गुरुवार, फ़रवरी 06, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top10 : रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan

अगर संगीतमाला की चौथी पायदान पर पापोन की गायिकी आपके दिल को सहला गयी थी तो आज वही काम तीसरी पायदान पर अरिजीत सिंह की आवाज़ कर रही है फिल्म सोनचिड़िया के इस गीत में जिसकी धुन बनाई विशाल भारद्वाज ने और बोल लिखे वरुण ग्रोवर ने। विशाल  अपनी फिल्मों में अरिजीत की आवाज़ का बखूबी इस्तेमाल करते आए हैं। हैदर, रंगून पटाखा और अब सोनचिड़िया के गीत इसकी मिसाल हैं। हाँ ये जरूर है कि विशाल अक्सर गुलज़ार के साथ काम करते हैं पर इस फिल्म के लिए उन्होंने वरूण को चुना जो आज के दौर के एक काबिल गीतकार हैं।


चंबल के डाकुओं से जुड़ी कई कहानियाँ फिल्मी पर्दे का हिस्सा बन चुकी है। नब्ने के बाद की बात करूँ तो पान सिंह तोमर या फिर Bandit Queen जैसी सफलता तो सोनचिड़िया के हाथ नहीं लगी  पर फिल्म को समीक्षकों द्वारा सराहा जरूर गया था। 

इस गीत को समझने के लिए मुझे आपको इस फिल्म की कहानी से रूबरू कराना पड़ेगा। अपने सरदार के मारे जाने के बाद पुलिस से भागते गिरोह को एक महिला के साथ घायल बच्ची मिलती है जिसकी जान के पीछे उसी के परिवार वाले पड़े हैं।  गिरोह उस बच्ची की मदद करते हुए उसे अस्पताल पहुँचाने के लिए तैयार हो जाता है। गिरोह के द्वारा एक बार गलती से कुछ बच्चों की हत्या हो गयी थी। उनके मन में ये धारणा भी है कि ये पाप तभी कटेगा जब वो किसी बच्ची रूपी सोनचिड़िया को बचाएँगे।

इसी क्रम में ये गीत फिल्म में आता है। वरुण एक ऐसे गीतकार हैं जिनके शब्दों में एक गहराई होती है। उसकी तहों तक पहुँचने के लिए एक श्रोता को गीत की भावनाओं में डूबना होता है। अब इसी गीत को देखिए। रुआँ रुआँ एक आशा का, एक नए जीवन के संचार का गीत है। नायक द्वारा अपनी बीती हुई ज़िदगी के कलुष को धोने की चेष्टा की तुलना इस गीत में वरुण ने एक ऐसे पंक्षी से की है जो अँधेरी रातों से निकल वक़्त की पुरानी गाँठों को खोलते हुए एक नए आकाश, एक नई सुबह की ओर उड़ चला है। ऐसे करते हुए उसका रोयाँ रोयाँ पुलकित है। नायक की सदाशयता के इस नूर ने पूरे मन रूपी कुएँ को मीठा कर दिया है इसलिए वरूण ने लिखा


पंछी चला, उस देस को
है जहाँ, रातों में, सुबह घुली
पंछी चला, परदेस को
कि जहाँ, वक्त की, गाँठ खुली

रुआँ रुआँ, रौशन हुआ
धुआँ धुआँ, जो तन हुआ
रुआँ रुआँ...
हाँ नूर को, ऐसे चखा
मीठा कुआँ, ये मन हुआ
रुआँ रुआँ...


नायक की ज़िदगी के इस दुखद चरण के समापन और एक नए की शुरुआत की बात कुछ अन्य बिंबों के साथ वरुण  दूसरे अंतरे में भी करते हैं। माटी के मैले घड़े के टूटकर कंचन होने की उनकी सोच वाकई लाजवाब है। 

गहरी नदी, में डूब के
आखिरी साँस का, मोती मिला
सदियों से था, ठहरा हुआ
हाँ गुज़र ही गया, वो काफ़िला
पर्दा गिरा, मेला उठा
खाली कोई, बर्तन हुआ
माटी का ये, मैला घड़ा
टूटा तो फिर, कंचन हुआ
रुआँ रुआँ...


विशाल ने इस गीत में गिटार और सीटी का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। गीत के बोलों के साथ गिटार की टुनटुनाहट इस बारीकी से गूँथी गयी है कि एक के बिना दूसरे की कल्पना ही नहीं की जा सकती है।  इस गीत में मधुर गिटार बजाया है अंकुर मुखर्जी ने।

विशाल भारद्वाज व वरुण ग्रोवर
गीत की शुरुआत में अरिजीत की रुआँ रुआँ की गूँज आपको एक अलग मूड में ले आती है और फिर तो उनकी गायिकी शब्द और संगीत के साथ ऐसे घुलती मिलती है कि आप  गीत खत्म होने तक उसके मोहपाश से अपने आप को अलग नहीं कर पाते। तो आइए सुनते हैं सोनचिड़िया का ये बेहद भावपूर्ण नग्मा। गीत में जो नदी नज़र आ रही है वो देश की सबसे साफ सुथरी नदियों में से एक चंबल नदी है।



वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

बुधवार, फ़रवरी 05, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 10 : तेरा साथ है Tera Saath Hai

असम के गायक अंगराग महन्ता  जिन्हें हम सब पापोन के नाम से जानते हैं की आवाज़ अपनी अलग बनावट की वज़ह से मुझे हमेशा से प्रिय रही है। एक शाम मेरे नाम की संगीतमालाओं में उनकी आवाज़ का जादू दो बार सरताज गीत बनकर गूँजा है। एक तो दम लगा के हइसा का मोह मोह के धागे और दूसरा बर्फी का क्यूँ ना हम तुम। 

आज एक बार फिर पापोन के स्वर में संगीतमाला की चौथी पायदान पर अनजान सी फिल्म का बेहद मधुर गीत है। ये फिल्म थी पिछले साल अक्टूबर में रिलीज़ हुई Jacqueline I Am Coming  जो अपने एक अलग  विषय के बावज़ूद प्रचार प्रसार के अभाव में सिनेमा के पर्दों पर ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाई। इस फिल्म के इस एकमात्र गीत का शानदार संगीत दिया है विपिन पटवा ने और इसके बोल लिखे हैं उनके कई सालों के जोड़ीदार डॉक्टर सागर ने। अगर आपको याद हो तो कुछ साल पहले भी इस तिकड़ी का एक गीत इस संगीतमाला में दाखिल हुआ था। फिल्म थी बॉलीवुड डायरीज़ और गीत के बोल थे ख्बाबों को सच करने के लिए तितली ने सारे रंग बेच दिए।


उत्तर प्रदेश के एक व्यापारी परिवार में जन्मे विपिन का शुरुआत से संगीत के प्रति रुझान और फिर शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा लेकर बतौर संगीतकार और गायक मुंबई की ओर रुख करने की बात तो मैं आपको पहले यहाँ बता ही चुका हूँ। 

रही बात गीतकार सागर की तो उनका ताल्लुक उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिले बलिया से रहा है। अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे सागर को स्कूल से ही भोजपुरी में कविता लिखने का शौक था। जिस स्कूल में वो पढ़ते थे वहाँ चार पाँच गाँवों के बच्चे पढ़ने आते थे। स्कूल में उनकी कविताई यूँ चमकी कि स्कूल तो स्कूल पूरे इलाके के लोकगीत कलाकार उनसे गीत लिखवाने के लिए उनके गाँव आने लगे। दो जून रोटी के संघर्ष ने उन्हें स्कूल के बाद कुछ सालों के लिए पढ़ाई लिखाई से दूर कर दिया पर उनकी जीवटता और कविता का प्रेम उन्हें ऐसे लोगों से मिलवाता गया जिनकी मदद से उन्होंने JNU से हिंदी में अपनी पीएचडी पूरी की। 

विपिन पटवा और डॉ सागर
दिल्ली में ही एक बार उनकी मुलाकात विपिन से हुई और बरसों बाद जब वे मुंबई पहुँचे तो ये पुरानी पहचान गीतकार संगीतकार की एक जोड़ी में तब्दील हो गई। विपिन के संगीत निर्देशन में उनका पहला गीत फिल्म ये स्टूपिड प्यार के लिए था जिसे विपिन के साथ श्रेया घोषाल ने गाया था। पिछले आठ सालों में इस जोड़ी ने बॉलीवुड डॉयरीज और दास देव जैसी फिल्मों के लिए अच्छा काम किया है। 

बहरहाल लौटते हैं Jacqueline I Am Coming के इस गीत की तरफ। Jacqueline I Am Coming  की कहानी एक अधेड़ अविवाहित पुरुष की कहानी है जो अकेला जीवन जीते जीते एक युवा ईसाई स्त्री से प्रेम कर बैठता है। प्रेम, सामाजिक विरोध के बीच विवाह और फिर नायिका की मानसिक बीमारी की वजह से आने वाली परेशानियों के बीच फिल्म का एकमात्र गीत आता है और नायक के मन की भावनाओं और कठिनाइयों पर विजय पाने की उसकी उम्मीदों की बात कह जाता है। 

आज ये गीत, गीतमाला के प्रथम दस गीतों में शामिल हुआ है तो उसकी सबसे बड़ी वजह विपिन पटवा की शानदार धुन और संगीत संयोजन है जिसे पापोन की दिल छूती गायिकी और सागर के सहज बोलों का भरपूर साथ मिला है। ये गीत इस बात को भी साबित करता है कि भारतीय वाद्य यंत्रों की अपनी एक अलग ही मिठास है जिसका स्वाद कभी फीका नहीं पड़ता।

गीत की शुरुआत में विपिन ने ताल वाद्य के रूप में घड़े का इस्तेमाल किया है तो अंतरे में सितार की झुनझुनाहट है। गीत के अंत में मुखड़े के साथ शहनाई बजती है और उसके बाद आख़िर के आधे मिनट में जो संगीत बजता है वो मेरी आँखें तो हमेशा नम कर जाता है। 

इन सब के बीच मुखड़े की मोहक धुन पापोन की आवाज़ के साथ फूल और खुशबू बन कर मन में समा जाती है। इतना ही नहीं पर्दे पर जब आप रघुबीर यादव जैसे अद्भुत कलाकार को इस गीत को अभिनीत करते देखते हैं तो गीत की सीधी सादी भावनाएँ और गहरी होकर उतर जाती हैं।


तेरा साथ है हाथों में हाथ है
फूलों सा दिन अब मेरा
खुशबू सी रात है

तेरे बिना कैसे रहूँ
मेरा अधूरा है आशियाँ
तेरे सिवा जाऊँ कहाँ
कोई  नहीं है मेरा यहाँ

तेरा साथ है हाथों में हाथ है
फूलों सा दिन अब मेरा
खुशबू सी रात है

पूरब से आने लगा है उजाला
बादल जो घेरे हैं वो छट जाएँगे
तेरे संग अब मेरी ज़िंदगी के
लमहे सुकूँ से कट जाएँगे

तेरा साथ है हाथों में हाथ है
फूलों सा दिन अब मेरा
खुशबू सी रात है

तो आइए सुनें पापोन की दिलकश आवाज़ में ये नग्मा जो पहले आपने शायद ही सुना हो



वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

मंगलवार, फ़रवरी 04, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 10 : तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र Zikra

हर साल बॉलीवुड में जितनी फिल्में बनती हैं उसमें एक छोटा सा हिस्सा डरावनी यानी भुतहा फिल्मों का रहता है। ऐसी फिल्में ज्यादा बजट की होती नहीं हैं। कलाकार भी ज्यादातर नए ही होते हैं। हर तीन चार फिल्मों में ऐसी एक दो फिल्में हिट भी हो जाती हैं। राज़ को ही देख लीजिए उसकी सफलता ने ऐसी फिल्मों का सालाना चलन तो बढ़ा ही दिया, साथ ही बिपाशा बसु जैसे कलाकारों का कैरियर भी चमका दिया।

अब ये फिल्में चाहे जैसी भी रहें इनका संगीत औसत से बेहतर रहता है। इसके लिए संगीत कंपनियाँ सीधा सा फार्मूला लगाती हैं। वो किसी एक कंपोज़र को इन फिल्मों के लिए अनुबंधित नहीं करती बल्कि अपने रिजर्व बैंक से अलग अलग संगीतकारों से लिए नगीने निकाल निकाल कर फिल्म की स्क्रिप्ट में फिट करती रहती हैं। यही वजह है कि ऐसी फिल्मों में तीन से चार संगीतकार भी दिखाई दे जाते हैं।


संगीतकार और गीतकार जब ऐसे गाने बनाते हैं तो उन्हें पता भी नहीं होता कि उनके गाने पारिवारिक, एक्शन या हॉरर फिल्मों में जाएँगे। बिना कहानी जाने जब गाने फिट करने हों तो अक्सर उनका ताना बाना रूमानियत के इर्द गिर्द ही बुना जाता है। 

इस संगीतमाला में फिल्म घोस्ट के जो दो गाने थे वे इसी प्रकृति के थे और आज गीतमाला की इस पायदान पर जो गीत जगह बना रहा है वो भटकती आत्माओं से जुड़ी कहानी पर बनी फिल्म अमावस से है। पिछले साल फरवरी में रिलीज़ हुई फिल्म अमावस का ये गीत भी प्रेम की चाशनी में डूबा हुआ गीत है जिसे संगीतबद्ध किया है असद खान ने, लिखा जुनैद वसी और अपनी आवाज़ से सँवारा है अरमान मलिक ने।

असद खान व  अरमान मलिक 
हिंदी फिल्म संगीत में जब जब सितार वादकों ने संगीत निर्देशन की कमान थामी है कुछ अच्छा ही सामने आया है। पंडित रविशंकर से लेकर निशात खान और फिर पिछले साल लैला मजनूँ का अद्भुत संगीत रचने वाले नीलाद्रि कुमार इसके जीते जागते उदाहरण हैं और इसी फेरहिस्त में नाम जुड़ गया है मेवात घराने से ताल्लुक रखने वाले असद खान का। असद खान को हिंदी फिल्मों से जोड़ने का श्रेय ए आर रहमान को जाता है। रहमान ने  स्लमडॉग मिलयनियर के साउंडट्रैक मौसम और एस्केप के लिए अपने संगीत के साथ असद खान से जिस तरह सितार का फ्यूजन कराया वो लोगों को बेहद पसंद आया। शास्त्रीय संगीत वादन के साथ साथ असद फिल्मों के इतर सिंगल्स में संगीत देते रहे हैं।


असद भले ही ख़ुद सितार वादक हों पर उन्होंने इस गीत का आगाज़ गिटार की मधुर धुन से किया है। जुनैद वसी की कलम प्रेम में डूबे दिल की तड़प को सहज शब्दों में बखूबी उभारती है। कानपुर से ताल्लुक रखने वाले इस गीतकार ने हिंदी फिल्मों में चुनिंदा गीत ही लिखे हैं पर इससे पहले उनका सबसे चर्चित गीत जौली एल एल बी 2 का बावरा मॅन राह ताके तरसे रे...नैना भी मल्हार बनके बरसे रे रहा है। 

इस गीत में अपने प्रिय से अतरंग होने के लम्हे तलाशते नायक की भावनाओं को वो कुछ ऐसी पंक्तियों से नवाज़ते हैं जिस्म से तेरे मिलने दे मुझे, बेचैन ज़िन्दगी इस प्यार में थी... उँगलियों से तुझपे लिखने दे ज़रा, शायरी मेरी इंतज़ार में थी... इसी गीत में आगे वो कहते है मुझको जगाये रख..खुद में लगाये रख..कि रातभर मैं अब ना सो सकूँ। असद का बनाई धुन इस रोमांटिक गीत की जान है और अरमान मलिक ने जुनैद के बोलों को बेहद दिल से गाया है। गीत सुनते ही इसके बोलों को उनके साथ गुनगुनाने की इच्छा होती है।

होने लगा इस तरह
मेरी गलती है
दिल को रोका तो ये
ज़ुबाँ चलती है
इश्क़  को मैंने बड़ा समझाया
इश्क़ के आगे कहाँ चलती है
तेरा ना करता ज़िक्र
तेरी ना होती फ़िक्र
तेरे लिये दिल रोता ना कभी
यूँ ना बहाता अश्क
मैं भी मनाता जश्न
खुद के लिये भी जीता ज़िंदगी

बाख़ुदा दिल गया
बाख़ुदा दिल गया...
तेरा ना करता ज़िक्र..

जिस्म से तेरे मिलने दे मुझे
बेचैन ज़िन्दगी इस प्यार में थी
उँगलियों से तुझपे लिखने दे ज़रा
शायरी मेरी इंतज़ार में थी
मुझपे लुटा दे इश्क़
मुझको सिखा दे इश्क़
किस्मत मेरे दर आ गया जो तू
मुझको जगाये रख
खुद में लगाये रख
कि रातभर मैं अब ना सो सकूँ
तेरा ना करता ज़िक्र


तो आइए सुनते हैं अमावस का ये रूमानी नग्मा





वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

शनिवार, फ़रवरी 01, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 10 : बोल उठा ये जग सारा, जय मर्द मराठा रे Mard Maratha

आशुतोष गोवारिकर एक ऐसे निर्देशक रहे हैं जिनकी फिल्में अपने लंबे चौड़े कैनवास के साथ साथ संगीत के लिए भी जानी जाती रही हैं। लगान, जोधा अकबर और स्वदेश में ए आर रहमान के साथ बनाए उनके गीत हर संगीतप्रेमी की पसंदीदा सूची में शामिल  होंगे। रहमान के बाद उन्होंने अपनी कुछ छोटी बजट की फिल्मों में संगीतकार सोहेल सेन का दामन थामा पर जब उन्होंने मराठा योद्धाओं पर केंद्रित फिल्म पानीपत बनानी शुरु की तो इसके लिए उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों की चर्चित संगीत जोड़ी अजय अतुल को लिया। ये चुनाव वास्तव में बिल्कुल वाजिब था क्यूँकि ये विषय ऐसा था जिसके साथ अजय अतुल जैसे संगीकार पूरा न्याय कर सकते थे।



अजय अतुल कहते हैं कि बचपन से अब तक पानीपत के बारे में उन्होंने खूब पढ़ा था। इस युद्ध के पहले की परिस्थितियाँ उनके दिल के इतने करीब थीं कि अगर आशुतोष ने उन्हें इस फिल्म में मौका नहीं दिया होता तो वे ख़ुद इस विषय पर फिल्म बना देते। आशुतोष गोवारिकर ने इस फिल्म के लिए भले ही संगीतकार बदल दिया हो पर उनकी फिल्मों के गीतकार हमेशा से जावेद अख्तर रहे और इस फिल्म के सारे गीत भी जावेद साहब ने लिखे हैं। अजय अतुल के लिए भी ये पहला मौका था जावेद अख्तर के साथ काम करने का और छोटे से तीन गीतों के एलबम में अपना एक गीत वो संगीतमाला की छठी पायदान पर शामिल करवाने में सफल हुए हैं।

तन मन में जोश भरते जावेद अख्तर के शानदार बोल, ताल वाद्यों की अद्भुत रिदम और अजय अतुल, प्रियंका बार्वे के साथ ढेर सारे गायक गायिकाओं की फौज द्वारा गाया ये समूह गान मन को आनंदित कर देता है। इस गीत में अजय अतुल के साथ सुदेश भोसले और कुणाल गांजावाला जैसी कुछ पुरानी आवाज़ें भी गूँजी हैं। गीत में जो सबसे युवा आवाज़ अंत में उभरती है वो पद्मनाभ गायकवाड़ की है और प्रभावित करती है। अब जब सारे गायक मराठी हों तो गायिका भी मराठी ही होनी थी। अजय अतुल ने इस गीत के लिए प्रियंका बार्वे को चुना जिनकी अद्भुत गायिकी से मैं आपका यहाँ पहले ही परिचय करा चुका हूँ।

आजकल की फिल्मों में ऐसे समूह गान कम ही सुनाई पड़ते हैं। ये गीत मराठा शूरवीरों के पराक्रम और जीवन मूल्यों की बात  बखूबी करता है और वो भी इस अंदाज़ में कि  गीत के बोलों के साथ आप भी बाकी गायकों के साथ सुर में सुर मिलाने के लिए तत्पर हो जाते हैं। जावेद साहब के बोल तो जबरदस्त हैं ही पर गीत के मुखड़े की शब्द रचना सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करती है। तो आइए सुनते हैं पानीपत फिल्म का ये गीत..


हे बोले धरती जयकारा, गगन है सारा गूँजा रे
जग में लहराया न्यारा, ध्वज है हमारा ऊँचा रे
हम वो योद्धा वो निडर, हम जो भी दिशा में जाएँ
सारे पथ चरण छुएँ और पर्वत शीश नवाये
रास्ते से हट जाएँ नदियाँ हो के हवाएँ

हम हैं जियाले जीतने को हम, रण में उतरते हैं
हम सूरज हैं अंत हमी, रातों का करते हैं
युग युग की जंजीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा, जय मर्द मराठा रे

जो रक्त है तन में बहता, वो हमसे है ये कहता
सम्मान के बदले जान भी दें, तो नही है घाटा रे
युग युग की जंजीरों ...... मर्द मराठा रे

वीरता हमने बोई और ये फल पाया
दूर तक अब है फैली अपनी ही छाया
हो.. जीवन जो रणभूमि में करता है तांडव
आज उसी ने है विजय का नगाड़ा बजाया
अपनी है जो गाथा अब है समय सुनाता
सब को है ये बताता कैसे सुख हमने बाँटा रे
युग युग की जंजीरों ...... मर्द मराठा रे

सच के सिपाही अलबेले राही
क्या जानते हो तुम
जब तुम नही थे हम कब यहीं थे
हम भी थे जैसे गुम
तुम ध्यान में थे तुम प्राण में थे
जैसे जनम जनम
जब तीर तुमपे बरसे तो
जैसे घायल हुए थे हम
हो.. देखो तो मुझसे कह के
मैं जान दे दूँ तुम पे
क्या तुम नहीं ये जानते
दुविधा के आगे जब नारी जागे
हिम्मत से काम ले
चूड़ी उतार कंगन उतार तलवार थाम ले

मैंने ली आज शपथ है
वीरों का पथ है मेरा रे
लक्ष्य अपना जो बना लूँ
वहीं पे डालूं डेरा रे

हम वो योद्धा....  मर्द मराठा रे

जितना इस गीत को सुनना मधुर लगता है उतना ही शानदार लगता है इसकी भव्यता को पर्दे पर देखना..



वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

शुक्रवार, जनवरी 31, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 10 : मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए Bharat

शंकर एहसान लॉय की तिकड़ी पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से फिल्म संगीत में सक्रिय है और बीच के कुछ सालों को छोड़ दें तो इनके द्वारा रचे संगीत की चमक फीकी नहीं पड़ी है। 2018 में राजी के गीत ऐ वतन और दिलबरो ने खासी लोकप्रियता अर्जित की थी तो इस साल मणिकर्णिका साल के बेहतरीन एलबमों में से एक रहा। इस संगीतमाला में बोलो कब प्रतिकार करोगे, राजा जी के बाद सातवीं पायदान पर दाखिल हो रहा है इसी फिल्म का गीत  मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए।


संगीत के मामले में मणिकर्णिका अगर इतनी सफल रही तो उसके पीछे एक बड़ा योगदान इसके गीतकार प्रसून जोशी को जाता है। इन सारे गीतों में उनकी शब्द रचना कमाल की है। देशप्रेम से ओतप्रोत उनके गीतों को सिर्फ पढ़ने से ही पूरे बदन में झुरझुरी हो उठती है। कुछ वैसे ही जैसी स्कूल के दिनों में रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविताओं को सुन कर होती थी। प्रसून ने इस फिल्म की पटकथा भी लिखी है। अपनी अन्य जिम्मेदारियों की वजह से बतौर गीतकार 2016 में आई नीरजा के बाद उन्होंने किसी फिल्म में काम नहीं किया था। झाँसी की रानी का शौर्य उन्हें हमेशा आकर्षित करता रहा इसलिए मणिकर्णिका लिए पटकथा और गीत लिखने का काम उन्हें मिला तो उसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया । 

 मणिकर्णिका के इस गीत के मुखड़े के बारे में प्रसून का कहना है कि 

देश को आज़ादी सिर्फ नारे लगाने वालों से नहीं मिली। बहुत लोगों ने अपना सर्वस्व त्यागा तब ये मुकाम हासिल हुआ। सिर्फ नारों से नहीं खून की धाराओं से भी मिली है ये आज़ादी। आज लेकिन बहुत से युवा इस बात को नहीं समझते। रानी लक्ष्मी बाई की कहानी हमें प्रेरित करती हैं। ये हमसे पूछती है कि क्या आप अपना जीवन यूँ ही व्यर्थ करना चाहते हैं या देश के लिए न्योछावर करना चाहते हैं ? आख़िर अपने पराक्रम की वज़ह से रानी को क्या मिला? वो चाहती तो पेंशन ले कर ज़िंदगी अच्छे से गुजार सकती थीं। उनकी व्यक्तित्व की यही बात मेरे दिल को लग गयी और इसीलिए मैंने लिखा कि देश से है प्यार तो हर पल यह कहना चाहिए..मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए

मुखड़ा तो मुखड़ा गीत का अंतरा भी प्रसून ने गजब का लिखा है। अब आप ही बताइए ये तो केवल एक गीत है, ऐसी पंक्तियाँ तो किसी कविता को एक अलग स्तर पर ले जाएँगी मेरी नस नस तार कर दो और बना दो एक सितार, ......राग भारत मुझपे छेड़ो झनझनाओ बार बार ......देश से ये प्रेम आँखों से छलकना चाहिए, .....मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए 


इतने अच्छे शब्दों को चाहिए थी एक शानदार आवाज़ और शंकर महादेवन के रहते हुए गायक की और जगह कौन ले सकता था? इस गीत को रिलीज़ करते समय उन्होंने कहा था कि मुझे गर्व है अपने भारतीय होने पर। गीत में तार वाद्यों से जुड़ा आर्केस्टा बांबे स्ट्रिंग का है और अंतरों के बीच की बाँसुरी बजाई है नवीन कुमार ने। तो आइए एक बार फिर सुनते हैं भारत और भारत को प्रेम करने वाले लोगों को समर्पित ये गीत।

देश से है प्यार तो हर पल यह कहना चाहिए
मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए
सिलसिला ये बाद मेरे यूँ ही चलना चाहिए
मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए

मेरी नस नस तार कर दो और बना दो एक सितार
राग भारत मुझपे छेड़ो झनझनाओ बार बार
देश से ये प्रेम आँखों से छलकना चाहिए
मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए

शत्रु से कह दो ज़रा सीमा में रहना सीख ले
ये मेरा भारत अमर है सत्य कहना सीख ले
भक्ति की इस शक्ति को बढ़कर दिखना चाहिए
मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए

है मुझे सौगंध भारत सौगंध भारत है मुझे
भूलूँ ना एक क्षण तुझे हम्म..
रक्त की हर बूँद तेरी है तेरा अर्पण तुझे
युद्ध ये सम्मान का है मान रहना चाहिए



वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

बुधवार, जनवरी 29, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 10 : आज जागे रहना, ये रात सोने को है Aaj Jage Rahna

हर साल संगीतमाला में रूमानियत भरे गीतों की नई बयार बहती रहती है पर इस बयार में एक आध ही गीत ऐसे होते हैं जिनकी मासूमियत भरी भावनाएँ एक बार सुनते ही दिल को यूँ सहला जाती हैं कि उस गीत को बार बार सुनने का मन करता है। 


संगीतमाला की आठवीं पायदान पर  प्रेम से लबरेज़ एक ऐसा ही प्यारा सा गीत है जो मुझे उस गीत की याद दिला गया जिसे स्वानंद किरकिरे ने फिल्म बर्फी के लिए लिखा था। बर्फी के उस गीत के बोल कुछ यूँ थे ..

साँवली सी रात हो, ख़ामोशी का साथ हो
बिन कहे, बिन सुने, बात हो तेरी मेरी
नींद जब हो लापता, उदासियाँ ज़रा हटा
ख़्वाबों की रज़ाई में, रात हो तेरी मेरी

गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखने वाले संगीतकार सिद्धार्थ अमित भवसार ने स्वानंद की लेखनी की ऊँचाइयों को तो अपने लफ़्जों में नहीं छुआ पर अगर आप ये जानेंगे कि उन्होंने बस यूँ ही सत्रह साल की उम्र में ये गीत लिख कर उसकी धुन बना दी थी तो आप उनकी इस कृति के कायल हो जाएँगे।

सालों बाद जब ये गीत  मोतीचूर चकनाचूर के लिए रिकार्ड हुआ तब उन्होंने अपने मन की भावनाएँ कुछ यूँ व्यक्त की थीं
मेरे पास शब्द नहीं है अपनी भावनाओं को प्रकट करने के लिए। ये हिंदी फिल्म के लिए गीत लिखने और उसे संगीतबद्ध करने की बात नहीं है, ना ही इसका ताल्लुक इस गीत की आगे मिलने वाली सफलता या असफलता से है। मैं तो बस वो दिन याद करना चाहता हूँ जब सालों पहले यूँ ही मैंने इस गीत को लिखा और कम्पोज़ किया था... बिना ये जाने हुए कि हिंदी फिल्मी गीतों की संरचना क्या होती है? उस समय भी जब पार्टी में संगीत की महफिल जमती थी तो मैं अपने कई मूल गीत गाता था पर इसे किसी को नहीं सुनाता था। मैं सोचता था कि ये गीत सिर्फ मेरे लिए है जिसे गा कर मैं अपने उस गुजरे हुए समय  पर एक नज़र डालते हुए कह सकता हूँ कि देखो उस वक़्त मैंने ये गीत यूँ ही बना दिया था।
स्वानंद के गीत की तरह ही  सिद्धार्थ के शब्द रात, नींद, ख़्वाब, खामोशी, उदासी और उसके अंदर बहती प्रेम की सरगम का जिक्र करते हैं। गीत इशान दास की बजाई गिटार की मधुर धुन से शुरु होता है और फिर अंतरे में किरण की बाँसुरी मन मोह लेती है।  पर इन सब के बीच जिस मुलायमियत के साथ हिमानी कपूर इस गीत को निभाती हैं वो गीत को एक अलग ही ऊँचाई पर ले जाता है। गीत का अंत हिमानी के आलाप से होता है पर उसकी गूँज गीत सुनने के बाद भी मन में काफी देर तक रहती है।

सिद्धार्थ अमित भास्वर व हिमानी कपूर
डेढ़ दशक पहले सारेगामापा से चर्चा में आई हिमानी की संगीत यात्रा उनके द्वारा हिंदी फिल्मों में गाए चुनिंदा गीतों तक ही सीमित रही है। शादी और उसके बाद की पारिवारिक समस्याओं से आए कैरियर में विराम के बाद से वे फिर उसी जोश से अपने कैरियर को पटरी पर लाने में प्रयत्नशील हैं। उनकी आवाज़ में एक अलग ही कशिश है जिसका इस्तेमाल अगर बाकी संगीतकार भी करें तो ऐसे ही दिल छूते गीत श्रोताओं को आगे भी सुनने को मिलेंगे । 

आज जागे रहना, ये रात सोने को है
आज जागे रहना, ये रात सोने को है
तेरी पलकों पे आँसू आए तो
मेरा कान्धा रोने को हैं, ये रात सोने को है

चुप चुप क्यूँ बैठे हो कह भी दो
गुमसुम से रहते हो कह भी दो
तेरे लब जो मेरी सरगम गाये तो
फिर प्यार होने को है
मेरा दिल भी खोने को है

ख़्वाहिशों के सहारे बैठकर
कब खुद से हम किनारा कर गए
जो आँखों में ख़्वाब थे, आँसू भर गए
आज जागे रहना, ये रात सोने को है


मोतीचूर चकनाचूर का ये गीत एलबम में तो मौज़ूद रहा पर फिल्म में शायद इसे जगह नहीं मिली। अब ऐसा क्यूँ हुआ ये तो सिद्धार्थ ही बता सकते हैं पर ऐसे गीतों को पर्दे पर देखना दर्शकों के लिए भी एक रूमानी अनुभव होता...




वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

मंगलवार, जनवरी 28, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 10 : दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए Dil Royi Jaye

पिछले कुछ सालों की तुलना ये अजूबा ही रहा कि वार्षिक संगीतमाला 2019 की दसवीं पायदान तक पहुँचने के बाद भी आजुकल के सबसे चहेते गायक अरिजीत सिंह की आवाज़ कानों में नहीं गूँजी। अक्सर ये पार्श्व गायिकाओं की शिकायत रहती है कि एक तो Female Solo फिल्मों में बेहद कम लिए जाते हैं और फिल्म का सबसे अच्छा गीत भी उन्हें ना मिलकर अरिजीत सरीखे गायकों की झोली में ही गिरता है। पर पिछले साल के गीतों को सुनते हुए कई ऐसे कुछ बेहतरीन नग्मे दिखे जिसे एकल या गीत का बड़ा हिस्सा गायिकाओं ने गाया है। श्रेया घोषाल की आवाज़ में आप इस साल तीन गीतों में  सुन ही चुके हैं। इसके आलावा ज्योतिका टांगरी, प्रतिभा सिंह बघेल, जसलीन रायल, हिमानी कपूर और शिल्पा राव की आवाज़ें भी इस साल की संगीतमाला का हिस्सा बनी हैं।


पर ऐसा भी नहीं है कि अरिजीत की आवाज़ का जादू कम हो गया है क्यूँकि इस संगीतमाला में उनके गाए हुए तीन गीत बजने हैं और उनमें से पहला गीत है नवीं पायदान पर फिल्म दे दे प्यार दे से। ऐसे तो ये बड़ी खुशनुमा सी फिल्म थी पर इसका एक गाना ढेर सारा दर्द अपने में समेटे हुए था। अकेले रह रहे एक प्रौढ़ शादीशुदा व्यक्ति का एक युवा स्त्री के प्रेम में पड़ना और उस रिश्ते को स्थायी रूप देने के पहले  परिस्थितिवश अलग हो जाने के क्रम में ये गीत पर्दे पर आता है।

कोई रिश्ता जब टूटता है तो हम चाह कर भी अपने आप को सँभाल नहीं पाते। आँसुओं की झड़ी सी लग जाती है उन पुराने साथ बिताए पलों के बारे में सोचकर। कुमार ने मन की इस स्थिति के लिए फिर एक नया शब्द ईजाद कर दिया दिल रोई जाए,। पानियों सा के बारे में लिखते समय मैंने आपको कुमार के एक साक्षात्कार की बात बताई थी जिसमें उन्होंने कहा था 

"..कि कोई मापदंड थोड़े ही है लफ़्जों का। एक डिक्शनरी बनी होगी उसके पहले खाली होगी। मैं तो कहता हूँ कि आप किसी चीज (गलत शब्द) को कैसे कनेक्ट करते हो ये महत्त्वपूर्ण है।"

रोए जाने और खोए रहने की बात तो आपने सुनी ही होगी पर तुझको पाने से ज़्यादा खोई-खोई जाए..दिल रोई जाए रोई जाए.. भी दिल को छूता ही गुजरता है। रोचक कोहली, कुमार और अरिजीत इससे पहले पिछले साल तेरा यार हूँ मैं में भी साथ नज़र आए थे और वो गीत भी खासा लोकप्रिय हुआ था। 

रोचक कोहली की गिटार में महारत है और उस पर आधारित उनकी धुनें बेहद सुरीली होती हैं।  इस गीत में मुखड़े के पहले और अंतरों के बीच इस्तेमाल होने वाली सिग्नेचर ट्यून में वो कमाल झलकता है। जब ऐसी धुनों को अरिजीत की आवाज़ का साथ मिलता है तो सहज से भाव भी गहरे लगने लगते हैं। 

मेरे हिस्से में तू नहीं है, ये भी ना जानूँ क्यूँ नहीं है
मेरे हिस्से में तू नहीं है, ये भी ना जानूँ क्यूँ नहीं है
इतना ही बस मुझको पता है
मैं तेरा ग़लत, तू मेरा सही है
तेरे बिन ये ग़म हैं, कुछ साँसें कम हैं
क्यूंकि तुझको पाने से ज़्यादा खोई-खोई जाए
दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए
आँखों के किनारे बैठा, रोई जाए
दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए
यादों के सहारे बैठा, रोई जाए
तेरे बिना ज़िंदगी तो है, पर
जीने से ऐतराज़ है
माने हुए हैं दो दिल, लेकिन
तक़दीरें नाराज़ हैं

कहता है कहानी इश्क़ का ये पानी
सब डूबे, साहिल पे लेकिन कोई-कोई आए
दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए
आँखों के किनारे बैठा, रोई जाए
दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए
यादों के सहारे बैठा, रोई जाए
रोई जाए (रोई जाए)

तू नहीं हमकदम तो रास्ते बुरे
तू नहीं तो नींद भी आँखों से है परे
ख़ामख़ाह ही पड़ गई दरारें ख़ाब में
तेरे बिन तनहाई सी धड़कनों में चले
तेरे बिन ये ग़म हैं, ....रोई जाए

तो आइए सुनते हैं ग़मगीन करता ये नग्मा। पर्दे पे इसे  फिल्माया गया है अजय देवगन और रकुल प्रीत सिंह पर..


 

वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

सोमवार, जनवरी 27, 2020

वार्षिक संगीतमाला 2019 Top 10 : कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ Shaabaashiyaan

अमित त्रिवेदी, अमिताभ भट्टाचार्य और शिल्पा राव की तिकड़ी एक शाम मेरे नाम की संगीतमालाओं के लिए नई नहीं है। जब अमित और अमिताभ ने अपना संगीत का कैरियर शुरु ही किया था तो उनकी प्रतिभा की गहराई मुझे उनके गीत इक लौ इस तरह क्यूँ  बुझी मेरे मौला में  नज़र आई थी। संगीतमाला के उस सरताज गीत को शिल्पा राव ने ही अपनी बेहतरीन आवाज़ में निभाया था। आज ग्यारह साल बाद एक बार फिर इस तिकड़ी ने अपना कमाल दिखाते हुए पिछले साल के दस चुनिंदा गीतों में अपना स्थान बनाया है मिशन मंगल के गीत शाबाशियाँ के ज़रिए।


मिशन मंगल विज्ञान से जुड़ी फिल्म थी जिसमें संगीत का कोई किरदार हो सकता है इसके बारे में अमित शुरू  में सशंकित थे। अमित एक ऐसे संगीतकार हैं जो म्यूज़िक बैंक बनाने में विश्वास नहीं रखते। वे अक्सर अपने साक्षात्कारों में दोहराते हैं कि जब तक पटकथा की खुराक उनके सामने नहीं रख दी जाती वो संगीत बनाने के लिए प्रेरित नहीं हो पाते। मिशन मंगल के लिए उन्होंने दो ही गीत बनाए पर जब आप फिल्म देखेंगे तो बिल्कुल नहीं लगेगा कि ये गीत बाहर से थोपे गए हैं।

शाबाशियाँ विपरीत परिस्थितियों में मन में एक उत्साह का संचार करने वाला गीत है। अमिताभ के लिखे गीत के बोलों में वो ताकत है जो किसी के भी डगमगाते आत्मविश्वास को पुनर्जीवित कर दे। सच ही तो है कि लाख लोग आपकी असफलताओं पर तंज़ कसें पर अगर आप अपने कार्य को पूरी लगन व मेहनत से करते रहें तो सफल होने पर वही लोग आपको सिर पर चढ़ा लेंगे। अमित त्रिवेदी और उनकी टीम ने बड़े सटीक ढंग से गीत मुखड़े के पहले और अंतरे में तार वाद्यों का संयोजन किया है जो गीत के गंभीर मूड को बनाए रखता है। कुल मिला के ये ऐसा गीत है जिसे फिल्म के इतर भी काफी सालों तक सुना जाएगा।


कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू
देंगे वही सलामियाँ
दिल थाम के जहां देखेगा एक दिन
तेरी भी कामयाबियाँ
करके दिखा कमाल वो
आ के ज़मीं पे, देके जाए आसमाँ
शाबाशियाँ, शाबाशियाँ...
सच होने की ख़ातिर जो सपने कीमत माँगेंगे
जाग के रातें, कीमत भर देना (कीमत भर देना)
जब नज़दीक से देखे, तो खुशियों के आँसू आएँ
तू नज़रों को वो मंज़र देना (वो मंज़र देना)
ख़ुदी ये एक ही एक दिन मिटाएगी
तेरी हजार खामियाँ

करके दिखा कमाल वो...शाबाशियाँ, शाबाशियाँ

इस गीत में शिल्पा राव के साथ आनंद भास्कर और अभिषेक श्रीवास्तव की आवाज़ें हैं पर ये गीत शिल्पा का है इसमें कोई दो राय नहीं। उनकी अलग तरह की आवाज़ की बुनावट का फिल्म उद्योग ने उतना इस्तेमाल तो नहीं किया पर जब जब शिल्पा को मौके मिले हैं उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। शिल्पा जब गीत और कान्सर्ट नहीं कर रही होती हैं तो ग़ज़लें गुनगुनाकर मेरे जैसे श्रोताओं को मुग्ध करती रहती हैं। इस साल घुँघरू, कलंक और इस गीत में उनकी गायिकी काफी सराही गयी।

अभी हाल ही में इसी गीत का एक और वीडियो उन्होंने ज़ारी किया है तो मैंने सोचा कि क्यूँ ना उसे भी यहाँ साझा किया जाए..


वार्षिक संगीतमाला 2019 
01. तेरी मिट्टी Teri Mitti
02. कलंक नहीं, इश्क़ है काजल पिया 
03. रुआँ रुआँ, रौशन हुआ Ruan Ruan
04. तेरा साथ हो   Tera Saath Ho
05. मर्द  मराठा Mard Maratha
06. मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए  Bharat 
07. आज जागे रहना, ये रात सोने को है  Aaj Jage Rahna
08. तेरा ना करता ज़िक्र.. तेरी ना होती फ़िक्र  Zikra
09. दिल रोई जाए, रोई जाए, रोई जाए  Dil Royi Jaye
10. कहते थे लोग जो, क़ाबिल नहीं है तू..देंगे वही सलामियाँ  Shaabaashiyaan
11 . छोटी छोटी गल दा बुरा न मनाया कर Choti Choti Gal
12. ओ राजा जी, नैना चुगलखोर राजा जी  Rajaji
13. मंज़र है ये नया Manzar Hai Ye Naya 
14. ओ रे चंदा बेईमान . बेईमान..बेईमान O Re Chanda
15.  मिर्ज़ा वे. सुन जा रे...वो जो कहना है कब से मुझे Mirza Ve
16. ऐरा गैरा नत्थू खैरा  Aira Gaira
17. ये आईना है या तू है Ye aaina
18. घर मोरे परदेसिया  Ghar More Pardesiya
19. बेईमानी  से.. 
20. तू इतना ज़रूरी कैसे हुआ? Kaise Hua
21. तेरा बन जाऊँगा Tera Ban Jaunga
22. ये जो हो रहा है Ye Jo Ho Raha Hai
23. चलूँ मैं वहाँ, जहाँ तू चला Jahaan Tu chala 
24.रूह का रिश्ता ये जुड़ गया... Rooh Ka Rishta 

 

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