस्सा रहें हैं। व्यक्तिगत तौर पर मुझे गुज़ारिश का उनका गीत तेरा जिक्र है सबसे पसंद है।





इक मलाल एक बेहद छोटा सा गीत है जिसे प्रशांत इंगोले की गहरे भाव ली हुई शब्द रचना और शैल हाडा की खूबसूरत गायिकी मन में बैठने को मजबूर कर देती है। ज़िंदगी में अचानक अपने प्रिय के चले जाने के बाद हमें अपनी गलतियाँ अपना दोष काटने दौड़ता है। साझी ख्वाहिशें का दुखंद अंत मन में कई सवाल खड़े कर देता है। शायद अगर मैंने ऐसा किया होता तो उसकी ये परिणिति नहीं हुई होती ऐसे ख्यालों या यूँ कहें मलाल बार बार मन को मथते हैं। प्रशांत इन्हीं भावों को गीत में कुछ यूँ प्रकट करते हैं।


इक मलाल है ऐसा

इक मलाल है

इक मलाल है ऐसा

इक मलाल है

बुन रहा है रंजिशों का

है ये जाल कैसा

इक मलाल है ऐसा
इक मलाल है

सोच की दीवारों पे
तारीख लिख के चला है
साँसों की मीनारों पे
ख़्वाहिश रख के चला है
रह गया है गर्दिशों में
ये सवाल कैसा
इक मलाल है ऐसा...




एक छोटी सी फिल्म का ये गाना आपमें से बहुतों के लिए अनसुना ही होगा। तो आइए सुनते हैं इस गीत कोमलाल का ये गीत नवोदित कलाकारों मीज़ान जाफरी और शरमिन पर फिल्माया गया है।


Thursday, December 26, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 30 : कितने बेचैन होते होंगे, छोटे छोटे नैन रोते होंगे Chitthiye

वार्षिक संगीतमाला की शुरुआत तो अगले साल पहली जनवरी से होगी पर उसके पहले जिक्र होगा बारी बारी से उन छः गानों का जो वार्षिक संगीतमाला के बेहद करीब आकर बाहर रह गए। भले ही ये संगीतमाला में नहीं हों पर इन्होंने मेरी गीतमाला में लगभग उतने ही अंक प्राप्त किए हैं जितने कि अंतिम के कुछ गीतों ने। अब तक आप सबने जो पसंद बताई है उसका कोई गीत इस छः गीतों में है तो आप उसे भी अपने स्कोर में शामिल कर सकते हैं।


आजकल हिंदी फिल्मी गीतों में पंजाबी बोलों का मिश्रण इस क़दर बढ़ गया है कि कई बार तो इन्हें सुनकर कोफ़्त सी होने लगती है। इसका एक कारण ये है कि जितने भी डांस या रैप नंबर हैं उनके मशहूर गायक पंजाब से आते हैं और आजकल की फिल्मों में इन्हीं गीतों की तूती बोल रही है। ऐसे गीतों में बेब्बी, सोणी, कुड़ी, रब्बा जैसे तमाम रटे रटाए पंजाबी शब्दों का इस तरह समावेश ऐसे होता है जैसे हर सब्जी में धनिया डलता हो।

इसके बावज़ूद कुछ गीत अपनी संवेदनशीलता से एक अलग पहचान छोड़ जाते हैं। ऐसा ही एक गीत संगीतमाला का हिस्सा भी है जबकि दूसरे को आज आपके सामने ले के आ रहा हूँ। इसे गाया है पंजाब के एक चर्चित सूफी गायक कँवर ग्रेवाल ने। कँवर ग्रेवाल संगीत के पुराने विद्यार्थी रहे हैं और उनकी गहरी आवाज़ इस गीत में पिता और बेटी के रिश्तों में आई खटास की पीड़ा सहज अभिव्यक्त कर देती है। रोचक कोहली का गिटार और तबला गीत में बहते दर्द में मरहम लगाने का काम करता है। गुरप्रीत सैनी के बोल तो सामान्य हैं पर गीत के एक अंतरे की ये पंक्तियाँ खास तौर पर असर डालती हैं।

कितने बेचैन होते होंगे, छोटे छोटे नैन रोते होंगे 
सहमे सहमे जागते अकेले, तन्हा सारी रात सोते होंगे 
काश कि तेरे नाल बह के, रो लैंदा तेरे दुख ले के
बोल तेरे ख्वाबाँ दी, डोर कित्थे टूटिए
जिंद मेरी रूठिये... चिट्ठिए नि चिट्ठिए

इस फिल्म में पिता और पुत्री का किरदार निभाया है वास्तविक पिता पुत्री अनिल कपूर और सोनम कपूर ने।

 

आपमें से बहुतों की पसंद में ये गीत था और मुझे भी कँवर की गायिकी भा गयी थी पर पच्चीस गीतों की बाध्यता की वज़ह से इसे अंतिम पच्चीस में स्थान नहीं मिल पाया। बहरहाल इस गीत के साथ आपमें से बहुतों का खाता खुल चुका होगा जो एक शाम मेरे नाम की इस प्रतियोगिता का हिस्सा बने हैं। अगर आपने ये गीत सुन लिया है तो इस गीतमाला की अगली पेशकश सुनना ना भूलें जिसे फिल्म मलाल से लिया गया है।

Wednesday, December 11, 2019

वार्षिक संगीतमाला 2019 : हिंदी फिल्मी गीतों में क्या रही आपकी इस साल की पसंद ? Top 25 Bollywood Songs of 2019

एक  शाम मेरे नाम पर वक़्त आ गया है इस साल की वार्षिक संगीतमाला का जिसमें चुने जाएँगे हर साल की तरह इस साल रिलीज़ हुई फिल्मों के मेरे पच्चीस पसंदीदा गीत। सोलह साल से चल रही इस संगीतमाला की शुरुआत के बारे में पिछले कई दिनों से श्रोताओं के सवाल आने शुरु हो गए हैं कि इस बार की संगीतमाला कब शुरु होगी। संगीतमाला तो हर नए साल में एक जनवरी से शुरु होती है और इस साल भी होगी।

इस साल रिलीज़ हुई सारी फिल्मों के गीतों को सुन चुकने के बाद मैंने तो लगभग अपनी राय कायम कर ली है और उसे यहाँ हर साल की तरह से सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत भी करूँगा पिछले साल की तरह इस बार भी मुझे उत्सुकता है ये जानने की कि इस साल आपने किन गीतों को पसंद किया?

तो बताइए मुझे इस साल के फिल्मी गीतों में अपनी पसंद । आप अधिकतम पच्चीस गीतों की पसंद बता सकते हैं। जिस किसी की पसंद मुझसे सबसे ज्यादा मिलेगी उसे मिलेगा एक शाम मेरे नाम की तरफ से एक छोटा सा तोहफा...। अभी से लेकर 25 दिसंबर तक आप अपनी पसंद मुझे बता सकते हैं इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में। हर एक गीत के बारे में बताते हुए उसका मुखड़ा और फिल्म का नाम अवश्य लिखें। याद रहे गीत 2019  में रिलीज़ हुई फिल्मों से ही होने चाहिए। :)

इस साल यानी  2019  में करीब एक सौ के करीब  फिल्में रिलीज हुई जिनकी पूरी सूची आप यहाँ देख सकते हैं। 



वर्ष 2018 की संगीतमाला के सितारों की चर्चा अलग से यहाँ पर हुई थी। नए पाठकों को जिन्हें एक शाम मेरे नाम की वार्षिक संगीतमालाओं के बारे में जानकारी नहीं है वो पिछली संगीतमालाओं से यहाँ गुजर सकते हैं..
 

मेरी पसंदीदा किताबें...

सुवर्णलता
Freedom at Midnight
Aapka Bunti
Madhushala
कसप Kasap
Great Expectations
उर्दू की आख़िरी किताब
Shatranj Ke Khiladi
Bakul Katha
Raag Darbari
English, August: An Indian Story
Five Point Someone: What Not to Do at IIT
Mitro Marjani
Jharokhe
Mailaa Aanchal
Mrs Craddock
Mahabhoj
मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
Lolita
The Pakistani Bride: A Novel


Manish Kumar's favorite books »

स्पष्टीकरण

इस चिट्ठे का उद्देश्य अच्छे संगीत और साहित्य एवम्र उनसे जुड़े कुछ पहलुओं को अपने नज़रिए से विश्लेषित कर संगीत प्रेमी पाठकों तक पहुँचाना और लोकप्रिय बनाना है। इसी हेतु चिट्ठे पर संगीत और चित्रों का प्रयोग हुआ है। अगर इस चिट्ठे पर प्रकाशित चित्र, संगीत या अन्य किसी सामग्री से कॉपीराइट का उल्लंघन होता है तो कृपया सूचित करें। आपकी सूचना पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

एक शाम मेरे नाम Copyright © 2009 Designed by Bie